Thursday, February 22, 2024
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अमीन सयानी – आवाज के जादूगर, जिन्होंने रेडियो प्रेजेंटेशन को नई पहचान दी।

अमीन सयानी (Ameen Sayani) एक समय रेडियो की आवाज के पर्याय बन चुके थे। उन्होने अपनी जादुई आवाज के बल पर रेडियो पर कई  सालों तक राज किया। उनके जीवन को जानते हैं…

अमीन सयानी : रेडियो पर खनकती आवाज़ के जादूगर (Ameen Sayani)

अमीन सयानी, जिन्हें ‘आवाज़ के जादूगर’ के नाम से जाना जाता था, रेडियो जॉकी के इतिहास में एक शानदार नाम थे। पहले ‘बिनाका गीतमाला’ और फिर नाम बदलने पर ‘सिबाका गीतामाला’ जैसे प्रसिद्ध कार्यक्रमों के माध्यम से, उन्होंने 46 वर्षों तक रेडियो सीलोन और बाद में विविध भारती पर अपनी मधुर आवाज़ और दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध किया।

जीवन परिचय

अमीन सयानी भारतीय रेडियो उद्घोषक और प्रस्तोता थे, जिन्हें ‘आवाज़ के जादूगर’ के रूप में जाना जाता था। वे रेडियो के इतिहास में पहले जॉकी के तौर पर भी प्रसिद्ध थे और विश्व के श्रेष्ठ रेडियो जॉकी के रूप में उनकी ख्याति थी।

सयानी का जन्म 21 दिसंबर 1932 में मुंबई में हुआ था। उनके मन में गायक बनने की इच्छा थी लेकिन संयोगवश वह ‘ऑल इंडिया रेडियो’ में आ गए, जहाँ उनके भाई हामिद सयानी ने उन्हें रेडियो जॉकी के रूप में उन्हें रेडियो उदघोषक बनने के लिए प्रेरित किया।

पहले उन्होंने 10 साल तक अंग्रेजी कार्यक्रमों की प्रस्तुति की। उसके बाद जब विविध भारती की शुरुआत हुई तो विविध भारती ने उन्हें अपने यहाँ काम करने के न्योता दिया। विविध भारती पर ‘बिनाका गीत माला’ जैसे कार्यक्रमों के साथ उन्होंने हिंदी रेडियो में क्रांति ला दी। अपनी सुगम और अनोखी आवाज के दम पर उन्होंने भारत में रेडियो को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।

1952 से 1994 तक इस कार्यक्रम के ज़रिए उनकी आवाज़ ‘बहनों और भाइयो’ ने लाखों दिलों को छू लिया।

कार्यक्रम और उपलब्धियां

‘गीतमाला’ के अलावा, सयानी ने 54,000 से अधिक रेडियो कार्यक्रमों की मेजबानी की और 19,000 जिंगल्स रिकॉर्ड किए। ‘बहनों और भाइयो’ जैसे उनके अभिवादन और ‘आपका अपना अमीन सयानी बोल रहा है’ जैसे वाक्य आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं।

मेगास्टार अमिताभ बच्चन के संबंध में एक रोचक प्रसंग

उन दिनों अमिताभ बच्चन संघर्ष कर रहे थे और अभिनेता नहीं बने थे। वह किसी तरह अपने करियर को बनाने के लिए संघर्षरत थे। इसी सिलसिले में वह ऑल इंडिया रेडियो में उद्घोषक बने के लिए गए और ऑल इंडिया रेडियो के मुंबई स्थित स्टूडियो में ऑडिशन देने के लिए गए। उस समय ऑल इंडिया रेडियो में अमीन सयानी ही वहां के कर्ताधर्ता के और उनसे मिलकर ही अमिताभ बच्चन का कार्य हो सकता था।

पहली बार जब अमिताभ बच्चन उनसे मिलने गए तब अमीन सयानी की सेक्रेटरी ने उन्हें बताया कि कोई अमिताभ बच्चन नाम का युवक आपसे मिलना चाहता है। तब अमीन सयानी का समय बेहद व्यस्त होता था। उन्होंने कहा कि वह अपॉइंटमेंट लेकर नहीं आए हैं, उनसे कहो कि अपॉइंटमेंट लेकर मिलने आए। उसके बाद दोबारा फिर अमिताभ बच्चन अपना वॉइस एडमिशन देने के लिए बिना अपॉइंटमेंट दिए ही ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस में आ गए।

इस बार भी अमीन सयानी से वह मिल नहीं पाए क्योंकि अमीन सयानी व्यस्तता के कारण उनसे मिल नहीं सके। अमीन सयानी ने एक साक्षात्कार में इस घटना का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया था कि वह 1960 का दशक था और उस समय वह एक हफ्ते में 20-20 कार्यक्रम किया करते थे और उनका अधिकतर समय साउंड स्टूडियो आदि में ही गुजरता था। इसी कारण उनके पास कितना समय नहीं होता था।

इस तरह अमिताभ बच्चन रेडियो उदघोषक बनते बनते रहे गए। अमिताभ बच्चन के संघर्षों की कथा जहां भी सुनाई जाती है, वहाँ पर यह जिक्र अवश्य होता है कि ऑल इंडिया रेडियो ने उनकी आवाज को रिजेक्ट कर दिया था।

पुरस्कार और सम्मान

अमीन सयानी को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनको मिले सम्मान और पुरुस्कार इस प्रकार हैं…

  • पद्म श्री (2009)
  • लिविंग लीजेंड अवॉर्ड (2006)
  • इंडियन सोसाइटी ऑफ एटवरटाइजमेंट की तरफ से गोल्ड मेडल (1991)
  • लिम्का बुक्स ऑफ रिकॉर्ड्स – पर्सन ऑफ द ईयर अवॉर्ड (1992)
  • कान हॉल ऑफ़ फेम अवॉर्ड, 2003 – रेडियो मिर्ची की तरफ से

अवसान

20 फरवरी, 2024 को अचानक उनकी तबियत खराब हुई। उन्हे तुरंत उपचार के लिए मुंबई में अस्पताल ले जाया जाने लगा तो अस्पताल पहुँचने से पहले ही हार्ट अटैक से मुंबई में उनका निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे।

अमीन सयानी केवल एक रेडियो जॉकी नहीं थे, वे एक संस्था थे। उन्होंने रेडियों के माध्यम से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। उनकी मधुर आवाज़ और मनमोहक व्यक्तित्व हमेशा लोगों के दिलों में याद रहेंगे।

अमीन सयानी का निधन 20 फरवरी 2024 को हार्ट अटैक के कारण हुआ। उनकी मृत्यु से भारतीय रेडियो जगत ने अपने सबसे बड़े सितारों में से एक को खो दिया, जिसकी आवाज़ लाखों दिलों में हमेशा रहेगी।


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सिरुली महावीर मंदिर – श्री हनुमान का अनोखा दिव्य मंदिर जहाँ भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

श्री रामभक्त श्री हनुमान की महिमा निराली है। श्री हनुमान के भारत में जितने अधिक मंदिर हैं, उतने अधिक मंदिर अन्य किसी देवता के नहीं। ऐसे सिरुली महावीर दिव्य मंदिर (Siruli Mahavir Mandir Odisha) उड़ीसा में है। इस मंदिर की महिमा को जानते हैं।

सिरुली महावीर मंदिर (उड़ीसा) (Siruli Mahavir Mandir Odisha)

भारत का कोई भी गाँव हो, नगर हो, हर जगह हनुमान मंदिर अवश्य मिल जाएगा। शिव मंदिर और हनुमान मंदिर हर जगह मिल जाते हैं।

सिरुली महावीर मंदिर एक अद्भुत मंदिर है जो अपनी धार्मिक, ऐतिहासिक और वास्तुकला महत्व के लिए जाना जाता है। यदि आप ओडिशा की यात्रा कर रहे हैं, तो यह मंदिर निश्चित रूप से आपके दर्शनीय स्थलों की सूची में होना चाहिए।

मेहंदीपुर बालाजी से लेकर कई ऐसे आने की दिव्य मंदिर हैं जो अपनी दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा ही एक दिव्य मंदिर उड़ीसा के पुरी धाम में स्थित है। यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है जो उड़ीसा के सिरुली गाँव में जगन्नाथ पुरी धाम जाने के रास्ते में स्थित है।

यह हनुमान मंदिर एक बेहद पौराणिक मंदिर है। इस मंदिर के साथ एक कथा भी जुड़ी हुई है जिसके अनुसार क्योंकि जगन्नाथ स्वयं भगवान विष्णु के अवतार का स्वरूप हैं, जो श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिए। भगवान श्री महावीर इन्हीं जगन्नाथ की सेवा जगन्नाथ पुरी के श्री मंदिर के सिंह द्वार पर रहकर किया करते थे, लेकिन जब वह खर्राटे लेते तो श्री लक्ष्मी जी को उनके खर्राटों से बेहद परेशानी होती थी। इसीलिए इसकी शिकायत उन्होंने जगन्नाथ प्रभु जगन्नाथ से की तो प्रभु जगन्नाथ में श्री महावीर को आदेश दिया कि यहाँ से थोड़ी दूर पर जाकर अपना बस जाओ।

उसके बाद से उनकी आज्ञा को शिरोधार्य करके श्री महावीर जगन्नाथ धाम से 33 किलोमीटर की दूरी पर जाकर बस गए और वहीं पर उनका मंदिर बन गया, जो सिरुली महावीर मंदिर के नाम से विख्यात है।

जो हनुमान जी के परम भक्त हैं उन्हें इस मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए कहते हैं, यहाँ पर आकर दीपक जलाकर अपनी मन्नत मांगने से मन्नत पूरी होती है।

यदि यहां पर नहीं आ पाए तो भी भारत के किसी को नहीं में या विश्व के किसी भी कोने में हों, वहां पर सिरुली महावीर का ध्यान करके उनके नाम पर दिया जलाकर अपनी सारी मनोकामना की पूर्ति कर सकते हैं। श्री महावीर मनोकामना को अवश्य पूर्ण करते हैं।

मंदिर के मुख्य आकर्षण

  • मंदिर की वास्तुकला देखने अद्भुत है। मंदिर के गर्भगृह, मंडप और शिखर सभी अत्यंत सुंदर हैं।
  • भगवान हनुमान की मूर्ति बहुत ही आकर्षक है। मूर्ति के चेहरे पर वीरता और भक्ति का भाव झलकता है।
  • मंदिर में हर वर्ष होने वाली चंदन यात्रा एक अद्भुत धार्मिक अनुभव देती है।
  • मंदिर के परिसर में स्थित अंजनी तालाब एक शांत और सुंदर जगह है।

मंदिर कहाँ पर है?

सिरुली, भुवनेश्वर, ओडिशा, भारत

किस बात के लिए प्रसिद्ध है?

भगवान हनुमान, चंदन यात्रा, अंजनी तालाब

मंदिर का इतिहास क्या है?

सिरुली महावीर मंदिर, भगवान हनुमान को समर्पित, 12वीं शताब्दी में गंग राजवंश द्वारा निर्मित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भुवनेश्वर से लगभग 60 किलोमीटर दूर पुरी जाने वाली सड़क पर सिरुली नामक गाँव में स्थित है।

मंदिर की विशेषताएं

  • हनुमान जी कीमूर्ति : मंदिर में भगवान हनुमान की 8 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है। मूर्ति काले पत्थर से बनी है और भगवान हनुमान को वीर मुद्रा में दर्शाया गया है।
  • चंदन यात्रा : सिरुली महावीर मंदिर अपनी चंदन यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। यह यात्रा हर साल रथयात्रा के दौरान आयोजित की जाती है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ की चंदन की मूर्ति को सिरुली महावीर मंदिर लाया जाता है।
  • अंजनी तालाब : मंदिर के पास एक तालाब है जिसे अंजनी तालाब कहा जाता है। यह तालाब माता अंजनी, भगवान हनुमान की मां को समर्पित है।

मंदिर का महत्व

  • सिरुली महावीर मंदिर ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण हनुमान मंदिरों में से एक है।
  • यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और भगवान हनुमान की सुंदर मूर्ति के लिए जाना जाता है।
  • चंदन यात्रा और अंजनी तालाब इस मंदिर के धार्मिक महत्व को बढ़ाते हैं।

मंदिर कैसे पहुँचे?

  • भुवनेश्वर से सिरुली तक बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • भुवनेश्वर हवाई अड्डा मंदिर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है।
  • पुरी रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है।

सिरुली महावीर मंदिर में हर सप्ताह मंगलवार तथा शनिवार को देश-विदेश से हजारों हनुमान भक्त जाकर सिरुली महावीर का दर्शन करते हैं और प्रसाद के रूप में चूड़ाखास तथा एंडुरी पिठा ग्रहण करते हैं, जो उड़ीसा का पारंपरिक व्यंजन है।

यहां के स्थानीय लोग अपने खेतों में जुताई-बुवाई करने से पहले सिरुली महावीर के दर्शन अवश्य करते हैं और उनके आशीर्वाद के कारण उनके खेतों में अच्छी फसल होती है, ऐसी मान्यता है।

सिरुली महावीर का प्रमुख प्रसाद चूड़ाखास तथा एंडुरी पिठा है। यह प्रसाद भक्तगण बड़े चाव से ग्रहण करते हैं। मंदिर के प्रांगण में एक तालाब भी है, जिसे अंजनी तालाब कहा जाता है। इस अंजनी तालाब के बारे में ऐसी मान्यता है कि श्री महावीर जी भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के समय अक्षय तृतीया से लेकर 21 दिनों तक जगन्नाथ प्रभु की भारी चंदन यात्रा अनुष्ठित करते हैं और इस तालाब में उनको नौका विहार करते हैं।

सिरुली महावीर मंदिर में श्री हनुमान के अलावा श्री गणेश, दुर्गा जी, शिवलिंग, दुर्गा जी की प्रतिमा स्थापित हैं और शिवलिंग और नंदी बैल भी स्थापित हैं। मंदिर की दीवारों पर नवग्रह का अंकन किया गया है मंदिर के प्रवेश द्वार पर दोनों तरफ दो सिंह मूर्तियां हैं।

 


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जेमिमा रोड्रिग्स – महिला क्रिकेटर का जीवन परिचय

जेमिमाह रोड्रिग्स भारत की स्टार महिला क्रिकेटर हैं, जो भारत की महिला क्रिकेट टीम की नियमित सदस्य हैं। उनके जीवन से (Jemimah Rodrigues Biography) परिचित होते हैं..

जेमिमा रोड्रिग्स का एक परिचय — Jemimah Rodrigues Biography

जेमिमाह रोड्रिग्स भारतीय महिला क्रिकेट में एक उभरती हुई ऑलराउंडर महिला क्रिकेटर हैं। वह भारत में घरेलू क्रिकेट में मुंबई की तरफ से खेलती हैं। WPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलती हैं। मूल रूप से मुंबई की रहने वाली जेमिमाह रोड्रिग्स भारतीय टीम में भी अपना स्थान बना चुकी है। जेमिमा एकआलराउंडर महिला क्रिकेटर हैं। वह एक मिडिल आर्डर बैटर हैं तथा राइट आर्म ऑफ ब्रेक बॉलर हैं।

जीवन पर एक नजर

जेमिमा का पूरा नाम जेमिमाह जेसिका रोड्रिग्स’ (Jemimah Jessica Rodrigues) है। उनका निक नेम जेमी’ है।

  • जेमिमा का जन्म 5 सितंबर 2000 को मुंबई के भांडुप नामक उपनगर में हुआ था।
  • जेमिमा के पिता का नाम इवान रोड्रिग्स और माता का नाम लविता रोड्रिग्स है।
  • उनके दो भाई हैं, जिनके नाम हनोक रोड्रिग्स और एली रोड्रिग्स हैं।
  • उनका जन्म भांडुप में हुआ और वह मुंबई के बांद्रा उपनगर में पली बढ़ीं।
  • जेमिमा ने मुंबई के बांद्रा उपनगर के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हाई स्कूल से आरंभिक स्कूली शिक्षा हासिल की है।
  • उन्होंने बांद्रा के ही रिजवी कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स से बीकॉम की डिग्री हासिल की है।
  • जेमिमा ईसाई धर्म को फॉलो करती हैं।
  • वह अविवाहित है।

खेल करियर

जेमिमा बचपन से ही खेल में रुचि थी। वह केवल क्रिकेट ही नहीं हो हॉकी का खेल भी खेल चुकी हैं। जेमिमा मुंबई की अंडर-17 कैटेगरी की टीम में क्रिकेट और हॉकी दोनों खेलों के लिए खेल चुकी हैं। शुरुआती दिनों में वह हॉकी भी खेलती थी, बाद में वह क्रिकेट से जुड़ी और क्रिकेट पर ज्यादा फोकस किया।

एक समय ऐसा आया जब उन्हें किसी एक खेल को चुनना था, तब उन्होंने क्रिकेट को चुना। जेमिमाह रोड्रिग्स ने अपना पहला घरेलू क्रिकेट मैच 13 साल की उम्र में खेला था, जब उन्हे महाराष्ट्र की अंडर-19 क्रिकेट टीम में के सदस्य के रूप में चुना गया। घरेलू क्रिकेट में महाराष्ट्र और मुंबई की तरफ से वह अनेक टीमों में खेली हैं।

उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 50 ओवर के फर्स्ट क्लास मैच में दोहरा शतक भी बनाया है। जेमिमा के कोच उनके पिता इवान रोड्रिग्स ही हैं, जिन्होंने उनके स्कूल में क्रिकेट टीम बनाई और यहीं से जेमिमा का क्रिकेट करियर शुरु हुआ। भारत की राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट टीम में जेमिमा का डेब्यू 13 फरवरी 2018 को दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध खेले मैच मे हुआ।

भारत की राष्ट्रीय वनडे क्रिकेट टीम में उनका डेब्यू 12 मार्च 2018 को ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध हुए मैच में हुआ। तब नियमित रूप से भारतीय वनडे और टी-20 क्रिकेट में बनी हुई हैं। कुछ समय के लिए उन्हे भारत की वनडे टीम से बाहर भी होना पडा तो तब वह निराश होकर क्रिकेट छोडने का मन रही थीं, लेकिन वो क्रिकेट से जुड़ी रही और वह भारतीय क्रिकेट टीम की नियमित सदस्य बनी हुई हैं।

जनवरी 2023 में हुए महिला टी-20 वर्ल्डकप में उन्होंने अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। हाल ही में शुरू हुए पहले महिला प्रीमियर लीग यानि (WPL) में वह दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलती है। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें नीलामी में 2.2 करोड़ रुपए में खरीदा उनकी स्टार वैल्यू को बताता है।

उपलब्धियाँ

  • जेमिमा घरेलू क्रिकेट में घरेलू वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली पहली महिला हैं।
  • वह टी20 क्रिकेट में मिताली राज के बाद सबसे अधिक सबसे तेज 1000 रन बनाने वाली दूसरी भारतीय हैं।
  • जेमिमा हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और मिताली राज के बाद टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए चौथी सबसे अधिक रन बनाने वाली महिला खिलाड़ी हैं।
  • अपने पहले टी-20 इंटरनेशनल डेब्यू मैच में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 27 गेंद में 37 रन की पारी खेली।
  • जेमिमा ने अपना पहला वनडे अर्धशतक 24 जनवरी 2019 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाया, जब उन्होंने 81 रन की पारी खेली।
  • अपने पहले इंटरनेशनल वनडे डेब्यू मैच में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 8 गेंद में 1 रन बनाये।

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कबीर – भक्तिकाल के क्रांतिकारी कवि (जीवन परिचय)

भक्तिकाल प्रमुख और ईश्वर के निर्गुण रूप के उपासक संत कवि कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों और पाखंड ऊपर प्रहार करने के लिए जाने जाते रहे हैं। आइए संत कबीर (Kabir Biography) के बारे में कुछ जानते हैं।

कबीर का पूरा जीवन परिचय (Kabir Biography)

कबीर हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में निर्गुण विचारधारा के सबसे महान संत कवि रहे हैं। समाज और नीतिपरक कबीर के दोहे जितने अधिक प्रसिद्ध है, उतने दोहे किसी और कवि के प्रसिद्ध नही हैं। उनके पूरे जीवन की यात्रा क्या थी। वो कैसे कवि बने उनके पूरे जीवन को समझते हैं…

जन्म

कबीर दास कबीर दास का जन्म के बारे में यह कहा जाता है कि उनका जन्म काशी में लहरतारा नामक तालाब के पास हुआ था, उनके माता-पिता के विषय में कोई स्पष्ट विवरण नहीं है और कहते हैं कि उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनका जन्म सन् 1398 को हुआ था।

कबीर की जीवन यात्रा

कबीर निर्गुण विचार धारा के कवि थे। उन्होंने अपने जीवन में जितने भी दोहों की रचना की वह ईश्वर के निर्गुण रूप पर आधारित थे। उन्होंने ईश्वर का साकार रूप नहीं बल्कि निराकार रूप का गुणगान किया।

कवि ने अपने दोहों के माध्यम से तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों का, पाखंडों, गैर जरूरी धार्मिक मान्यताओं का विरोध किया। उन्होंने हिंदू एवं मुस्लिम दोनों संप्रदायों पर समान रूप से प्रहार किया था।

वह अपने जीवनपर्यंत पाखंड धार्मिक पाखंड का विरोध करते रहे। वह हिंदी साहित्य की भक्तिकाल धारा के इकलौते कवि रहे हैं जिन्होंने अपने पूरे जीवन पर्यंत धार्मिक पाखंड, आंडबरों का विरोध किया। कबीर ईश्वर के निर्गुण रूप को मानते थे।

कबीर के जन्म के विषय में स्पष्ट विवरण नहीं है, लेकिन संभवत उनके माता-पिता उनके बचपन में ही मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। एक दिन वे लावारिस रूप में स्वामी रामानंद को काशी के घाट की सीढ़ियों पर पड़े मिले। स्वामी रामानंद गंगा स्नान करने के लिए जा रहे थे और उनका पैर सीढ़ियों पर पड़े कबीर से टकरा गया। उनके मुंह से राम-राम शब्द निकल पड़ा। कबीर इसी शब्द को अपना गुरु मंत्र मान लिया।

दूसरी किवदंती के अनुसार कबीर स्वामी रामानंद को अपना गुरु बनाना चाहते थे इसलिये जानबूझ कर उनके रास्ते में लेट गये थे।

उसके बाद कबीर स्वामी रामानंद के शिष्य बन गए। इस प्रकार कबीर के गुरु स्वामी रामानंद थे।

कबीर पेशे से जुलाहा थे। जुलाहा का काम करके अपना जीवन यापन करते थे और बेहद सादगी पूर्ण जीवन व्यतीत करते थे। समय-समय पर वह अपनी काव्य रचनाएं करते रहते थे।

कबीर की साखियां और दोहे बेहद प्रसिद्ध है। कबीर के जितने भी दोहे बचे हैं, वह नीतिपरक दोहे रहे हैं। कबीर के दोहों में अद्भुत ज्ञान-दर्शन मिलता है। कबीर बिल्कुल ही पढ़े-लिखे नही थे। ये उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से खुद स्पष्ट किया है। उस मध्यकालीन युग में एक साधारण बिना पढ़े लिखे कवि का इतना ज्ञान रखना अद्भुत है।

कबीर का दोहा एक से बढ़कर है।

उदाहरण के लिए कबीर कहते हैं,

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय

यहां पर कबीर प्रेम के महत्व को स्पष्ट करते हैं और कहते हैं बड़े-बड़े धर्म शास्त्रों को पढ़ने से से कोई विद्वान नही बन जाता, ईश्वर को नही जान पाता। सच्चा ज्ञानी बनने के लिए प्रेम की भाषा समझना पड़ता है।

कबीर की रचनायें

कबीरदास जी रचनायें कबीर के दोहे नाम प्रसिद्ध हैं। उनके शिष्यों ने उनकी रचनाओं का संग्रह कर उसको बीजक’ नाम दिया। इस ग्रंथ के तीन भाग हैं।

  • रमैनी
  • शबद
  • साखी

रमैनी ⦂ रमैनी अधिकतर चौपाईयां छंदों के रूप में लिखे गयी हैं। इसमें कबीर के दार्शनिक विचारों का प्रकटीकरण होता है।

शबद ⦂ शबद अर्थात पद। इसमें कबीरदास जी ने संगीतात्मक शैली में भावप्रधान होकर लिखा हैं। इन पदों में कबीर अपने प्रेम और साधना के भाव को अभिव्यक्त करते हैं।

साखी ⦂ इसमें दोहों के रूप में साखियां लिखी गयी हैं। साखी संस्कृत के साक्षी शब्द का अपभ्रंश रूप है। कबीर की साखियां ही जनमानस में सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।

बीजक ग्रंथ में कबीर द्वारा रचित दोहों का संकलन किया गया है। इस ग्रंथ में कबीर के 600 से अधिक छंद (दोहे) संकलित हैं। बीजक ग्रंथ में कुल ग्यारह खंड या अंग या अध्याय हैं, जो इस प्रकार हैं..

  • रमैनी
  • शब्द
  • ज्ञान चौंतीसा
  • विप्रमतीसी
  • कहरा
  • वसन्त
  • चाचर
  • बेलि
  • बिरहुली
  • हिंडोला
  • साखी

कबीर की भाषा-शैली

कबीर की भाषा सधुक्कड़ी भाषा रही है, क्योंकि वे पढ़े-लिखे नहीं थे। इसलिए उनकी बोली सामान्य जन की बोली थी। उनकी उनके रचनाओं मेंसभी भाषाओं का मिश्रण मिलता है। उन्होंने हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी, पंजाबी, अवधी, ब्रज सभी भाषाओं के शब्दों को ग्रहण किया है।

कबीर स्वभाव से बेहद मस्त मौला व्यक्ति थे और वे जीवन भर फक्कड़ मिजाजी में जीते रहे। उनके समय में तत्कालीन समाज की सामाजिक दशा बेहद खराब थी। भारत में इस्लाम धर्म का आगमन हो चुका था। हिंदू धर्म में अनेक कुरीतियां व्याप्त हो चुकी थी।

कबीर ने ऐसे समय में अपने नीतिपरक रचनाओं द्वारा समाज में चेतना जगाने का प्रयत्न किया था।

देहावसान

कबीर का निधन 1518 ईस्वी में ‘मगहर’ नामक जगह पर हुआ था।

उनके निधन के बाद उनके भक्तों में जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों थे, में उनके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद छिड़ गया। लेकिन जब कबीर के शव के पास गए तो वहां पर उनका शव नहीं था और उसकी जगह फूल पड़े थे। तब दोनों हिंदू मुस्लिम दोनों भक्तों ने फूल आपस में बैठकर अपनी अपनी रीति रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

इस तरह कबीर ने हिंदी साहित्य एक अद्भुत ज्ञान से आलोकित किया। वह हिंदी के महान कवियों में एक हैं।


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मीराबाई – भक्तिकाल की कृष्णभक्त संत कवयित्री (जीवन परिचय)

मीराबाई हिंदी काव्य जगत की एक महान कवयित्री थीं। वह कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति के लिए जानी जाती थीं। कृष्ण की भक्ति के जितने भी महान कवि कवयित्री हुये हैं, उनमें मीराबाई का नाम सबसे प्रमुख है। उनके जीवन (Meerabai Biography) को जानते हैं…

मीराबाई का पूरा जीवन परिचय (Meerabai Biography)

मीराबाई भक्तिकाल की एक प्रमुख कवयित्री संत थीं। मीराबाई कृष्ण भक्ति शाखा की कवयित्री थीं। वह कृष्ण से आध्यात्मिक स्तर का प्रेम करती थी और उन्होंने अपना पूरा जीवन कृष्ण के प्रति आध्यात्मिक प्रेम में समर्पित कर दिया था। वह श्रीकृष्ण के प्रति निर्मल, शुद्ध, सात्विक और आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक थीं।

जन्म

मीराबाई का जन्म पंद्रहवीं शताब्दी में सन् 1498 ईस्वी में राजस्थान के पाली जिले के ‘कुड़की’ नाम के गाँव में हुआ था।

जीवन परिचय और परिवार

मीराबाई के पिता का नाम रतन सिंह राठौड़ था। उनकी माता का नाम वीरकुमारी और उनके दादा का नाम राव दूदा था, जो कि मेड़ता के राजघराने से संबंध रखते थे।

मीराबाई को बचपन से ही कृष्ण के प्रति बेहद लगाव था और वह बचपन में ही कृष्ण को अपना पति मान बैठी थीं। वह आध्यात्मिक प्रवृत्ति में रुचि रखती थीं। हालांकि उनकी इच्छा के विपरीत उनका विवाह मेवाड़ के राजघराने में राणा भोजराज सिंह से कर दिया गया, जो महाराणा सांगा के बड़े पुत्र थे। जो बाद में राणा कुंभा के नाम से प्रसिद्ध हुए।

जब मीाराबाई का विवाह चित्तौड़ के राणा सांगा के बड़े पुत्र भोजराज के साथ तया हुआ तो वह विवाह करने की इच्छुक नहीं थीं, परन्तु अपने परिवार वालों के दवाब में उन्होंने विवाह कर लिया।

परन्तु सच्चाई यही थी कि वह मन ही मन श्री कृष्ण को ही अपना पति मानती थीं। विवाह के समय पति के घर जाते समय वह श्री कृष्ण की मूर्ति अपने साथ ले गई थी और नित्य श्रीकृष्ण की साधना-अराधना करती रहती थीं। उनके ससुराल वालों को यह सब पसंद नहीं था, परन्तु मीराबाई अपनी श्रीकृष्ण भक्ति में रमी रहती थीं। मीराबाई का वैवाहिक जीवन बहुत अधिक लंबे समय तक नहीं चला और 5 वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद उनके पति भोजराज की मृत्यु हो गई।

आध्यात्मिक यात्रा

पति की मृत्यु के बाद मीराबाई ने अपनी ससुराल छोड़कर जीवन से विरक्त भाव अपना लिया, और साधु संतों के साथ हरि कीर्तन करने लगीं।
भजन कीर्तन में जाती रहतीं और नृत्य एवं गायन करती थीं। वह बचपन से ही अपने पति के रुप में श्री कृष्ण को ही स्वीकार कर चुकी थीं। उनका श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम आध्यात्मिक स्तर की पराकाष्ठा वाला प्रेम था। उनके बारे में कहा जाता है कि वह पूर्व जन्म में गोपी थीं, जो श्रीकृष्ण से बेहद प्रेम करती थी। उसी गोपी ने मीराबाई के रूप में जन्म लिया। उन्होंने अपना अधिकांश समय वृंदावन, मथुरा और द्वारका में बताया और साधु-संतों की सत्संगति करते हुए कृष्ण भक्ति से भरे पदों की रचना की।

मीराबाई के गुरु संत रविदास थे, जिनसे उन्होंने भक्ति का पाठ पढ़ा।

अपने गुरु के बारें उन्होंने कहा…

नहिं मैं पीहर सासरे, नहिं पियाजी री साथ
मीरा ने गोबिन्द मिल्या जी, गुरु मिलिया रैदास

जीवन विवरण

मीरा बाई का बचपन से ही कृष्ण के प्रति आध्यात्मिक लगाव हो गया था। इसके बारे में एक प्रसंग है कि जब वह छोटी थी तो उनके घर के पास पड़ोस में किसी की बारात आई। मीरा बाई ने उत्सुकता बस अपनी माँ से पूछा कि मेरा दूल्हा कौन है, तो उनकी माँ ने श्री कृष्ण की मूर्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह तुम्हारे दूल्हा हैं। तभी से मीराबाई के मन में यह बात बैठ गई और वे श्रीकृष्ण को अपना पति मानने लगीं। इसके बाद वह श्रीकृष्ण की भक्ति के प्रति पूरी तरह समपर्पित हो गईं।

पति की मृत्यु के बाद मीराबाई ने पूरी तरह अपने स्वयं को श्रीकृष्ण भक्ति के प्रति समर्पित कर दिया। वह साधु संतों के साथ संगत करने लगी। वह भजन-कीर्तन करते समय श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने आनंद विभोर होकर नाचने लगती थीं। उनके ससुरालवालों को यह सब पसंद नहीं आया। उनके ससुराल वालों ने अनेक तरह के षड्यंत्र रचे किन्तु मीराबाई से टस से मस नहीं हुईं।

अंततः अपने ससुराल वालों के रोज के षड्यंत्रों और ताने-प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने अपनी ससुराल चित्तौड़गढ़ को छोड़ दिया और मेड़ता आ गई। वहां से वाराणसी होती हुई वृंदावन की ओर चली गई। वाराणसी में गुरु रविदास उर्फ संत रैदास को अपना गुरु बनाया। उसके बाद वह पूरी तरह आध्यात्मिक पथ पर चलने लगी। उन्होंने अपना अधिकांश समय मथुरा, वृंदावन और द्वारका में बिताया। उनके जीवन के अंतिम पल द्वारका में बीते।

साहित्यिक रचनाएं

मीराबाई ने कुल 4 ग्रंथों की रचना की थी, जिनके नाम इस प्रकार हैं :

  • बरसी का मायरा
  • गीत गोविंद टीका
  • राधा गोविंद
  • राग सोरठ के पद

मीराबाई के सभी रचनाओं को ‘मीराबाई के पद’ नामक ग्रंथ में एक साथ संकलित किया गया है।

प्रसिद्ध भजन

पायो जी मैंने नाम रतन धन पायो।
बस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।
जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सवायो।
सत की नाव खेवहिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस पायो।।

देहावसान

मीराबाई के जीवन का अंतिम समय द्वारका में बीता । कहते हैं कि द्वारका के एक मंदिर में जन्माष्टमी के दिन वह साधना करते-करते श्रीकृष्ण की मूर्ति में समा गयीं।

मीराबाई का निधन सन् 1547  ईस्वी में वाराणसी मे 49 वर्ष की आयु में हुआ था।

इस प्रकार मीराबाई ने श्रीकृष्ण की भक्तिधारा के पथ पर चलकर स्वयं को इतिहास के पन्नों में अमर कर लिया।


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पॉलिग्राफ (Polygraph Test) टेस्ट और नार्को (Narco Test) क्या हैं?

हम अक्सर समाचारों में, न्यूज़ चैनल्स में, अखबारों में, नार्को टेस्ट पॉलीग्राफ टेस्ट आदि के बारे में सुनते रहते हैं। कभी कोई अपराध होता है, तो उस अपराधी के संबंध में नारको टेस्ट या पॉलीग्राफ़ टेस्ट के बारे में सुनते रहते हैं, तब हमारे मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न होती होगी, यह नारको टेस्ट या पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test-Narco Test) क्या है? इसके बारे में जानते हैं।

पॉलिग्राफ टेस्ट और नार्को टेस्ट के बारे में जानें (Polygraph Test-Narco Test)

पॉलीग्राफ़ टेस्ट और नार्को टेस्ट अपराधियों से किसी अपराध के संबंध में सच्चाई उगलवाने की दो वैज्ञानिक और चिकित्सीय विधि हैं, जिनके सहायता से अपराधियों से वह सच उगल वाया जा सकता है जो अपराधी सामान्य तौर पर पूछताछ में नहीं बताते।

यह टेस्ट अक्सर कड़ी प्रवृत्ति वाले अपराधियों पर आजमाया जाता है, जो पुलिस द्वारा कड़ी पूछताछ में भी सच नहीं बताते और सच को छुपाते रहते हैं। ऐसी स्थिति में जब कोई पुलिस या जाँच एजेंसी को ये अंदाजा हो जाता है कि अपराधी सच को छुपा रहा है और आसानी से नही बतायेगा तो उस पर पॉलिग्राफ टेस्ट और नार्को टेस्ट आजमाया जाता है। ये टेस्ट लगभग सटीक परिणाम देते है, हालाँकि 100% रिजल्ट की गारंटी नही होती।

पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) क्या है?

पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) की खोज सबसे पहले 1921 में एक अमेरिकन फिजियोलॉरिस्ट जॉन ए लार्सन ने की थी। पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) पॉलिग्राफ अपराधी द्वारा बोले जाने वाले झूठ को पकड़ने ही एक टेक्निक है, जो एक मशीन की सहायता से की जाती है।

यह अपराधी की गतिविधियों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की एक टेक्निक है। इस टेक्निक में अपराधी से कुछ सवाल पूछे जाते हैं और जब उन सवालों का जवाब देता है तो उसकी गतिविधियों को पकड़ा जाता है। जब अपराधी सवाल का जवाब दे रहा होता है तो उसकी एक्टिविटी को नोट किया जाता है।

उसके होठों द्वारा बोलने की दशा, उसके दिमाग में हो रही गतिविधि, उसकी आँखों की गतिविधि, उसकी दिल की धड़कन, नाड़ी की गति, साँस लेने की दर तथा पसीने निकलने आदि को नोट किया जाता है। हम सब जानते हैं कि झूठ बोलने की स्थिति में मनुष्य के अंदर कुछ अलग परिवर्तन होते हैं।

झूठ बोलने व्यक्ति के अंदर हमेशा कुछ न कुछ डर रहता है, पॉलिग्राफ टेस्ट इसी सिद्धांत पर काम करता है। यदि अपराधी झूठ बोल रहा होता है तो उसके शरीर में कुछ अलग परिवर्तन होते हैं। उसके दिमाग में कुछ हलचल हो रही होती है,  दिल की धड़कन अलग हो सकती है, यह सभी गतिविधि पॉलीग्राफ टेस्ट में नोट की जाती ,है जिसके लिए एक मशीन का प्रयोग किया जाता है। इस टेस्ट को लाई डिटेक्टर टेस्ट यानि झूठ पकड़ने वाली मशीन भी कहा जाता है।

पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) कैसे करते हैं?

पॉलीग्राफ टेस्ट करते समय मशीन को अपराधी के शरीर के अलग-अलग हिस्सों के साथ जोड़ दिया जाता है, ताकि उसके शरीर के बाहरी और अंदरूनी अंगों की गतिविधि को नोट किया जा सके। प्रश्न कर्ता उस अपराधी से प्रश्न पूछता है और जब व्यक्ति जवाब देता है तो जवाब देते समय उसके शरीर की क्या गतिविधियां होती हैं। वह सब सिग्नल मशीन में नोट कर दिए जाते हैं उसके आधार पर सारी गतिविधियों का एनालिसिस किया जाता है और उसके आधार पर रिजल्ट निकाला जाता है।

टेस्ट करने से पहले मशीन से अपराधी के अलग-अलग प्वाइंट को जोड़ा जाता है, उसके सीने पर एक बेल्ट बाँधी जाती है, जिसे  न्यूमोग्राफ ट्यूब (Pneumograph Tube) कहते हैं। जो अपराधी के दिल की धड़कन को नापती है। अपराधी की उंगलियों पर लोमब्रोसो ग्लव्स (Lombroso Gloves) बांधे जाते हैं, उंगलियों के मूवमेंट पर नजर रखते हैं।

अपराधी की बाहों पर बाजू पल्स कफ (Pulse Cuff) बांधे जाते है, जो उसके घटते-बढ़ते ब्लड प्रेशर पर नजर रखते हैं। ये सारी एक्टिविटी एक स्क्रीन पर दिखती रहती हैं और एक्सपर्ट बारीकी से उस पर नजर रखते हैं। सवालों के जवाब के समय अपराधी की सारी गतिविधियों को बारीकी से नोट किया जाता है

पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) किस पर किया जाता है?

पॉलीग्राफ़ टेस्ट किसी आम अपराध के लिए नहीं किया जाता। यह टेस्ट करने के लिए विशेष परिस्थिति में बेहद संगीन अपराधों के लिये ही किया जाता है और इस टेस्ट के लिए अदालत से परमिशन लेनी पड़ती है। भारत में पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अदालत से परमिशन लेने के बाद ही जांच एजेंसी अपराधी का पॉलिग्राफ टेस्ट कर सकती है। पॉलिग्राफ टेस्ट के लिए अपराधी की सहमति होनी भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार अपराधी की इच्छ के विरुद्ध उस पर पॉलिग्राफ टेस्ट नही कराया जा सकता है।

पॉलीग्राफ़ टेस्ट किन किन मामलों में किया जा सकता है?

जब यह टेस्ट अधिकतर बेहद संगीन अपराधों के मामले में किया जाता है। जब अपराधी ने बहुत गंभीर अपराध किया हो और वह पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहा हो और अपराध बेहद हाई प्रोफाइल मामले से संबंधित हो। तब पुलिस जांच एजेंसी अपराधी पर जवाब देने का निर्णय लेती है, उसके लिए उसे अदालत से परमिशन लेनी पड़ती है।

पॉलिग्राफ टेस्ट किन मामलों में किया जा सकता है?

ये टेस्ट यौन दुर्व्यवहार, रेप, हत्या, नशीली दवाओं के प्रयोग, बैंक फ्रॉड, वित्तीय फ्रॉड आदि के मामले में पॉलीग्राफ टेस्ट किया जा सकता है। अदालत केवल विशेष परिस्थितियों में ही पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति देती है। यह परीक्षण जांच एजेंसियों के अधिकारियों, एक्सपर्ट तथा डॉक्टरों आदि देखरेख मे किया जाता है, इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी की जाती है।

क्या ये टेस्ट सटीक रिजल्ट देता है?

बहुत शातिर अपराधी जिन्हें टेस्ट के बारे में पहले से पता है, जो प्रोफेशनल अपराधी है। वह स्वयं को मानसिक रूप से ऐसा तैयार कर सकते हैं कि अपने शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित कर लें। लेकिन बहुत कम मामलों में ऐसा हो पाता है। अधिकतर मामलों में यह टेस्ट सटीक रिजल्ट देता है। हालांकि 100% रिजल्ट नही मिले ऐसा जरूरी नही लेकिन अधिकतर मामलों में इस टेस्ट से सही रिजल्ट ही मिलते हैं।

क्या पॉलीग्राफ टेस्ट के रिजल्ट को साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जा सकता है?

नहीं। पॉलीग्राफ टेस्ट का रिजल्ट सीधे साक्ष्य के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता बल्कि उसके आधार पर आगे की जांच में यदि कोई ऐसा सबूत मिलता है, जो अपराधी द्वारा पॉलीग्राफ टेस्ट में पूछे गए सवालों के जवाब को सही सिद्ध करता हो, तो उन सबूतों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। पॉलीग्राफ़ टेस्ट इन्वेस्टीगेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करता है और यह साक्ष्य जुटाने में मददगार होता है।

नार्को टेस्ट (Narco Test) क्या है?

नार्को टेस्ट भी बेहद संगीन अपराध के मामले में किया जाने वाला टेस्ट है। यह बेहद गंभीर और विशेष परिस्थिति में ही किया जाता है। यह टेस्ट हर किसी अपराधी पर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए अपराधी की शारीरिक और मानसिक स्थिति तथा उसकी उम्र और स्वास्थ्य आदि को ध्यान में रखकर ही टेस्ट किया जा सकता है। इस टेस्ट को करने के लिए अदालत से विशेष परमिशन की जरूरत पड़ती है।

यह टेस्ट पॉलीग्राफ टेस्ट से अधिक जटिल टेस्ट है. क्योंकि इसमें विशेष प्रकार की ड्रग्स को इंजेक्शन आदि द्वारा अपराधी के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे उसके शरीर और दिमागी स्थिति अलग अवस्था में पहुंच आती है। उसका दिमाग ना तो खुद के कंट्रोल में रहता है और ना ही वो पूरी तरह बेहोश हुआ होता है, यानी अपराधी होश और बेहोश की बीच की अवस्था में होता है। ऐसी अवस्था में वह जो कुछ बोलता है, वह वही बोलता है जो सच होता है। वह चाह कर भी झूठ नहीं बोल पाता।

नार्को (Narco Test) कैसे करते हैं?

नार्को टेस्ट करने के लिए अपराधी को ‘ट्रुथ सिरम’ नाम का एक ड्रग दिया जाता है। इस ड्रग को ट्रुथ ड्रग भी कहा जाता है। उसके बाद अपराधी को ‘सोडियम पेंटोथल’ का इंजेक्शन लगाया जाता है। इन दोनों दवाओं के असर होते ही व्यक्ति अर्थ चेतन की अवस्था में पहुंच जाता है अर्थात ना तो वह पूरी तरह होश में रहता है और ना ही बेहोश हुआ होता है।

इन दवाइयों के असर से व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता समाप्त हो जाती है और केवल उसका अंदरूनी चेतन मस्तिष्क काम कर रहा होता है। इस कारण वह ऐसी वही सवालों का जवाब देता है, जो उससे पूछे जाते हैं। उसका खुद पर कंट्रोल ना होने के कारण वह बातों को इधर-उधर घुमा-फिरा कर और झूठ नही बोल सकता है।

झूठ बोलने के लिए व्यक्ति को काफी कुछ सोचना पड़ता है और वह बातों को घुमाने की कोशिश करके बोलने की कोशिश करता है, लेकिन टेस्ट के दौरान दवाओं के प्रभाव से व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है और वह हर सवाल का सीधा जवाब देता है, ऐसी स्थिति में उसके द्वारा झूठ बोलने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

नार्को (Narco Test) किन पर किया जाता सकता है?

नार्को टेस्ट भी पॉलीग्राफ टेस्ट की तरह विशेष परिस्थितियों में ही विशेष अपराधी पर किया जा सकता है। बल्कि कहें तो पॉलीग्राफ टेस्ट तो बहुत से अपराधियों पर आसानी से किया जा सकता है, लेकिन नार्कोटेस्ट के लिए तो बहुत विशेष परिस्थिति की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि इसमें अपराधी के स्वास्थ्य, उसकी उम्र आदि का भी ध्यान रखना पड़ता है।

यदि अपराधी को कोई बीमारी है तो उस पर नारको टेस्ट नहीं आजमाया जा सकता क्योंकि उस पर ड्रग का दुष्प्रभाव पड़ सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है। नार्को टेस्ट में जो ट्रक दी जाती है वह काफी हाई पावर की ड्रग होती हैं। थोड़ी सी भी ज्यादा ड्रग मिलने पर अपराधी की मौत भी हो सकती है।

नार्को टेस्ट करने के लिए भी जांच एजेंसी को अदालत की विशेष परमिशन लेनी पड़ती है। नार्कोटेस्ट कराने से पूर्व व्यक्ति के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति की जांच की जाती है। उसकी उम्र को भी ध्यान में रखा जाता है तथा ड्रग के दबाव को सहने की उसकी क्षमता आदि को ध्यान में रखा जाता है। इसके अलावा अपराध की सहमति होना भी आवश्यक है। इसके बाद ही अदालत की परमिशन ली जाती है। अदालत अपराध की संगीनता और केस की स्थिति को देखते हुए ही परमिशन देती है।

नार्को टेस्ट विशेष एक्सपर्ट्स की देखरेख में किया जाता है, क्योंकि इसके लिए बहुत अधिक सावधानी की आवश्यकता पड़ती है इसमें जांच अधिकारी के अलावा, चिकित्सक, विशेष नार्को एक्सपर्ट और मनोचिकित्सक शामिल होते हैं। टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है ताकि उसकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल ना कर सके। विश्व का सबसे नारको टेस्ट 1922 में किया गया था। यह टेस्ट अमेरिका में किया गया था और कैदियों पर इसको आजमाया गया था।

क्या नार्को टेस्ट (Narco Test) एकदम सटीक रिजल्ट देता है?

नार्कों टेस्ट अधिकतर मामलों में एकदम सटीक रिजल्ट ही देता है। बहुत कम मामले ऐसे हुए हैं, जिसमें नार्को को टेस्ट को से सही रिजल्ट नहीं मिला हो नहीं तो अधिकतर इस मामले में लगभग सटीक रिजल्ट ही मिलता है। नार्कोटेस्ट अपराधियों द्वारा सच्चाई उगलवाने के लिए एक सटीक टेक्निक है, जिसके माध्यम से अपराधी से बिल्कुल सच उगलवाया जा सकता है, लेकिन यह हर अपराधी पर नहीं आजमाया जा सकता है। इसलिए इसका लाभ हर मामले में नहीं मिल पाता।

पॉलिग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) एवं नार्को टेस्ट (Narco Test) में अंतर

पॉलीग्राफ टेस्ट मशीन के आधार पर अपराधियों द्वारा झूठ बोलने की गतिविधि को पकड़ने का एक टेस्ट है, जिसमें एक उपकरण के माध्यम से अपराधी की गतिविधियों को रिकॉर्ड करके उनके आधार पर निष्कर्ष निकाला जाता है, जबकि नार्को टेस्ट दवाओं के माध्यम से अपराधी को आधी बेहोशी की स्थिति में लाकर उससे सच उगलवाने की एक टेक्निक है, जिसमें अपराधी अधिकतर मामलों में सच बोल ही देता है।

दोनों टेस्ट में नार्को टेस्ट अधिक सटीक रिजल्ट देता है। तो हमने जाना कि पॉलीग्राफ टेस्ट एवं नार्को टेस्ट क्या होते हैं। आशा है आपको इसके बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा। आपको यह पोस्ट कैसी लगी इसके बारे में अपनी राय नीचे कमेंट दें।

Polygraph Test Narco Test 


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तैलीय त्वचा से छुटकारा पाएं – ये उपाय आजमाएं

आजकल तैलीय त्वचा (Oily Skin Remedy) की समस्या बहुत आम हो गई है । त्वचा के तैलीय हो जाने के कारण मुँहासे, व्हाइटहेड्स, ब्लैकहेड्स की समस्या होने लगती है । आज हम तैलीय त्वचा (Oily Skin) से छुटकारा पाने के उपाय आजमाएंगे और इसके के बारे में विस्तार से कुछ घरेलू उपाये बताएंगे, जिसका प्रयोग आप घर में आसानी से कर सकते हो।

तैलीय त्वचा से छुटकारा पाने के उपाय (Oily Skin Remedy)

बहुत से लोगों के त्वचा बेहद तैलीय होती है, जिस कारण उनके मुँह पर मुँहासे आदि की समस्या होना बेहद आम है। इस तैलीय त्वचा से छुटकारा पाने के उपाय से पहले तैलीय त्वचा के बारे में जानते हैं।

तैलीय त्वचा (Oily Skin)क्या है?

कफ दोष तैलीय त्वचा के लिए जिम्मेदार होता है। तैलीय त्वचा मोटी तथा बड़े रोमछिद्र लिए हुए होती है। किन्तु तैलीय त्वचा में झुर्रियाँ शुष्क तथा सामान्य त्वचा की अपेक्षा देर से पड़ती है। इसे कफज त्वचा भी कहा जा सकता है। आपकी त्वचा कैसी है? यह मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करता है। यहाँ पर हम आपको तैलीय त्वचा से छुटकारा पाने के आसान उपाय बता रहे हैं।

तैलीय त्वचा से बचाव के उपाय

1) तैलीय त्वचा (Oily Skin) के लिए फायदेमंद दही

दही चेहरे के अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद करती है। अपने चेहरे पर दही लगाकर 15 मिनट तक छोड़ दे फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें।

2) खीरे की मदद से लाएं तैलीय त्वचा (Oily Skin) में निखार

रात को सोने से पहले खीरे की एक स्लाइस से त्वचा पर मालिश कर के छोड़ दें। सुबह त्वचा को गर्म पानी से धो लें।

3) हल्दी का मिश्रण तैलीय त्वचा (Oily Skin) के लिए लाभकारी

  • एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें जब यह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। ऑयली स्किन केयर के लिए आप इस उपाय को आजमा सकती हैं।
  • एक चम्मच चन्दन पाउडर, दो चम्मच बेसन, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, दो बूँद रोज ऑयल, दो बूँद लैवंडर ऑयल तथा एक चम्मच दूध, सब को मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएँ तथा सूखने पर गुनगुने पानी से धो लें।

4) नींबू तैलीय (Oily Skin)) त्वचा  के लिए फायदेमंद

एक चम्मच नींबू का रस, आधा चम्मच शहद और एक चम्मच दूध लेकर मिलाएँ। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें फिर ठंडे पानी से धो लें।

5) आटा तैलीय त्वचा (Oily Skin) के लिए फायदेमंद

एक चम्मच गेहूँ का आटा, एक चम्मच शहद और दो चम्मच दही मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएँ। इस लेप को हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाने से तैलीय त्वचा निखर उठती है।

6) तैलीय त्वचा (Oily Skin) में टमाटर के फायदे

टमाटर में ऑयल एब्सॉर्बिंग एसिड होता है जो त्वचा के अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद करता है। टमाटर के एक टुकड़े से त्वचा की तब तक मसाज करें जब तक त्वचा उसका जूस न सोख ले फिर 15 मिनट तक रखकर ठंडे पानी से धो लें।

7) संतरे का छिलका तैलीय त्वचा (Oily Skin) में फायदेमंद

तीन चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर, चार चम्मच दूध, एक चम्मच नारियल का तेल तथा दो से चार चम्मच गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। 15-20 मिनट तक इसे चेहरे पर लगाकर धो लें।

8) ग्रीन टी तैलीय त्वचा (Oily Skin) में फायदेमंद

  • ग्रीन टी पीने के साथ-साथ चेहरे पर लगाने से भी लाभ करती है। इसमें पॉलीफोलिक और एन्टी इंफ्लैमटोरी गुण पाए जाते हैं जो त्वचा सम्बन्धी रोगों से हमारी रक्षा करते हैं।
  • दो चम्मच ग्रीन टी, एक चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच चावल का आटा लेकर पेस्ट बना ले। 15-20 मिनट तक इसे चेहरे पर लगाएँ रखें। इसके बाद चेहरे को ताजे पानी से धो लें।

9) मेथी तैलीय त्वचा (Oily Skin) के लिए लाभकारी

  • 2-3 चम्मच मेथी के दानों को लेकर रातभर भीगने के लिए रख दें। अगली सुबह इसे पीस कर पेस्ट बना लें, इससे चेहरे पर थोड़ी देर मालिश कर सूखने के लिए छोड़ दें। सूख जाने पर ठण्डे पानी से धो लें।

10) मुल्तानी मिट्टी तैलीय त्वचा (Oily Skin) के लिए गुणकारी

  • मुल्तानी मिट्टी और पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर सूखने दें। पूरी तरह सूखने के बाद पानी से धो लें।
  • मुल्तानी मिट्टी और आधा चम्मच नींबू का रस या संतरे का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर सूखने दें। पूरी तरह सूखने के बाद ठण्डे पानी से चेहरे को धो लें। यह लाभ पहुंचाता है।

उपर लिखे गए सभी उपाय हमारी तैलीय त्वचा (Oily Skin) से छुटकारा पाने में बहुत मदद करेगी।

Post topic: Oily skin remedy

Disclaimer
ये सारे उपाय इंटरनेट पर उपलब्ध तथा विभिन्न पुस्तकों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कोई भी उपाय करते समय अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। इन्हें आम घरेलू उपायों की तरह ही लें। इन्हें किसी गंभीर रोग के उपचार की सटीक औषधि न समझें।

 


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Windows Key Tricks – विंडोज ‘की’ के कमाल के फंक्शन बड़े काम के हैं।

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विंडोज ‘की’ के कमाल के फंक्शन – Windows Key Tricks : कंप्यूटर का उपयोग आज हर व्यक्ति के जीवन की आवश्यकता बन चुकी है। हर किसी व्यक्ति को किसी न किसी कार्य हेतु कंप्यूटर का उपयोग करना ही पड़ता है। आज कंप्यूटर किसी की पहुंच से दूर नहीं है।

हर व्यक्ति को कंप्यूटर चलाने की बेसिक नॉलेज होती है। कंप्यूटर पर काम करते समय हमें अक्सर विंडोज ‘की’ (windows key) के कमाल के फंक्शन के बारे में नहीं पता होता। आइए विंडोज की के ऐसे ही कुछ कमाल के फंक्शन के बारे में जानते हैं…

विंडोज ‘की’ के कमाल के फंक्शन – Windows Key Functions

कंप्यूटर में विंडोज ‘की’ (Windows Key) वह key होती है, जो space bar के बाई तरफ ctrl और alt  key के बीच में पाई जाती है। इसकी key को दबा करके इसके साथ दूसरी अलग-अलग keys दबाकर अलग-अलग तरह के फंक्शन चलाए जा सकते हैं। कई तरह की कमांड दी जा सकती हैं।

विंडोज key के अनेक उपयोग हैं। Win key का उपयोग के द्वारा हम अनेक तरह के कार्य को आसान बना सकते हैं हमें बहुत से विंडोज की प्रेस करके उसके फंक्शन के बारे में पता नहीं होता ही विंडोज की के साथ दूसरी की दबाकर क्या-क्या लाभ उठाया जा सकता है विंडोज की किन्ही कमाल के फंक्शन के बारे में जानते हैं।

Win + Numbers (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9)

अक्सर आप टास्क बार (Task bar) पर वो प्रोग्राम को सेट करके रखते हैं, जो आप सबसे ज्यादा प्रयोग में लातें है ताकि जरूरत पड़ने पर फटाफट उस प्रोग्राम के आइकन पर क्लिक करके प्रोग्राम को ओपन किया जा सके। आप अपनी जरूरत के अनुसार सारे प्रोग्राम को एक क्रम में सेट कर देते हैं।

अगर आपको इनमें से किसी प्रोग्राम को ओपन करना हो तो आप टास्क बार में उस प्रोग्राम के आइकन माउस ले जाकर क्लिक जाकर उस प्रोग्राम को ओपन करना पड़ता है। लेकिन यदि आपको आप चाहें तो माउस का उपयोग करे बिना भी win key और numbers key के काम्बिनेशन से टास्क बार का कोई भी प्रोग्राम ओपन कर सकते हैं।

माना कि आपने टास्क बार पर गूगल क्रोम, माइक्रोसॉफ्ट एज, फाइल एक्सप्लोरर, एमएस वर्ड और एमएस एक्सेल ये पाँच प्रोग्राम सेट इसी क्रम मे सेट करके रखें है। तो Win key और ऊपर की Row की 1 नंबर key दबाइये। गूगल क्रोम तुरंत ओपन हो जायेगा। या अगर आपने गूगल ओपन करके रखा है, और आप दूसरे किसी प्रोग्राम पर है तो Win + 1 दबाने पर आप तुरंत गूगल क्रोम में स्विच हो जायेंगे।

इसी प्रकार अगर आपकी टास्क बार पर दूसरे क्रम में माइक्रोसॉफ्ट एज प्रोग्राम सेट है, तो Win + 2 का काम्बिनेशन दबाने पर माइक्रोसाॉफ्ट एज ओपन हो जायेगा। आप इसी तरह टास्क बार के सभी प्रोग्राम Win key और अलग-अलग नंबरों को सहायता फटाफट ओपन कर सकते हैं।

Win + shift + S

अक्सर आपको कम्प्यूटर पर काम करते समय अपनी स्क्रीन का कोई स्नैपशॉट निकालना पड़ता है या स्क्रीन पर कोई विशेष हिस्सा crop करने की जरूरत पड़ती है, तब आपको snipping tool  का उपयोग करना पड़ता है।

इसके लिए या तो आपको नीचे लेफ्ट साइड की सर्च बार जाकर snipping tool टाइप करके सर्च करना पड़ता है या पहले टास्क बार या डेस्कटॉप पर सेव snipping tool के आइकन पर क्लिक करके ओपन करना पड़ता है। लेकिन आप चाहें तो  Win key  की मदद से सीधे snipping tool को ओपन कर सकते हैं।

Win + Shift + S keys का काम्बिनेशन दबायें। आपके सामने snipping tool ओपन हो जायेगा। आप snipping tool की मदद से स्क्रीन का मनचाहा भाग crop कर सकते हैं।

Win + R

मान लिया आप कंप्यूटर पर कोई कार्य कर रहे हैं और आपको अचानक कोई प्रोग्राम ओपन करने की जरूरत पड़ती है। वह प्रोग्राम आपके टास्कबार पर सेव नहीं है और ना ही डेक्सटॉप पर उसका आइकन है। ऐसे में अपना मनचाहा प्रोग्राम सबसे सरल उपाय है, Win + R दबाएं। अब छोटी सी विंडो ओपन होगी, उसमें आप प्रोग्राम का नाम टाइप कर दें। आपके सामने आपका प्रोग्राम खुल जाएगा। इसमें आप कोई भी फोल्डर, फाइल अथवा किसी भी प्रोग्राम का नाम टाइप करके तुरंत वो प्रोग्राम को ओपन कर सकते हैं।

Win + Arrows keys

माना आप किसी विंडोज पर कोई कार्य कर रहे हैं और वह विंडोज आपको मूव करनी है या आपको वह विंडोज छोटी करनी है तथा एक दूसरी विंडोज में भी साथ में कार्य करना है, तो आप इसके लिए Win key और Arrows keys के काम्बिनेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप जिस विंडोज में कार्य कर रहे हैं, उसको ओपन रखिए और Win key + Left Arrows दबायें।

आपकी एक्टिव विंडो लेफ्ट साइड में हाफ विंडो के रूप में मिनिमाइज हो जाएगी। आप दूसरी विंडो ओपन कीजिए। Win + Right Arrows दबायें। ये विंडो स्क्रीन की राइट की तरफ हाफ विंडों के रूप में minimize हो जायेगी। इसी तरह Win key के साथ Up और Down Arrows keys का प्रयोग करके आप अपनी एक्टिव विंडों को ऊपर या नीचे हाफ विंडो के रूप में सेट कर सकते हैं।

Win + H

वॉइस टूल द्वारा टाइपिंग करने के लिए यह कमांड एक बेहतर उपाय है। अक्सर हमें किसी बड़े मैटर को वॉइस द्वारा टाइप करने की जरूरत पड़ती है और जब हमें किसी बाहरी टूल की मदद लेनी पड़ती है, लेकिन विंडोज में ही ऐसा सिस्टम है कि आप वॉइस टूल के द्वारा वह टाइपिंग कर सकते हैं।

यह सुविधा माइक्रोसॉफ्ट के किसी भी प्रोग्राम को सपोर्ट करती है, लेकिन इसमें केवल अंग्रेजी भाषा के माध्यम से ही टाइप कर सकते हैं अन्य भाषाओं के लिए इस टूल में अभी सपोर्ट नहीं है। आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में या माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में बोलकर टाइप करना चाहते हैं तो माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या एक्सल ओपन करें।

Win + H key कॉम्बिनेशन को दबायें। स्क्रीन पर ऊपर एक छोटी से बार ओपन हो जायेगी जिसमे एक माइक शो हो रहा होगा। आप बस बोलना शुरु कीजिए। आपके द्वारा बोले शब्द अपने टाइप होते जायेंगे। ध्यान रहे फिलहाल इसमें केवल इंग्लिश भाषा को ही सपोर्ट है, और ये माइक्रोसॉफ्ट के सभी प्रोग्राम पर चल सकता है।

Win + E

फाइल एक्सप्लोरर ओपन करने के लिए यह एक बेहतरीन कमांड है। अक्सर आपको काम करते समय किसी फाइल की तलाश करने के लिए फोल्डर एक्सप्लोरर में जाना होता है। ये फाइल एक्सप्लोरर ओपन करने के लिए शार्टकट की है। Win + E keys दबाएं। आपके सामने फाइल एक्सप्लोरर ओपन हो जाएगा और आप वहाँ पर अपनी कोई भी फाइल को सर्च कर सकते हैं।

Win + Tab

यह बहुत उपयोगी और मजेदार शार्टकट की है। इसके माध्यम से आप अपने कंप्यूटर में की जाने वाली सारी एक्टिविटी यानि आपने कौन सी फाइल कब खोली, उसके बारे में पता कर सकते हैं। Win + Tab दबाएं। स्क्रीन पर आपके सामने वह सभी फाइलें दिखनी शुरू हो जाएंगे जो आपने ओपन कीं, या कर ओपन कीं। यहाँ आपको पिछले 20 से 25 दिनों में ओपन की गईं फाइलों और फोल्डर आदि की हिस्ट्री मिल जायेगी। अगर आपकी अनुपस्थिति में किसी ने फाइल ओपन की है तो आपको उसका पता चल सकता है।

Win + I

Win + I का कॉन्बिनेशन आपको सेटिंग फोल्डर को ओपन करने में मदद करता है। यदि आपको अपने कंप्यूटर की सेटिंग में जाना है, तो सीधे Win + I दबायें। आपके सामने सेटिंग फोल्डर ओपन हो जायेगा। आप उसमे से अपनी सेटिंग कर सकते हैं।

Win + D

आप किसी विंडोज में काम कर रहे हैं और आपको सीधे डेक्सटॉप पर जाना है। आपको डेस्कटॉप पर कोई आइकॉन की सर्च करना है या दूसरा कोई भी कार्य करना है तो सीधे डेस्कटॉप ओपन करने के लिए Win + D दबाएं। आपकी एक्टिव विंडोज मिनिमाइज हो जाएगी और जितने भी प्रोग्राम एक्टिव होंगे वह सब मिनिमाइज होकर टास्क बार में चले जाएंगे और आपके सामने डेक्सटॉप दिखने लगेगा। डेस्कटॉपर अपना काम करने के बाद आप दोबारा से Win + D दबायेंगे तो आपकी एक्टिव विंडोस वापस स्क्रीन पर आ जाएगी।

Win + alt +R

Win + alt + R  keys कॉम्बिनेशन की मदद से आप अपनी एक्टिव स्क्रीन को रिकॉर्ड कर सकते हैं। आपको काम करते समय अपनी स्क्रीन को रिकॉर्ड करने की जरूरत पड़ रही है तो आपको किसी बाहरी टूल की मदद लेने की कोई जरूरत नही है। विंडोज में रिकार्डिंग फीचर है।

Win + Alt + R दबाएं। आपकी एक्टिव स्क्रीन की रिकॉर्डिंग शुरू हो जाएगी। ऊपर एक छोटी सी एक्टिव बार दिखाई देगी जहां पर रिकॉर्डिंग होने का टाइमिंग शो होता रहेगा। आप जब चाहें स्टॉप रिकॉर्डिंग आइकॉन पर क्लिक करके रिकॉर्डिंग को रोक सकते हैं। आपकी रिकॉर्डिंग कंप्यूटर के Videos फोल्डर में Capture फोल्डर में मिलेगी।

Win + G

यह भी स्क्रीन रिकॉर्ड करने का फीचर है। इसमें भी ऊपर दिए गए ऑप्शन के अनुसार ही स्क्रीन रिकॉर्डिंग की जा सकती है। इसमें आप स्क्रीनशॉट भी ले सकते हैं। दरअसल ये एक गेमिंग फीचर्स है, जो कंप्यूटर पर गेम खेलते समय स्क्रीन रिकॉर्ड करने के लिए बनाया गया है। इसकी सहायता से आप सामान्य रिकॉर्डिंग भी कर सकते हैं।

Win + V

इस कमांड के द्वारा आप क्लिपबोर्ड को एक्टिव कर सकते हैं। Win + V दबाइये। आपके सामने क्लिपबोर्ड की छोटी सी विंडो ओपन हो जाएगी। इस विंडो में आपके द्वारा कॉपी किया गया सारा डाटा शो होने लगेगा। आपने पिछले समय में जो भी फाइल, फोल्डर, इमेज अथवा डाटा कॉपी किया होगा वह सारा का सारा क्लिपबोर्ड में आपको शो होगा। आप उनमें से अपना मनचाहा डाटा कहीं पर भी पेस्ट कर सकते हैं।

Win + L

विंडोज और L key के फंक्शन के साथ आप अपने कम्प्यूटर को लॉक कर सकते हैं। मान लीजिए आप कंप्यूटर पर कोई महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। आपको अचानक किसी काम से बाहर जाना है। आप कंप्यूटर को बंद नहीं करना चाहते, क्योंकि आपको उन फाइल में दोबारा से काम करना है।

आप यही चाहते हैं कि कम्प्यूटर तो चालू रहे लेकिन आपकी फाइल को कोई देख न सके। Win + L दबाइये। आपका कंप्यूटर एक्टिव रहते हुए लॉक हो जाएगा। अब आपकी अनुपस्थिति में आपके कम्प्यूटर के साथ को छेड़छाड़ नही कर सकेगा। जब आप अपना काम निपटा कर वापस आए तो पासवर्ड द्वारा अपने कंप्यूटर को अनलॉक कर सकते हैं, और आगे का काम शुरु कर सकते हैं।

Win + P

इस कमांड के द्वारा आप अपने कंप्यूटर की स्क्रीन को प्रोजेक्टर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। आप अपने कंप्यूटर की स्क्रीन को किसी बाहरी स्क्रीन से प्रोजेक्टर के रूप कनेक्ट कर सकते हैं। Win + P दबाइये आपकी स्क्रीन की दाहिनी तरफ एक पैनल ओपन हो जाएगा। जहाँ से आप अपनी कंप्यूटर स्क्रीन को प्रोजेक्टर के रूप में जैसा चाहे वैसा प्रयोग कर सकते हैं।

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जानें कौन पूजा गोल्हानी, जिन्होंने “मेरे भारत का बच्चा-बच्चा जय-जय श्रीराम बोलेगा” गाया है।

‘मेरे भारत का बच्चा-बच्चा, जय-जय श्रीराम बोलेगा’ ये भजन गीत आजकल हर धार्मिक उत्सव बजाया जाने लगा है। इस गीत को गाने वाली गायिका का नाम पूजा गोल्हानी हैं, कौन हैं पूजा गोल्हानी? (Pooja Golhani Biography) आइए जानते हैं…

पूजा गोल्हानी (Pooja Golhani Biography)

2021 में एक एक भजन गीत रिलीज हुआ था, मेरे भारत का बच्चा-बच्चा जय जय श्री राम बोलेगा। भजन रिलीज होने के बाद यह गीत लोगों की जुबान पर चढ़ गया था हिंदू धर्म के हर धार्मिक कार्यक्रम में यह गाना डीजे पर जोर-जोर से बजाया जाता था।

अयोध्या में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह गाना और अधिक लोकप्रिय हो उठा है, और अब हर धार्मिक समारोह या धार्मिक व्रत त्यौहार आदि पर होने वाले उत्सवों में यह गाना जरूर बजाया जाता है।

बहुत से लोगों को शायद यह पता ना हो यह गाना किस गायिका ने गाया है या बहुत से लोगों को यह उत्सुकता हो कि यह गाना किसने गया है, तो इस गायिका का नाम पूजा गोल्हानी है।

कौन है पूजा गोल्हानी?

इस गाने को गाने वाली गायिका का नाम पूजा गोल्हानी है। पूजा गोल्हानी एक प्रसिद्ध भजन गायिका हैं, जो हिंदू धर्म के देवी-देवताओं पर आधारित भजनों को गाती हैं। उन्होंने ही इस भजन गीत को गाकर पूरे भारत में लोकप्रिय कर दिया। इस जीत की गायिका पूजा गोल्हानी है और इसके गीतकार नंदू ताम्रकार हैं।

पूजा गोल्हानी का परिचय

पूजा गोल्हानी मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। उनका जन्म 14 जनवरी को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन नामक कस्बे के एक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके परिवार में उनके माता-पिता के अलावा उनका एक भाई भी है, जिसका नाम दीपक गोल्हानी है। उनकी एक बहन भी है जिसका नाम निधि गोल्हानी हैं।

वह अविवाहित हैं, और अपने परिवार के सात मध्यप्रदेश के सिवनी के लखनादौन में रहती हैं।

उनकी आरंभिक शिक्षा दीक्षा मध्य प्रदेश के इस सिवनी जिले के लखनादौन के स्वामी विवेकानंद गवर्नमेंट कॉलेज से हुई, जहाँ से उन्होंने ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की थी। उन्हें बचपन से ही जीत भजन गाने में रुचि थी और उन्होंने 2017 में भजन गीत गाने का अपना करियर आरंभ किया।

सबसे पहले उन्होंने ‘बलियो के बली बजरंग बली’ नामक गीत गाया। इस जीत के गीतकार और निर्देशक नंदू ताम्रकर ही है, जिन्होंने भारत का बच्चा-बच्चा गीत की रचना की। उसके बाद पूजा गोल्हानी ने अनेक भजन गीतों को गाया है।

उन्होंने सभी हिंदू देवी-देवताओं पर भजन गीत गाए हैं। यूट्यूब पर उनके गीत-भजन बेहद लोकप्रिय हैं। उनके गाए लगभग सभी भजन गीतों के गीतकार नंदू ताम्रकार ही हैं।

वर्तमान समय वह मध्यप्रदेश के अपने गृहनगर लखनादौन में ही रहती हैं और भजन गीत गाकर अपने करियर को आगे ले जा रही हैं।

 

मेरे भारत का बच्चा-बच्चा ये भजन यूट्यूब पर देखिए। वीडियो में पूजा गोल्हानी स्वयं है।

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पुरुषों के वनडे वर्ल्ड कप क्रिकेट के सभी 13 वर्ल्डकप का पूरा इतिहास जानें।

1975 से शुरु हुए पुरुषों के वनडे वर्ल्ड कप क्रिकेट के 13 संस्करण हो चुकें हैं। इन सभी संस्करणों में कौन सी टीम कब चैंपियन बनी? सभी वनडे वर्ल्ड कप का क्या इतिहास (All one-day cricket world cup history) है आइए जानते हैं…

वनडे क्रिकेट वर्ल्डकप का पूरा इतिहास (All one-day cricket world cup history)

5 अक्टूबर 2023 से भारत में वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का 13वां संस्करण खत्म हुआ। आस्ट्रेलिया ने फाइनल में भारत को हराकर 6वीं बार वनडे वर्ल्ड कप जीता। कुल मिलाकर पुरुष क्रिकेट के 13 वर्ल्ड कप हो चुके हैं। क्रिकेट के इन 13 वर्ल्ड कप में 6 वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया ने 2-2 वर्ल्ड कप भारत और वेस्टइंडीज ने तथा श्रीलंका, पाकिस्तान और इंग्लैंड ने 1-1 वर्ल्ड कप जीता थे।

क्रिकेट के वनडे वर्ल्ड कप की यात्रा कैसे आरंभ हुई? कौन सा वर्ल्ड कप किसने और कब जीता? किन-किन देशों ने अब तक वर्ल्ड कप में भाग लिया है। वर्ल्ड कप के पूरे इतिहास (all one-day cricket world cup history) का एक आकलन करते हैं…

वनडे वर्ल्ड कप कब शुरु हुआ?

क्रिकेट के वर्ल्ड कप का यह सिलसिला 1975 में आरंभ हुआ थास जो अब 13वें वर्ल्ड कप के रूप में 2023 तक आ पहुँचा। अब अगला यानि 14वां वनडे वर्ल्ड कप दक्षिणी अफ्रीका, जिम्बॉब्वे और नामीबिया में संयुक्त रूप से आयोजित किया जाएगा।

वनडे क्रिकेट का सबसे पहला वर्ल्ड कप 1975 में हुआ था। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला सबसे बड़ा टूर्नामेंट था। वनडे क्रिकेट कुछ वर्षों पहले ही लोकप्रिय होना शुरू हुआ था, जब लगभग 5 वर्ष पहले की 1971 में 5 जनवरी 1971 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला एकदिवसीय यानी वनडे मैच खेला गया था। तब से वनडे मैच धीरे-धीरे अपनी लोकप्रियता प्राप्त करने लगा और फिर आईसीसी द्वारा क्रिकेट का वनडे वर्ल्ड कप आजोजित कराने करने का निर्णय लिया गया।

पहला वनडे वर्ल्ड कप (1st One-day World-cup)│इंग्लैंड-1975

पहला वनडे वर्ल्ड कप 1975 में इंग्लैंड में खेला गया था। पहले वनडे वर्ल्ड कप को प्रूडेंशियल कप के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इंग्लैेड की प्रूडेंशियल इंश्योरेंश कंपनी इस वर्ल्ड कप की मुख्य प्रायोजक थी।

पहला आईसीसी वर्ल्ड कप जून 1 जून 1975 से 21 जून 1975 के बीच में इंग्लैंड में आयोजित किया गया। पहले वनडे वर्ल्ड कप में कुल आठ देशों ने भाग लिया था। उस समय क्रिकेट में केवल 6 देश ही टेस्ट क्रिकेट खेलते थे। इसीलिए पहले वनडे वर्ल्ड कप में सभी छह टेस्ट मैच खेलने वाले देशों ने भाग लिया। यह टेस्ट मैच खेलने वाले देश के भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज थे। इन छह टेस्ट मैच खेलने वाले देशों के अलावा दो एसोसिएट सदस्य देशों ने भी पहले वनडे वर्ल्ड कप में भाग लिया। यह देश थे, श्रीलंका और ईस्ट अफ्रीका थे।

पहले वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली 8 टीमें इस प्रकार थीं..

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. वेस्टइंडीज
  6. पाकिस्तान
  7. श्रीलंका
  8. पूर्वी अफ्रीका

इस तरह पहले वनडे वर्ल्ड कप में 8 देशों ने भाग लिया। सभी 8 देशों को चार-चार टीमों के ग्रुप ए और ग्रुप बी में बांटा गया।

ग्रुप Aग्रुप B
भारतऑस्ट्रेलिया
इंग्लैंडपाकिस्तान
न्यूजीलैंडवेस्टंडंडीज
ईस्ट अफ्रीकाश्रीलंका

उस समय वनडे क्रिकेट 60 ओवर का मैच होता था, यानी पूरे मैच में दोनों टीमों के साथ साथ कुल 120 ओवर फेंके जाते थे। इसलिए पहला वनडे वर्ल्ड कप 60 ओवर के मैच वाला वनडे वर्ल्ड कप था।

इस वनडे वर्ल्ड कप में हर टीम को अपने ग्रुप की बाकी तीनों टीमों से एक-एक मैच खेलना था। दोनों ग्रुप की टॉप दो टीमो को सेमीफाइनल में पहुंचना था। ग्रुप ‘A’ में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने टॉप किया तो ग्रुप ‘B’ में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने टॉप किया।

भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और ईस्ट अफ्रीका ये चारों टीमें ग्रुप मैचों के चरण में ही बाहर हो गईं और सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1इंग्लैंड330012
2न्यूज़ीलैंड32108
3भारत31204
4पूर्वी अफ़्रीका30300

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1वेस्टइंडीज330012
2ऑस्ट्रेलिया32108
3पाकिस्तान31204
4श्रीलंका30300

ग्रुप ‘A’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

ताऱीखटीमवेन्यूस्कोरप्लेयर ऑफ दी मैचपरिणाम
7 जून 1975इंग्लैंड—भारतलॉर्ड्स, लंदनइंग्लैंड 334/4 (60 ओवर) भारत 132/3 (60 ओवर)डेनिस एमिस (इंग्लैंड)इंग्लैंड ने 202 रनो से भारत को हराकर मैच जीता।
7 जून 1975न्यूजीलैंड—ईस्ट अफ्रीकाएजबेस्टन, बर्मिघमन्यूज़ीलैंड 309/5 (60 ओवर) पूर्वी-अफ़्रीका 128/8 (60 ओवर)ग्लेन टर्नर (न्यूजीलैंड)न्यूजीलैंड 181 रनों से जीता
11 जून 1975इंग्लैंड-न्जूजीलैंडट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघमइंग्लैंड 266/6 (60 ओवर) न्यूज़ीलैंड 186 (60 ओवर)कीथ फ्लेचर (इंग्लैंड)इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 80 रनों से हराया।
11 जून 1975भारत-पूर्वी अफ्रीकाहेडिंग्ले, लीड्सपूर्वी अफ़्रीका 120 (55.3 ओवर) भारत 123/0 (29.5 ओवर)फारुख इंजीनियर (भारत)भारत 10 विकेट से जीता
14 जून 1975इंग्लैंड—पूर्वी अफ्रीकाएजबेस्टन, बर्मिंघमइंग्लैंड : 290/5 (60 ओवर) पूर्वी अफ़्रीका 94/10 (52.3 ओवर)जॉन स्नो (इंग्लैंड)इंग्लैंड 196 रनों से जीता
14 जून 1975भारत—न्यूजीलैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरभारत  230 (60 ओवर) न्यूज़ीलैंड  233/6 (58.5 ओवर)ग्लेन टर्नर (न्यूजीलैंड)न्यूजीलैंड 4 विकेट से जीता

ग्रुप ‘B’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

तारीखटीमवेन्यूस्कोरप्लेयर ऑफ दि मैचपरिणाम
7 जून 1975ऑस्ट्रेलिया—पाकिस्तानहेडिंग्ले , लीड्सऑस्ट्रेलिया 278/7 (60 ओवर) पाकिस्तान 205 (53 ओवर)डेनिस लिली (ऑस्ट्रेलिया)ऑस्ट्रेलिया 73 रन से जीता
7 जून 1975वेस्टइंडीज—श्रीलंकाओल्ड ट्रैफर्ड , मैनचेस्टरश्रीलंका 86 (37.2 ओवर) वेस्टइंडीज 87/1 (20.4 ओवर)बर्नार्ड जूलियन (वेस्टइंडीज)वेस्टइंडीज 9 विकेट से जीता
11 जून 1975ऑस्ट्रेलिया—श्रीलंकाओवल, लंदनऑस्ट्रेलिया 328/5 (60 ओवर) श्रीलंका 276/4 (60 ओवर)एलन टर्नर (ऑस्ट्रेलिया)ऑस्ट्रेलिया 52 रन से जीता
11 जून 1975पाकिस्तान—वेस्टइंडीजएजबेस्टन , बर्मिंघममैचपाकिस्तान  266/7 (60 ओवर) वेस्टइंडीज 267/9 (59.4 ओवर)सरफराज नवाजवेस्टइंडीज 1 विकेट से जीता
14 जून 1975ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीजओवल, लंदनऑस्ट्रेलिया 192 (53.4 ओवर), वेस्टइंडीज़ 195/3 (46 ओवर)एल्विन कालीचरण (वेस्टइंडीज)वेस्टइंडीज ने 7 विकेट से जीत दर्ज की
14 जून 1975पाकिस्तान—श्रीलंकाट्रेंट ब्रिज, नॉंघमपाकिस्तान 330/6 (60 ओवर) श्रीलंका 138 (50.1 ओवर)जहीर अब्बास (पाक)पाकिस्तान 192 रनों से जीता

सेमीफाइनल में 4 टीमें पहुंची। ग्रुप ए से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड तथा ग्रुप बी से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज। पहला सेमीफाइनल 18 जून को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच तथा दूसरा सेमीफाइनल 18 जून को ही वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया।

सेमीफाइनल

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरप्लेयर ऑफ दि मैचपरिणाम
पहला सेमीफाइनल18 जून 1975ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैडहेंडिग्ले, लीड्सइंग्लैंड 93/10 (36.2 ओवर) ऑस्ट्रेलिया 94/6 (28.4)गैरी गिल्मर (ऑस्ट्रेलिया)ऑस्ट्रलिया ने 4 विकेट से मैच जीता
दूसरा सेमीफाइनल18 1975वेस्टइंडीज-न्यूजीलैंडओवल, लंदनन्यूजीलैंड 158/10 (52.2) वेस्टइंडीज 159/5 (40.1)एल्विन कालीचरण (वेस्टइंडीज)वेस्टइंडीज ने 5 विकेट से न्यूजीलैंड को हराया

फाइनल

ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को और वेस्टइंडीज ने न्यूजीलैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई। पहले वर्ल्ड कप का फाइनल 21 जून 1975 को लंदन के लार्ड्स मैदान पर खेला गया।

फाइनल मैच में वेस्टइंडीज ने पहले बैटिंग करते हुए 60 ओवर में कुल 8 विकेट खोकर 291 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 58.4 ओवर में केवल 274 रन ही बना सकी। इस तरह वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को 17 रन से हराकर क्रिकेट के पहले वर्ल्ड कप में पहला चैंपियन होने का गौरव प्राप्त किया।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरप्लेयर ऑफ दि मैचपरिणाम
फाइनल25 जून 1975ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीजलार्ड्स, लंदनवेस्टइंडीज 291/8 (60) ऑस्ट्रेलिया 174/10 (58.4)क्लाइव लॉयड (वेस्टइंडीज)वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को 17 रन से हराकर पहला वर्ल्ड कप जीता।

पहले वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 1 जून 1975 से 21 जून 1975
  • मेजबान देश इंग्लैंड
  • भाग लेने वाले देश 8
  • कुल मैच खेले गए 15
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट घोषित नही
  • सबसे अधिक रन 333 – ग्लेन टर्नर (न्यूजीलैंड)
  • सबसे अधिक विकेट 11 – गैरी गिल्मर (ऑस्ट्रेलिया)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन वेस्टइंडीज


दूसरा वनडे वर्ल्ड कप (2nd One-day World-cup)│इंग्लैंड-1979

वनडे क्रिकेट का दूसरा वर्ल्ड कप भी इंग्लैंड में ही खेला गया। क्रिकेट का दूसरा वर्ल्ड कप को भी प्रूडेंशियल वर्ल्ड कप के नाम से जाना जाता है क्योंकि ये कंपनी ही वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप के दूसरे संस्करण की प्रायोजक थी।

वनडे क्रिकेट का दूसरा वर्ल्ड कप 9 जून 1979 से 23 जून 1979 के बीच इंग्लैंड में लगातार दूसरी बार आयोजित किया गया। इस टूर्नामेंट में भी 8 टीमों ने भाग लिया। 7 टीमें पहले वर्ल्ड कप वाली ही थीं और एक टीम नई थी। नई टीम कनाडा थी, जो पूर्वी अफ्रीका के जगह पर दूसरे वर्ल्ड कप में खेल रही थी।

दूसरे वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली 8 टीमें इस प्रकार थीं..

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. वेस्टइंडीज
  6. पाकिस्तान
  7. श्रीलंका
  8. कनाडा

दूसरा वर्ल्ड कप का प्रारूप भी पहले जैसा ही था। जिसमें सभी टीमों को ग्रुप ए और ग्रुप बी दो ग्रुपों में बांटा गया।

ग्रुप Aग्रुप B
ऑस्ट्रेलियाभारत
इंग्लैंडवेस्टइंडीज
पाकिस्तानन्यूजीलैंड
कनाडाश्रीलंका

दूसरे वनडे वर्ल्ड कप का प्रारूप भी पहले वनडे वर्ल्ड कप जैसा ही था, जिसमें और दो ग्रुप में चार चार टीमें थी। यानी हर टीम को अपनी ग्रुप की बाकी तीनों टीमों से एक-एक मैच खेलना था।

ग्रुप स्टेज के मैचों का आरंभ 9 जून 1975 से हुआ ग्रुप ए में इंग्लैंड तथा पाकिस्तान ने अपने ग्रुप में टॉप किया तथा सेमीफाइनल में जगह बनाई। ग्रुप बी में वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड ने टॉप किया तथा सेमीफाइनल में जगह बनाई। भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और कनाडा ये चारों टीमें ग्रुप स्टेज के मैचों में निचले स्थान पर रहकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 इंग्लैंड330012
2 पाकिस्तान32108
3 ऑस्ट्रेलिया31204
4 कनाडा30300

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 वेस्ट इंडीज320010
2 न्यूज़ीलैंड32108
3 श्रीलंका31106
4 भारत30300

ग्रुप ‘A’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

तारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
9 जून 1979ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंडलॉर्ड्स, लंदन, इंग्लैंडऑस्ट्रेलिया 159/9 (60 ओवर), इंग्लैंड 160/4 (47.1 ओवर)इंग्लैंड 6 विकेट से जीता
9 जून 1979कनाडा-पाकिस्तानहेडिंग्ले, लीड्स, इंग्लैंडकनाडा 139/9 (60 ओवर), पाकिस्तान 140/2 (40.1 ओवर)पाकिस्तान 8 विकेट से जीता
13-14 जून 1979पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलियाट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघम, इंग्लैंडपाकिस्तान 286/7 (60 ओवर) ऑस्ट्रेलिया 197 (57.1 ओवर)पाकिस्तान 89 रन से जीता
13-14 जून 1979कनाडा-इंग्लैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर, इंग्लैंडकनाडा 45 (40.3 ओवर) इंग्लैंड 46/2 (13.5 ओवर)इंग्लैंड 8 विकेट से जीता
16 जून 1979कनाडा-ऑस्ट्रेलियाएजबेस्टन, बर्मिंघम, इंग्लैंडकनाडा 105 (33.2 ओवर), ऑस्ट्रेलिया 106/3 (26 ओवर)ऑस्ट्रेलिया 7 विकेट से जीता
16 जून 1979पाकिस्तान-इंग्लैंडहेडिंग्ले, लीड्स, इंग्लैंडइंग्लैंड 165/9 (60 ओवर), पाकिस्तान 151 (56 ओवर)इंग्लैंड 14 रन से जीता

ग्रुप ‘B’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

तारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
9 जून 1979भारत-वेस्टइंडीजएजबेस्टन, बर्मिंघम, इंग्लैंडभारत 190 (53.1 ओवर), वेस्टइंडीज 194/1 (51.3 ओवर)वेस्टइंडीज ने 9 विकेट से जीता
9 जून 1979श्रीलंका-न्यूजीलैंडट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघम, इंग्लैंडश्रीलंका 189 (56.5 ओवर), न्यूज़ीलैंड 190/1 (47.4 ओवर)न्यूजीलैंड ने 9 विकेट से जीत हासिल की
13-15 जून 1979श्रीलंका-वेस्टइंडीजओवल, लंदन, इंग्लैंडश्रीलंका 0/0 वेस्ट इंडीज 0/0मैच रद्द कर दिया गया
13 जून 1979भारत-न्यूजीलैंडहेडिंग्ले, लीड्स, इंग्लैंडभारत  182 (55.5 ओवर), न्यूजीलैंड 183/2 (57 ओवर)न्यूजीलैंड 8 विकेट से जीता
16-18 जून 1979भारत-श्रीलंकाओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर, इंग्लैंडश्रीलंका 238/5 (60 ओवर), भारत 191 (54.1 ओवर)श्रीलंका ने 47 रन से जीता
16 जून 1979इंग्लैंड-वेस्टइंडीजट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघम,वेस्टइंडीज 244/7 (60 ओवर), इंग्लैंड 212/9 (60 ओवर)वेस्टइंडीज ने 32 रनों से जीत हासिल की

सेमीफाइनल

दूसरे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली 4 टीमें इंग्लैंड, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड थीं। वर्ल्ड कप का

पहला सेमीफाइनल 20 जून को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया, जिसमें इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 9 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

दूसरा सेमीफाइनल वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच लंदन के ओवल मैदान पर खेला गया, जिसमें वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान पर 40 रनों से जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी जगह बनाई।

दूसरे वर्ल्डकप का सेमीफाइनल मैचों का स्कोरकार्ड

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल20 जून 19750इंग्लैंड-न्यूजीलैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरइंग्लैंड 221/8 (60) न्यूजीलैंड 212/9 (60)इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 9 रन से हराया
दूसरा सेमीफाइनल20  जून 1975वेस्टइंडीज-पाकिस्तानद ओवल, लंदनवेस्टइंडीज 293/6 (60) पाकिस्तान 250/10 (56.2)वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान को 43 रन से हराया

फाइनल

वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 23 जून 1979 को वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच लंदन के ऐतिहासिक लार्ड्स मैदान पर खेला गया।

फाइनल मैच में वेस्टइंडीज ने पहले बैटिंग करते हुए 60 ओवर में 9 विकेट खोकर 286 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड की टीम 51 ओवर में 194 रन पर ऑल आउट हो गई।

इस तरह वेस्टइंडीज ने लगातार दूसरी बार वनडे क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। उसने लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीता।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल23 जून 1979वेस्टइंडीज-इंग्लैंडलार्ड्स, लंदनवेस्टइंडीज 286/9 (60) इंग्लैंड 194/10 (51)वेस्टइंडीज इंग्लैंड को 92 रन से हराकर दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना

दूसरे वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 9 जून 1979 से 23 जून 1979 तक
  • मेजबान देश इंग्लैंड
  • भाग लेने वाले देश 8
  • कुल मैच खेले गए 15
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट घोषित नही
  • सबसे अधिक रन 253 – गार्डन ग्रीनिज (वेस्टइंडीज)
  • सबसे अधिक विकेट 10 – माइक हेंड्रिक(इंग्लैंड)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन वेस्टइंडीज


तीसरा वनडे वर्ल्ड कप (3rd One-day World-cup)│इंग्लैंड-1983

वनडे क्रिकेट का तीसरा वर्ल्ड कप इंग्लैंड में ही खेला गया। इस तीसरे वर्ल्ड कप का नाम भी प्रूडेंशियल वर्ल्ड कप ही था। वनडे क्रिकेट का तीसरा वर्ल्ड कप 9 जून 1983 से 25 जून 1983 के बीच इंग्लैंड और वेल्स में आयोजित किया गया।

इस टूर्नामेंट में भी पिछले 2 टूर्नामेंट की तरह 8 देशों ने भाग लिया। 7 देश पिछले टूर्नामेंट वाले ही थे। इस बार जिंबाब्वे इस टूर्नामेंट में नया सदस्य था। जिंबाब्वे ने 1982 की आईसीसी ट्रॉफी जीती थी, इसी कारण उसे वनडे वर्ल्ड कप में प्रवेश मिला।

इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले 8 देशों के नाम इस प्रकार थे।

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. वेस्टइंडीज
  6. पाकिस्तान
  7. श्रीलंका
  8. जिम्बॉब्वे

तीसरे वर्ल्ड कप का प्रारूप भी पहले जैसा ही था। जिसमें 8 टीमों को ग्रुप ए और ग्रुप बी दो ग्रुपों में बांटा गया।

ग्रुप Aग्रुप B
भारतइंग्लैंड
ऑस्ट्रेलियान्यूजीलैंड
वेस्टइंडीजपाकिस्तान
जिम्बॉब्वेश्रीलंका

इस बार प्रारूप में थोड़ा परिवर्तन किया गया और सभी दोनों ग्रुप की चारों टीमों को अपनी अन्य तीन टीमों से एक नहीं बल्कि दो-दो मैच खेलने थे। इस तरह ग्रुप स्टेज में हर टीम को अपनी बाकी तीन सदस्य टीमों से 2-2 मैच खेलने थे यानी ग्रुप स्टेज में हर टीम को कुल 6 मैच खेलने थे। 9 जून से ग्रुप स्टेज के मैचों का आरंभ हो गया।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 इंगलैंड651020
2 पाकिस्तान633012
3 न्यूज़ीलैंड633012
4 श्रीलंका61504

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 वेस्ट इंडीज651020
2 भारत642016
3 ऑस्ट्रेलिया62408
4 ज़िम्बाब्वे61504

ग्रुप ‘A’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

तारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
9 जून 1983इंग्लैड-न्यूजीलैंडओवल, लंदनइंग्लैंड 322/6 (60 ओवर), न्यूज़ीलैंड 216 (59 ओवर)इंग्लैंड 106 रन से जीता
9 जून 1983पाकिस्तान-श्रीलंकासेंट हेलेन्स, स्वानसीपाकिस्तान 338/5 (60 ओवर), श्रीलंका 288/9 (60 ओवर)पाकिस्तान ने 50 रन से जीत दर्ज की
11 जून 1983इंग्लैंड-श्रीलंकाकाउंटी ग्राउंड, टॉनटनइंग्लैंड 333/9 (60 ओवर), श्रीलंका 286 (58 ओवर)इंग्लैंड ने 47 रन से जीत दर्ज की
11 जून 1983न्यूजीलैंड-पाकिस्तानएजबेस्टन, बर्मिंघमन्यूज़ीलैंड 238/9 (60 ओवर), पाकिस्तान 186 (55.2 ओवर)न्यूज़ीलैंड 52 रन से जीता
13 जून 1983पाकिस्तान-इंग्लैडलॉर्ड्स, लंदनपाकिस्तान, 193/8 (60 ओवर), इंग्लैंड 199/2 (50.4 ओवर)इंग्लैंड 8 विकेट से जीता
13 जून 1983श्रीलंका-न्यूजीलैंडकाउंटी ग्राउंड, ब्रिस्टलश्रीलंका 206 (56.1 ओवर), न्यूज़ीलैंड 209/5 (39.2 ओवर)न्यूजीलैंड ने 5 विकेट से जीता
15 जून 1983इंग्लैंड-न्यूजीलैडएजबेस्टन, बर्मिंघम,इंग्लैंड 234 (55.2 ओवर), न्यूज़ीलैंड 238/8 (59.5 ओवर)न्यूज़ीलैंड 2 विकेट से जीता
16 जून 1983पाकिस्तान-श्रीलंकाहेडिंग्ले, लीड्सपाकिस्तान 235/7 (60 ओवर), श्रीलंका 224 (58.3 ओवर)पाकिस्तान 11 रन से जीता
18 जून 1983पाकिस्तान-इंग्लैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरपाकिस्तान 232/8 (60 ओवर), इंग्लैंड 233/3 (57.2 ओवर)इंग्लैंड ने 7 विकेट से जीता
18 जून 1983न्यूजीलैंड-श्रीलंकाकाउंटी ग्राउंड, डर्बीन्यूज़ीलैंड 181 (58.2 ओवर), श्रीलंका 184/7 (52.5 ओवर)श्रीलंका ने 3 विकेट से जीत दर्ज की
20 जून 1983श्रीलंका-इंग्लैंडहेडिंग्ले, लीड्सश्रीलंका  136 (50.4 ओवर), इंग्लैंड, 137/1 (24.1 ओवर)इंग्लैंड 9 विकेट से जीता
20 जून 1983पाकिस्तान-न्यूजीलैंडट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघमपाकिस्तान 261/3 (60 ओवर), न्यूज़ीलैंड, 250 (59.1 ओवर)पाकिस्तान 11 रन से जीता

ग्रुप ‘B’ के मैचों का संक्षिप्त विवरण

तारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
9 जून 1983ऑस्ट्रेलिया-जिम्बॉब्वेट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघमजिम्बाब्वे 239/6 (60 ओवर), ऑस्ट्रेलिया226/7 (60 ओवर)जिम्बाब्वे 13 रन से जीता
9 जून 1983भारत-ऑस्ट्रेलियाओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरभारत 262/8 (60 ओवर), वेस्टइंडीज 228 (54.1 ओवर)भारत ने 34 रन से जीत दर्ज की
11 जून 1983वेस्टइंडीज-ऑस्ट्रेलियाहेडिंग्ले, लीड्सवेस्टइंडीज 252/9 (60 ओवर), ऑस्ट्रेलिया 151 (30.3 ओवर)वेस्टइंडीज 101 रन से जीता
11 जून 1983भारत-जिम्बॉब्वेग्रेस रोड, लीसेस्टरजिम्बाब्वे 155 (51.4 ओवर), भारत 157/5 (37.3 ओवर)भारत 5 विकेट से जीता
13 जून 1983भारत-ऑस्ट्रेलियाट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघमऑस्ट्रेलिया 320/9 (60 ओवर), भारत 158 (37.5 ओवर)ऑस्ट्रेलिया 162 रनों से जीता
13 जून 1983जिम्बॉब्वे-वेस्टइंडीजन्यू रोड, वॉर्सेस्टरजिम्बाब्वे 217/7 (60 ओवर), वेस्टइंडीज़ 218/2 (48.3 ओवर)वेस्टइंडीज ने 8 विकेट से जीत दर्ज की
15 जून 1983भारत-वेस्टइंडीजओवल, लंदनवेस्टइंडीज 282/9 (60 ओवर), भारत 216 (53.1 ओवर)वेस्टइंडीज ने 66 रन से जीत दर्ज की
16 जून 1983ऑस्ट्रेलिया-जिम्बॉब्वेकाउंटी ग्राउंड, साउथेम्प्टनऑस्ट्रेलिया 272/7 (60 ओवर), जिम्बाब्वे 240 (59.5 ओवर)ऑस्ट्रेलिया ने जिम्बॉब्वे को 32 रन से हराया
18 जून 1983ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीजलार्ड्स, लंदनऑस्ट्रेलिया 273/6 (60 ओवर), वेस्टइंडीज 276/3 (57.5 ओवर)वेस्टइंडीज  7 विकेट से जीता
18 जून 1983भारत-जिम्बॉव्बेनेविल ग्राउंड, ट्यूनब्रिजभारत 266/8 (60 ओवर), जिम्बाब्वे 235 (57 ओवर)भारत ने 31 रन से जीत दर्ज की
20 जून 1983भारत-ऑस्ट्रेलियाकाउंटी ग्राउंड, चेम्सफोर्डभारत 247 (55.5 ओवर), ऑस्ट्रेलिया 129 (38.2 ओवर)भारत ने 118 रन से जीत दर्ज की
20 जून 1983जिम्बॉब्वे-वेस्टइंडीजएजबेस्टन, बर्मिघमजिम्बाब्वे 171 (60 ओवर), वेस्टइंडीज़ 172/0 (45.1 ओवर)वेस्टइंडीज ने 10 विकेट से जीत दर्ज की

सेमीफाइनल

ग्रुप ए में इंग्लैंड और पाकिस्तान ने टेबल में पहले 2 स्थान पर जगह में बनाई। इंग्लैंड पहले स्थान पर और पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा, जबकि ग्रुप बी में भारत और वेस्टइंडीज ने पहले दो स्थान में जगह बनाई।

वेस्टइंडीज पहले स्थान पर और भारत दूसरे स्थान पर रहा। भारत ने इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया था और पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।

तीसरे वनडे वर्ल्डकप का पहला सेमीफाइनल 22 जून 1975 को भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्ट के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेला गया, जिसमें भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया।

दूसरा सेमीफाइनल वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच 22 जून 1983 को लंदन के द ओवल मैदान में खेला गया। वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर लगातार तीसरी बार फाइनल में वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के फाइनल में अपनी जगह बनाई।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल22 जून 19750भारत-इंग्लैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरइंग्लैंड 213/10 (60) भारत 217/4 (54.4)भारत ने इंग्लैड को 6 विकेट से हराया
दूसरा सेमीफाइनल22  जून 1975वेस्टइंडीज-पाकिस्तानद ओवल, लंदनपाकिस्तान 184/8 (60) वेस्टइंडीज 188/2 (48.4)वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया

फाइनल

तीसरे वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल 25 जून 1983 को भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था। भारत पहली बार फाइनल में पहुंचा था जबकि वेस्टइंडीज लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचने वाली टीम थी। सभी लोगों को यही उम्मीद थी कि वेस्टइंडीज ही इस बार फिर से चैंपियन बनेगा, लेकिन भारत ने उलटफेर करते हुए वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम को हराकर पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता।

यह भारत के क्रिकेट इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन था, जिस कारण भारत में क्रिकेट निरंतर आगे बढ़ता गया। फाइनल मैच में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 54.4 ओवर में 10 विकेट खोकर 183 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की टीम 52 ओवर में 140 रन बनाकर ही ऑल आउट हो गई।

फाइनल में मैच में भारत के मोहिंदर अमरनाथ को प्लेयर ऑफ दि मैच का पुरुस्कार मिला।  उन्होंने 7 ओवर में 12 रन देकर तीन विकेट लिए थे।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल25 जून 1979भारत-वेस्टइंडीजलार्ड्स, लंदनभारत 183/10 (54.4) वेस्टइंडीज 140/10 (52)भारत ने वेस्टडंडीज को 43 रन से हराकर पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीता

तीसरे वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 9 जून 1979 से 23 जून 1979 तक
  • मेजबान देश इंग्लैंड
  • भाग लेने वाले देश 8
  • कुल मैच खेले गए 27
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट घोषित नही
  • सबसे अधिक रन 384 – डेविड गॉवर (इंग्लैंड)
  • सबसे अधिक विकेट 18 – रोजर बिन्नी (भारत)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन भारत


चौथा वनडे वर्ल्ड कप (4th One-day World-cup)│भारत-पाकिस्तान 1987

अभी तक के तीनों वर्ल्ड कप इंग्लैंड में ही आयोजित किए गए थे, लेकिन अब वर्ल्ड कप का यह सफर इंग्लैंड से बाहर निकलकर भारतीय उपमहाद्वीप में आ पहुंचा था यानी चौथा वनडे वर्ल्ड कप भारतीय उपमहाद्वीप में आयोजित किया गया था।

दूसरे वर्ल्ड कप की भारत और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से मेजबानी की थी। 1987 के वर्ल्ड कप को आधिकारिक रूप से रिलायंस कप के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि धीरूभाई अंबानी की रिलायंस कंपनी इस वर्ल्ड कप आयोजन की प्रमुख प्रायोजक थी।

1987 का वर्ल्ड कप भारत और पाकिस्तान में संयुक्त रूप से 8 अक्टूबर 1987 से 8 नवंबर 1987 के बीच खेला गया।

भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस टूर्नामेंट की संयुक्त रूप से मेजबानी की थी। इसी कारण सेमीफाइनल और फाइनल को मिलाकर कुल 27 मैचों में 17 मैच भारत में तथा 10 मैच पाकिस्तान में खेले गए। एक सेमीफाइनल भारत में तथा दूसरा सेमीफाइनल पाकिस्तान में खेला गया।

टूर्नामेंट का फाइनल मैच भारत में खेला गया। इस वर्ल्ड कप में पिछले तीनों टूर्नामेंट की तरह 8 देशों ने ही भाग लिया और वह आठ देश पिछले वर्ल्ड कप वाले 8 देश ही थे, जिन्होंने पिछले 1983 के वर्ल्ड कप में भाग लिया। इनमें सात देश टेस्ट खेलने का दर्जा रखने वाले देश थे और 8वां देश जिंबाब्वे एसोसिएट सदस्य देश था, जिसने 1986 की आईसीसी ट्रॉफी जीतकर

इस टूर्नामेंट में खेलने का अधिकार पाया था। इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले 8 देशों के नाम इस प्रकार थे।

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. वेस्टइंडीज
  6. पाकिस्तान
  7. श्रीलंका
  8. जिम्बॉब्वे

चौथे वर्ल्ड कप का प्रारूप भी पहले जैसा ही था। जिसमें 8 टीमों को ग्रुप ए और ग्रुप बी दो ग्रुपों में बांटा गया।

ग्रुप Aग्रुप B
भारतइंग्लैंड
ऑस्ट्रेलियावेस्टइंडीज
न्यूजीलैंडपाकिस्तान
जिम्बॉब्वेश्रीलंका

दोनो ग्रुप की चारों टीमों को अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से दो-दो बार भिड़ना था यानि प्रत्येक टीम को हर टीम से दो बार मैच खेलने थे। इस तरह हर टीम को ग्रुप स्टेज में 6 मैच खेलने थे। दोनो की ग्रुप की टॉप पर रहने वाली 2 टीमों को सेमीफाइनल में जगह मिलनी थी। ग्रुप स्टेज की मैचों की शुरुआत 8 अक्टूबर 1987 से हो चुकी थी।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 भारत651020
2 ऑस्ट्रेलिया651020
3 न्यूज़ीलैंड62408
4 ज़िम्बाब्वे60600

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारटाइअंक
1 पाकिस्तान651020
2 इंगलैंड642016
3 वेस्ट इंडीज633012
4 श्रीलंका60600

सेमीफाइनल

चौथे वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने जगह बनाई। पिछले 3 वर्ल्ड कप मैच का फाइनल चलने वाली तथा शुरू के 2 वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम इस बार सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई और ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई।

इस तरह सेमीफाइनल के लिए भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के रूप में चार टीमें क्वालिफाई हुईं। पहला सेमीफाइनल मैच पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के पाकिस्तान के लाहौर शहर में खेला गया था। ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 18 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले वह 1975 के वर्ल्ड कप मे फाइनल में पहुँचा था और उपविजेता रहा था।

पहला सेमीफाइनल 4 नवंबर 1987 को पाकिस्तान के लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला गया था । ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवरों में 8 विकेट खोकर 267 रन बनाए जवाब में पाकिस्तान की टीम 50 ओवर मे 249 रन बनाकर आउट हो गई।

दूसरा सेमीफाइनल 5 नवंबर 1987 को भारत और इंग्लैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया। इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट खोकर 254 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम केवल 219 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल4 नवंबर 1987ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तानगद्दाफी स्टेडियम, लाहौरऑस्ट्रेलिया 267/8 (50) पाकिस्तान 249/10 (49)आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 18 रन से हराया
दूसरा सेमीफाइनल5 नंवबर 1987भारत-इंग्लैंडवानखेड़े स्टेडियम, मुंबईइंग्लैड 254/6 (50) भारत 219/10 (45.3)इंग्लैंड ने भारत को 35 रन से हराया

फाइनल

चौथे वर्ल्ड कप का फाइनल मैच भारत के कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) शहर के ईडन गार्डन में खेला गया था। फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर अपना पहला वनडे वर्ल्ड कप जीता।

ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 5 विकेट खोकर कुल 253 रन बनाए जवाब में इंग्लैंड की टीम 50 ओवर में 8 विकेट खोकर 246 रन ही बना सकी। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने अपना पहला वनडे वर्ल्ड कप जीता।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल8 नवंबर 1987ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंडईडन गार्डन, कोलकाता (कलकत्ता)ऑस्ट्रेलिया 253/3 (50) इंग्लैंड 246/8 (50)ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 7 रन से हराया

चौथे वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 8 अक्टूबर 1987 से 8 नवंबर 1987
  • मेजबान देश भारत-पाकिस्तान
  • भाग लेने वाले देश 8
  • कुल मैच खेले गए 27
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट घोषित नही
  • सबसे अधिक रन 471 – ग्राहम गूच (इंग्लैंड)
  • सबसे अधिक विकेट 18 – क्रेग मैक्डरमोट (ऑस्ट्रेलिया)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


पाँचवा वनडे वर्ल्ड कप (5th One-day World-cup)│ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड 1992

पाँचवा वर्ल्ड कप 1992 में आयोजित किया गया। इस बार पांचवा वनडे वर्ल्ड कप 1992 में ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड में आयोजित किया गया। इस वर्ल्ड कप को प्रायोजक बेंसन एंड हेजेज कप के नाम से भी जाना जाता है, जो इस टूर्नामेंट का मुख्य प्रायोजक था।

पांचवा वनडे वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 22 फरवरी 1992 से 25 मार्च 1992 के बीच खेला गयाष अब इस वनडे वर्ल्ड कप में कुल 9 टीमों ने भाग लिया और टूर्नामेंट का प्रारूप पूरी तरह से बदल दिया गया। अब सभी 9 टीमों को 2 ग्रुपों में नहीं बांटा गया बल्कि सारे मैच राउंड रोबिन फॉर्मेट के आधार पर खेले गए। सभी 9 टीमों को टूर्नामेंट की बाकी 8 अन्य टीमों से मैच खेलने थे।

इस वर्ल्ड कप तक श्रीलंका को टेस्ट मैच खेलने का दर्जा मिल चुका था। इसी कारण टेस्ट मैच खेलने वाले सभी 8 देश इस टूर्नामेंट में शामिल हुए। जिम्बॉब्वे एसोसियेट सदस्य के रूप में शामिल हुआ था। हालाँकि वनडे वर्ल्ड कप तक दक्षिणी अफ्रीका की टीम को टेस्ट मैच का दर्जा नही मिला था लेकिन वनडे वर्ल्ड कप के एक महीने बाद उसे टेस्ट मैच देश का दर्जा मिल गया था। प्रतिबंध लगने से पहले भी भी दक्षिणी अफ्रीका एक टेस्ट मैच खेलने वाला देश ही था।

दक्षिणी अफ्रीका की टीम पहली बार वनडे वर्ल्ड कप में शामिल हुई, उसे भी पहले से ही देश का दर्जा मिला हुआ था, लेकिन प्रतिबंधों के कारण वह कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल पा रही थी। 1992 में साउथ अफ्रीका के ऊपर से आईसीसी का प्रतिबंध हट गया और उसने पांचवे वनडे वर्ल्ड कप में पहली बार भाग लिया।

5वें वनडे वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी 9 देशों के नाम इस प्रकार हैं

  1. भारत
  2. पाकिस्तान
  3. आस्ट्रेलिया
  4. न्यूजीलैंड
  5. इंग्लैंड
  6. वेस्टइंडीज
  7. श्रीलंका
  8. जिम्बॉब्वे
  9. दक्षिणी अफ्रीका

टूर्नामेंट की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 न्यूज़ीलैंड871014
2 इंगलैंड852011
3 दक्षिण अफ्रीका853010
4 पाकिस्तान84309
5 ऑस्ट्रेलिया84408
6 वेस्ट इंडीज84408
7 भारत82505
8 श्रीलंका82505
9 ज़िम्बाब्वे81702

सेमीफाइनल

टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका ने अपनी जगह बनाई। टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच 21 मार्च 1992 में न्यूजीलैंड में ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम पर खेला गया। न्यूजीलैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट खोकर 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 262 रन बनाए जवाब में पाकिस्तान की टीम ने 49 ओवर में 6 विकेट खोकर 264 रन बनाकर मैच 4 विकेट से मैच जीत लिया और टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया।

टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल 22 मार्च 1992 को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच सिडनी के सिडनी क्रिकेट ग्राउंड स्टेडियम में खेला गया। इस सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 45 ओवर में छह विकेट पर 252 रन बनाए जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 40 ओवर में छह विकेट खोकर 232 रन ही बना पाई। इंग्लैंड ने 19 रन से मैच जीतककर टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल21 मार्च 1992पाकिस्तान-न्यूजीलैंडईडन पार्क, आकलैंडन्यूजीलैंड 262/7 (50) पाकिस्तान 264/6 (49)पाकिस्तान ने न्जूजीलैंड को 4 विकेट से हराया
दूसरा सेमीफाइनल22 मार्च 1992इंग्लैंड-दक्षिणी अफ्रीकासिडनी क्रिकेट ग्राउंड, सिडनीइंग्लैंड 252/6 (45) दक्षिणी अफ्रीका 232/6 (43)इंग्लैंड ने दक्षिणी अफ्रीका को 19 रन से हराया

फाइनल

टूर्नामेंट का फाइनल 25 मार्च 1992 को पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच खेला गया। फाइनल मैच में पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए  50 ओवर में छह विकेट खोकर 249 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड की टीम 49.2 ओवर में केवल 227 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। पाकिस्तान ने 22 रन से मैच जीतकर पाँचवा वनडे वर्ल्ड कप जीत लिया।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल25 मार्चइंग्लैंड-पाकिस्तानमेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, मेलबर्नपाकिस्तान 249/6 (50) इंग्लैंड 227/10 (49.2)पाकिस्तान ने इंग्लैड को 19 रन से हराया

5वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 22 फरवरी 1992 से 25 मार्च 1992
  • मेजबान देश ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड
  • भाग लेने वाले देश 9
  • कुल मैच खेले गए 39
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट मार्टिन क्रो
  • सबसे अधिक रन 456 – मार्टिन क्रो (न्यूजीलैंड)
  • सबसे अधिक विकेट 18 – वसीम अकरम (पाकिस्तान)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन पाकिस्तान


छठा वनडे वर्ल्ड कप (6th One-day World-cup)│भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका 1996

छठा वनडे वर्ल्डकप टूर्नामेंट 1996 में खेला गया। 1987 के बाद एक एक बार फिर ये टूर्नामेट भारतीय उपमहाद्वीप में खेला गया।

6वे वनडे वर्ल्ड कप का आयोजन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में 14 फरवरी 1996 से 17 मार्च 1996 के बीच किया गया। इस वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका तीनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। इस वर्ल्ड कप का आधिकारिक नाम विल्स वर्ल्ड कप था, क्योंकि विल्स कंपनी इस वर्ल्ड कप की मुख्य प्रायोजक कंपनी थी।

छठे वनडे वर्ल्ड कप में कुल 12 देशों ने भाग लिया। इस वर्ल्ड कप में टेस्ट खेलने वाले सभी 9 देशों ने भाग लिया इसके अतिरिक्त तीन एसोसिएट सदस्य देशों ने भी भाग लिया। जिंबाब्वे को 1996 तक टेस्ट खेलने का दर्जा मिल चुका था। इस तरह टेस्ट खेलने वाले 9 देश हो चुके थे। इन सभी 9 देशों के अलावा 3 देश एसोसियेट सदस्य संयुक्त अरब अमीरात, केन्या और नीदरलैंड थे।

भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका द्वारा संयुक्त रूप मेजबानी करने के कारण भारत ने 17 मैचों की मेजबानी की तो पाकिस्तान ने 16 मैचों की मेजबानी की। श्रीलंका ने चार मैचों की मेजबानी की। यानी कुल 36 मैचों में से 17 भारत में खेले गए। 16 मैच पाकिस्तान में खेले गए तथा 4 मैच श्रीलंका में खेले गए। इनमें दो सेमीफाइनल और एक फाइनल भी शामिल था। इस बार एक सेमीफाइनल भारत में तथा एक सेमी फाइनल श्रीलंका में खेला गया। फाइनल मैच पाकिस्तान में खेला गया।

छठे वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले सभी 12 देश इस प्रकार थे…

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. वेस्टइंडीज
  6. पाकिस्तान
  7. श्रीलंका
  8. दक्षिणी अफ्रीका
  9. जिम्बॉब्वे
  10. नीदरलैंड
  11. केन्या
  12. संयुक्त अरब अमीरात

दूसरा वर्ल्ड कप का प्रारूप राउड रोबिन से हटाकर फिर से ग्रुप वाला कर दिया गया। जिसमें सभी टीमों को ग्रुप ए और ग्रुप बी दो ग्रुपों में बांटा गया।

ग्रुप ‘A’ग्रुप ‘B’
भारतइंग्लैड
ऑस्ट्रेलियान्यूजीलैड
वेस्टइंडीजपाकिस्तान
श्रीलंकादक्षिणी अफ्रीका
जिम्बॉब्वेनीदरलैड
केन्यासंयुक्त अरब अमीरात

इस बार टूर्नामेंट का प्रारूप थोड़ा बदला हुआ था। दोनों ग्रुप में से टॉप की चार टीमों को नॉकआउट चरण में प्रवेश करना था, जिसे क्वार्टर फाइनल कहा गया। दोनों ग्रुप की सभी टीमों को बाकी अन्य 5 दिनों से एक एक मैच खेलना था। हर ग्रुप में से चार टीमें क्वार्टर फाइनल में प्रवेश करने वाली थी। यानी नॉकआउट चरण (क्वार्टर फाइनल) के लिए 8 टीमें जाने वाली थी।

ग्रुप स्टेज के मैचों का आरंभ 17 फरवरी 1996 से हो गया और ग्रुप स्टेज के मैचों में ग्रुप ए से श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और वेस्टइंडीज ने पहले 4 स्थानों मे जगह बनाई तो ग्रुप बी से दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड ने पहले 4 स्थानों में जगह बनाई। ग्रुप ए से जिम्बॉब्वे और केन्या तथा ग्रुप बी से नीदरलैड और संयुक्त अरब अमीरात बाहर हो गईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1श्रीलंका550010
2ऑस्ट्रेलिया53206
3भारत53206
4वेस्ट इंडीज52304
5ज़िम्बाब्वे51402
6केन्या51402

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1दक्षिण अफ्रीका550010
2पाकिस्तान54108
3न्यूज़ीलैंड53206
4इंग्लैंड52304
5संयुक्त अरब अमीरात51402
6नीदरलैंड50500

क्वार्टर फाइनल का रिजल्ट

ग्रुप स्टेज के मैच पूरे हो चुके थे। दोनों ग्रुप से टॉप की चार-चार टीमों ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल में सभी 8 टीमों को एक-एक में मैच खेला था और सेमीफाइनल में जगह बनानी थी। कुल 4 क्वार्टर फाइनल होने थे।

पहले क्वार्टर फाइनल में 9 मार्च 1996 को इंग्लैंड का मुकाबला श्रीलंका से हुआ। श्रीलंका ने इंग्लैंड को 5 विकेट से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई।

दूसरे क्वार्टर फाइनल में 9 मार्च 1996 को भारत एवं पाकिस्तान के बीच मुकाबला हुआ। भारत ने पाकिस्तान को 39 रन से हराकर सेमीफाइनल की राह पकड़ी।

तीसरे क्वार्टर फाइनल में 10 मार्च 1996 को वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका एक दूसरे से के लिए अपना स्थान पक्का किया।

चौथे क्वार्टर फाइनल में 11 मार्च 1996 को ही न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच हुआ, जिसमें ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड को 6 विकेट से हराकर सेमीफाइनल की चौथी टीम बनी।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला क्वार्टर फाइनल9 मार्च 1996इंग्लैंड-श्री लंकाइकबाल स्टेडियम, फैसलाबादइंग्लैंड 235/8 (50) श्रीलंका 236/5.4श्रीलंका ने इंग्लैंड को पांच विकेट से हराया
दूसरा क्वार्टर फाइनल9 मार्च 1996भारत-पाकिस्तानएम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरुभारत 287/8(50) पाकिस्तान 248/9 (49)भारत ने पाकिस्तान को 39 रन से हराया
तीसरा क्वार्टर फाइनल11 मार्च 1996वेस्टइंडीज-दक्षिणी अफ्रीकानेशनल स्टेडियम, कराचीवेस्ट इंडीज 264/8(50) दक्षिण अफ्रीका 245/10 (49.3)वेस्टइंडीज ने दक्षिण अफ्रीका को 19 रन से हराया
चौथा क्वार्टर फाइनल11 मार्च 1996न्यूजीलैंड-ऑस्ट्रेलियाएमए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नईन्यूजीलैंड 286/9 (50) ऑस्ट्रेलिया 289/447.5ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को 6 विकेट से हराया

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें भारत, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज थीं। पहला सेमीफाइनल 13 मार्च 1996 को भारत और श्रीलंका के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में हुआ। श्रीलंका ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट पर 251 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम केवल 34.1 ओवर में 8 विकेट खोकर 120 रन ही बना पाई।

भारतीय टीम के बेहद खराब प्रदर्शन के कारण दर्शक बेहद गुस्सा हो गए और मैच में दर्शकों द्वारा व्यवधान उत्पन्न किए जाने के कारण मैच को रोकना पड़ा। बाद में तकनीकी आधार पर श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया गया। इस तरह श्रीलंका छठे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली टीम बन गई।

दूसरा सेमीफाइनल 14 मार्च 1996 को ऑस्ट्रेलिया एवं वेस्टइंडीज के बीच मोहाली के पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट पर 207 रन बनाए जब आप में वेस्टइंडीज की टीम 49.3 ओवर में 202 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने पांच रनों से मैच जीत कर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल फाइनल मैच में अपनी जगह बनाई।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल13 मार्च 1996भारत-श्रीलंकाईडन गार्डन, कोलकाताश्रीलंका 251/8 (50) भारत 120/8 (34.1)श्रीलंका ने भारत को हराया। श्रीलंका तकनीकी आधार पर विजेता
दूसरा सेमीफाइनल14 मार्च 1996ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीजगद्दाफी स्टेडियम, लाहौरऑस्ट्रेलिया 207/8 (50) वेस्टइंडीज 202/10 (49.3)ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को 5 रन से हराया

फाइनल

वर्ल्ड कप का फाइनल ऑस्ट्रेलिया एवं श्रीलंका के बीच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला गया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 241 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की टीम ने 40.5 ओवर में 245 रन बनाकर मैच जीत लिया और श्रीलंका ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का चैंपियन होने का गौरव प्राप्त किया।

मैचतारीखटीमवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल17 मार्च 1996ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंकागद्दाफी स्टेडियम, लाहौरऑस्ट्रेलिया 207/8 (50) वेस्टइंडीज 202/10 (49.3)ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को 5 रन से हराया

6वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 14 फरवरी 1996 से 17 मार्च 1996 तक
  • मेजबान देश भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका
  • भाग लेने वाले देश 12
  • कुल मैच खेले गए 37
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट सनथ जयसूर्याा (श्रीलंका)
  • सबसे अधिक रन 523 – सचिन तेंदुलकर (भारत)
  • सबसे अधिक विकेट 15 – अनिल कुंबल (भारत)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन श्रीलंका


सातवां वनडे वर्ल्ड कप (7th One-day World-cup)│इंग्लैड 1999

सातवां वनडे वर्ल्ड कप एक बार फिर 1999 में इंग्लैंड में खेला गया। यह चौथा अवसर था जब इंग्लैंड में वनडे वर्ल्ड कप खेला जा रहा था।

आईसीसी द्वारा आयोजित सातवां वनडे वर्ल्ड कप 14 मई 1999 से 20 जून 1999 के बीच इंग्लैंड में खेला गया। इंग्लैंड इस वर्ल्ड कप का मुख्य आयोजक था। उसके अलावा कुछ मैच स्कॉटलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड और वेल्स में भी खेले गए जो सह मेजबान थे।

सातवें वनडे वर्ल्ड कप में कुल 12 टीम में शामिल हुई, जिनके बीच कुल 42 मैच हुए थे। सभी टीमों को छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया। टूर्नामेंट का प्रारूप इस तरह था कि ग्रुप मैच के बाद सुपर सिक्स फॉर्मेट होगा यानी हर ग्रुप से तीन-तीन टीम में सुपर सिक्स में जाने वाली थीं। यह वर्ल्ड कप में एक नया प्रारूप था।

सातवें वनडे वर्ल्ड कम में 9 टेस्ट मैच खेलने वाले देशों के अलावा बांग्लादेश, केन्या और स्कॉटलैंड की टीमें भी शामिल थी। इस बार बांग्लादेश की टीम आईसीसी ट्रॉफी के विजेता के तौर पर पहली बार वनडे वर्ल्ड कप खेल रही थी। केन्या की टीम आईसीसी ट्रॉफी की उपविजेता थी और स्कॉटलैंड ने आईसीसी ट्रॉफी में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। इसी आधार पर इन तीनों टीमों को शामिल किया गया। बाकी 9 देश टेस्ट खेल मैच खेलने वाले देश थे।

सातवें वनडे वर्ल्ड कप में कल 12 देशों ने भाग लिया जिनके नाम इस प्रकार हैं

  • भारत
  • ऑस्ट्रेलिया
  • इंग्लैंड
  • न्यूजीलैंड
  • पाकिस्तान
  • दक्षिण अफ्रीका
  • वेस्टइंडीज
  • जिंबॉब्वे
  • श्रीलंका
  • बांग्लादेश
  • केन्या
  • स्कॉटलैंड

सभी 12 टीमों को छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया जो कि इस प्रकार थे।

ग्रुप ‘A’ग्रुप ‘B’
भारतऑस्ट्रेलिया
इंग्लैंडन्यूजीलैड
दक्षिणी अफ्रीकापाकिस्तान
श्रीलंकावेस्टइंडीज
जिम्बॉब्वेबांग्लादेश
केन्यास्कॉटलैंड

ग्रुप स्टेज

ग्रुप स्टेज के मैच 14 मई से आरंभ हो गए। ग्रुप ए में दक्षिण अफ्रीका, भारत और जिंबॉब्वे ने प्वाइंट टेबल में पहले तीन स्थानों में जगह बनाई। ग्रुप बी में पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने पहले तीन स्थानों में जगह बनाई। मेजबानी इंग्लैंड, श्रीलंका केन्या, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश और स्कॉटलैंड जैसी टीम पहले चरण में ही बाहर हो गईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1दक्षिण अफ्रीका54108
2भारत53206
3ज़िम्बाब्वे53206
4इंगलैंड53206
5श्रीलंका52304
6केन्या50500

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1पाकिस्तान54108
2ऑस्ट्रेलिया53206
3न्यूज़ीलैंड53206
4वेस्टइंडीज53206
5बांग्लादेश52304
6स्कॉटलैंड50500

सुपर सिक्स स्टेज

दोनों ग्रुप से टॉप की टीम 3-3 टीमें सुपर सिक्स में पहुंचीं। सुपर सिक्स में पहुंचने वाली छः टीमें भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और जिंबाब्वे थीं। सुपर सिक्स में पहुंचने वाले सभी 6 टीमों को एक ही ग्रुप में रखा गया और हर टीम को बाकी की 5 टीमों से मैच खेलने थे।

टॉप के 4 स्थानों पर रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल में प्रवेश मिलना था। सुपर सिक्स में पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका और न्यूजीलैंड ने टॉप 4 स्थान पर जगह बनाई और सेमीफाइनल में प्रवेश किया। भारत और जिम्बॉब्वे ये दोनो टीमें सुपर सिक्स में टूर्नामेंट से बाहर हो गईं।

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1पाकिस्तान53206
2ऑस्ट्रेलिया53206
3दक्षिण अफ्रीका53206
4न्यूज़ीलैंड52215
5ज़िम्बाब्वे52215
6भारत51402

सेमीफाइनल

सेमी फाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका थी। पहला सेमीफाइनल 16 जून 1999 को न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच खेला गया। न्यूजीलैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट होकर कल 241 रन बनाए, जवाब में पाकिस्तान की टीम ने केवल एक विकेट खोकर 242 रन बनाकर मैच जीत लिया और टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया।

दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका का मुकाबला 17 जून 1999 को हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 49.2 ओवर में 213 रन बनाए। जबाव में दक्षिणी अफ्रीकाकी टीम ने भी 49.4 ओवर में 213 रन ही बनाए। दोनों का स्कोर टाइ होने के बाद बेहतर रन रेट के आधार पर ऑस्ट्रेलिया को विजेता घोषित किया गया और उसे फाइनल में जगह मिली।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल16 जून 1999पाकिस्तान-न्यूजीलैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरन्यूजीलैंड 241/7 (50) पाकिस्तान 242/1 (47.3)पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को 9 विकेट से हराया
दूसरा सेमीफाइनल17 जून 1999ऑस्ट्रेलिया-दक्षिणी अफ्रीकाएजबेस्टन, बर्मिघमऑस्ट्रेलिया 213/10 (49.2) दक्षिणी अफ्रीका 213/10 (49.4)ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिणी अफ्रीका को बेहतर रन रेट के आधार पर हराया

फाइनल

सातवें वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 20 जून 1999 को पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। इस फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर अपना दूसरा वनडे वर्ल्ड कप जीता। पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए 39 ओवर में 132 रन बनाए तो ऑस्ट्रेलिया की टीम ने केवल 20.1 ओवर में ही दो विकेट होकर 133 रन बनाकर मैच जीत लिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल20 जून 1999ऑस्ट्रेलिया- पाकिस्तानलार्ड्स, लंदनपाकिस्तान 132 (39) ऑस्ट्रेलिया 133/2 (20.1)ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया

7वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • टूर्नामेंट खेला गया 14 मई 1999 से 20 जून 1999 तक
  • मेजबान देश इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड, वेल्स
  • कुल टीमों ने भाग लिया 12
  • कुल मैच खेले गए 42
  • प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट लांस क्लूजनर (दक्षिण अफ्रीका)
  • सबसे अधिक रन 461 – राहुल द्रविड़ (भारत)
  • सबसे अधिक विकेट विकेट 20 – ज्योफ एलॉट (न्यूजीलैंड) एवं 20 – शेन वार्न (ऑस्ट्रेलिया)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


आठवां वनडे वर्ल्ड कप (8th One-day World-cup)│द. अफ्रीका-जिम्बॉब्वे-केन्या 2003

आठवां वनडे वर्ल्ड कप 2003 दक्षिण अफ्रीका, जिम्बॉब्वे और केन्या में संयुक्त रूप से खेला गया। आठवां वनडे का वर्ल्ड कप 9 फरवरी 2003 से 23 मार्च 2003 के बीच दक्षिण अफ्रीका, जिम्बॉब्वे और केन्या में खेला गया। आठवें वनडे वर्ल्ड कप में कल 14 टीमों ने भाग लिया। यह अब तक किसी भी वनडे वर्ल्ड कप में सबसे अधिक टीमों की संख्या थी।

इन 14 टीमों के बीच कुल 54 मैच खेले गए। वनडे वर्ल्ड कप का प्रारूप 1999 वाले पिछले वर्ल्ड कप जैसा ही था। जिसमें सभी टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया और हर ग्रुप की टॉप 3 टीमो को सुपर सिक्स के लिए क्वालिफाई करना था। आठवें वनडे वर्ल्ड कप में 10 टेस्ट मैच खेलने वाले देश शामिल थे क्योंकि बांग्लादेश को भी टेस्ट मैच खेलने का दर्जा मिल चुका था। इसके अलावा एसोसिएट सदस्य के रूप में केन्या, कनाडा, नामीबिया और नीदरलैंड ने भाग लिया।

आठवें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले 14 देश इस प्रकार थे,

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. न्यूजीलैंड
  4. इंग्लैंड
  5. पाकिस्तान
  6. दक्षिणी अफ्रीका
  7. वेस्ट इंडीज
  8. श्रीलंका
  9. जिम्बॉब्वे
  10. बांग्लादेश
  11. केन्या
  12. कनाडा
  13. नामीबिया
  14. नीदरलैंड

आठवें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले सभी 14 देश को 7-7 टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया, ग्रुप ए और ग्रुप बी।

ग्रुप ‘A’ग्रुप ‘B’
भारतन्यूजीलैंड
ऑस्ट्रेलियादक्षिणी अफ्रीका
जिम्बॉब्वेवेस्ट इंडीज
इंग्लैंडश्रीलंका
पाकिस्तानकेन्या
नीदरलैंडबांग्लादेश
नामीबियाकनाडा

ग्रुप स्टेज

ग्रुप स्टेज के मैचों का आरंभ 10 फरवरी से हो गया। ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया. भारत और जिम्बॉब्वे टॉप तीन स्थान पर रहे। इस वर्ल्ड कप में बड़ा उलट पर देखने को मिला जब इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी बड़ी टीम ग्रुप ए में नीचे रहकर बाहर हो गईं। ग्रुप बी में श्रीलंका, केन्या और न्यूजीलैंड ने पहले तीन स्थान पर कब्जा किया। इस ग्रुप में भी उलटफेर देखने को मिला जब दक्षिणी अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमें बाहर हो गई।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 ऑस्ट्रेलिया660024
2 भारत651020
3 ज़िम्बाब्वे632114
4 इंगलैंड633012
5 पाकिस्तान623110
6 नीदरलैंड61504
7 नामिबिया60600

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइअंक
1 श्रीलंका641018
2 केन्या642016
3 न्यूज़ीलैंड642016
4 दक्षिण अफ्रीका632014
5 वेस्ट इंडीज632114
6 कनाडा61504
7 बांग्लादेश60512

सुपर सिक्स स्टेज

सुपर सिक्स स्टेज में प्रवेश करने वाली 6 टीम में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जिम्बॉब्वे, केन्या, श्रीलंका और न्यूजीलैंड थीं। सुपरसिक्स स्टेज में टॉप की 4 टीमों को सेमीफाइनल में प्रवेश मिलना था। सुपर सिक्स स्टेज में में भारत, ऑस्ट्रेलिया, केन्या और श्रीलंका में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप चार में जगह बनाई। न्यूजीलैंड और जिंबाब्वे की टीम सुपर सिक्स से बाहर हो गई। इस तरह भारत, ऑस्ट्रेलिया, केन्या और श्रीलंका ने सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई।

पोजीशनटीममैचडब्ल्यूएलटाइ/कैंसिलअंक
1श्रीलंका641118
2केन्या642016
3न्यूज़ीलैंड642016
4दक्षिण अफ्रीका632114
5वेस्ट इंडीज632114
6कनाडा61504
7बांग्लादेश60502

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में आने वाली 4 टीमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और केन्या थीं। पहला सेमीफाइनल 18 मार्च 2003 को ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच खेला गया। ऑस्ट्रेलिया में पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 212 रन बनाए जवाब में श्रीलंका की टीम 38.1 ओवर में 7 विकेट खोकर 123 रन ही बना सकी। ऑस्ट्रेलिया ने 48 रन से मैच जीत लिया। मैच का रिजल्ट डकवर्थ लुइस मैथड से निकालना पड़ा था क्योंकि बारिश के कारण मैच पूरा नही हो पाया।

दूसरा सेमीफाइनल 20 मार्च  2003 को भारत और केन्या के बीच खेला गया। भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 4 विकेट खोकर 270 रन बनाए। जवबा में केन्या की टीम 46.4 ओवर में 179 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह भारत ने दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई, जहां उसका सामना ऑस्ट्रेलिया से होना था।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल18 मार्च 2003ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंकासेंट ऑफ जार्ज क्रिकेट ग्राउंड, पोर्ट एलिजाबेथऑस्ट्रेलिया 212/7 (50) श्रीलंका 123/7 (38.1)ऑस्टेलिया ने श्रीलंका को 48 रनो से हराया
दूसरा सेमीफाइनल20 मार्च 2003भारत-केन्याकिंग्समीड क्रिकेट स्टेडियम, डरबनऑस्ट्रेलिया 213/10 (49.2) दक्षिणी अफ्रीका 213/10 (49.4)भारत ने केन्या को 91 रनों से हराया

फाइनल

आठवें वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल 23 मार्च 2003 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 2 विकेट खोकर 359 रन का स्कोर खड़ा कर दिया, जवाब में भारतीय टीम 39.2 ओवर में केवल 234 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रनों से हराकर अपना लगातार दूसरा और कुल तीसरा वनडे वर्ल्ड कप जीता।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल23 मार्च 2003भारत-ऑस्ट्रेलियावांडरर्स, जोहान्सबर्गऑस्ट्रेलिया 259/2 (50) भारत 234/10 (39.4)ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रन से हराया

8वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 9 फरवरी 2003 से 23 मार्च 2003
  • मेजबान देश दक्षिण अफ्रीका, केन्या, जिम्बॉब्वे।
  • भाग लेने वाले देश 14
  • कुल मैच खेले गए 54
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट सचिन तेंदुलकर (भारत)
  • सबसे अधिक रन 673 – सचिन तेंदुलकर (भारत)
  • सबसे अधिक विकेट 23 – चमिंडा वास (श्रीलंका)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


नौवां वनडे वर्ल्ड कप (9th One-day World-cup)│वेस्टइंडीज 2007

नौवां वनडे वर्ल्ड कप अब एक अपने नए मुकाम पर पहुंच चुका था। आठवां वनडे वर्ल्ड कप इस बार वेस्टइंडीज के देशों में आयोजित किया गया। वेस्टइंडीज उ70 80 और 90 के दशक में एक बेहद ताकतवर टीम मानी जाती थी लेकिन अभी तक वेस्टइंडीज के देशों में वनडे वर्ल्ड कप का आयोजन नहीं किया गया था। इस बार आईसीसी ने 2007 का आठवां वनडे वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज के देशों में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

नौवां वनडे वर्ल्ड कप 13 मार्च 2007 से 28 अप्रैल 2007 के बीच वेस्टइंडीज में आयोजित किया गया। इस वनडे वर्ल्ड कप में कुल 16 देशों ने भाग लिया था और कल 51 मैच खेले गए थे। इस बार टूर्नामेंट का प्रारूप पिछले सभी वर्ल्ड कप से अलग था।

इस बार भाग लेने वाली सभी 16 टीमों को चार-चार टीमों के चार ग्रुप में बांटा गया। टूर्नामेंट का प्रारूप इस प्रकार रखा गया कि हर ग्रुप से टॉप की दो टीमें अगले नॉकआउट चरण सुपर-8 में प्रवेश करने वाली थीं। नौवें वनडे वर्ल्ड कप में टेस्ट मैच खेलने वाले सभी 10 देशों और 6 एसोसियेट देशों ने भाग लिया।

9वें वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले 16 देश के नाम इस प्रकार थे…

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. दक्षिण अफ्रीका
  6. वेस्टइंडीज
  7. पाकिस्तान
  8. बांग्लादेश
  9. श्रीलंका
  10. जिम्बॉब्वे
  11. बरमूडा
  12. केन्या
  13. नीदरलैंड
  14. कनाडा
  15. आयरलैंड
  16. स्कॉटलैंड

इन सभी 16 देश की टीमों को चार-चार टीमों के ग्रुप में बांटा गया। ग्रुप ए, ग्रुप बी, ग्रुप सी और ग्रुप डी।

ग्रुप ‘A’ग्रुप B’ग्रुप ‘C’ग्रुप ‘D’
 ऑस्ट्रेलियाभारत न्यूज़ीलैंड पाकिस्तान
 दक्षिण अफ़्रीका श्रीलंका इंग्लैंड वेस्ट इंडीज
 स्कॉटलैंड बांग्लादेश केन्या ज़िम्बाब्वे
 नीदरलैंड बरमूडा कनाडा आयरलैंड

ग्रुप स्टेज

ग्रुप स्टेज के मैचों का आरंभ 14 मार्च 2007 से हो गया। ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने टॉप 2 में अपनी जगह बनाई। नीदरलैंड और स्कॉटलैंड बाहर हो गए। ग्रुप बी में श्रीलंका और बांग्लादेश ने टॉप 2 में जगह बनाई। भारत जैसी बड़ी टीम के लिए यह वर्ल्ड कप अच्छा नहीं रहा, और वह ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई। उसके साथ बरमूडा की टीम भी ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई।

ग्रुप सी में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड ने टॉप 2 में जगह बनाई। केन्या और कनाडा बाहर हो गई। ग्रुप डी से वेस्टइंडीज और आयरलैंड ने टॉप 2 में जगह बनाई। इस ग्रुप में भी उलट फिर हुआ और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम भी पहले चरण में ही बाहर हो गई।

इस तरह ग्रुप स्टेज में भारत और पाकिस्तान जैसी बड़ी टीमें पहले चरण में ही बाहर हो गईं, जिससे वनडे वर्ल्ड कप का रोमांच पीका पड़ गया। अब हर ग्रुप से टॉप की दो टीमों ने अगले चरण यानी सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर लिया था।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1ऑस्ट्रेलिया33006
2दक्षिण अफ्रीका32104
3नीदरलैंड31202
4स्कॉटलैंड30300

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1श्रीलंका33006
2बांग्लादेश32104
3भारत31202
4बरमूडा30300

सुपर 8 चरण

सुपर-8 में पहुंचने वाली 8 टीमें ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश और आयरलैंड थीं। सुपर-8 का प्रारूप राउंड रोबिन आधार पर रखा गया यानी सभी आठ टीमों को एक टीम को छोड़कर बाकी 6 टीमों से एक-एक मैच खेलना था।

सुपर-8 में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, न्यूजीलैंड और दक्षिणी अफ्रीका ने पहले चार स्थान पर कब्जा करके सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई। नीचे पॉइंट टेबल में सात मैच में दिए गए हैं, जबकि सुपर-8 में हर टीम ने केवल 6 मैचे खेले। इसका मुख्य कारण यह है कि इसमें एक मैच ग्रुप स्टेज का रिजल्ट भी शामिल है। वह ग्रुप मैच जो एक टीम ने अपने ग्रुप की उस टीम के साथ खेला था, जो सुपर-8 के लिए क्वालिफाई की।

इसी कारण सुपर-8 के चरण हर टीम बाकी सात टीमों में केवल उसी टीम के साथ मैच नही खेला जो ग्रुप स्टेज में उसकी साथ थी।

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1ऑस्ट्रेलिया770014
2श्रीलंका752010
3न्यूज़ीलैंड752010
4दक्षिण अफ्रीका74308
5इंग्लैंड73406
6वेस्ट इंडीज72504
7बांग्लादेश71602
8आयरलैंड71602

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और दक्षिणी अफ्रीका थीं। पहला सेमीफाइनल 24 अप्रैल 2007 को किंग्सटन में सबीना पार्क में खेला गया। पहले सेमीफाइनल में श्रीलंका ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 289 रन बनाएय़ जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 41.4 ओवर में केवल 208 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह श्रीलंका ने न्यूजीलैंड को 81 रन से हराकर दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में प्रवेश किया।

दूसरे सेमीफाइनल में 25 अप्रैल 2007 को ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से हुआ। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बैटिंग करते हुए 43.5 ओवर में कुल 149 रन बनाए और ऑल आउट हो गई। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 31.3 ओवर में ही 3 विकेट खोकर 153 रन बनाकर मैच जीत लिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से मैच जीत कर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल फाइनल में पाँचवी बार जगह बनाई।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल24 अप्रेल 2007श्रीलंका-न्यूजीलैंडसबीना पार्क, किंग्सटनश्रीलंका 289/5 (50) न्यूजीलैंड 208/10 (41.4)श्रीलंका ने न्जूजीलैंड को 81 रन से हराया
दूसरा सेमीफाइनल25 अप्रेल 2007ऑस्ट्रेलिया-दक्षिणी अफ्रीकाब्यूजजोर स्टेडियम, ग्रोस आइलेटदक्षिणी अफ्रीका 149/10 (43.5) ऑस्ट्रेलिया 153/3 (31.3)ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिणी अफ्रीका को 7 विकेट से हराया।

फाइनल

फाइनल मुकाबला 28 अप्रैल 2007 को ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच खेला गया। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 38 ओवर में चार विकेट खोकर 281 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की टीम 36 ओवर में 8 विकेट खोकर केवल 215 रन ही बना सकी। बरसात के कारण मैच 50 ओवर से केवल 38 ओवर का ही खेला जा सका।

इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका को 53 रन से हराकर वर्ल्ड कप का अपना चौथा खिताब जीता। उसने यह खिताब लगातार तीसरी बार जीता था और कुल चौथी बार जीता था। इस तरह ऑस्ट्रेलिया वनडे वर्ल्ड कप चार बार जीतने वाली और लगातार तीन बार वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन गई।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल28 अप्रेल 2007ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंकाकेंग्सिटन ओवल, ब्रिजटाउनऑस्ट्रेलिया 281/4 (38) श्रीलंका 215/8 (36)ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका को 53 रन से हराया

9वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 13 मार्च 2007 से 28 अप्रेल 2007
  • मेजबान देश वेस्टइंडीज
  • भाग लेने वाले देश 16
  • कुल मैच खेले गए 51
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट ग्लेन मैक्ग्राथ (ऑस्ट्रेलिया)
  • सबसे अधिक रन 659 – मैथ्यू हैडन (ऑस्ट्रेलिया)
  • सबसे अधिक विकेट 23 – ग्लेन मैक्ग्राथ (ऑस्ट्रेलिया)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


दसवां वनडे वर्ल्ड कप (10th One-day World-cup)│भारत-श्रीलंका-बांग्लादेश 2011

दसवां वनडे वर्ल्ड कप 2011 में एक बार फिर से भारतीय उपमहाद्वीप में खेला गया। इस बार भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश ने 10वें वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी संयुक्त रूप से की थी। दसवां वनडे वर्ल्ड कप भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में 9 फरवरी 2011 से 2 अप्रैल 2011 के बीच खेला गया। इस वनडे वर्ल्ड कप में कुल 14 टीमों ने भाग लिया था और कुल 49 मैच खेले गए। 14 टीमों में 10 टीमे टेस्ट मैच खेलने वाली टीम थीं तथा चार टीमें एसोसिएट सदस्य के रूप में भाग ले रही थीं। इस वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले 14 टीमों के नाम इस प्रकार हैं..

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. न्यूजीलैंड
  4. इंग्लैंड
  5. पाकिस्तान
  6. दक्षिणी अफ्रीका
  7. वेस्ट इंडीज
  8. श्रीलंका
  9. जिम्बॉब्वे
  10. बांग्लादेश
  11. केन्या
  12. कनाडा
  13. आयरलैंड
  14. नीदरलैंड

दसवें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले सभी 14 देश को 7-7 टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया, ग्रुप ए और ग्रुप बी।

ग्रुप ‘A’ग्रुप ‘B’
ऑस्ट्रेलियाभारत
पाकिस्तानदक्षिणी अफ्रीका
श्रीलंकावेस्टइंडीज
न्यूजीलैंडइंग्लैंड
जिम्बॉब्वेआयरलैंड
कनाडानीदरलैंड
केन्याबांग्लादेश

ग्रुप स्टेज

इस टूर्नामेंट का फॉर्मेट इस प्रकार था कि सभी 14 टीमों को 7-7 टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया। हर ग्रुप में से टॉप की चार टीमों को अगले दौर यानी क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करना था। सभी टीमों ग्रुप मैचों का आरंभ 2 फरवरी 2011 से हो गया।

ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और श्रीलंका ने टॉप करते हुए पहले चार स्थान में जगह बनाई और अगले नॉक आउट चरण के लिए क्वालीफाई किया। जिम्बॉब्वे, कनाडा और केन्या की टीम बाहर हो गईं। ग्रुप बी में भारत, दक्षिणी अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ने टॉप के चार स्थानों में जगह बनाई और अगले नॉकआउट चरण के लिए क्वालीफाई किया। बांग्लादेश, आयरलैंड और नीदरलैंड की टीम बाहर हो गईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारटाइ/कैंसिलअंक
1पाकिस्तान651010
2श्रीलंका64109
3ऑस्ट्रेलिया64109
4न्यूज़ीलैंड64208
5ज़िम्बाब्वे62404
6कनाडा61502
7केन्या60600

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1दक्षिण अफ्रीका651010
2भारत64119
3इंग्लैंड63217
4वेस्टइंडीज63306
5बांग्लादेश63306
6आयरलैंड62404
7नीदरलैंड60600

क्वार्टरफाइनल

क्वावर्टर फाइनल में प्रवेश करने वाली आठ टीमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, दक्षिणी अफ्रीका और न्यूजीलैंड थी। क्वार्टर फाइनल मैचों का आरंभ  23 मार्च 2011 से हुआ। पहले क्वार्टर फाइनल मैच 23 मार्च 2011 को वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच खेला गया, जिसमें पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को 10 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

दूसरा क्वार्टर फाइनल 24 मार्च 2011 को ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच खेला गया जिसमें भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। तीसरा क्वार्टर फाइनल मैच 25 मार्च 2011 को न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुआ, जिसमें न्यूजीलैंड ने दक्षिणी अफ्रीका को 49 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। चौथा क्वार्टर फाइनल 26 मार्च 2011 को इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच हुआ, जिसमें श्रीलंका ने इंग्लैंड को 10 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला क्वार्टरफाइनल23 मार्च 2011वेस्टइंडीज-पाकिस्तानशेर बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम, ढाकावेस्टइंडीज 112 (43.3 ओवर) पाकिस्तान 113/0 (20.5 ओवर)पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को 10 विकेट से हराया
दूसरा क्वार्टरफाइनल24 मार्च 2011भारत-ऑस्ट्रेलियासरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम, अहमदाबादऑस्ट्रेलिया 260/6 (50 ओवर) भारत 261/5 (47.4 ओवर)भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराया
तीसरा क्वार्टरफाइनल25 मार्च 2011न्यूजीलैंड-दक्षिणी अफ्रीकाशेरे बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम, ढाकान्यूज़ीलैंड 221/8 (50 ओवर) दक्षिण अफ़्रीका 172 (43.2 ओवर)न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को 49 रन से हराया
चौथा क्वार्टरफाइनल26 मार्च 2011इंग्लैंड-श्रीलंकाआर प्रेमदासा स्टेडियम, कोलंबोइंग्लैंड 229/6 (50 ओवर) श्रीलंका 231/0 (39.3 ओवर)श्रीलंका ने इंग्लैंड को 10 विकेट से हराया

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका थीं। पहला सेमीफाइनल 29 मार्च 2011 को न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच हुआ। श्रीलंका ने न्यूजीलैंड को पांच विकेट से हराकर तीसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में प्रवेश किया। दूसरा सेमीफाइनल 30 मार्च 2011 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के पाकिस्तान के बीच हुआ। भारत ने पाकिस्तान को 29 रन से हराकर तीसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में प्रवेश किया।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल29 मार्च 2011न्यूजीलैंड-श्रीलंकाआर प्रेमदासा स्टेडियम, कोलंबोन्यूज़ीलैंड  217 (48.5 ओवर) श्रीलंका 220/5 (47.5 ओवर)श्रीलंका ने न्यूजीलैंड को 5 विकेट से हराया
दूसरा सेमीफाइनल30 मार्च 2011भारत-पाकिस्तानआईएस बिंद्रा पंजाब क्रिकेट एसोसियेशन एसोसिएशन स्टेडियम, मोहालीभारत 260/9 (50 ओवर) पाकिस्तान 231 (49.5 ओवर)भारत ने पाकिस्तान को 29 रन से हराया

फाइनल

वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 2 अप्रैल 2011 को भारत और श्रीलंका के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुआ। इस मैच में श्रीलंका ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट कोकर 274 रन बनाए। जवाब में भारत की टीम ने गौतम गंभीर के 97 और महेंद्र सिंह धोनी के 91 रन की बदौलत 48.2 ओवर में चार विकेट खोकर 277 रन बनाए और दूसरी बार वनडे वर्ल्ड कप का चैंपियन होने का गौरव प्राप्त किया।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल2 अप्रेल 2011भारत-श्रीलंकावानखेड़े स्टेडियम, मुंबईश्रीलंका 274/6 (50 ओवर) भारत 277/4 (48.2 ओवर)भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से हराया

10वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 9 फरवरी 2011 से 2 अप्रेल 2011
  • मेजबान देश भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश
  • भाग लेने वाले देश 14
  • कुल मैच खेले गए 49
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट युवराज सिंह (भारत)
  • सबसे अधिक रन 500 – तिकरत्ने दिलशान ((श्रीलंका)
  • सबसे अधिक विकेट 21 – जहीर खान (भारत) और शाहिद आफरीदी (पाकिस्तान)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन भारत


ग्यारहवाँ वनडे वर्ल्ड कप (11th One-day World-cup)│ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड 2015

ग्यारहवां वनडे वर्ल्ड कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।

11वां वनडे वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में 14 फरवरी 2015 से 29 मार्च 2015 के बीच खेला गया। पिछले वर्ल्ड कप की तरह इस वनडे वर्ल्ड कप में भी कुल 14 टीमों ने भाग लिया था और कुल 49 मैच खेले गए। सभी 14 टीमों में 10 टीमे टेस्ट मैच खेलने वाली टीम थीं तथा चार टीमें एसोसिएट सदस्य के रूप में भाग ले रही थीं। इस वर्ल्ड कप में पिछले वर्ल्ड कप की तीन टीमें बदल गईं।

इस बार केन्या और कनाडा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई। उनकी जगह संयुक्त अरब अमीरात और स्कॉटलैंड की टीम वर्ल्ड कप में खेलीं। उसके अलावा नीदरलैंड भी वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई और उसकी जगह अफगानिस्तान की टीम ने वर्ल्ड कप में पहली बार भाग लिया।

सभी दस टेस्ट मैच खेलने वाले देशों के अलावा केवल आयरलैंड की टीम ही पिछले वर्ल्ड कप की थी। आयरलैंड और अफगानिस्तान वर्ल्ड क्रिकेट लीग चैंपियनशिप के विजेता और उपविजेता थे। इस कारण उन्हें 11वें वर्ल्ड कप में प्रवेश मिला। संयुक्त अरब अमीरात और अफगानिस्तान ने वर्ल्ड कप क्वालीफायर राउंड में अपने मैच जीत कर वर्ल्ड कप में प्रवेश किया।

इस वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले 14 टीमों के नाम इस प्रकार हैं..

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. न्यूजीलैंड
  4. इंग्लैंड
  5. पाकिस्तान
  6. दक्षिणी अफ्रीका
  7. वेस्ट इंडीज
  8. श्रीलंका
  9. जिम्बॉब्वे
  10. बांग्लादेश
  11. अफगानिस्तान
  12. संयुक्त अरब अमीरात
  13. आयरलैंड
  14. स्कॉटलैंड

11वें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले सभी 14 देश को 7-7 टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया, ग्रुप ए और ग्रुप बी।

ग्रुप ‘A’ग्रुप ‘B’
ऑस्ट्रेलियाभारत
न्यूजीलैंडदक्षिणी अफ्रीका
इंग्लैंडवेस्टइंडीज
बांग्लादेशपाकिस्तान
श्रीलंकाआयरलैंड
स्कॉटलैंडजिम्बॉब्वे
अफगानिस्तानसंयुक्त अरब अमीरात

ग्रुप स्टेज

इस टूर्नामेंट का फॉर्मेट पिछले वर्ल्ड कप जैसा ही था कि सभी 14 टीमों को 7-7 टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया। हर ग्रुप में से टॉप की चार टीमों को अगले दौर यानी क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करना था। सभी टीमों ग्रुप मैचों का आरंभ 14 फरवरी 2015 से हो गया।

ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश ने टॉप करते हुए पहले चार स्थान में जगह बनाई और अगले नॉक आउट चरण के लिए क्वालीफाई किया। इंग्लैड, अफगानिस्तान और स्कॉटलैंड की टीमें बाहर हो गईं।

ग्रुप बी में भारत, दक्षिणी अफ्रीका, पाकिस्तान और वेस्टइंडीज ने टॉप के चार स्थानों में जगह बनाई और अगले नॉकआउट चरण के लिए क्वालीफाई किया। आयरलैंड, जिम्बॉब्वे और संयुक्त अरब अमीरात की टीमें बाहर हो गईं।

ग्रुप ‘A’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1न्यूज़ीलैंड660012
2ऑस्ट्रेलिया64109
3श्रीलंका64208
4बांग्लादेश63207
5इंगलैंड62404
6अफ़ग़ानिस्तान61502
7स्कॉटलैंड60600

ग्रुप ‘B’ की प्वाइंट टेबल

पोजीशनटीममैचजीतेहारेटाइ/कैंसिलअंक
1 भारत660012
2 दक्षिण अफ्रीका64208
3पाकिस्तान64208
4वेस्टइंडीज63306
5आयरलैंड63306
6ज़िम्बाब्वे61502
7संयुक्त अरब अमीरात60600

क्वार्टर-फाइनल

क्वार्टर फाइनल में प्रवेश करने वाली 8 टीम में ग्रुप ए से न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और बांग्लादेश तथा ग्रुप बी से भारत, पाकिस्तान, दक्षिणी अफ्रीका और वेस्टइंडीज थी। न्यूजीलैंड ने ग्रुप ए में टॉप किया था तथा भारत ने ग्रुप बी में टॉप किया था।

क्वार्टर फाइनल में सभी आठ टीमों को किसी दूसरी टीम से एक बार भिड़ना था और जीतकर सीधे सेमीफाइनल का टिकट कटाना था। क्वार्टर फाइनल मैच 18 मार्च 2015 से आरंभ हो गए।

पहले क्वार्टर फाइनल में 18 मार्च 2015 को श्रीलंका और दक्षिणी अफ्रीका का आमना सामना हुआ। दक्षिणी अफ्रीका ने श्रीलंका को 9 विकेट से हराकर पहला क्वार्टर फाइनल जीत लिया और सेमीफाइनल में पहुंचने बनने वाली पहली टीम बनी।

19 मार्च 2015 को दूसरे क्वार्टरफाइनल में भारत और बांग्लादेश का मुकाबला हुआ, जिसमें भारत ने बांग्लादेश को 109 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

20 मार्च 2015 को तीसरी क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान का आमना-सामना हुआ, जिसमें आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 6 विकेट से हराकर सेमीफाइनल की तीसरी टीम बनी।

चौथे क्वार्टर फाइनल में 21 मार्च 2015 को न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज का मैच हुआ जिसमें न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज को 143 रन से हराकर चौथा क्वार्टर फाइनल जीत लिया और न्यूजीलैंड सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाली चौथी टीम बनी।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला क्वार्टरफाइनल18 मार्च 2015श्रीलंका-दक्षिणी अफ्रीकासिडनी क्रिकेट ग्राउंड, सिडनीश्रीलंका 133 (37.2 ओवर) दक्षिण अफ़्रीका 134/1 (18 ओवर)दक्षिणी अफ्रीका ने श्रीलंका को 9 विकेट से हराया
दूसरा क्वार्टरफाइनल19 मार्च 2015भारत-बांग्लादेशमेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, मेलबॉर्नभारत 302/6 (50 ओवर) बांग्लादेश 193 (45 ओवर)भारत ने बांग्लादेश को 109 रन से हराया
तीसरा क्वार्टरफाइनल20 मार्च 2015ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तानएडीलेड ओवल, एडिलेडपाकिस्तान  213 (49.5 ओवर) ऑस्ट्रेलिया 216/4 (33.5 ओवर)ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 6 विकेट से हराया
चौथा क्वार्टरफाइनल21 मार्च 2015न्यूजीलैंड-वेस्टइंडीजवेलिंगटन रीजनल स्टेडियम, वेलिंगटनन्यूज़ीलैंड  393/6 (50 ओवर) वेस्टइंडीज 250 (30.3 ओवर)न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज को 141 रन से हराया

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड ये चारों टीमें पहुंची थीं।

पहला सेमीफाइनल 24 मार्च 2015 को दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेला गया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बैटिंग करते हुए 43 ओवर में 5 विकेट खोकर 281 रन बनाए। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम ने 42.5 ओवर में 1 विकेट खोकर 299 रन बनाकर 4 विकेट से मैच जीत लिया। बारिश के कारण बाधित होने के कारण इस मैच का निर्णय डकवर्थ लुईस पद्धति के आधार पर हुआ था। इसी कारण न्यूजीलैंड को 299 रन का लक्ष्य मिला था।

दूसरे सेमीफाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया का आमना-सामना हुआ। 26 मार्च 2015 को खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 328 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 46.5 ओवर में केवल 245 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने 95 रन से मैच जीत लिया।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल24 मार्च 2015न्यूजीलैंड-दक्षिणी अफ्रीकाईडेन पार्क, ऑकलैंडदक्षिण अफ़्रीका 281/5 (43 ओवर) न्यूज़ीलैंड 299/6 (42.5 ओवर)न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को डकवर्थ लुईस पद्धति के तहत 4 विकेट से हराया
दूसरा सेमीफाइनल26 मार्च 2015भारत-ऑस्ट्रेलियासिडनी क्रिकेट ग्राउंड, सिडनीऑस्ट्रेलिया 328/7 (50 ओवर) भारत 233 (46.5 ओवर)ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 95 रन से हराया

सेमीफाइनल

11वें वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 29 मार्च 2015 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच हुआ। ऑस्ट्रेलिया 7वीं बार वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रहा था। जबकि न्यूजीलैंड पहली बार वर्ल्ड कप का फाइनल खेला रहा था।

ऑस्ट्रेलिया इससे पहले 6 बार फाइनल खेलकर चार फाइनल मैच जीत चुका था। दोनों टीमों का आमना-सामना मेलबर्न के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड स्टेडियम में हुआ। दोनों मेजबान देश थे, यानी जो चैंपियन बनना था, वह मेजबान देश ही बनना था। न्यूजीलैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 45 ओवर में कुल 183 रन बनाए और उसकी पूरी टीम ऑल आउट हो गई। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 33.1 ओवर में 3 विकेट खोकर 186 रन बना लिए और न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर मैच जीत लिया।

इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने 11वें वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल जीतकर पांचवीं बार चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। ऑस्ट्रेलिया विश्व की एकमात्र ऐसी टीम बन गई, जिसने 5 बार आईसीसी वर्ल्ड कप जीता हो। 3 बार तो उसने 1999, 2003 और 2007 में लगातार वर्ल्ड कप जीते थे।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल29 मार्च 2015ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंडमेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, मेलबर्नश्रीलंका 274/6 (50 ओवर) भारत 277/4 (48.2 ओवर)ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर वर्ल्ड कप जीता

11वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 14 फरवरी 2015 से 29 मार्च 2015 तक
  • मेजबान देश ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड
  • भाग लेने वाले देश 14
  • कुल मैच खेले गए 49
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट मिशेल स्टार्क (ऑस्ट्रेलिया)
  • सबसे अधिक रन 547 – मार्टिन गप्टिल (न्यूजीलैंड)
  • सबसे अधिक विकेट 22 – मिशेल स्टार्क (ऑस्ट्रेलिया) और 22 – ट्रेंट बोल्ड (न्यूजीलैंड)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


बारहवां वनडे वर्ल्ड कप (12th One-day World-cup)│इंग्लैंड 2019

12वां वनडे वर्ल्ड कप एक बार फिर इंग्लैंड में आयोजित किया गया। यह पांचवा वनडे वर्ल्ड कप था जो इंग्लैंड में आयोजित किया जा रहा था।

12वां वनडे वर्ल्ड कप इंग्लैंड और वेल्स में 30 मई 2019 से 14 जुलाई 2019 के बीच आयोजित किया गया। इस बार वनडे वर्ल्ड कप का प्रारूप बिल्कुल ही बदल दिया गया था। इस बार वनडे वर्ल्ड कप में केवल 10 देशों ने ही भाग लिया क्योंकि आईसीसी ने वनडे वर्ल्ड कप की क्वालिटी में और सुधार करने के लिए उच्च रैंकिंग वाले 10 देश के बीच ही टूर्नामेंट आयोजित कराने का निर्णय लिया गया था।।

इस टूर्नामेंट का प्रारूप पिछले दो-तीन वर्ल्ड कप टूर्नामेंट से अलग था। इस इस बार 1992 के राउंड रोबिन टूर्नामेंट को ही फॉलो किया गया यानी सभी 10 टीमों को दो अलग-अलग ग्रुपों में नहीं बांटा गया बल्कि सभी 10 टीमों के बीच राउंड रोबिन आधार पर मैच कराए गए। इसका मतलब था कि सभी 10 टीमों में से हर टीम को बाकी 9 टीमों से एक बार मैच खेलने था। 12वें वनडे वर्ल्ड कप में कुल 10 देशों ने भाग लिया जिनके बीच कुल 48 मैच हुए।

12वें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले 10 देश के नाम इस प्रकार हैं…

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. इंग्लैंड
  4. न्यूजीलैंड
  5. पाकिस्तान
  6. श्रीलंका
  7. दक्षिण अफ्रीका
  8. बांग्लादेश
  9. वेस्टइंडीज
  10. अफगानिस्तान

टूर्नामेंट का प्रारूप कुछ इस तरह था कि लीग मैचों में टॉप की 4 टीमों को सीधे अगले चरण यानि सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करना था। इस टूर्नामेंट में कोई क्वार्टर फाइनल नही था बल्कि लीग मैचों के बाद सीधे सेमी-फाइनल और फाइनल थे।

लीग मैचों का आरंभ 14 जुलाई 2019 को हो गया, जब पहले मैच में इंग्लैंड और दक्षिणी अफ्रीका खेले। आखिर लीग मैच 6 जुलाई को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। लीग मैचों की संख्या कुल 45 थी। लीग मैचों का चरण खत्म होने के बाद भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने पहले चार स्थानों में जगह बनाते हुए सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। लीग मैचों में भारत ने टेबल को टॉप किया और उसके सबसे अधिक 14 अंक थे। भारत ने लीग मैच में अपने 9 में से से 7 मैच जीते 1 मैच हारा और उसका एक मैच बिना खेल रद्द कर हो गया था। ऑस्ट्रेलिया ने भी सात मैच जीते और दो मैच हारे इसलिए वह टेबल में दूसरे स्थान पर रहा। इंग्लैंड तीसरे तथा न्यूजीलैंड चौथे स्थान पर रहा।

टूर्नामेंट के लीग मैचों की प्वाइंट टेबल

क्रमटीममैचजीतेहारेटाइ/ड्राअंकनेट रन रेटपरिणाम
1भारत971115+0.809सेमीफाइनल में पहुंचे
2ऑस्ट्रेलिया972014+0.868
3इंग्लैंड963012+1.152
4न्यूज़ीलैंड953111+0.175
5पाकिस्तान953111−0.430टूर्नामेंट से बाहर
6श्रीलंका93428−0.919
7दक्षिण अफ्रीका93517−0.030
8बांग्लादेश93517-0.410
9वेस्ट इंडीज92615−0.225
10अफ़ग़ानिस्तान90900−1.322

सेमीफाइनल

सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड थीं।

पहला सेमीफाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच 9 जुलाई 2019 को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में खेला गया। न्यूजीलैंड ने 50 ओवर में 8 विकेट होकर कल 239 रन बनाए। जैसे ही भारत की पारी आरंभ हुई बारिश हो गई, इस कारण मैच उस दिन मैच संपन्न नहीं हो पाया। अगले दिन रिजर्वडे के दिन मैच को खेला गया। जवाब में भारत की टीम 49.3 ओवर में केवल 221 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह न्यूजीलैंड ने 18 रनों से मैच जीत कर लगातार दूसरी बार टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया। वह 2015 के वर्ल्ड कप फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया के साथ खेला था।

दूसरा सेमीफाइनल 11 जुलाई 2019 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 49 ओवर में कल 223 रन ही बनाए और उसकी पूरी टीम ऑल आउट हो गई। जवाब में इंग्लैंड की टीम ने 32.8 ओवर में मात्र दो विकेट होकर 226 रन बनाकर 8 विकेट से मैच जीत लिया और वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया। इंग्लैंड चौथी बार वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा था।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
पहला सेमीफाइनल9-10 अप्रेल 2019भारत-न्यूजीलैंडओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टरन्यूज़ीलैंड 239/8 (50 ओवर) भारत 221 (49.3 ओवर)न्यूजीलैंड ने भारत को 18 रन से हराया
दूसरा सेमीफाइनल11 अप्रेल 2019इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलियाएजबेस्टन, बर्मिघमऑस्ट्रेलिया 223 (49 ओवर) इंग्लैंड 226/2 (32.1 ओवर)इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराया

फाइनल

12वें वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 14 जुलाई 2019 को इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच लंदन के लॉर्ड्स मैदान में खेला गया। न्यूजीलैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट खोकर कल 241 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड की टीम भी 50 ओवर में 241 रन बनाकर और ऑल आउट हो गई।

इस तरह दोनों टीमों के बीच मैच टाई हो गया। अब मैच का नतीजा निकलने के लिए सुपर ओवर कराया गया। सुपर ओवर में भी दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहा यानी इंग्लैंड और न्यूजीलैंड दोनों ने 15-15 रन ही बनाएय़ ऐसी स्थिति में मैच का फैसला करने के लिए बाउंड्री की संख्या को आधार बनाया गया तो इंग्लैंड ने अधिक बाउंड्री लगाई थी, इसी कारण इंग्लैंड को विश्व विजेता घोषित कर दिया गया।

इस तरह इंग्लैंड ने पहली बार वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का टूर्नामेंट जीता और वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल14 अप्रेल 2019इंग्लैंड-न्यूजीलैंडमेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, मेलबर्नन्यूजीलैंड 241/8 (50 ओवर) इंग्लैंड 241 (50 ओवर)(टाइ) इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को ज्यादा चौके लगाने के आधार पर हराया

12वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया 30 मई 2019 से 14 जुलाई 2019
  • मेजबान देश इंग्लैंड-वेल्स
  • भाग लेने वाले देश 10
  • कुल मैच खेले गए 48
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट केन विलियमसन (न्यूजीलैंड)
  • सबसे अधिक रन 348 – रोहित शर्मा (भारत)
  • सबसे अधिक विकेट 27 – मिशेल स्टार्क (ऑस्ट्रेलिया)
  • टूर्नामेंट का चैंपियन इंग्लैंड


तेरहवाँ वनडे वर्ल्ड कप (13th One-day World-cup)│भारत-2019

13वां वनडे वर्ल्ड कप भारत में 5 अक्टूबर 2023 से 19 नवंबर 2023 के बीच भारत मे खेला गया। इस वनडे वर्ल्ड कप में भी कुल 10 टीमों े भाग लिया।

13वें वनडे वर्ल्ड कप का फॉर्मेट पिछला वर्ल्ड कप पर जैसा ही था यानी सभी 10 टीमों के बीच राउंड रोबिन आधार पर मैच खेलने थे। इस तरह कुल 45 लीग मैचों हुए और तीन मैच नॉक आउट चरण (2 सेमीफाइनल और फाइनल) के हुए।

यह पहला वनडे वर्ल्ड कप है जो पूरी तरह भारत में आयोजित किया गया था। इससे पहले भारत में जो भी तीन वनडे वर्ल्ड कप हुए हैं, वह संयुक्त मेजबानी में हुए हैं यानी भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका भी सह मेजबान रहे थे। इस वनडे वर्ल्ड कप का मेजबान अकेला भारत था।

13वें वनडे वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली 10 टीमें इस प्रकार थीं..

  1. भारत
  2. इंग्लैंड
  3. ऑस्ट्रेलिया
  4. न्यूजीलैंड
  5. पाकिस्तान
  6. श्रीलंका
  7. बांग्लादेश
  8. अफगानिस्तान
  9. दक्षिण अफ्रीका
  10. नीदरलैंड

इस वनडे वर्ल्ड कप में पहले दो कप की वर्ल्ड कप विजेता वेस्टइंडीज की टीम भाग नहीं ले पाई है, क्योंकि वह वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने में असमर्थ रही थी। ये पहली बार था कि कोई चैंपियन टीम वनडे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई तक नही कर पाई।

टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच भी 5 अक्टूबर 2023 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड एवं न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। टूर्नामेंट का फाइनल मैच 19 नवंबर 2023 को ही अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया।

इस टूर्नामेंट का प्रारूप भी पिछले टूर्नामेंट की तरह ही राउंड रोबिन था यानि सभी 10 टीमों को बाकी की 9 टीमों से लीक मैच खेलने थे।  लीग मैचों में टॉप की 4 टीमों को सीधे अगले चरण यानि सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करना था। इस टूर्नामेंट में कोई क्वार्टर फाइनल नही था बल्कि लीग मैचों के बाद सीधे सेमी-फाइनल और फाइनल थे।

लीग मैचों का आरंभ 5 अक्टूबर 2023 को हो गया, जब पहले मैच में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच उद्घाटन मैच हुआ। आखिर लीग मैच 12 नवंबर 2023 को भारत और नीदरलैंड के बीच खेला गया। लीग मैचों की संख्या कुल 45 थी।

लीग मैचों का चरण खत्म होने के बाद भारत, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने पहले चार स्थानों में जगह बनाते हुए सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

पिछली चैंपियन इंग्लैंड सहित पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नीदरलैंड और अफगानिस्तान की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। लीग मैचों में भारत ने टेबल को टॉप किया और उसके सबसे अधिक 18 अंक थे। भारत ने लीग मैच में अपने 9 में से से 9 मैच जीते। भारत टूर्नामेंट की एकमात्र टीम रही जिसने कोई भी लीग मैच नही हारा।

दक्षिणी अफ्रीका ने 9 में 7 मैच जीतकर प्वाइंट टेबल मे दूसरे स्थान पर जगह बनाई। ऑस्ट्रेलिया ने भी सात मैच जीते और दो मैच हारे और वह टेबल में तीसरे स्थान पर रहा। न्यूजीलैंड चौथे स्थान पर रहा।

टूर्नामेंट के लीग मैचों की प्वाइंट टेबल
टीममैच जीतेहारेअंकनेट रन रेट
भारत98016+2.570
दक्षिण अफ़्रीका97214+1.261
ऑस्ट्रेलिया97214+0.841
न्यूजीलैंड95410+0.743
पाकिस्तान9458-0.199
अफगानिस्तान9458-0.336
इंग्लैंड9366-0.572
बांग्लादेश9274-1.087
श्रीलंका9274-1.419
नीदरलैंड9264-1.825

सेमीफाइनल मैच

पहला सेमीफाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 15 नवंबर 2023 को खेला गया। भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए कुल चार विकेट खोकर 397 रन बनाए। भारत की तरफ से विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने सेंचुरी मारी। उसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम डेरिल मेशिल के 134 रनों के बावजूद 327 रन बनाकर ऑल आउट हो गई और भारत ने 70 रन से मैच जीत कर फाइनल में प्रवेश किया।

दूसरा सेमीफाइनल दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच 16 नवंबर 2023 को कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में खेला गया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बैटिंग करते हुए 49.4 ओवर में कल 212 रन बनाए और वह और ऑल आउट हो गई। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 47.2 ओवर में 7 विकेट पर 2015 रन बनाकर आसानी से मैच जीत लिया। इस तरह फाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया का आमना सामना होना था।

सेमीफाइनलदिनाँकवेन्यू टीमविजेता
पहला सेमीफाइनल15 नवंबर 2023वानखेड़े स्टेडियम, मुंबईभारत-न्यूजीलैंडभारत
दूसरा सेमीफाइनल16 नवंबर 2023ईडेन गार्डन, कोलकाताऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीकाऑस्ट्रेलिया

फाइनल

टूर्नामेंट का फाइनल मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 19 नवंबर 2023 को खेला गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया भारत ने पहले बैटिंग करते हुए कल 240 रन बनाए और उसकी पूरी टीम 50 ओवर में ऑल आउट हो गई। भारत की तरफ से राहुल ने सबसे अधिक 66 रन के एल राहुल ने बनाए। विराट कोहली ने 54 बनाए। रोहित शर्मा ने 47 रन बनाए। भारत की शुरुआत धुआंधार रही थी लेकिन रोहित शर्मा के आउट होने के बाद भारत की पारी लड़खड़ा गई और उसके सभी खिलाड़ी जल्दी-जल्दी आउट होते गए। कोहली और राहुल केएल राहुल ने पारी को कुछ संभाला लेकिन उनकी पारी बेहद धीमी रही। इसी कारण भारत केवल 240 रन ही बना पाया। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने चार विकेट कोकर 43 ओवर में ही 241 रन बनाकर मैच जीत लिया।

ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ऑस्ट्रेलिया के ओपनर ट्रेविस हेड ने सबसे अधिक 137 रन बनाए। मार्नस लाबुशेन ने 58 रनों का योगदान दिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 6 विकेट से हराकर छठी बार वनडे वर्ल्ड कप जीता।

मैचतारीखटीमेंवेन्यूस्कोरपरिणाम
फाइनल19 नवंबर 2023भारत-ऑस्ट्रेलियानरेंद्र मोदी स्टेडियमभारत 240/10 (50 ओवर) ऑस्ट्रेलिया 241/4 (43 ओवर)ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 6 विकेट से हराया

13वें वनडे वर्ल्ड कप की कुछ खास बातें

  • वर्ल्ड कप खेला गया  5 अक्टूबर 2023 से 19 नवंबर 2023 तक
  • मेजबान देश भारत
  • भाग लेने वाले देश 10
  • कुल मैच खेले गए  48
  • प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट ➩ विराट कोहली
  • सबसे अधिक रन ➩ विराट कोहली (भारत) – 765 रन
  • सबसे अधिक विकेट मोहम्मद शमी (भारत) – 24
  • टूर्नामेंट का चैंपियन ऑस्ट्रेलिया


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बसंत पंचमी को जानें। क्यों मनाते हैं? कैसे मनाते हैं? बसंत पंचमी का अर्थ और महत्व।

वसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्यौहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक त्यौहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन के साथ-साथ विद्या की देवी सरस्वती की आराधना के लिए भी प्रसिद्ध है। बसंत पंचमी का त्यौहार क्यों मनाते हैं? इसे कैसे मनाते हैं? इस दिन क्या किया जाता है। इसके बारे में पूरी तरह जानते हैं…

बसंत पंचमी (Basant Panchami)

बसंत पंचमी बसंत ऋतु का एक प्रमुख त्यौहार है, जो हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। यह त्योहार विद्या की देवी सरस्वती के लिए समर्पित त्यौहार है, क्योंकि इस दिन देवी सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है।

देवी सरस्वती विद्या और ज्ञान की देवी हैं, इसलिए जो विद्या के उपासक हैं, जो छात्र हैं, जो शिष्य हैं, जो विद्वान हैं वह सब बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा आराधना करते हैं।

वसंत ऋतु में आने के कारण यह त्यौहार ऋतुओं से भी जुड़ गया है, क्योंकि बसंत ऋतु का आगमन बसंत पंचमी के दिन से ही माना जाता है। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन होता है और चारों तरफ मदमस्त वातावरण छा जाता है। प्रकृति में चारों तरफ पीले-पीले पुष्प खिल उठते हैं। सरसों के पीले-पीले खेत फसल से लहलहा उठाते हैं।

स्त्री-पुरुष पीले वस्त्र पर पहनकर बसंत पंचमी के दिन हर्षोल्लास से बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं। जो विद्यार्थी हैं, जो विद्वानजन हैं, विद्या के उपासक है, वह इस दिन विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा आराधना करते हैं और उनसे अपने जीवन में विद्या और बुद्धि देने की प्रार्थना करते हैं।

बसंत पंचमी कब मनाई जाती है?

बसंत पंचमी हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व जनवरी अथवा फरवरी महीने में पड़ता है। सामान्यतः फरवरी के प्रथम अथवा द्वितीय सप्ताह में यह पर्व पड़ता है।

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है और इसी दिन वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।

वसंत पंचमी का त्यौहार मनाने के पीछे क्या कारण है?

बसंत ऋतु में प्रकृति में जितनी अधिक सुंदरता और होती है और प्रकृति जितनी अधिक सुहानी होती है, उतनी अन्य किसी ऋतु में नहीं होती। बसंत ऋतु में चारों तरफ मदमस्त वातावरण छा जाता है, क्योंकि इसी दिन से बसंत ऋतु का आगमन होता है। इसीलिए वसंत ऋतु के आगमन के दिन को वसंत पंचमी के त्यौहार के रूप में मनाया जाने लगा। वसंत ऋतु का त्योहार हर्षोल्लास के आगमन का प्रतीक है और इस दिन का लोग ऋतुओं की रानी बसंत ऋतु के स्वागत करने लगे हेतु बसंत पंचमी का त्योहार मनाने लगे।

ऋग्वेद में यह वर्णन मिलता है कि देवी सरस्वती जिसकी जीभ पर बैठ जाती हैं, उसकी जीभ पर सरस्वती का वास माना जाता है और वह अत्यंत विद्वान व कुशाग्र विधि का व्यक्ति होता है। जो लोग विद्या को महत्व देते हैं, विद्वान बनना चाहते हैं, जो पुस्तकों को बहुत अधिक पढ़ते हैं, जिनका संबंध लेखन, पठन और साहित्य कार्य से रहता है, वह देवी सरस्वती को अपना इष्ट मानकर उनकी पूजा आराधना करते हैं।

बहुत से विद्यालय में जोकि भारतीय संस्कृति के लिए समर्पित हैं, वहाँ पर भी विद्यार्थियों को देवी सरस्वती की पूजा आराधना करने की जाती है और सरस्वती वंदना गाई जाती है।

बसंत पंचमी मनाने के पीछे पौराणिक मान्यताएं?

बसंत पंचमी का त्यौहार मनाने के पीछे अनेक पौराणिक मान्यताएं भी छुपी हैं। यह त्यौहार पूरी तरह विद्या की देवी सरस्वती के लिए समर्पित कर दिया गया है। भारत के अनेक धार्मिक ग्रंथो में विद्या की देवी सरस्वती और बसंत पंचमी के त्यौहार का वर्णन मिलता है।

यह त्यौहार देवी सरस्वती के जन्मदिन के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है विद्या की देवी सरस्वती का प्रकटीकरण बसंत पंचमी के दिन ही हुआ था। बसंत पंचमी के दिन को उनके आविर्भाव का दिन माना जाता है। उनका आभिर्भाव होने के कारण इस दिन को वागेश्वरी जयंती अथवा श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। वागेश्वरी देवी सरस्वती का ही एक नाम है।

वसंत पंचमी को मनाने के पीछे पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार जब ब्रह्मा जी ने अपनी किसी समस्या के निवारण के लिए अपने कमंडल से जल लेकर अपनी हथेली पर रखा और संकल्प लिया, फिर उसे जल को छिड़ककर उन्होंने भगवान विष्णु की आराधना करना आरंभ की तो भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सामने प्रकट हुए।

भगवान ब्रह्मा ने भगवान विष्णु को अपनी समस्या बताई। तब भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आह्वान किया उनके आह्वान पर भगवती दुर्गा तुरंत प्रकट हुई। तब दोनों देवों में देवी दुर्गा से समस्या के निवारण का निवेदन किया। उनकी समस्या को जानकर आदिशक्ति दुर्गा ने शरीर से श्वेत रंग का एक तेज उत्पन्न हुआ तो वह एक तेज दिव्य नारी के रूप में परिवर्तित हो गया।

उन दिव्य नारी का स्वरूप चतुर्भुजधारी था। उनके चारों हाथों में से एक हाथ में वीणा थी तो दूसरे हाथ में पुस्तक थी। एक हाथ में माला थी तथा चौथा हाथ से उन्होंने वर मुद्रा धारण की हुई थी। जैसे ही वह दिव्य स्वरुप वाली देवी प्रकट हुईं तो प्रकट होते ही उन्होंने अपनी वीणा से मधुर नाद किया, जिससे सृष्टि के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई। पूरे सृष्टि में वाणी की हलचल होने लगी और कोलाहल होने लगा। सृष्टि में शब्द और रस का संचार करने वाली उन देवी को सरस्वती कहा गया।

उनका प्रकटीकरण वसंत पंचमी यानी मार्ग शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही हुआ था, इसीलिए बसंत पंचमी को माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को देवी सरस्वती के अभिर्भाव दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

बसंत पंचमी का त्यौहार का महत्व

बसंत पंचमी का त्यौहार का पर्व का दिन बेहद शुभ माना गया है। यह सभी शुभ कार्यों के लिए बेहद सर्वश्रेष्ठ दिन है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। बसंत पंचमी का पूरा दिन ही शुभ मुहूर्त माना गया है। यह माघ मास में आता है और माघ मास धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व वाला मानस माना गया है। इसीलिए बसंत पंचमी का त्यौहार भी बेहद शुभ और महत्वपूर्ण त्यौहार है।

बसंत पंचमी का त्यौहार कैसे मनाते हैं?

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की आराधना की जाती है, इसलिए जो देवी सरस्वती के उपासक हैं, वह इस दिन व्रत धारण करते हैं और देवी के वीणाधारी स्वरूप की मूर्ति अथवा चित्र को अपने घर अथवा संस्थान में बने मंदिर में स्थापित करके उनकी विधि विधान से पूजा करते हैं।

इसी दिन विद्या के उपासक को पूरे दिन व्रत धारण करना चाहिए और स्वयं अथवा किसी ब्राह्मण के द्वारा स्वास्ति वचन करना चाहिए। उसके बाद विधि विधान से गंध, अक्षत, फल, फूल, धूप, दीप नैवेद्य आदि के द्वारा पूजा करनी चाहिए।

देवी सरस्वती के मंत्र की कम से कम एक माला जपनी चाहिए और देवी सरस्वती के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पूरे दिन मौन रहकर व्रत धारण करना चाहिए और संध्या के समय ही भोजन करना चाहिए। यदि व्रत नहीं धारण कर रहे हो तो भी विधि विधान से पूजा पाठ करने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

देवी सरस्वती को  सफेद पदार्थ का भोग अर्पण करना चाहिए अर्थात उन्हें चावल, दूध से बने पदार्थ का भोग लगाना चाहिए। देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा पाठ करने पर उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और वह व्यक्ति विद्या के क्षेत्र में अवश्य विद्वान बनता है।

वसंत पंचमी का ऋतु की दृष्टि से महत्व

बसंत पंचमी का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक त्यौहार है। उत्तर भारत में यह त्यौहार विशेष रूप से प्रसिद्ध है, क्योंकि यहाँ पर इस दिन बसंत की बहार चारों तरफ छाई रहती है। सरसों के पीले पीले खेत लहलहा रहे होते हैं। पीले रंग को हिंदू धर्म में शुभ रंग भी माना गया है। इस दिन सभी लोग पीले वस्त्र धारण कर नृत्य और गान करते हैं और हर्षोल्लास से त्यौहार मनाते हैं। वह अपने घर में तिल से मिठाइयां बनाते हैं। केसर युक्त खीर बनाते हैं, पीले लड्डू बनाते हैं और खाते हं।

वसंत पंचमी संबधी कुछ विशेष तथ्य

  • बसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है।
  • वसंत पंचमी के दिन ही भगवान प्रभु श्री राम माता शबरी के आश्रम में गए थे।
  • वसंत पंचमी के दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को अपने तीसरे नेत्र से भस्म किया था और उसके बाद कामदेव ने श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लिया था, इसलिए इस दिन कामदेव की भी पूजा की जाती है।
  • वसंत ऋतु के दिन ही राजा भोज का जन्मदिन भी आता है, राजा भोज प्राचीन भारत में परमार वंश के एक प्रसिद्ध राजा थे जो मध्य भारत में मालवा क्षेत्र के आसपास आसपास केंद्रित था।
  • हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्मदिन भी बसंत पंचमी के दिन ही आता है।

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श्री गुरुनानक देव जी – सिखों के प्रथम गुरु और भारत के दिव्य संत के जीवन को जानें।

सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी से कौन परिचित नही है। वह भारत के ओजस्वी आध्यात्मिक संत रहें है, जिन्होंने भारत में भक्ति की अलख जगाई और भारत में सिख धर्म की नींव भी रखी। उनके जीवन का आकलन (Guru Nanakdev ji Biography) करते हैं।

हमारे बड़े-बुजुर्ग हमारे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं होते है। हमारे बुजुर्ग हमारा साथ कभी नहीं छोड़ते है। वह हमेशा हमारे साथ होते है। हमें अपने बुजुर्गों का हमेशा सत्कार करना चाहिए। यह हमेशा हमें अपने जीवन के अनुभव के साथ सिखाते है। बुजुर्ग हमारा साथ कभी नहीं छोड़ते है। हमें अपने बुजुर्गों की बताई हुई बातों को हमेशा याद रखना चाहिए। बुजुर्गों के बिना हमारा कोई वजूद नहीं है। हमें हमेशा उनकी इज्जत करनी चाहिए।

गुरुनानक देव जी का जीवन परिचय (Guru Nanakdev ji Biography)

भारत सदैव से संत और सिद्ध महापुरुषों, ऋषि-मुनियों की धरती रही है। भारत में एक से बढ़कर सिद्ध महात्मा, महान पुरुष रहे हैं। भारत के कुछ प्रसिद्ध संतों की बात की जाए तो उन में से गुरु नानक देव जी एक है।

गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की स्थापना की थी। वह सिखों के पहले गुरु थे। गुरु नानक जी के दोहे आज तक हमें ज्ञान देते है। गुरु नानक जी ने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने अपने जीवन में मूर्ति पूजा को निरर्थक माना और रूढ़िवादी सोच का विरोध किया।

गुरु नानक जी ने समाज में एकता का प्रचार किया था। सभी को मानवता और दया का पाथ पढ़ाया था। नानक जी के दोहे आज भी हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है।

गुरु नानकदेव जी का जन्म और परिवार

गुरु नानक देव जी का जन्म पंजाब में रावी नदी के तट पर स्थित तलवंडी नामक गाँव में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हुआ था। तलवंडी नामक गाँव वर्तमान समय मे पाकिस्तान में स्थित है जिसे ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है।

कुछ विद्वान के मतानुसार उनकी जन्मतिथि 15 अप्रेल 1469 को मानते हैं, लेकिन सामान्यत उनका जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा दिवाली के ठीक 15 दिन बाद आती है।

गुरु नानक देव जी के पिता का नाम कल्याण दास बेदी उर्फ कालू चंद्र खत्री था। उन्हें सामान्यतः कालू मेहता कहा जाता था। उनकी माता का नाम तृप्ता देवी था। नानक देव जी का जन्म एक हिंदू पंजाबी खत्री कुल में हुआ। नानक देव जी के दादा का नाम शिवराम बेदी और परदादा का नाम राम नारायण बेदी था। उनके पिता हिंदू ब्राह्मण थे और एक व्यापारी भी थे। गुरु नानक देव जी एक बहन भी थी जिनका नाम नानकी था, जो उनके पाँच वर्ष बढ़ी थीं। सन् 1475 में उनका विवाह हो गया और उनके पति का नाम जयराम जो तत्कालीन दिल्ली सल्तनत के लाहौर प्रांत के गर्वनर दौलत खान के यहाँ अधिकारी थे।

जीवन यात्रा

बचपन से ही गुरु नानक देव जी बेहद प्रखर बुद्धि के धनी थे। उनके अंदर प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह बचपन से ही सांसारिक जीवन के प्रति उदासीन रहा करते थे और उनका मन ईश्वर के प्रति चिंतन में अधिक लगता था। इसी कारण वह बहुत अधिक शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए और मात्र 8 वर्ष की आयु के बाद ही उन्होंने पाठशाला त्याग दी और प्रभु के चिंतन में स्वयं को रमा लिया।

अब  वह अपना अधिकतर जीवन आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में बिताते थे। उनके द्वारा ऐसी चमत्कारिक घटनाएं भी हुईं जिससे उनके गाँव के लोग उन्हें दिव्य पुरुष मानने लगे।

मात्र 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह पंजाब के गुरदासपुर जिले के लाखौकी नामक गाँव सुलक्खिनी देवी से हुआ। उसके बाद गुरु नानक देव जी आध्यात्मिक चिंतन करते हुए गृहस्थ जीवन भी व्यतीत करने लगे। विवाह की काफी लंबे समय के बाद 32 वर्ष की आयु में उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जब उनके पहले पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ। उनके बड़े पुत्र के बाद श्रीचंद्रमुनि के नाम से जाना गया जिन्होंने उदासीन संप्रदाय की स्थापना की। पहले पुत्र के जन्म के ठीक 4 वर्ष बाद उनके दूसरे पुत्र लख्मीचंद का जन्म हुआ।

इस तरह दो पुत्रों के जन्म के बाद सन् 1507 ईस्वी में गुरु नानक देव जी ने अपना भरा-पूरा परिवार छोड़ दिया और परिवार का उत्तरदायित्व अपने ससुर को सौंपते हुए वह आध्यात्मिक चिंतन और ईश्वर की खोज में निकल पड़े।

उनके साथ उनके उनके चार शिष्य बाला, मरदाना, लहना और रामदास भी थे। अपने चारों शिष्यों के साथ वह तीर्थ यात्रा के लिए निकल पड़े। वह अनेक स्थानों पर जाते, वहाँ पर सत्संग करते, भजन कीर्तन करते, लोगों को उपदेश देते।

गुरु नानक देव जी अपने चारों शिष्यों के साथ-साथ जगह-जगह घूम कर उपदेश देने लगे। 1507 से 1521 ई के बीच 17 वर्षों में उन्होंने अपने चार यात्रा चक्र पूरे किए, जिसमें उन्होंने भारत सहित अफगानिस्तान, फारस और अरब सहित कई जगहों का भ्रमण किया। उनकी इन आध्यात्मिक यात्राओं को पंजाब सिख धर्म में उदासियां कहा जाता है।

अपनी यह यात्राएं पूरी करते-करते वह एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत बन चुके थे और उनके हजारों लाखों अनुयाई बन चुके थे वह वापस पंजाब लौटकर आ चुके थे और 55 वर्ष की आयु में मैं पंजाब के करतारपुर साहिब में स्थाई रूप से बस गए और अपनी मृत्यु पर्यंत वहीं पर रहे।

बीच-बीच में वह कई छोटी-छोटी यात्राओं पर गए थे, लेकिन उन्होंने अपना स्थाई निवास करतारपुर में ही बना दिया। करतारपुर पाकिस्तान के नारोवाल जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। ये भारत की सीमा से केवल 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच करतापुर साहिब कारीडोर बना है, जो भारत के जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों के लिए बनाया गया है।

करतारपुर में निवास करते-करते इस अवधि में पंजाब और आसपास के क्षेत्र में उनके लाखों अनुयाई बन चुके थे जो उनके द्वारा बताए गए उपदेशों पर चलते थे।

गुरु नानक देव जी ने स्पष्ट रूप से खालसा पंथ यानी सिख धर्म की नींद नहीं रही की थी, लेकिन उनके द्वारा एक नई परंपरा का प्रचलन हो गया था और इसी परंपरा के उत्तराधिकारी के तौर पर उन्होंने अपने शिष्य लहना को चुना और उनका नाम बदलकर गुरु अंगद देव रखा गया, जो सिखों के दूसरे गुरु कहलाए।

देहावसान

अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करने के कुछ समय बाद ही गुरु नानक देव जी का देहावसान 22 सितंबर 1539 को 70 वर्ष की आयु में करतारपुर साहिब में ही हो गया। करतारपुर में उनका स्मृति में एक विशाल गुरुद्वारा है।

उनके देहावसन के संबंध में एक कथा प्रचलित है कि जब उनका देहावसान हुआ तो उनके शिष्य हिंदू और मुसलमान दोनों धर्म से थे तो दोनों उनके दाह संस्कार को लेकर आपस में झगड़ने लगे। इसलिए जब उन्होंने उनके शरीर को ढकने वाली चादर को खींचा गया तो वहाँ पर गुरु नानक देव जी का शरीर नहीं मिला और वहाँ पर उन्हें फूलों का ढेर मिला।

गुरनानक देव जी के सिद्धांत

एक ओंकार : एक ओंकार का अर्थ है, ईश्वर एक है, ईश्वर का नाम एक ही है, ईश्वर हम सब के अंदर है हमें ईश्वर को बाहर नहीं खोजना चाहिए। गुरु नानक जी कहते थे कि एकता और एकपन में भूत ताक़त होती है।

सतनाम : सतनाम का अर्थ होता है, सत्य का नाम। हमेशा सत्य और ईमानदारी और दया, धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। अंत में हमारे कर्म हमारे साथ जाते है।

करता करीम : नानक जी ने हमेशा समझाते थे, ईश्वर की कृपा, दया और उनकी महर हमेशा हमारे ऊपर बनी रहती है।

नाम जपो : गुरु नानक जी ने हमेशा नाम का भजन-सिमरन करने को कहा है। नाम का सिमरन करने से आत्मा को शांति और आनंद मिलता है।

गुरुनानक देव जी की शिक्षाएं

गुरु नानक देव जी ने सदैव ईश्वर एक है, यानी एक ओंकार यानी ईश्वर एक है पर जोर दिया। गुरु नानक देव जी कहते हैं की सदैव ईश्वर की उपासना करो ईश्वर एक है और वह सर्वत्र व्याप्त है।

नानक देव जी के अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है और इस सर्वशक्तिमान ईश्वर की उपासना करने वाले को अन्य किसी का भय नहीं रहता।

नानक देव जी कहते हैं कि अपना जीवन सदैव ईमानदारी से निर्वाह करना चाहिए। ईमानदारी से परिश्रम करके अपने जीवन को सात्विक तरीके से बिताना चाहिए।

नानक देव जी के अनुसार कभी भी ना तो कोई बुरा कार्य करने के बारे में सोचें और ना ही कोई बुरा कार्य करें।

नानक देव जी कहते हैं कि कभी किसी को न सताएं। ना किसी को दिल दुखाएं। किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं।

नानक देवी जी कहते हैं कि अपनी गलतियों के लिए बिना किसी संकोच के सदैव ईश्वर से क्षमा मांग लेनी चाहिए।

नानक देव जी कहते हैं कि अपने परिश्रम से कमाए हुए धन से कुछ हिस्सा कि जरूरतमंदों और गरीबों की सहायता के लिए अवश्य देना चाहिए।

नानक देव जी के अनुसार स्त्री-पुरुष में कोई भेद नहीं होता। स्त्री और पुरुष दोनों समान हैं। नानक देव जी ने जाति प्रथा को भी पूरी तरह नकार दिया था। उनके अनुसार समाज में कोई ऊँचा-नीचा नहीं होता, सब बराबर हैं।

नानक देव जी किसी भी तरह लोभ-लालच और संग्रह करने की प्रवृत्ति से दूर रहने की शिक्षा देते हैं। उनके अनुसार केवल उतना ही रखना चाहिए जिससे वर्तमान जरूरत पूरा हो। किसी भी तरह का संग्रह करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए क्योंकि संग्रह करने की प्रवृत्ति मन में लोभ-लालच को जन्म देती है और लोभ-लालच पतन की ओर ले जाता है।

गुरु नानक देव जी से संबंधित के जीवन से संबंधित प्रमुख बातें

  • नानक देव जी का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। उनका जन्म पाकिस्तान के तलवंडी नामक गांव में हुआ जो वर्तमान समय में नानकाना साहिब के नाम से जाना जाता है।
  • नानक देव जी एक हिंदू परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता हिंदू ब्राह्मण खत्री थे, लेकिन नानक देव जी ने जीवन पर्यंत ना तो स्वयं को हिंदू-मुस्लिम से परे माना।
  • नानक देव जी के अंदर बचपन से ही प्रतिभा कूट-कूट कर भरी थी, जितनी समय वह पाठशाला में पढ़े, अपनी सहज बुद्धि से शिक्षकों के प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे देते थे और कभी-कभी अपने शिक्षकों से विचित्र सवाल भी पूछ लेते थे, जिनका जवाब उनके शिक्षकों के पास नहीं होता था।
  • नानक देव जी बचपन से ही सांसारिक विषय वासनाओं से उदासीन रहा करते थे और उनका अधिकतर समय ईश्वर के चिंतन और सत्संग में व्यतीत होता था।
  • नानक देव जी ने बचपन से ही कुछ ऐसी चमत्कारिक घटनाएं करनी शुरू कर दी थी, जिससे लोग उन्हें दैविक शक्ति से युक्त दिव्य पुरुष मान्य लगे थे।
  • नानक देव जी का विवाह 16 वर्ष की आयु में ही हो गया था और 32 वर्ष की आयु में उनके श्रीचंद नाम के पहले पुत्र तथा 36 वर्ष की आयु में लक्ष्मीदास नाम के दूसरे पुत्र हुए।
  • उनके पहले पुत्र श्रीचंद ने उदासी नामक संप्रदाय की स्थापना की थी।
  • नानक देव जी ने 1507 ई से 1521 ई के बीच 17 वर्ष तक विश्व के कई प्रमुख स्थान का भ्रमण किया, जिनमें भारत के अलावा अफगानिस्तान, ईरान, फारस (वर्तमान ईरान) अब जैसे स्थान शामिल थे। वह अरब के मक्का भी गए थे।
  • नानक देव जी ने सदैव ‘इक ओंकार’ का नारा दिया यानी ईश्वर एक है।
  • नानक देव जी ने ही सार्वजनिक रसोई की परंपरा शुरु की जो बाद में सिख धर्म में लंगर का नाम से प्रसिद्ध हुई। आज लंगर और सिख धर्म के एक-दूसरे पर्याय बन चुके हैं।
  • नानक देव जी ने अपनी मृत्यु से पहले अपने शिष्य लहना अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था जो बाद में गुरु अंगद देव कहलाए।

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टूथपेस्ट के बॉटम पर लगे हुए लाल, नीले और हरे चौकोर निशान का मतलब समझें।

टूथपेस्ट खरीदते समय टूथपेस्ट के रैपर पर बॉटम मे एक निशान बना होता है, जो लाल, नीला या हरा होता है। इन निशानों (Red Blue and Green Mark on Toothpaste Meaning) का टूथपेस्ट पर क्या अर्थ है, आइए समझते हैं…

टूथपेस्ट पर अंकित लाल नीले काले और हरे निशानों का मतलब (Red Blue and Green Mark on Toothpaste Meaning)

टूथपेस्ट का उपयोग सभी करते हैं, चाहे कोई किसी भी ब्रांड का टूथपेस्ट क्यों ना हो। हर किसी का अपना-अपना पसंदीदा ब्रांड है। टूथपेस्ट हर किसी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन बहुत से लोगों को अपने दाँतों को साफ करने के लिए मुँह की दुर्गंध को दूर करने के लिए टूथपेस्ट हर किसी के काम आता है। टूथपेस्ट हर किसी की जरूरत है, लेकिन लोगों को अपनी इस बेहद जरूरी और दैनिक उपयोग वाली वस्तु के विषय में बहुत सी जानकारियां पता नहीं होती।

आजकल टूथपेस्ट में नमक है, टूथपेस्ट में लांग हैं, टूथपेस्ट में नीम है अथवा तरह-तरह की औषधीय मिली हुई हैं, ऐसे दावे करते हुए अनेक तरह के ब्रांड बाजार में हैं। लेकिन इसी टूथपेस्ट को जब हम खरीदते हैं तो टूथपेस्ट के पीछे बॉटम के चपटे हिस्से में एक रंग-बिरंगा चेक का निशान होता है। उस मार्क का मतलब क्या है, यह कभी किसी ने गौर नहीं किया।

यह निशान लाल, नीले, हरे अथवा काले रंग का चौकोर निशान होता है। इस निशान के पीछे भी एक अर्थ होता है, यह बहुत से लोगों को पता नहीं। आईए जानते हैं टूथपेस्ट की ट्यूब के पतले हिस्से पर अंकित इस लाल, हरे, नीले अथवा काले निशान का मतलब क्या होता है। इन निशानों को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आप किस क्वालिटी का टूथपेस्ट खरीद रहे हैं।

लाल निशान

अगर आपके टूथपेस्ट पर लाल निशान दिखाई दे तो इसका मतलब यह नहीं है कि नॉनवेज टूथपेस्ट है यानि उसको बनाने में कुछ मांसाहारी तत्वों को मिलाया  गया है। हमें पता है कि खाने पीने की वस्तुओं पर लाल रंग का मार्क नॉनवेज खाद्य पदार्थ होने का संकेत देता है। लेकिन टूथपेस्ट के संदर्भ में यह अलग अर्थ रखता है।

टूथपेस्ट पर लाल निशान होने का मतलब है कि टूथपेस्ट में केमिकल का भी उपयोग किया गया है। इसमें नेचुरल पदार्थों के अलावा केमिकल पदार्थ भी डाले गए हैं। ये टूथपेस्ट मिक्स पदार्थों को मिलाकर बनाया गया है। इस तरह यह टूथपेस्ट ना तो बहुत खराब है और ना ही बहुत अच्छा है।

नीला निशान

मुझे निशान का मतलब है कि इस टूथपेस्ट में नेचुरल तत्वों के साथ-साथ कुछ मेडिसनल गुणों से युक्त तत्व भी डाले गए हैं। ये तत्व दाँतों की बीमारी से संबंधित किसी दवा से संबंधित हो सकते हैं। यह टूथपेस्ट उपयोग करने के लिए ठीक रहता है। खासकर जब दाँतो की कोई बीमारी हो।

काला निशान

इस टूथपेस्ट का मतलब है कि इस टूथपेस्ट में बहुत अधिक केमिकल का इस्तेमाल किया गया है और यह टूथपेस्ट खरीदने से बचना चाहिए। यह टूथपेस्ट सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे टूथपेस्ट दाँतों को तुरंत लाभ देने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक उपयोग करना नुकसानदायक हो सकता है।

हरा निशान

यह टूथपेस्ट सबसे अधिक उपयोगी और सेफ माना गया है। हरे रंग के निशान वाले टूथपेस्ट का मतलब है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक चीजों से बनाया गया है। यह टूथपेस्ट पूरी तरह नेचुरल है और औषधि गुनों वाली वनस्पतियों से इसे बनाया गया है। प्योह हर्बल टूथपेस्ट पर अक्सर ऐसा निशान होता है।

तो आप भविष्य में जब कभी भी टूथपेस्ट खरीदने जाए तो उसके बॉटम पर अंकित चौकोर निशान को अवश्य देख लें ताकि आपको अंदाजा हो जाए कि आप किस तरह का टूथपेस्ट खरीद रहे हैं।


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पपीता के लाजवाब फायदे और गुण – पपीता खाएं सेहत बनाएं

पपीता एक ऐसा फल है जो अपने कमाल के सेहतमंद गुणों के लिए जाना जाता है। पपीते क्या लाजवाब गुण (Know papaya benefits) हैं, ये सेहत के लिए कितना फायदेमंद है? आइए जानते हैं।

पपीता क्या है?

पपीता एक ऐसा फल है जो बहुत ही आसानी से कहीं भी मिल सकता है। यहाँ तक कि आप घर के आस-पास थोड़ी-सी जगह होने पर वहां भी लगा सकते हैं। पपीता को कच्चा या पका दोनों अवस्थाओं में खा सकते हैं। कच्चा हो या पका पपीता के औषधीय गुणों के कारण ये कई बीमारियों के लिए उपचारस्वरुप प्रयोग किया जाता है।

पपीता के गुण

आयुर्वेद में पपीता के पौष्टिक गुणों के कारण इसको दाँत और गले के दर्द के साथ-साथ दस्त, जीभ के घाव,दाद, सूजन जैसे अनेक बीमारियों के लिए औषधि के रुप प्रयुक्त किया जाता है।

पपीता का पेड़ हल्के छोटे और आसानी से उगने वाले होते हैं। पपीता के फल विभिन्न आकार के, गोलाकार अथवा बेलनाकार, कच्ची अवस्था में हरे तथा  पकने के बाद पीले रंग के हो जाते हैं। फलों के अन्दर काले धूसर रंग के गोल मरिच जैसे बीज रहते हैं। इसकी फलमज्जा पकने पर पीली तथा मीठी होती है।

इस पौधे के किसी भी भाग में हल्का खरोंच आने पर भी दूध जैसा पदार्थ निकलने लगता है, जिसको आक्षीर कहते है। पपीता कच्चा हो या पका उसमें इतने सारे मिनरल, विटामिन, प्रोटीन, एनर्जी आदि है कि वह बहुत सारे रोगों के लिए फायदेमंद साबित होता है।

पपीता प्रकृति से कड़वा, गर्म, तीखा, कफ और वात कम करने वाला और जल्दी हजम होने वाला होता है। पपीता का क्षीर या कच्चे पपीते को काटने से जो दूध निकलता है वह पाचक होता है। पपीता  का कच्चा फल  थोड़ा कड़वा तथा मधुर होता है। और पका हुआ फल मधुर, पित्त कम करने वाला, सूजन का दर्द कम करने वाला, वात को कम करने के साथ – साथ रक्त को भी शुद्ध करता है।

यह विष हरने वाला, बल बढ़ाने वाला, पसीना निकालने वाला तथा कुष्ठनाशक होता है। पपीता का वानस्पतिक नाम है कैरिका पपाया। पपीता Caricaceae (कैरीकेसी) कुल का होता है। पपीता को अंग्रेजमें Papaya (पपाया) कहते हैं।

पपीता के फायदे (Know papaya benefits)

पपीता में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, पोटाशियम, एनर्जी जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। जिसके कारण आयुर्वेद में पपीते के पत्ते, बीज, जड़ और फल सब का रोगों के उपचार के तौर पर प्रयोग किया जाता है।

मुँह के छालों को ठीक करने में फायदेमंद पपीता

कई बार किसी दवाई के एलर्जी के कारण,  किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से या शरीर में किसी विटामिन की कमी से मुंह में छाले या घाव होने लगते हैं। इस परेशानी से राहत पाने के लिए पपीते का इस्तेमाल ऐसे करने पर आराम मिलता है। पपीते के दूध या आक्षीर को जीभ पर लगाने से जीभ पर होने वाला घाव जल्दी भर जाते हैं।

दाँत दर्द में लाभकारी पपीता

अगर दाँत दर्द से परेशान हैं तो पपीते का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी आराम मिलता है। पपीते से प्राप्त दूध को रूई में लपेटकर लगाने से दाँत का दर्द कम होता है।

कंठरोग से दिलाये राहत पपीता

कई बार ठंड लगने के कारण गले में दर्द या सूजन हो जाती है लेकिन पपीता से बनाये गए घरेलू उपाय का प्रयोग करने से जल्दी आराम मिलता है। पपीता से प्राप्त आक्षीर या दूध को जल में मिलाकर गरारा करने से गले के रोगों में लाभ होता है।

कमजोरी दूर करने में मदद करता है पपीता

अगर लंबे बीमारी के कारण या पौष्टिकता की कमी के वजह से कमजोरी महसूस हो रही है तो पपीता का इस तरह से सेवन करने पर लाभ  (papaya benefits)मिलता है। पपीता के कच्चे फलों का साग बनाकर सेवन करने से अग्निमांद्य (Dyspepsia) तथा कमजोरी में लाभ होता है। कहने का मतलब यह है कि पपीता खाने के फायदे कमजोरी दूर होने में मदद मिलती है।

दस्त रोके पपीता

अगर ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड या बाहर का खाना खा लेने के कारण दस्त है कि रूकने का  नाम ही नहीं ले रहा तो पपीता का घरेलू उपाय बहुत काम आता है। पके बीजों का सेवन चावल के साथ करने से अतिसार या दस्त में फायदा पहुँचता है। इसके अलावा कच्चे फल का साग बनाकर सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है।

बवासीर में फायदेमंद पपीता

आजकल के असंतुलित खान-पान के वजह से बवासीर की समस्या बढ़ने लगी है। इसके दर्द से राहत पाने में पपीता बहुत फायदेमंद साबित होता है। पपीता के कच्चे फलों से प्राप्त आक्षीर या दूध को अर्श के मस्सों पर लगाने से बवासीर में लाभ होता है। इसका प्रयोग चिकित्सकीय परामर्शानुसार करना चाहिए।

लीवर-प्लीहा से जुड़े रोगों में लाभकारी है पपीता

अगर कोई लीवर और स्प्लीन संबंधी बीमारियों से परेशान है तो पपीता का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है। पपीता के फलों का सेवन करने से रक्तार्श, यकृत् तथा प्लीहा – विकारों का शमन होता है। लकवा के लक्षणों से दिलाये राहत पपीता लकवा होने पर जो परेशानियां होती है उससे राहत दिलाने में पपीता काम करता है। पपीता के बीजों से तेल बनाकर, छानकर मालिश करने से लकवा तथा अर्दित (मुँह का लकवा) में लाभ होता है।

त्वचा-विकार से दिलाये राहत पपीता

आजकल के तरह-तरह के नए-नए कॉज़्मेटिक प्रोडक्ट के दुनिया में त्वचा रोग होने का खतरा भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। पपीता के द्वारा बनाये गए घरेलू उपाय चर्म या त्वचा रोगों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। पौधे से निकलने वाले आक्षीर को सिध्म, गोखरू, अर्बुद, गाँठ तथा चर्म रोगों में लगाने से लाभ होता है।

दाद-खुजली से दिलाए आराम पपीता

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में दाद-खुजली रोग होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। हर कोई किसी न किसी त्वचा संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं। पपीता इन सब परेशानियों को कम करने में मदद करता है। पपीता के बीजों को पीसकर, उसमें ग्लिसरीन मिलाकर दाद पर लगाने से दाद तथा खुजली में लाभ होता है। इसके अलावा इसके फलों से प्राप्त आक्षीर को लगाने से दाद तथा खुजली की परेशानी कम होती है।

सूजन को करें कम पपीता

अगर किसी चोट के कारण या बीमारी के वजह से किसी अंग में हुए सूजन से परेशान है तो पपीता के द्वारा किया गया घरेलू इलाज बहुत ही फायदेमंद होता है।  पपीता के फल मज्जा को पीसकर लगाने से सूजन कम होती है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद पपीता

पपीता  सेवन कोलेस्ट्रॉल को कम  करने में आपकी मदद कर सकता है क्योकि रिसर्च के अनुसार पपीता में एंटीऑक्सीडेंट का गुण पाया जाता है जो की कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता है।

रोग प्रतिरक्षक क्षमता बढ़ाने में सहायक पपीता

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पपीता का सेवन आपके लिए एक अच्छा साधन हो सकता है क्योंकि रिसर्च के अनुसार पपीता में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण पाया जाता है।

आँखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक

पपीता पपीते में विटामिन ए और सी पाए जाने के कारण यह आँखों के लिए भी लाभकारी होता है।

पाचन तंत्र को सक्रिय करने में सहायक पपीता

पपीते की दीपन और पाचन गुण के कारण यह पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है साथ ही  पपीता में रेचन यानि लैक्सटिव का गुण भी पाया जाता है  जो कि कब्ज को भी दूर करने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से दिलाये राहत पपीता पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द वात दोष के अधिक बढ़ने के कारण होता है। पपीते में वात शामक गुण पाए जाने के कारण यह इसमें राहत देता है।

वजन घटाने में मददगार पपीता

पपीता अपने दीपन, पाचन और रेचन गुण के कारण वजन घटाने में मदद करता है। इससे पाचन स्वस्थ होता है एवं शरीर के सभी विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

डायबिटीज के लक्षणों से दिलाये राहत पपीता

डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में पपीता के बीज का सत्व फायदेमंद हो सकता है क्योंकि एकरिसर्च के अनुसार  इसमें एंटी डायबिटिक का गुण होता है।

तनाव को कम करने में मददगार पपीता

अगर आपको किसी प्रकार का या आप डिप्रेशन के शिकार है तो पपीता का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि एक रिसर्च केअनुसार पपीता में एंटी डिप्रेशन के गुण पाए जाते है।

गठिया के दर्द से दिलाये राहत पपीता

गठिया का रोग वात दोष के बढ़ने के कारण होता है। पपीते में पाए जाने वाले वात शामक गुण इस रोग के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है।

बिच्छू के काटने पर पपीते का प्रयोग

बिच्छू के काटने पर उसके असर को कम करने में पपीता मदद करता है। पपीते के कच्चे फल से प्राप्त आक्षीर या दूध को दंश-स्थान पर लगाने से वृश्चिक या बिच्छू दंशजन्य विषाक्त प्रभाव कम  होता है।

मासिक धर्म में कम ब्लीडिंग होने पर पपीता फायदेमंद

पपीता के उपयोगी भाग पपीते के फल, पत्ते, बीज, जड़ और आक्षीर का इस्तेमाल औषधि के लिए किया जाता है।

पपीता का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए ?

बीमारी के लिए पपीता के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए पपीता का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

पपीता से चेहरे के अनचाहे बालों से मुक्ति

पपीता में पैपैन एंजाइम होता है, जो बालों को बढ़ने से रोकता  है। इसका उपयोग करने से आपके बालों का बढ़ना कम हो जाता है, और वे जल्दी दिखाई नहीं पड़ते। पपीता संवेदनशील त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। इसके उपयोग से आप हमेशा के लिए इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

यह अनचाहे बाल हटाने का बहुत ही सटीक तरीका है। इसके लिए 1-2 टी-स्पून पपीता और 1/2 टी-स्पून हल्दी पाउडर लें। सबसे पहले पपीता को छीलकर मिक्सी में पीस लें। इस पेस्ट में हल्दी मिलाएं। पेस्ट को 15 मिनट के लिए फेस और गर्दन में अच्छे से लगायें। कुछ देर बाद पानी से धो लें। इस पेस्ट का इस्तेमाल हफ्ते में 2 बार करें।

पपीते से करें डेंगू बुखार का इलाज

पपीते के पत्ते डेंगू बुखार में बहुत लाभदायक होते हैं। अगर आपको डेंगू बुखार के लक्षण नजर आते हैं तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार इसका सेवन करें। पपीते में मौजूद पोषक तत्वों और कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण प्लेटलेट्स की संख्या में वृद्धि करता है।

पपीता कहाँ पाया और उगाया जाता है ?

पपीता का मूल रूप से दक्षिण अमेरिका से आया है। 400 वर्ष पूर्व पोर्तुगीज लोगों के द्वारा यह भारत में लाया गया। मालूम होता है पहले यह दक्षिण भारत के केरल देश में आया है। केरल निवासी इसे कप्पकाय‘ कहते हैं। इसका मूल उत्पत्ति स्थान दक्षिण अमेरिका है, किन्तु अब तो यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में न्यूनाधिक प्रमाण में घरों में और बागों में पाया जाता है। मुंबई, पूना, बंगलौर, चेन्नई और राँची के पपीते प्रसिद्ध और उत्तम माने जाते हैं।

तो आज हमने जाना कि पपीते के बहुत सारे गुण हैं, इसके फायदों की तो बात ही निराली है। यदि हम पपीते को अपने दैनिक डाइट में शामिल कर लें तो सेहत के लिए किसी वरदान से कम नही होगा।


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जगजीत सिंह : ग़ज़ल सम्राट – चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश, जहाँ तुम चले गए। (जीवन स्कैन)

जगजीत सिंह : ग़ज़ल सम्राट (Jagjit Singh)

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) जो ‘ग़ज़ल सम्राट’, ‘ग़ज़ल के बादशाह’ जैसे नामों से नवाजे जाते हैं। गज़़ल के क्षेत्र में उनका जो स्थान है, वैसा स्थान भारत में कोई नहीं बना पाया। जो ग़ज़ल विधा को एक नई ऊँचाइयाँ दी है, उनके याद करते हैं…

जगजीत सिंह जो अपनी मखमली आवाज के जादू में सबको मदमस्त करते थे, वह 10 अक्टूबर 2011 को इस दुनिया से चले गए। उनकी यादें आज भी सब गजल प्रेमियों के दिल में बसी हुई हैं।

जगजीत सिंह भारत के एक महान ग़ज़ल कार थे। उन्होंने ग़ज़ल को जिस ऊँचाई तक पहुंचाया उस कारण उन्हें ग़ज़ल सम्राट ग़ज़ल के बादशाह आदि उपाधियों से विभूषित किया जाता था। उनके जैसा ग़ज़ल कार भारत में इससे पहले कोई नहीं हुआ और आगे भविष्य में ना कोई होगा यह बात भी तय है।

ग़ज़ल को आधुनिक और लोकप्रिय रूप देने का श्रेय अगर भारत में किसी को जाता है तो वह उसका नाम जगजीत सिंह है। जगजीत सिंह से पहले ग़ज़ल केवल एक खास वर्ग तक ही सीमित थी, लेकिन जगजीत सिंह ने ग़ज़ल में अनोखे प्रयोग करके और अपनी मखमली आवाज के जादू से ग़ज़ल को हर वर्ग में खासकर युवा वर्ग में बेहद लोकप्रिय बनाया।

जन्म

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक सिख परिवार में हुआ था। जगजीत सिंह के पिता का नाम अमर सिंह धमानी था। वे राजस्थान के गंगानगर में एक सरकारी कर्मचारी थे। मूलतः वेे पंजाब के रोपड़ जिले के रहने वाले थे।

जगजीत सिंह के पिता ने सिख धर्म अपनी स्वेच्छा से स्वीकार किया था, उससे पहले वह हिंदू धर्म से संबंध रखते थे। जगजीत सिंह के बचपन का नाम ‘जीत’ था।

उनकी आरंभिक शिक्षा श्रीगंगानगर के खालसा विद्यालय में हुई थी और उसके बाद उन्होंने जालंधर की ओर रुख किया और वहाँ से डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। जगजीत सिंह के पिता भी संगीत में रुचि रखते थे। इसीलिए संगीत उन्हें विरासत में मिला था। श्रीगंगानगर में ही उन्होंने पंडित छगनलाल शर्मा से लगभग 2 साल तक शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और संगीत के क्षेत्र में अपने कदम रख दिये।

हालाँकि उनके पिता उन्हे आईएएस बनाना चाहते थे, लेकिन जगजीत सिंह के मन में तो संगीत के बीज पढ़ चुके थे और उन पर गायक बनने की धुन सवार हो गई थी। वह श्रीगंगानगर में ही कार्यक्रमों छोटा-मोटा गायन करने लगे और अपनी पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने अपनी गायन प्रतिभा को निरंतर निखारा और अनेक छोटी-मोटी प्रस्तुतियां दी।

गायन के प्रति उनकी रुचि देखकर उनके मित्रों और शुभचिंतकों की सलाह पर वह 1965 में मुंबई आ गए। मुंबई में आरंभिक दिनों में उन्होंने काफी संघर्ष किया। उन्होंने विज्ञापनों के लिए जिंगल कर उन्होंने अपने संघर्ष का समय काटा। यह उनके संघर्ष का दौर था।

धीरे-धीरे वह मुंबई में उन्हें काम मिलने लगा, लेकिन जैसा काम वे चाहते थे और जिस तरह की आशाएं पालकर में मुंबई आए थे, वैसा अभी तक कुछ हुआ नहीं था। उन्होंने कई फिल्मों में संगीत भी दिया लेकिन उस समय उनके द्वारा दी गई संगीत दी गई फिल्में खास चली गई और उनका संगीत औसत दर्जे का ही रहा। उन्हें सही सफलता फिल्म साथ-साथ में उनके द्वारा दिये गये संगीत और गानों से मिली उसके बाद प्रेमगीत फिल्म का उनका गीत ‘होठ से छू लो तुम’ गीत काफी लोकप्रिय हुआ। फिल्म ‘अर्थ’ में उनके द्वारा गायी सभी ग़ज़लें बेहद लोकप्रिय हुईं। इस फिल्म में संगीत भी उन्होने ही दिया। फिल्मों गाने या ग़ज़लों के मामले में उन्हें बहुत अधिक विशेषता नही मिली थी। कुछ फिल्में उनके द्वारा गायी ग़ज़लें/गाने बेहद लोकप्रिया हुईं।

फिल्मों में उनके द्वारा गाये कुछ गीत और ग़ज़ल बेहद लोकप्रिय हुए जोकि इस प्रकार हैं…

  • साथ-साथ ➩ तुमको देखा तो ये ख़्याल आया, जिंदगी धूप तुम घना साया
  • साथ-साथ ➩ प्यार मुझसे किया तुमने तो क्या पाओगी
  • साथ-सात ➩ ये तेरा घर ये मेरा घर
  • अर्थ ➩ झुकी-झुकी सी नज़र बेकरार है कि नही
  • अर्थ ➩ तुम जो इतना मुस्कुरा रहे हो
  • अर्थ ➩ तेरी खुश्बू में बसे खत
  • प्रेमगीत ➩ होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो
  • दुश्मन ➩ चिट्ठी ना कोई संदेश जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गये,
  • जॉगर्स पार्क ➩ बड़ी नाजुक है यह मंजिल, मोहब्बत का सफर है
  • सरफरोश ➩ होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है
  • ट्रैफिक सिग्नल ➩ हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छूटा करते
  • तुम बिन ➩ कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो
  • तरकीब ➩ किसका चेहरा अब मैं देखूं, तेरा चेहरा देखकर
  • नरगिस ➩ मैं कैसे कहूँ जानेमन, तेरा दिल सुने मेरी बात

ग़जलों का सफर

मुंबई में छोटे-मोटे कार्यक्रमों में गजलें गाने के दौरान और संगीत सीखने की प्रक्रिया के दौरान उनकी मुलाकात 1967 में चित्रा सिंह से हुई, जो खुद गायन करती थीं और शादीशुदा थीं।

2 साल तक दोनों का प्रेम प्रसंग चला। चित्रा सिंह की पहली शादी एक असफल शादी थी, इसीलिए उनका उनके पति से तलाक हो गया और 1969 में जगजीत सिंह ने चित्रा सिंह से विवाह कर लिया।

ग़ज़लों के क्षेत्र में दोनों को सबसे पहली से सफलता तब मिली जब 1975 में एचएमवी कंपनी ने जगजीत सिंह और चित्रा का पहला एल्बम ‘द अनफॉरगेटेबल’ निकाला।

उसके बाद जगजीत सिंह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दोनों ग़ज़ल युगल के अनेक एल्बम आए। दोनों पति पत्नी साथ गाते रहे और लोकप्रियता के शिखर पर चढ़ते चले गए।

1987 में जगजीत सिंह ने डिजिटल सीडी एल्बम ‘बियोंड टाइम्स’ निकाला जो किसी भारतीय संगीतकार द्वारा निकाला गया पहाल सीडी एल्बम था।

1991 में जगजीत सिंह के पुत्र विवेक सिंह की मृत्यु के बाद चित्रा सिंह ने गायन छोड़ दिया। जगजीत सिंह भी कई महीनों तक सदमे में रहे और कुछ महीनों के बाद दुख से उबलने के बाद उन्होने दोबारा गायन शुरु किया लेकिन चित्रा सिंह फिर कभी नही गा पाईं।

फिल्मों में अर्थ और साथ-साथ फिल्मों में उन्होंने लगभग सभी गाने गाए थे और सभी गाने नगर बेहद लोकप्रिय हुए थे। जगजीत सिंह की प्रमुख एल्बम के नाम इस प्रकार हैं

  • द अनफॉरगेटेबल (The Unforgettable) 1975
  • एटर्निटी (Eternity) 1978
  • ए माइलस्टोन (A Milestone) 1980
  • मैं और मेरी तन्हाई (Mai Aur Meri Tanhai) 1981
  • दे लेटेस्ट (The Latest) 1982
  • द गोल्ड डिस्क (The God Disk)1983
  • ए मेरे दिल (Ye Mere Dil)1983
  • एस्कटेसिस (Ecstasies) 1984
  • ए साउंड अफेयर (A Sound Affair) 1985
  • इकोस (Echoes) 1986
  • समवन समव्हेयर (Someone Somewhere) 1986
  • पैशन (Passion) 1987
  • बियोंड टाइम्स (Beyond Times)1987
  • द अनफॉरगेटेबल हिट्स (The Unforgettable Hits) 1987
  • मिर्जा गालिब (Mirza Ghalib)1988 (टीवी सीरियल)
  • डिज़ायर्स (Desires) 1989
  • इमोशंस (Emotions) 1989
  • महफिल (Mehfil) 1990
  • मेमोरेबल ग़ज़ल (Memorable Ghazals) 1990
  • सज़दा (Sazda) 1991
  • होप (Hope) 1991
  • कहकशां (Kahakashan)1991 (टीवी सीरियल)
  • इन सर्च (In Search)1992
  • विजन (Vision) 1992
  • अदा (Adaa)1992
  • रेअर गेम्स (Rare Games) 1992
  • योर चॉइस 1993
  • चिराग 1993
  • इनसाइट 1994
  • यूनिक 1996
  • क्राइ फॉर क्राइ 1995
  • फेस टू फेस 1996
  • मिरेज 1996
  • सिलसिले 1998
  • रिश्तो में दरार आई 1996
  • लव इस ब्लाइंड 1998
  • जाम उठा 1998
  • मरासिम 1999
  • नई दिशा 1999
  • रेअर मूमेंट्स 1999
  • रॉयल सेल्यूट 1999
  • सहर 2000
  • एक जर्नी 2000
  • क्लासिक फॉरएवर 2000
  • टुगेदर 2000
  • आइना 2000
  • डिफरेंट स्ट्रोक्स 2001
  • सॉलि़ड गोल्ड 2001
  • सोज़ 2001
  • खामोशी 2008
  • खुमार 2001
  • ख्वाहिश 2001
  • संवेदना 2002
  • फॉरएवर 2002
  • फॉरगेट मी नोट 2002
  • माय फेवरेट 2002
  • क्लोज टू माई हार्ट 2002
  • मुंतज़िर 2004
  • प्रे फॉर इंडिया 2004
  • तुम तो नहीं हो 2005
  • जीवन क्या है 2005
  • कोई बात चले 2006
  • स्टोलेन मोमेंट्स 2006
  • आवाज 2006
  • कबीर 2006
  • जज्बात 2008
  • इंतेहा 2009
  • रवायत 2009
  • दर्दे जिगर 2011
  • द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जगजीत सिंह 2011
  • शुकराना 2011
  • निवेदन 2011
  • रोमांस 2011 तेरे बयां ग़ालिब 2012
  • द वॉइस फ्रॉम बियोंड 2013

जगजीत सिंह – रोमानियत का अहसास

जगजीत सिंह ग़ज़ल की दुनिया में अनोखे ग़ज़लकार थे। उन्होंने गजलों में अनेक प्रयोग किए। उन्होंने ही गजलों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के अलावा आधुनिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया और ग़ज़लों को एक नया रूप दिया। उनके इस प्रयोग से गजल आधुनिक पीढ़ी की युवा में भी लोकप्रिय हुई नहीं तो उससे पहले गजल यह बोरिंग विधा बन चुकी थी।

जगजीत सिंह की भारी और मखमली आवाज लोगों के दिल के तारों को छेड़ दी थी थी। उनकी आवाज और उनके द्वारा गाई हुई ग़ज़लों से एक रूमानियत का एहसास होता था। हम जब भी जगजीत सिंह की गजलें सुनते तो रोमानियत की अनोखी दुनिया में पहुँच जाते थे।

जगजीत सिंह की ग़ज़लों मैं एक नई आशा, एक नई रोमानियत और आध्यात्मिकता दी। उनकी गजलों का जवाब नहीं था। व्यक्तिगत तौर पर कहूँ तो जगजीत सिंह की गजलों को सुनकर एक अलग अलग ही पवित्रता और आध्यात्मिकता का बोध होता था, वो आध्यात्मिकता थी प्रेम की आध्यमिकता।

जहाँ पर प्रेम की पवित्रता के अलावा कुछ नही होता। उनकी ग़जलों को सुनकर मन की सारी वासनायें भस्म हो जाती थीं और मन पवित्र प्रेम की आध्यात्मिकता से भर उठता था, ये व्यक्तिगत अनुभव है। आज भी उनकी ग़ज़ले जीवन की निराशा को दूर करती है।

जगजीत सिंह का जाना

जगजीत सिंह 2011 में सितंबर-अक्टूबर के महीनों के दौरान काफी से समय से ब्रेन स्ट्रोक के कारण अस्पताल में भर्ती थे। 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह को ब्रेन स्ट्रोक की तकलीफ के कारण होने के कारण वह हम सब को छोड़कर इस दुनिया से चले गए, लेकिन अपनी गजलों के रूप में वह आज भी सभी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।  उनको भावभीनी श्रद्धांजलि।


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हरित क्रांति के जनक और भारत रत्न से सम्मानित एस. स्वामीनाथन को जानिए।

एस स्वामी नाथन भारत में हरित क्रांति के जनक के तौर पर जाने जाते हैं, उन्होंने भारत को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दिया था। एस स्वामीनाथन कौन थे? (S. Swaminathan biography) उनका भारत के कृषि क्षेत्र में क्या योगदान रहा है, उनके बारे में जानते हैं…

भारत सरकार ने एस स्वामीनाथन को भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया है। भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। एस स्वामीनाथन को 9 फरवरी 2024 को भारत सरकार द्वारा की गई घोषणा के द्वारा भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा हुई है। इस तरह वह भारत रत्न सम्मान पाने वाले 53वें व्यक्ति बन गए।

एस स्वामीनाथन भारत में हरित क्रांति के जनक के तौर पर जाने जाते है। उन्हें भारत रत्न सम्मान से पहले भारत के अन्य नागरिक सम्मान पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री भी मिल चुके हैं। भारत के चारों सर्वोच्च नागरिक सम्मान वाले भारत की हरित क्रांति के जनक एस स्वामीनाथन ही थे जिन्होंने 1960 के दशक में हुई भारत की हरित क्रांति के कार्यक्रम का खाका तैयार किया था, जिस कारण भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन गया था।

एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय (S. Swaminathan biography)

एम एस स्वामीनाथन भारत के एक कृषि वैज्ञानिक थे। जिन्होंने भारत को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। हरित क्रांति से तात्पर्य उस क्रांति से है, जो 1960 के दशक में भारत में खाद्यान्न को आत्मनिर्भर बनाने के लिए की गई थी। हरित क्रांति कृषि क्षेत्र से संबंधित आंदोलन था, और इसके अन्तर्गत आधुनिक तकनीक और उपायों द्वारा कृषि की उपज बढ़ाने का प्रयास किया गया था, इसीलिए इसे ‘हरित क्रांति’ कहा जाता है। भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व एस एस स्वामीनाथन द्वारा किया गया थ।

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत उन्होंने ही की थी इसी कारण से उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता हैं। इसके अलावा भी उन्होंने कृषि के लिए काफी कार्य किए थे, उन कार्यों के कारण ही भारत कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सका।

जन्म और व्यक्तिगत जीवन और परिवार

एम एस स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। उनके पिता का नाम डॉ. एमके सांबासिवन और माता का नाम पार्वती थंगम्मल सांबासिवन था। बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था और उनका पालन-पोषण उनके चाचा ने किया था।

वर्तमान समय में उनके परिवार में उनकी पत्नी मीना स्वामीनाथन और एक पुत्र नित्य स्वामीनाथन और दो पुत्रियां सौम्या स्वामीनाथन और मधुरा स्वामीनाथन हैं।

शिक्षा-दीक्षा और करियर

स्वामीनाथन बचपन से ही प्रतिभा के धनी थे। इसलिए इसी पढ़ाई में वह काफी अच्छे थे। परंतु वह कृषि क्षेत्र से ना जुड़कर किसी अन्य क्षेत्र से जुड़ना चाहते थे लेकिन उस वक्त भारत की स्थिति कृषि के क्षेत्र में बहुत ही खराब थी जिसे देखते हुए उन्होंने कृषि की ओर अपना रुख किया जिसके लिए एग्रीकल्चर में शिक्षा ग्रहण की।

स्वामीनाथन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कुंभकोणम के कैथोलिक लिटिल फ्लावर स्कूल से की। 1940 में उन्होंने केरल के महाराज कॉलेज से जूलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की।

उसके बाद उन्होंने मद्रास के एग्रीकल्चर कॉलेज में दाखिला लिया और वहा से इन्होंने बीएससी में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया, जिसके बाद इन्हें बैचलर ऑफ़ साइंस की उपाधि मिली।

फिर 1949 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से जेनेटिक्स में एसोसिएटशिप की डिग्री प्राप्त की तथा 1952 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अनुवांशिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

कृषि में पीएचडी करने के बाद वह घोर अनुसंधान में जुट गए और भारत में कृषि की पैदावार को बढ़ाने के उपायों पर काम करने लगे क्योकि उस भारत में कृषि की दशा अच्छी नही थी। भारत अपने नगारिकों के पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न नही उत्पन्न नहीं कर पाता था और उसे बाहर के देशों से अनाज मंगाना पड़ता था।

उन्होंने 1954 से 1972 के बीच कटक के कृषि संस्थान तथा नई दिल्ली में पूसा स्थित प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में काफी शोध कार्य किया। वे 1963 में हेग में हुई अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष भी बनाए गए।

1966 में जेनेटिक्स वैज्ञानिक स्वामीनाथ ने भारत के बीजो को विदेशी बीजो की किस्म के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए। स्वामीनाथन का ये प्रयास सफल रहा और पहले ही वर्ष देशभर में काफी पैदावार हुई। 1969 में डॉ. स्वामीनाथन इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के सचिव बनाए गए साथ वे इसके फेलो मेंबर भी बने।

1972 में भारत सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिषद का महानिदेशक नियुक्त किया। साथ ही उन्हें भारत सरकार में सचिव भी नियुक्त किया। 1979 से 1980 तक वे मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर फ़ॉर्म के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी बने। उन्होंने 1982 से 88 तक जनरल डायरेक्टर के पद पर रहते हुए इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट की सेवा भी की।

इसके साथ ही उन्होंने विदेशी और भारत के बीजो की किस्मों के मिश्रण को भी जारी रखा। इस बार उन्होंने पिछली बार से भी ज्यादा उन्नत किस्म के बीज की उपज करके अन्न के उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया और देश में हरित क्रांति लेकर आए। जिससे देश में सभी जगह से अन्न की समस्या खत्म हो गई।

1988 मैं इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज के प्रेसिडेंट भी बने। 1999 में टाइम पत्रिका ने उन्हें 20वीं सदी के 200 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया।

भारत में उस समय पुराने तरीकों से कृषि की जाती थी जिससे बहुत अधिक पैदावर नही होती थी। इसी कारण भारत एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद कृषि के मामले में बेहद पिछड़ा हुआ था। इसी कारण वह कृषि के उन्नत तरीकों और उन्नत बीजों के विकास के लिए काम करते रहे। उन्होंने विदेशी बीजों को भारत की किस्म के बीजों के साथ मिश्रित करके एक उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की किस्म तैयार की।

उनके इस प्रयोग के कारण वजह से भारत में अन्न की भरपूर पैदावार होने लगी। इसी कारण 1960 के दशक में भारत में हरित क्रांति सम्पन्न हुई जिसका नेतृत्व एस. स्वामीनाथन ने ही किया था।

एस स्वानीनाथन के प्रयासों के कारण ही भारत कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन और उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

एम एस स्वामीनाथन ने वर्ष 1990 के दशक के आरंभिक वर्षों में अवलंबनीय कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए चेन्नई में एकशोध केंद्र की स्थापना की।

स्वामीनाथन की उपलब्धियां और पुरुस्कार

एस स्वामीनाथन को अपने जीवन में अनेक पुरुस्कार मिल चुके हैं, जो कि इस प्रकार हैं…

उपलब्धियां

  • एस स्वामीनाथन 2007 से 2013 तक राज्य सदन में मनोनित संसद सदस्य भी रहे।
  • एस स्वानीनाथन को 1999 में अमेरिका की टाइम पत्रिका ने उन्हें 20वी सदी के 200 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया।
  • उन्हें कृषि के क्षेत्र में बेतरीन योगदान के लिए पद्म श्री, पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण तथा भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।
  • भारत में हरित क्रांति के जनक के नाम से जाने जाते हैं।

पुरुस्कार

  • 2024 : भारत रत्न
  • 1967 : पद्म श्री
  • 1972 : पद्म भूषण
  • 1989 : पद्म विभूषण
  • 1987 : विश्व खाद्य पुरस्कार
  • 1971 : सामुदायिक नेतृत्व के लिए ‘मैग्सेसे पुरस्कार’
  • 1986 : ‘अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस पुरस्कार’
  • 1987 : पहला ‘विश्व खाद्य पुरस्कार’
  • 1991 : अमेरिका में ‘टाइलर पुरस्कार’
  • 1994 : पर्यावरण तकनीक के लिए जापान का ‘होंडा पुरस्कार’
  • 1997 : फ़्राँस का ‘ऑर्डर दु मेरिट एग्रीकोल’ (कृषि में योग्यताक्रम)
  • 1998 : मिसूरी बॉटेनिकल गार्डन (अमरीका) का ‘हेनरी शॉ पदक’
  • 1999 : ‘वॉल्वो इंटरनेशनल एंवायरमेंट पुरस्कार’
  • 1999 : ही ‘यूनेस्को गांधी स्वर्ग पदक’ से सम्मानित

अंतिम यात्रा

भारत के महान कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक एस स्वामीनाथन का निधन 28 सितंबर 2023 को 98 वर्ष की आयु में हुआ।

2024 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया है।


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आरडी (RD) और एफडी (FD) में अंतर क्या है? समझें।

आरडी और एफडी का नाम सेविंग के संदर्भ में बेहद आम है। इनमें अंतर (Difference between RD and FD) क्या है? ये जानते हैं…

आरडी और एफडी में अंतर (Difference between RD and FD)

आरडी RD और एफडी FD में अंतर : बचत के लिए निवेश करते समय हमें अक्सर आरडी (RD) और एफडी (FD) के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो जाती है, तब मन में जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि आरडी क्या है? और एफडी क्या है? किस में निवेश करना सही रहेगा, जिससे सही मायनों में बचत हो सके और अधिक फायदेमंद हो। आइए दोनों को समझते हैं और दोनों के बीच के अंतर को समझते है…

आरडी RD और एफडी FD में अंतर को समझें

आरडी RD और एफडी FD में अंतर को समझते हैं…

आरडी (RD) क्या है?

आरडी यानी रिकरिंग डिपॉजिट एक बचत निवेश योजना है। इसको हिंदी में ‘आवर्ती जमा’ भी कहते हैं। यह एक छोटी अवधि की बचत निवेश योजना है, जिसके माध्यम से शॉर्ट टर्म यानि छोटी अवधि के निवेश किया जाता है। इस बचत निवेश योजना के तहत एक किसी बैंक में एक रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खोलना होता है और हर महीने एक निश्चित एकमुश्त रकम एक निश्चित अवधि तक जमा करनी होती है।

वह समय अवधि पूरी होने के बाद ब्याज सहित जो रकम बनती है उसे आरडी खाते से निकाला जा सकता है। उदाहरण के लिए आपने एक साल के लिए आरडी (RD) खोली है। आपने ₹2000 प्रतिमाह का निवेश चुना है तो आपको अपने आरडी खाते में हर माह ₹2000 जमा कराने होंगे। इस तरह 1 साल तक आपकी कुल जमा रकम ₹24000 हो जायेगी।

इस रकम पर आपको 6% से 9% का वार्षिक ब्याज मिलेगा। ब्याज सहित आपकी जो रकम बनेगी आपक आरडी के मैच्योर होने पर निकाल सकते है। आप चाहें तो उसी आरडी को आगे बढ़ा सकते हैं। आरडी (RD) में निवेश करना उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होता है, जिन्हें शार्ट टर्म के लिए निवेश करना होता है और जिन्हें बहुत जल्दी ही पैसे की आवश्यकता पड़ सकती है।

आरडी (RD) के क्या फायदे हैं?

आरडी (RD) के मुख्य फायदा यह है कि आरडी (RD) छोटे समय का निवेश है। इसके लिए यदि साल भर बाद हमें किसी कार्य के लिए पैसे की जरूरत पड़ने वाली है, तो आरडी (RD) खोल कर बचत कर सकते हैं और आपकी जरूर का समय आने पर आरडी (RD) के मैच्योर से पैसा निकाल सकते हैं।

आरडी में जो ब्याज मिलता है, वह बचत खाते से अधिक मिलता है। इसलिए बचत खाते में पैसा जमा रखने की जगह आईडी खोलकर पैसा जमा किया जाए तो अधिक ब्याज मिलने की संभावना होती है।

आरडी छोटे निवेशकों के लिए सही बचत योजना है, जो एक साथ एक मुश्त और बड़ी रकम का निवेश नही कर सकते इसलिये वो आरडी के माध्यम से छोटा निवेश कर सकते है।

आरडी (RD) 100 से रूपये से लेकर कितनी भी पैसों से की जा सकती है। आप कम से कम से एक साल से लेकर पाँच साल तक की आरडी खोल सकते हैं। आरडी पर ब्याजदर 6% से 9% तक मिलती है जो अलग-अलग बैंकों मे अलग-अलग होती है। ये ब्याज दर समय समय पर बदलती रहती है।

एफडी (FD) क्या है?

एफडी यानी फिक्स डिपाजिट जिसे हिंदी में ‘सावधि जमा खाता’ कहते हैं। यह लंबे समय के लिए निवेश करने की एक या अधिक सुरक्षित बचत योजना है।

एफडी में निवेश करने से निवेशकों को सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि एफडी में निवेश करते समय होने पर निवेशक को कितना लाभ प्राप्त होगा इसका निवेशक पहले से अनुमान हो जाता है। इसमें पहले से तय ब्याज दर पर एफडी में निवेश किया जाता है और वह ब्याज निश्चित रहती है यानि एफडी खोलते समय जो ब्याज दर तय होती है वो पूरी अवधि के दौरान नही बदलेगी। ना ही अधिक मिलेगी नहीं कम होगी, इससे निवेशक को एक निश्चित अनुमान हो जाता है कि उसे एफडी में निवेश करने पर कितना लाभ प्राप्त होगा।

एफडी उन निवेशकों के लिए सही रहती है जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। जिनके पास अधिक धन है और वह धन की बड़ी राशि को लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। एफडी किसी भी बैंक या डाकघर में खोली जा सकती है।

एफडी में एक बार में एकमुश्त रकम जमा करनी पडती है इसमे आरडी की तरह हर महीने पैसा जमा नही करना पड़ता। एफडी को बीच में जरूरत पड़ने पर निकाला जा सकता है। लेकिन निवेशक को एफडी बीच तोड़ने का शुल्क देना पड़ता है। एफडी कम से कम 6 महीने और अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए की जा सकती है।

एफडी की ब्याज दर सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज दर से अधिक होती है जो 6 से 9% के बीच हो सकती है। समय-समय पर ब्याज दरें परिवर्तित होती रहती है। लेकिन एफडी में एक बार अगर निवेश कर दिया तो एफडी में वही ब्याज दर रहेगी जो एफडी में निवेश करते समय तय हुई थी।

एफडी (FD) के क्या फायदे हैं?

एफडी (FD) में निवेश करने का मुख्य फायदा यह है कि यह लंबे समय के निवेश के लिए एक सुरक्षित योजना है। बड़ी राशि का निवेश करने के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। एफडी (FD) पर मार्केट के उतार-चढ़ाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि एफडी में निवेश करते समय जो ब्याज दर तय हो जाती है वह ही स्थिर रहती है।

मार्केट में ब्याज दर कम ज्यादा होने पर एफडी की ब्याज दर प्रभावित नहीं होती। एफडी में निवेश करने से निवेशकों को इन्कमटैक्स में भी छूट मिल सकती है। यदि निवेशक को किसी आपात स्थिति में धन की आवश्यकता पड़तीहै तो वह अपने एफडी अकाउंट के आधार पर बैंक से लोन ले सकते हैं और फिर सही समय आने पर बैंक को उसकी वापसी कर सकते हैं।

आरडी (FD) और एफडी (FD) में क्या अंतर है?

आरडी में एक निश्चित अवधि के लिए निवेश किया जाता है और यह निवेश हर महीने पैसा जमा करने के आधार पर किया जाता है। जबकि आरडी में एक निश्चित अवधि के लिए निवेश किया जाता है, लेकिन यह निवेश एक बार में ही करना होता है। आरडी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिनकी एक निश्चित मासिक आय है और वह अपने उस मासिक आय से हर महीने निवेश करना चाहते हैं।

एफडी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिनके पास एक बड़ी धनराशि अतिरिक्त पैसे के रूप में है और वह उसे एफडी में निवेश करके अपनी धनराशि को ना केवल सुरक्षित कर सकते हैं बल्कि उस पर अच्छा ब्याज भी प्राप्त कर सकते हैं। एफडी 6 महीने से लेकर 10 साल की अवधि तक खोली जा सकती है।

एफडी भी 6 महीने से लेकर 10 साल की अवधि तक खोली जा सकती है। आरडी में निवेश करने पर इनकम टैक्स में कोई लाभ प्राप्त नहीं होता जबकि एफडी में निवेश करने पर इनकम टैक्स में छूट मिल सकती है। आरडी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ सकता है, जबकि एफडी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव नही पड़ता है, उसकी ब्याज दर स्थिर रहती है।

रिटर्न की अगर तुलना की जाए तो आरडी की तुलना में एफडी ज्यादा रिटर्न देती है, और उस पर अधिक ब्याज प्राप्त होता है।

  Post topic: Difference between RD and FD


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कब्ज में राहत दिलाते हैं, ये फल, आज ही करें अमल। रोज ये फल खाएं, कब्ज दूर भगाएं।

कब्ज में राहत पाने के लिए ये फल बेहद राहत देते हैं। इनका नियमित खाने से कब्ज उड़नछू हो जाती है। आइए इन फलों के नाम (fruits for constipation remedy) जानते हैं… 

बिगड़ते खानपान और बिगड़ती जीवनशैली के कारण आज कब्ज (Constipation) की समस्या से हर कोई परेशान है। बहुत से लोगों की कब्ज की समस्या हमेशा बनी रहती है। कभी-कभी कुछ दिन राहत मिलती है फिर वापस समस्या शुरू हो जाती है। कब्ज की समस्या में कुछ फल (constipation remedy) बेहद आराम पहुंचाते हैं, क्योंकि यह फल high-fiber वाले होते हैं। हम जानते हैं कि फाइबर कब्ज का दुश्मन है, जब हम फाइबर वाला खाना खाना खाएंगे तो कब्ज की समस्या नहीं होगी। आइए जानते हैं कौन कौन से फल कब्ज की समस्या में बेहद फायदेमंद हैं,

कब्ज में राहत दिलाते हैं, ये फल। कब्ज (fruits for constipation remedy) मिटाने को ये फल खाएं

अमरूद

अमरूद बहुत अधिक फाइबर से युक्त फल होता है, इसको नियमित रूप से खाने से कब्ज में बेहद राहत मिलती हैष अमरूद में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कब्ज में अमरूद एक रामबाण इलाज की तरह है।

नाशपाती

नाशपाती भी कब्ज से राहत पाने में बेहद उपयोगी फल है। नाशपाती में लगभग 5.5 ग्राम फाइबर पाया जाता है। मानव को रोज लगभग 25 से 30 ग्राम रोज जरुरत होती है। एक अमरूद का सेवन करने के रोज की फाइबर जरूरत का लगभग 20% प्राप्त हो जाता है। नाशपाती को छिलके के साथ खाना चाहिए। इसके में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो कब्ज में बेहद लाभदायक होता है और पेट में जमा सख्त मल को ढीला करने में सहायक होता है।

संतरा

संतरा एक ऐसा फल है जिसका नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज में बहुत राहत मिलती है। एक संतरे में लगभग 4 से 5 ग्राम फाइबर पाया जाता है जो रोज की फाइबर जरूरत का लगभग 20% है।

कीवी

कीवी का फल कब्ज में बेहद लाभदायक होता है। यह भी फाइबर रिच फल होता है। कीवी को नियमित रूप से खाने कब्ज में राहत मिलती है इसमें लगभग 2 ग्राम पाया जाता है। इसके छिलके में और अधिक फाइबर पाया जाता है, इसलिए इसको छिलके के  साथ खाना चाहिए।

जामुन

जामुन भी हाई फाइबर से युक्त एक फल है। इसका नियमित सेवन करने से पुरानी से पुरानी कब्ज में  राहत मिलती है।

सेब

कब्ज से राहत पाने में सेब  बेहद उपयोगी फल है, इसका नियमित सेवन करने से भी कब्ज में बहुत राहत मिलती है। सेब का नियमित सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। सेब के अंदर सर्बिटोल नामक  तत्व पाया जाता है, जो कब्ज के कराण पेट में जमा हो गए मल को नरम करता है, जिससे पेट से मल साफ हो जाता है और कब्ज में राहत मिलती है। सेब को हमेशा खाली पेट और छिलके के साथ ही खाना चाहिए। खाना खाने के तुरंत बाद सेब को नही खाना चाहिए।  सेब का प्योह जूस भी कब्ज में लाभकारी होता है।

पपीता

कब्ज में राहत पाने के लिए पपीता एक बेहद उपयोगी पल है। पपीते में विटामिन ए, पोटेशियम और कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है। यह high-fiber से युक्त फल है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है आंतों की सफाई होती है, मल बाहर निकल जाता है। पपीता केवल कब्ज में ही नही बल्कि पेट की कई बीमारियों में राहत दिलाता है। तो ये कुछ फल हैं जो Constipation remedy में उपयोगी है, इनको नियमित खाने से फल में बेहद राहत मिलती है।

Constipation remedy

Disclaimer
ये सारे उपाय इंटरनेट पर उपलब्ध तथा विभिन्न पुस्तकों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कोई भी उपाय करते समय अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। इन्हें आम घरेलू उपायों की तरह ही लें। इन्हें किसी गंभीर रोग के उपचार की सटीक औषधि न समझें।


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इन लक्षणों से पता चलता है कि किडनी खराब होने वाली है या खराब हो चुकी है। इस तरह करें बचाव।

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शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग किडनी के खराब होने की स्थिति में बेहद मुश्किल हो जाती है। किडनी खराब होने वाली है या खराब हो चुकी है, इसका कैसे पता चले और किडनी डैमेज को कैसे कंट्रोल  (Kidney damage symptoms and control) करें, आइए जानते हैंं…

किडनी डैमेज होने के लक्षण और डैमेज कंट्रोल के उपाय (Kidney damage symptoms and control)

किडनी मानव शरीर का एक महत्वूपर्ण अंग है। शरीर में दो किडनियां पाई जाती हैं। इन्हें हिंदी मे यकृत कहा जाता है। सामान्य बोलचाल की भाषा में किडनी को गुर्दा भी कहा जाता है।

मानव शरीरा में दो किडनियां पाई जाती हैं। यदि मानव शरीर की एक किडनी खराब हो जाए तो भी पीड़ित व्यक्ति केवल एक किडनी के सहारे जीवित रह सकता है।

किडनी शरीर में खून की गंदगी को साफ करने का काम करती है। लेकिन यही किडनी अगर खराब हो जाए तो शरीर में अनेक तरह की समस्याएं हो जाते है। एक बार किडनी अगर पूरी तरह डैमेज हो जाए तो उसे फिर से ठीक कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। फिर रोगी को जीवन भर दवाइयों या डायलिसिस के सहारे जीवन बिताना पड़ता है या फिर किडनी ट्रांसप्लान्ट जैसे मंहगे आपरेशन की तरफ जाना पड़ता है।

लेकिन यदि व्यक्ति समय रहते संभल जाए और किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षणों के दिखने पर सेहत के प्रति सचेत हो जाए तो फिर किडनी को डैमेज होने से बचाया जा सकता है।

किडनी खराब होने के लिए हमारी जीवन शैली और गलत खान-पान की आदते मुख्य जिम्मेदार होती है। किडनी डैमेज एक साइलेंट किलर की तरह होता है। यानि व्यक्ति अगर ज्यादा ध्यान न दे तो उसे तुरंत पता ही नही चल पाता कि उसकी किडनी खराब हो चुकी है।

व्यक्ति की किडनी खराब हो चुकी है या खराब होने की ओर बढ़ रही है, इसका पता व्यक्ति को बहुत देर बाद चलता है इस कारण व्यक्ति फिर किडनी डैमेज के रोग की चपेट मे आ जाता है।

अगर व्यक्ति के किडनी खराब होने की ओर बढ़ रही है तो शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, अगर व्यक्ति इन लक्षणों को पहचान करके तुरंत सचेत हो जाए तो वह अपनी किडनी को खराब होने के बचा सकता है।

किडनी डैमेज होने के लक्षण

किडनी का मानव शरीर मे मुख्य कार्य शरीर के खून में मौजूद गंदगी को हटाना और यूरिन के रास्ते बाहर निकालना होती है। किडनीज की खराबी के कारण ये गंदगी ब्लड में टॉक्सिंस के रूप में बढ़ रहती हैं। यदि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हैं तो इससे शरीर पर खराब सेहत का असर दिखने लगता है।

किडनीज के खराब होने के शुरूआती सिम्टम्स में से बहुत कम लक्षण पकड़ में आते हैं। इसलिए, किडनीज के खराब होने की पहचान करना काफी मुश्किल हो सकता है। किडनीज के खराब हो जाने पर 70 से 80 प्रतिशत किडनीज डैमेज हो चुकी होती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर किडनी फेलियर को साइलेंट किलर भी कहते हैं।

किडनीज के खराब होने के लक्षण

पेशाब में रंग बदलाव और पेशाब का बार-बार आना :

अगर बारृबार पेशाब जाना पड़ रहा है। पेशाब करने की फ्रीक्वेंसी बहुत अधिक हो गई है। रात में बार-बार उठकर पेशाब करने को जाना पड़ रहा है। पेशाब में झाग या गंदी स्मेल आ रही है, तो ये किडनी के खराब होने के लक्षण है। ध्यान रखे ये जो लक्षण बताए गए हैं, ये लक्षण अगर लंबे समय तक रहते हैं तो फिर चिंता होने की बात है। केवल दो-चार यदि ये समस्या हो जाए फिर सब सामान्य हो जाए तो किडनी की समस्या हो, ये जरूरी नही।

पेशाब करते हुए जलन या रुक-रुक के पेशाब आना

यदि पेशाब करते समय जलन होती है और रुक-रुक कर पेशाब आती है तो इन लक्षणों का मतलब है कि किडनी में इंफेक्शन हो सकता है और वह खराब होने की ओर बढ़ रही है।

पैरों मे सूजन होना या आँखों के नीचे सूजन होना

पैरों में स्वेलिंग यानि सूजन होना, आँखों के नीचे सूजन के लक्षण भी किडनी की सेहत के खराब होने के संकेत हो सकते हैंं।

पीठ मे दर्द होना

बिना किसी कारण के बार-बार या लगातार होने वाला बैक पेन यानि पीठ दर्द भी किडनी के खराब होने का संकेत हो  सकता है।

हाथ-पैरों में बार-बार खुजली होना।

यदि शरीर पर दिन भर खुजली होती रहती है या स्किन पर पैचेज बनते हैं, तो इससे पता चलता है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हैं।

हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का होना

किडनी के खराब होने का मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज हो सकते हैं। यदि व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से या डायबिटीज से पीड़ित है, तो किडनी खराब होने की संभावना बेहद बढ़ सकती है।

किडनी के सेहत को ठीक करने के उपाय

यदि ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई देने लगें तो किडनी की सेहत पर कोई दुष्प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में अगर किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते है, जिनकी सहायता से किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है। ये उपाय आजमाएं…

भरपूर पानी पिएं

पानी पीने के महत्व को सभी जानते हैं। हमेशा अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है। पानी शरीर के लिए वरदान के समान है। जब किडनी संबंधी समस्या हो तो अच्छी मात्रा में पानी पीना और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए भरपूर मात्रा में पानी पिएं। दिन में 10 से 12 गिलास पानी अवश्य पिएं। इससे किडनी को अपने कार्य को करने में आसानी होगी और उसकी सेहत सुधरने लगेगी।

गर्म पानी पिएं

गर्म पानी पीने से भी किडनी की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए यथासंभव गर्म पानी पिएं। सुबह उठते समय दिन की शुरुआत गर्म पानी पीकर ही करें। इससे भी किडनी की सेहत पर अच्छा असर पड़ेगा।

पेन किलर खाने से बचें

विज्ञान द्वारा भी सिद्ध हो चुका है कि बार-बार पेन किलर लेने से किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए बिना डॉक्टर की सलाह के थोड़ी सी समस्या होने पर पेन किलर्स खाने से बचें। अधिक मात्रा में पेन किलर किडनी को डैमेज करने  सकता है।

नमकीन और ज्यादा नमक वाली चीजों को खाने से बचें

अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ जिनमें नमक की मात्रा अधिक हो, तेल मसाले की मात्रा अधिक हो, ऐसी चीज खाने से बचें यह चीज भी किडनी की सेहत को खराब करती हैं। अत्यधिक नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या उत्पन्न होती है, जो किडनी को भी प्रभावित करता है।

योग को अपनाएँ

योग शरीर की सेहत के लिए एक सर्वोत्तम उपाय है। योग में कपालभाति प्राणायाम के द्वारा किडनी को काफी हद तक राहत पहुंचाई जा सकती है। उचित योग प्रशिक्षक की देख-देख में पहले कपालभाति प्राणायाम सीखे और उसका निरंतर अभ्यास करें।

कपालभाति प्राणायाम का निरंतर अभ्यास करने से खराब होती किडनी पर सकारात्मक असर पड़ेगा और धीरे-धीरे किडनी ठीक होना शुरू होगी।

अंत में…

मानव के शरीर में दो किडनियां पाईं जाती है। किडनी शरीर की एक नेचुरल डिटॉक्स सिस्टम होती हैं और इसका बेहद महत्वपूर्ण है। किडनी की सेहत को सुधारने के लिए शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने से बेहद मदद मिलती है।

 

Disclaimer
ये सारे उपाय इंटरनेट पर उपलब्ध तथा विभिन्न पुस्तकों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कोई भी उपाय करते समय अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। इन्हें आम घरेलू उपायों की तरह ही लें। इन्हें किसी गंभीर रोग के उपचार की सटीक औषधि न समझें।

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टीडीएस और टीसीएस में अंतर क्या है?

टैक्स फाइलिंग करते समय टीडीएस और टीसीएस जैसे टर्म अक्सर सुनने में आते हैं। इन दोनों क्या अंतर (Difference between TDS and TCS) क्या है, समझते हैं…

टैक्स फाइलिंग करते समय टीडीएस और टीसीएस जैसे टर्म अक्सर सुनने में आते हैं। जो लोग किसी अच्छी कंपनी में अच्छी सैलरी पर है, उन्हें टीडीएस सुनने को मिलता है। जो किसी कोई व्यापार कर रहे हैं, किसी उत्पाद या सेवा को बेच रहे हैं उनका वास्ता टीसीएस से पड़ता रहता है।

अक्सर लोग टीडीएस और टीसीएस के अंतर को नहीं समझ पाते और इस कारण अक्सर भ्रम की स्थिति में आ जाते हैं। टीडीएस और टीसीएस दोनों सरकार द्वारा टैक्स वसूल करने के दो अलग-अलग तरीके हैं। आइए दोनों के बीच अंतर को समझते हैं

टीडीएस और टीसीएस में अंतर (Difference between TDS and TCS)

सबसे पहले टीडीएस को समझते है कि वो क्या है?

टीडीएस (TDS)

टीडीएस यानि Tax Deducted at the Source (TDS) TDS एक ऐसा प्रत्यक्ष कर है जो किसी भी तरह के लाभ पर सरकार द्वारा भुगतान से पहले ही काट लिया जाता है, यानी लाभार्थी को जो भुगतान प्राप्त हो रहा है, उसका टीडीएस उसे कटकर मिलेगा।

उदाहरण के लिए यदि किसी को ₹10000 किसी लाभ के रूप में प्राप्त हो रहे हैं और 10% टीडीएस का प्रावधान है तो उसे 10% टीडीएस कट कर ₹9000 ही प्राप्त होंगे।

टीडीएस काटने वाले को डिडक्टर (Deducter) तथा जिसका टीडीएस काटा जाता है, उसे डिडक्टी (Deductee) कहा जाता है। यानि डिडक्टर 10% टीडीएस काटकर डिडक्टी को देगा। टीडीएस काटने वाले की ये जिम्मेदारी होती है, कि वो काटा गया टैक्स सरकार में जमाकरे।

दूसरा उदाहरण देते हैं जैसे किसी व्यक्ति को ₹100000 की लॉटरी लगी है या उसने ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरह के अन्य गेम आदि में कोई पुरस्कार जीता है और उसे ₹100000 की धनराशि प्राप्त हुई है तो उसे ₹100000 नहीं प्राप्त होंगे बल्कि उस पर 30% टीडीएस कट कर उसे मात्र ₹70000 ही प्राप्त होंगे।

टीडीएस कटने के नियम अलग-अलग स्रोतों के लिए अलग-अलग हैं। टीडीएस नौकरी करने वाले व्यक्तियों, डिवेंचर या म्यूचुअल से मिलने वाले ब्याज के लाभ पर, 5 साल से और 50 हजार से अधिक एफडी कराने पर, डिविडेंड या लाभांश के रूप में आमदनी होने पर, लॉटरी, क्रॉसवर्ड, ऑनलाइन गेम अथवा किसी भी तरह के आधिकारिक गैम्बलिंग गेम आदि पर होने वाली आमदनी पर काटा जाता है।

कहने का तात्पर्य यह है जिस किसी व्यक्ति को किसी लाभ के भुगतान के रूप में जो आमदनी प्राप्त होती है, उस पर उसका टीडीएस पहले से ही काट कर भुगतान प्राप्त होता है। TDS काटने के अलग-अलग मानदंड हैं।

सैलरी और पेंशन पर (सेक्शन 192 के अनुसार) : ताजा वित्तीय वर्ष के अलग-अलग टैक्स स्लैब के अनुसार 5 साल से और 50 हजार से ज्यादा एफडी करने पर – 10% शेयर, डिवेंचर या म्यूचुअल फंड, डिविडेंट आदि से मिलने वाले ब्याज लाभांश पर – 10% शेयर पर मिलने वाले जमा पर ब्याज मिलने वाले ब्याज पर – 10% लॉटरी या गेम या आधिकारिक गैम्बलिंग गेम जीतने पर- 30% इसके अलावा भी अलग-अलग आमदनी स्रोतों पर अलग-अलग TDS प्रतिशत है।

टीडीएस के लाभ

टीडीएस आमदनी के आरंभ में ही काटने से सरकार को पहले से ही टेक्स्ट प्राप्त हो जाता है, जो कि उसे ताजा वित्तीय वर्ष में प्राप्त हो जाता है। इससे टैक्स चोरी की संभावना कम होती है। टीडीएस पहले से ही कटने के कारण बाद में टैक्स फाइलिंग करते समय टैक्सपेयर को कोई राशि नहीं जमा करानी पड़ती है क्योंकि उसकी आमदनी पर पहले ही टैक्स कट चुका है।

टीसीएस (TCS) क्या होता है?

टीसीएस यानि Tax Collected at the Source (TCS) सरकार द्वारा टैक्स वसूलने का एक दूसरा तरीका है, जोकि व्यापार में किसी वस्तु के सौदे पर लगता है।

यह टैक्स किसी भी तरह के वस्तु के सौदे पर. वस्तु बेचने वाला वस्तु बेचते समय भुगतान लेते समय खरीदार से लेता है और वस्तु की मूल राशि में टीसीएस जोड़कर भुगतान लेता है। वस्तु का जो मूल्य होता है उसमें पीसीएस अलग से जोड़कर भुगतान लिया जाता है। वस्तु बेचने वाले की जिम्मेदारी होती है कि वह टीसीएस को खरीदार से वसूले और उसे सरकार के पास जमा कराएं।

उदाहरण के लिए कोई वित्तीय संस्थान किसी व्यक्ति को हजार रुपए की कोई वस्तु बेच रहा है, तो उस पर यदि मानदंडों के अनुसार 5% टीसीएस है तो वस्तु बेचने वाला खरीदार से रुपए की ₹1000 जगह ₹1050 का भुगतान प्राप्त करेगा। यानि वह 5% जोड़कर ₹1050 देने के लिए खरीदार को कहेगा।

हर वस्तु पर टीसीएस नहीं लिया जाता बल्कि यह केवल सरकार द्वारा निर्धारित व्यापारिक उद्देश्य की कुछ विशेष वस्तुओं की बिक्री पर ही काटे जाने का प्रावधान है। यह टीसीएस व्यक्ति के लिए किसी वस्तु के सौदे होने पर नहीं काटा जाता। टीसीएस अधिकतर शराब, इमारती लकड़ी, आदि वस्तुओं की बिक्री पर ही काटा जाता है।

टीसीएस शराब उत्पाद तेंदूपत्ता कबाड़ फर्नीचर इमारती लकड़ी आदि की बिक्री पर ही काटा जाता है। यह आयात माल पर टीसीएस नहीं लगाया जाता।


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टीजर (Teaser) और ट्रेलर (Trailer) में क्या अंतर है? जानें और समझें।

ज्ञानवापी मंदिर की पूरी कहानी और इसके इतिहास को जानें।

ज्ञानवापी मंदिर का विवाद काफी समय से चल रहा है। इसका क्या इतिहास है, क्यों ये विवाद उत्पन्न हुआ? सारी कहानी (Gyanvapi Mandir full History) को समझते हैं…

ज्ञानवापी मंदिर विवाद का पूरा इतिहास (Gyanvapi Mandir full History)

अयोध्या के राम मंदिर बनने के बाद आप ज्ञानवापी मंदिर का मामला जोर-जोर से उठने लगा है। अभी हाल-फिलहाल में ही अदालत ने ज्ञानवापी मंदिर परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा करने की इजाजत दी है। इसके साथ ही अब हिंदू पक्ष और हिंदू धर्म के अनुयायियों की तरफ से यह मांग उठने लगी है कि उन्हें शीघ्र ही इस ज्ञानवापी मंदिर का परिसर पूरी तरह सौंप दिया जाए और यहाँ पर भगवान शिव के मंदिर को पुनर्स्थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाए।

हालांकि इस प्रक्रिया में समय लगेगा और ये कानूनी लड़ाी है। पुरातत्व पुरातत्व विभाग द्वारा ज्ञानवापी मंदिर परिसर का जो सर्वेक्षण किया गया था। उसमें जो साक्ष्य प्राप्त हुए। वह भी यहां पर ज्ञानवापी मंदिर परिसर में जिस जगह पर मस्जिद बनी हुई है, वहां पर मंदिर होने का को प्रमाणित करते हैं और यह सिद्ध होता है कि वहाँ पर पहले एक मंदिर ता जिसे तोड़कर ही वहां पर मस्जिद बनाई गई।

ज्ञानवापी मंदिर विवाद क्या है, इसका आरंभ कैसे हुआ? वहाँ पर शिव मंदिर को कब तोड़ा गया। वहाँ कब मंदिर बनाया गया था, किसने उसे मंदिर को तोड़ा? यह विवाद कब से चला आ रहा है आगे इसमें क्या प्रगति होने की संभावना है। सारी बातों को समझते हैं

ज्ञानवापी मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ का शिव मंदिर होना के अनेक ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं। उससे पहले हम पौराणिक धर्म ग्रंथो के साक्ष को भी जानेंगे। जहाँ पर काशी में ज्ञानवापी मंदिर होने का वर्णन मिलता है।

काशी भगवान भोलेनाथ की नगरी मानी गई है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह विश्वास है कि काशी नगरी भगवान भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी हुई है। यह संसार की सबसे प्राचीन नगर है यह भी एक स्थापित मान्यता है।

काशी विश्व में भगवान भोलेनाथ का मंदिर हो, इस बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। भगवान भोलेनाथ को समर्पित इस पवित्र नगरी में भगवान शिव का मंदिर होना स्वाभाविक है। हिंदू प्राचीन धर्म के अनेक धर्म ग्रंथो में काशी नगरी और वहां पर मंदिर होने के विषय में अनेक वर्णन मिलता है।

स्कंद पुराण की रचना 5वीं से 7वीं शताब्दी के बीच मानी जाती है। स्कंद पुराण में यह वर्णन मिलता है कि काशी में ज्ञानवापी परिसर था और वहाँ पर एक भगवान शिव का भव्य विशाल मंदिर था। स्कंद पुराण के काशी खंड के 36वें, 37वें, 38वें और 39वें श्लोक काशी के ज्ञानवापी मंदिर और उसके परिसर का वर्णन मिलता है। स्कंद पुराण के 70वें श्लोक में भी ज्ञानवापी मंदिर के बारे में वर्णन मिलता है।

वर्तमान समय में ज्ञानवापी परिसर में जहां पर मस्जिद बनी हुई है, वहाँ पर औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई थी, यह बात सभी जानते हैं। औरंगजेब में 17वीं शताब्दी में ये मंदिर तोड़ा था।

मंदिर होने के ऐतिहासिक साक्ष्य

काशी के ज्ञानवापी परिसर मे जहाँ पर आज ज्ञानवापी मस्जिद है, वहाँ पर पहले कभी भगवान शिव का एक भव्य मंदिर था, इसके प्रमाण भी एक ब्रिटिश इतिहासकार की पुस्तक से मिलते हैं। एक ब्रिटिश यात्री की द्वारा लिखी गई पुस्तक से मिलते हैं। पीटर मंडी नामक ये यात्री ने अपनी पुस्तक ‘द ट्रैवलर आफ पीटर मंडी इन यूरोप एंड एशिया 1608-1667’ में काशी का वर्णन करते हुए लिखा है कि किताब में उन्होंने ज्ञानवापी परिसर में एक के भव्य शिव मंदिर होने की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया है कि काशी में उसे समय क्षत्रिय, ब्राह्मण और बनिया वर्ण के लोग रहते थे, जो एक सफेद गोल पत्थर की पूजा करते हैं। वह उसे पर जल चढ़ाते हैं और उसकी नियमित पूजा करते हैं। वह काशी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित एक मंदिर में गए वहां पर उन्होंने देखा कि एक चबूतरे पर बड़ा लंबा गोल सफेद रंग का पत्थर है, जिस पर लोग पास की गंगा नदी से लाया हुआ जल चढ़ा रहे हैं और दूध चढ़ा रहे हैं तथा फूल आदि चढ़कर पूजा कर रहे हैं। इस पत्थर को ये लोग महादेव बोलते हैं। उनका ये वर्णन भी काशी के ज्ञानवापी मंदिर परिसर में शिव मंदिर होने का साक्ष्य मिलता है।

काशी में जिस जगह पर भगवान शिव का मंदिर था वहाँ पर सबसे पहली बार मंदिर 11वीं शताब्दी राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। ऐसा इतिहासकार बताते हैं। ये वो विक्रमादित्य नही हैं, जो उज्जैन के राजा थे और गुप्त वंश के प्रमुख शासक थे। ये राजा विक्रमादित्य दूसरे हैं।

मंदिर कब तोड़ा गया?

काशी में भगवान शिव का मंदिर 11वीं शताब्दी में बना, यह बात हमको पता चल गई, लेकिन इस पर सबसे पहला हमला 12वीं शताब्दी में हुआ, जब मोहम्मद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हराया और जयचंद को हराने के बाद मोहम्मद गौरी के सैनिकों ने काशी की और कूच किया। वहाँ पर उनके रास्ते में जितने भी मंदिर पड़े, उन्होंने उनको तहस-नहस करना आरंभ कर दिया। काशी विश्वनाथ के मंदिर को भी उन्होंने भारी भरकम क्षति पहुंचाई। यह काशी विश्वनाथ मंदिर पर पहला हमला था। इसका वर्णन फारसी भाषा के एक कई इतिहासकार हसन निजामी ने अपनी पुस्तक ताज उल मासिर से में किया है।

उसके कई वर्षों बाद काशी बड़े-बड़े व्यापारियों ने मंदिर का पुनर्निर्माण किया और मंदिर फिर से बनकर खड़ा हो गया। मोहम्मद गौरी के बाद फिर कई मुस्लिम आक्रांता आए और उन्होंने फिर से मंदिरों को तोड़ने का प्रयास किया। काशी विश्वनाथ का मंदिर भी इसका शिकार बना। 14 वीं 15 शताब्दी में भी मंदिर को फिर से तोड़ा गया। 14 शताब्दी मंदिर को मुस्लिम शासकों द्वारा फिर से दुबारा तोड़ा गया। ये दूसरा मौका था, जब काशी विश्वनाथ का मंदिर तोड़ा गया। उसके बाद वहाँ 100 वर्षों तक कोई मंदिर नही बन पाया।

15वीं शताब्दी के बाद भारत में मुगलों का आगमन हुआ। अकबर के शासनकाल में अकबर के नवरत्नों में से एक रन राजा टोडरमल ने अपने पुत्र को आदेश देकर वाराणसी के मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। लेकिन जब शाहजहां का शासन काल आया तो शाहजहां ने काशी विश्वनाथ के मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन भारी विरोध के कारण वह मंदिर को तोड़ नहीं सका।

शाहजहाँ के बाद उसका पुत्र औरंगजेब का शासन काल आया जो सभी मुगलों में सबसे क्रूर था। जिसने अपने शासनकाल में हजारों मंदिरों को तोड़ा और काशी विश्वनाथ का मंदिर भी उसके इसी विध्वंस का कारण बना। औरंगजेब ने ही वहाँ पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया। उसने जानबूझकर अपने प्रभुत्व को दिखाने के लिए मंदिर के एक तरफ की दीवार को बने रहने दिया ताकि वह हिंदु धर्म के अनुयायियों के बार-बार याद दिलाता रहे।। वह दीवार आज भी मौजूद है, जो कि वहां पर मंदिर होने का पुख्ता सबूत देती है।

उसने मंदिर की दिशा में नंदी बैल की मूर्ति को भी नष्ट नहीं किया गया। आमतौर पर किसी भी शिव मंदिर में नंदी बैल की मूर्ति शिवलिंग की और मुख किए हुए स्थापित की जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर की विवादित जगह पर जहां पर वर्तमान समय में नंदी बैल की मूर्ति है, वह उसे जगह की ओर देख रही है, जहाँ पर मस्जिद बनी हुई है। इससे स्पष्ट होता है मस्जिद की जगह पर कभी वहाँ पर शिव मंदिर था।

औरंगजेब ने काशी में भगवान शिव के मंदिर को जब तोड़ा था तो उसने एक शाही फरमान जारी किया था। वह फरमान आज भी मौजूद है और कोलकाता की एशियाटिक लाइब्रेरी में संरक्षित रखा हुआ है, इससे पुष्टि होती है कि काशी विश्वनाथ में उस जगह पर कभी भगवान शिव का मंदिर था, जिसे तोड़कर औरंगजेब ने वहाँ पर मस्जिद बनवा दी।

औरंगजेब के समय के ही एक तत्कालीन मुस्लिम इतिहासकार साकिब मुस्तइक खान ने अपनी पुस्तक मसीदे आलमगिरि में मंदिर के गिराने का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है, जो वहां पर मंदिर के होने की पुष्टि करता है।

उसके अलावा इतिहासकार एलजी शर्मा ने भी अपनी किताब मध्यकालीन भारत में लिखते हैं कि 1669 ईस्वी में औरंगजेब ने अपने सभी सूबेदारों को आदेश दिया था कि जो भी हिंदू मंदिर और हिंदू पाठशाला हैं, उन सबको नष्ट कर दिया जाए।

उसके बाद जब औरंगजेब ने जगह पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना दी तो फिर वहाँ पर कोई मंदिर नहीं बचा था। लेकिन यह कम 100 साल तक जारी रहा और 100 साल बाद इंदौर की रानी महारानी अहिल्याबाई होलकर ने उस मस्जिद के आसपास की जमीन को खरीद लिया और मस्जिद के पास ही भगवान भोलेनाथ का मंदिर बनाया जोकि वर्तमान समय में मौजूद है, लेकिन यह मंदिर उस जगह पर मौजूद नहीं है जहाँ पर कभी बाबा भोलेनाथ का मंदिर हुआ करता था। उस जगह पर औरंगजेब द्वारा बनवाई गई मस्जिद मौजूद है, जिसके कारण ही सारा विवाद उत्पन्न हो रहा है।

इसी परिसर में विश्वनाथ मंदिर बनवाया, जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया और नेपाल के महाराजा ने वहाँ पर नंदी की प्रतिमा स्थापित करवाई। नंदी की प्रतिमा का मुख उल्टा होने का रहस्य यही है कि पहले जहाँ मंदिर था, वहाँ मस्जिद बना ली गई।

इसी मंदिर को की जगह को दुबारा पाने के लिए हिंदु धर्म के लोग संघर्ष करते रहे। 1810 को बनारस में अंग्रेज अधिकारी वाटसन ने वाइस प्रेसिडेंट इन काउंसिल को खत लिखकर ज्ञानवापी परिषद हिंदुओं को हमेशा के लिए सौंपने के लिए कहा था, लेकिन यह भी कभी संभव नही हो सका।

एक अंग्रेज लेखक ने अपनी पुस्तक बनारस इलस्ट्रेटेड में विस्तान  में लिखा है कि मस्जिद की जगह पर शिव मंदिर था। उसके लिए उसने वैज्ञानिक तकनीक की सहायता से अध्ययन करके ये निष्कर्ष निकाला। उन्होंने अपनी किताब में वहां पर कई हिंदू कलाकृतियां होने की भी बात की। उन्होंने आज से 200 साल पहले यह कह दिया था कि मंदिर को एक नहीं कई बार तोड़ा गया और यह सब उन्होंने बाकायदा साइंटिफिक सर्वे करके साबित किया।

80 के दशक में मामले ने फिर से जोर पकड़ना शुरु किया।

उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था और भारत के लोग भारत के स्वतंत्रता के आंदोलन में सक्रिय हो गए थे इस कारण मंदिर का मामला ठंडा पड़ा रहा।

1984 में विश्व हिंदू परिषद इस मुद्दे को फिर से उठाया जब वह हिंदुओं के लिए विशेष महत्व रखने वाले तीन मंदिरों का जब जिक्र किया, तब पहली बार ज्ञानवापी मस्जिद का भी मामला फिर उछला। ये तीन मंदिरों में अयोध्या, मथुरा और काशी के मंदिर थे।

उस समय अयोध्या के राम मंदिर पर अधिक फोकस किया जा रहा था। 1991 में वाराणसी कोर्ट में पहली बार पिटीशन लगाई गई और पिटीशन लगाकर ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी।

1991 के बाद से काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रगति रिपोर्ट

  • काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मामले सबसे पहली बार 1991 में वाराणसी कोर्ट में पहला मुकदमा दायर किया गया था। इस याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी गई थी। प्राचीन मूर्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की ओर से सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय बतौर वादी इस याचिका में शामिल थे।
  • इस याचिका के कुछ महीने बाद सितंबर 1991 में तत्कालीन नरसिम्हाराव की कांग्रेस सरकार ने पूजा स्थल कानून बना दिया।
  • इस पूजा स्थल कानून 1991 के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता था। इसका उल्लंघन करने पर तीन साल की सजा का प्रावधान थी।
  • अयोध्या का मामला उस वक्त अदालत में में था इसलिए अयोध्या के मामले को इस कानून से अलग रखा गया था।
  • ज्ञानवापी मंदिर के मामले में इसी कानून का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई।
  • इसी कानून को आधार बनाकर मस्जिद कमेटी ने याचिका को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
  • तब 1993 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगाकर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया।
  • उसके बाद 25 साल तक इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश करती जा रही।
  • 2018 में मामले ने फिर बल पकड़ना शुरु किया जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि किसी भी मामले में स्टे ऑर्डर की वैधता केवल छह महीने के लिए ही होगी। उसके बाद ऑर्डर प्रभावी नहीं रहेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद 2019 में वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवारी मामले की सुनवाई शुरू हुई।
  • 2021 में इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी। ये निर्णय इस मामले में हिंदु पक्ष की एक बड़ी सफलता माना गया।
  • उसके बाद कोर्ट के इस आदेश के बाद में एक कमीशन नियुक्त किया गया और इस कमीशन को 6 और 7 मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए। 10 मई तक अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी थी।
  • उसके बाद मंदिर का सर्वे पुरातात्विक सर्वे होना शुरु हो गया। 6 मई को केवल एक दिन का ही सर्वे हो पाया था कि मुस्लिम पक्ष इसके विरोध को लेकर कोर्ट पहुँच गया।
  • 12 मई को मुस्लिम पक्ष द्वारा की गई कमिश्नर को बदलने की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया और ये आदेश भी पारित किया कि 17 मई तक सर्वे का काम पूरा कर लिया जाए और रिपोर्ट बनाकर अदालत में पेश की जाए।
  • कोर्ट ने कहा सर्वे का काम बिना किसी रोक-टोक तुरंत ही पूरा करने का आदेश दिया।
  • 14 मई से ही ज्ञानवापी के सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। सभी बंद कमरों से लेकर कुएं तक की का पूरा सर्वे हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई।
  • 16 मई तक सर्वे हो चुका था। हिंदू पक्ष ने इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया।लेकिन  21 जुलाई 2023 को जिला अदालत ने हिंदू पक्ष की मांग को मंजूरी देते हुए ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दे दिया।
  • उसके बाद ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वे शुरु हो गया। लगभग 100 दिनों तक ये सर्वे चला।
  • जो सर्वे हुआ था उसकी रिपोर्ट पुरातात्विक विभाग द्वारा अदालत में जमा की जा चुकी थी लेकिन उस रिपोर्ट के सार्वजनिक नही किया गया था।
  • 24 जनवरी 2024 को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने ने वादी पक्ष को सर्वें रिपोर्ट दिए जाने का आदेश दिया।
  • 25 जनवरी 2024 को रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई।
  • पुरातात्विक विभाग की जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक ज्ञानवापी में जो सर्वे हुआ उसमे ये पाया गया कि मस्जिद के अंदर ऐसे अनेक प्रमाण मिले हैं जो वहाँ पर पहले किसी मंदिर के होने के पुष्टि करते हैं।

पुरातात्विक विभाग के रिपोर्ट के अनुसार

  • 100 दिनों तक चले इस सर्वे में कल 321 ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो उसे जगह पर किसी हिंदू मंदिर के होने की पुष्टि करते हैं।
  • सर्वे में शिव, विष्णु, कृष्ण, हनुमान आदि की मूर्तियां मिली हैं।
  • मंदिर के ऐसे कई संरचनायें मिली, जिन्हें प्लास्टर और चूने के द्वारा छुपाया गया। उस प्लास्टर और चूने को हटाने पर पाया गया कि ये मंदिर का स्ट्रक्चर है।
  • मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव के नाम लिखे हुए पाए गए हैं।
  • मंदिर की जो पश्चिमी दीवार है वह स्पष्ट रूप से किसी हिंदू मंदिर की दीवार नजर आ रही है, क्योंकि उसकी संरचना पूरी तरह किसी हिंदू मंदिर के दीवार की संरचना की तरह ही पाई गई है। उस पर स्वास्तिक और त्रिशूल के निशान भी पाए गए हैं, जो वहाँ पर मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।
  • इस सर्वे में 32 ऐसे शिलालेख और पत्थर आदि भी पाए गए जिन पर यह लिखी भाषा से स्पष्ट होता है कि वहां पर कोई हिंदू मंदिर था। यह पत्थर और शिलालेख वहाँ पर किसी हिंदू मंदिर के होने की पुष्टि करते हैं। इन पर देवनागरी लिपि के अलावा कन्नड़ और तेलुगु जैसी भाषाओं में लिखे हुए शिलालेख भी पाए गए हैं। इन शिलालेखों में कई शिलालेखों पर भगवान शिव के नाम भी लिखे हुए पाए गए हैं।
  • मंदिर में एक खंडित शिवलिंग भी पाया गया है। उसके अलावा नंदी बैल की खंडित मूर्ति भी पाई गई है। एक गदा का ऊपरी भाग भी प्राप्त हुआ है। गदा एक ऐसा अस्त्र है, जो हिंदू राजाओं द्वारा ही प्रयोग किया जाता था।
  • ऐसी कई आकृतियां पाई गईं है, जो किसी हिंदू मंदिर या हिंदू राजा द्वारा की बनवाई गई थीं।
  • मंदिर के सर्वे के दौरान यह भी पाया गया कि मंदिर में पाई जाने वाली कई आकृतियों और संरचनाओं तथा मूर्ति आदि को मिटाने और नष्ट करने का भी प्रयास किया गया है ताकि इन साक्ष्यों को मिटाया जा सके।
  • दीवारों पर जो हिंदू देवी देवताओं के नाम अंकित थे, उन्हें खुरचकर मिटाने का प्रयास किया है।

अब इस मामले में आगे क्या होता है और अदालत का क्या रूख रहता है ये देखना होगा।


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सर्वाइकल कैंसर क्या है? ये महिलाओं के लिए क्यों खतरनाक है? इससे कैसे बचें?

सर्वाइकल कैंसर क्या (What is cervical caner) है, जो महिलाओं के लिए जानलेवा साबित होता है। इससे कैसे बचें? आइए जानते हैं…

सर्वाइकल कैंसर: एक संपूर्ण जानकारी (What is Cervical Cancer)

मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से निधन की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया है। केवल 32 साल की अल्पायु में ही सर्वारइकल कैंसर ने पूनम पांडे की जान ले ली। ऐसे में सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानने के जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि क्या ये इतना खतरनाक है, कि इससे जान का खतरा बन जाता है।

सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर रोग है जो महिलाओं के गर्भाशय के ग्रीवा क्षेत्र में उत्पन्न होता है। इसका कारण वहाँ पर इंफेक्शन हो सकता है, जो लंबे समय तक धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और समय के साथ कैंसर बन जाता है। इस पोस्ट में हम इस जानलेवा बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) क्या है?

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के ग्रीवा क्षेत्र में विकसित होने वाला कैंसर है। यह अक्सर एक प्रकार के वायरस, जिसे ह्यूमन पैपिल्लोमावायरस (HPV) कहा जाता है, के कारण होता है। इसका वायरस एक साथी से दूसरे साथी में सेक्सुअल संबंधों के माध्यम से फैलता है।

सर्वाइकल कैंसर तब शुरू होता है, जब गर्भाशय ग्रीवा में स्वस्थ कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, जिससे एक संरचना बन जाती है, जिसे ट्यूमर कहा जाता है। गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय का निचला हिस्सा है जो योनि से जुड़ता है। गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर आमतौर पर समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है, क्योंकि गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर पूर्व परिवर्तन होते हैं। यदि उपचार न किया जाए, तो ये असामान्य कोशिकाएं कैंसर बन सकती हैं और आस-पास के ऊतकों पर आक्रमण कर सकती हैं या शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं।

सर्वाइकल कैंसर क्यों होता है?

सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है, HPV इंफेक्शन, जो कई प्रकार का हो सकता है। इस इंफेक्शन के कुछ प्रकार अपने आप समाप्त हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामूली होते हैं और समय के साथ कैंसर में बदल जाते है।

सर्वाइकल कैंसर के कितने प्रकार हैं?

सर्वाइकल कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, जो उनकी प्रकृति पर निर्भर करता है। सामान्यत: गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के दो मुख्य प्रकार हैं:

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, जो गर्भाशय ग्रीवा के बाहरी भाग की पतली, सपाट कोशिकाओं में शुरू होता है,

और

एडेनोकार्सिनोमा, जो आंतरिक गर्भाशय ग्रीवा की ग्रंथि कोशिकाओं में विकसित होता है।

सर्वाइकल कैंसर का प्राथमिक कारण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के खिलाफ नियमित जांच और टीकाकरण के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर को अत्यधिक रोका जा सकता है।

सर्वाइकल कैंसर के सामान्य लक्षणों में योनि से असामान्य रक्तस्राव, पेल्विक दर्द, सेक्स के दौरान दर्द और योनि स्राव शामिल हैं। हालाँकि, कई महिलाओं में शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते हैं। इसीलिए पैप परीक्षण और एचपीवी परीक्षणों के साथ नियमित सर्वाइकल कैंसर की जांच इसका पता लगाने और उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके क्या लक्षण हैं?

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण अक्सर अस्वस्थता या इंफेक्शन के सामान्य लक्षणों के साथ मिलते हैं, लेकिन कभी-कभी वे अद्वितीय हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं बार-बार पेशाब का इरादा, खूनी पेशाब, और तेजी से वजन घटाना।

इससे क्या नुकसान होते हैं?

सर्वाइकल कैंसर गंभीर हो सकता है और अगर समय पर नहीं रोका जाता है, तो यह जानलेवा हो सकता है। ये पीड़ित स्त्री के स्वास्थ्य को बेहद बुरी तरह प्रभावित करता है।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे किया जा सकता है?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए नियमित गाइनेकोलॉजिकल चेकअप अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। HPV वैक्सीनेशन भी एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय है जो इस बीमारी से बचाव कर सकता है।

उपचार के विकल्प कैंसर के चरण पर निर्भर करते हैं, लेकिन इसमें सर्जरी, विकिरण, कीमोथेरेपी या संयोजन शामिल हो सकते हैं। मुख्य शल्य प्रक्रिया हिस्टेरेक्टॉमी, गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटाना है।

कई महिलाएं सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद पूरी तरह से ठीक हो जाती हैं, खासकर जब शुरुआती चरण में इसका पता चल जाता है। दर्द, थकान और अन्य दुष्प्रभावों को देखने के लिए देखभाल उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उचित जांच और सही देखभाल से, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों और मौतों को रोका जा सकता है। एचपीवी टीकाकरण और सुरक्षित यौन व्यवहार भी इसके जोखिम को कम करते हैं। लेकिन अगर सर्वाइकल कैंसर होता है, तो बीमारी और आपके उपचार विकल्पों को समझने से इसके निदान और उपचार से निपटने में मदद मिल सकती है।

सर्वाइकल कैंसर का उपचार क्या है?

इस बीमारी का सही समय पर पता लगाना महत्वपूर्ण है, और यह विभिन्न तरीकों पता लगाया जा सकता है, जैसे कि शल्यचिकित्सा, रेडिओथेरेपी, और कीमोथेरेपी।

यदि असामान्य ग्रीवा कोशिकाएं पाई जाती हैं, तो कोल्पोस्कोपी और बायोप्सी जैसे आगे के परीक्षण यह निर्धारित कर सकते हैं कि कैंसर मौजूद है या नहीं। परिणामों के आधार पर, ट्यूमर के आकार और यह फैल गया है या नहीं, इसका आकलन करने के लिए सर्वाइकल कैंसर का चरण I से IV तक किया जाता है। गर्भाशय ग्रीवा तक सीमित प्रारंभिक चरण के कैंसर का पूर्वानुमान सबसे अच्छा होता है।

Disclaimer
इस आर्टिकल में आपको जो भी जानकारी दी गई है वह मेडिकल बैकग्राउंड वाली कुछ वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई। किसी जानकारी में कोई त्रुटि होना मानवीय भूल हो सकती है। इस आर्टिकल में उपलब्ध जानकारी को केवल बेसिक नॉलेज के रूप में समझे। यहाँ किसी चिकित्सीय एक्सपर्ट की कोई राय नही है।

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अयोध्या के श्रीराम मंदिर कैसे जाएं? जानें पूरी गाइड।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्री राम के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है। अब हर कोई श्री राम के दर्शन करना चाहता है। श्री राम मंदिर (Shri Ram Mandir) में कैसे जाएं, बिल्कुल आसान तरीके से समझें.. 

श्रीराम मंदिर अयोध्या – एक पूर्ण गाइड (Shri Ram Mandir)

अयोध्या, उत्तर प्रदेश में स्थित एक पवित्र नगरी है जो हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ पर श्री राम जी की जन्मभूमि स्थित है जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आकर उनके दर्शन करते हैं। इस पोस्ट हम आपको अयोध्या के राम मंदिर के बारे में विस्तार से बताएंगे।

श्री राम जन्म स्थान

राम मंदिर अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में स्थित है। यहां पर श्री राम जन्मभूमि है और यह भगवान श्री राम के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

हिंदू धर्म में प्रभु श्री राम का बहुत महत्व है। प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक आस्था के अनुसार अयोध्या में ही प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। अयोध्या एक प्राचीन धार्मिक नगरी है। यह 5000 वर्षों से हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र नगरी रही है।

उस जगह पर जहां पर श्री राम का जन्म हुआ था। वहाँ पर अयोध्या में भव्य विशाल मंदिर बनकर तैयार हुआ है। उसके बाद से 2024 में वहाँ पर भव्य विशाल श्रीराम मंदिर बनकर तैयार हो गया है। जहाँ पर 22 जनवरी 2024 को प्रभु श्री राम के बाल रूप की प्राण प्रतिष्ठा हुई।

उसके बाद से पूरा भारत देश राममय हो गया है। हर कोई अयोध्या जाना चाहता है और प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन करना चाहता है।

अयोध्या कहाँ पर है?

अयोध्या भारत के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश में स्थित एक छोटा सा नगर है। जो श्री राम जन्मभूमि होने के कारण एक बेहद पवित्र तीर्थ क्षेत्र बन गया है। अयोध्या दिल्ली से अयोध्या की दिल्ली से दूरी लगभग 700 किलोमीटर है।

दिल्ली से तथा भारत के कई प्रमुख शहरों से अयोध्या के लिए ट्रेन सेवा उपलब्ध है। यदि आपको अयोध्या जाना है तो आप दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन से जा सकते हैं। नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन अयोध्या जाने के लिए कई ट्रेन उपलब्ध है। अभी हाल में ही दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनस रेल्वे स्टेशन से अयोध्या के लिए वंदे भारत ट्रेन शुरु की गई है। जो आपको दिल्ली से अयोध्या साढ़े आठ घंटे में पहुँचा देगी। ये ट्रेन सुबह 6 बजे चलती है।

इसके अलावा अयोध्या के लिए अब विमान सेवा भी शुरू हो गई है, क्योंकि अयोध्या में भव्य एयरपोर्ट बनकर तैयार हो गया है। भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से विशेषकर दिल्ली-मुंबई से अयोध्या के लिए सीधी विमान सेवा है।

अयोध्या जाने के लिए यदि आप ट्रेन से आगे जा रहे हैं तो आपको अयोध्याधाम जंक्शन रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा जो कि नया-नया बना है और यह स्टेशन इतना अधिक विकसित किया गया है कि यह किसी एयरपोर्ट से जैसा लुक देता है।

अयोध्या कब जाएं?

वैसे तो ये आस्था का विषय है। जब आपकी आस्था है आप जा सकते हैं, क्योंकि प्रभु के दर्शन करने के लिए सुविधाएं नही देखी जातीं। फिर भी अगर आप मौसम देखकर जाना चाहे तो श्री राम मंदिर में श्री राम के दर्शन करने के लिए सबसे उचित समय अक्टूबर से मार्च महीने के बीच का है, क्योंकि इस समय बहुत अधिक गर्मी नहीं पड़ती है।

अप्रैल के बाद जून महीने तक यहां पर भीषण गर्मी पड़ती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च का महीना का समय सबसे उपयुक्त समय है।

अयोध्या पहुँच कर कहाँ ठहरें

श्रीराम का मंदिर अयोध्याधाम रेल्वे स्टेशन से मात्र 1-2 किलोमीटर की दूरी पर ही है। आप चाहें तो यहाँ पर पैदल या ई रिक्शा के माध्यम से पहुंच सकते हैं।  अगर आप प्लाइट से जा रहे है तो भी अयोध्या एअरपोर्ट उतरकर आप आसानी से श्रीराम मंदिर पहुँच सकते हैं।

 श्री राम मंदिर के आसपास एक से दो किलोमीटर के एरिया में आपको 500 से लेकर 2000 प्रतिदिन के अनेक होटल और धर्मशालाएं मिल जाएंगी। सीजन के अनुसार रेट में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

अयोध्या स्टेशन से आपको ई रिक्शा अथवा टैक्सी के रूप में कई तरह के साधन मिल जाएंगे, जिनके द्वारा आप श्री राम मंदिर पहुंच सकते हैं। एयरपोर्ट से भी आपको ई रिक्शा टैक्सी के रूप में सार्वजनिक साधन मिल जाएंगे।

हनुमानगढ़ी मंदिर

अयोध्या में श्री राम का दर्शन करने से पहले मान्यता है कि हनुमानगढ़ी मंदिर जाना बेहद आवश्यक होता है। हनुमानगढ़ी मंदिर हनुमान जी का मंदिर है, जो अयोध्या के हनुमानगढ़ी नामक स्थान पर है। आप यदि अयोध्या सुबह पहुंच जाते हैं तो आप किसी होटल आदि में ठहरकर फ्रेश होकर सबसे पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करें। फिर श्रीराम में श्रीराम के दर्शन करें।

हनुमानगढ़ी मंदिर श्री राम मंदिर के बाद अयोध्या का दूसरा सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर भक्तों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन के बाद से श्री राम मंदिर की दूरी केवल आधा किलोमीटर है इसीलिए आप हनुमानगढ़ी मंदिर में श्री हनुमान के दर्शन करने के बाद श्री राम मंदिर के दर्शन के लिए निकल सकते हैं।

श्री राम मंदिर

राम मंदिर अयोध्या में दर्शन करने के लिए आपको एक विशेष प्रक्रिया का पालन करना होगा। आपको मंदिर के प्रांगण में अपने मोबाइल और कैमरा जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजें नहीं ले जाने दिया जाता है। आप यहां पर लॉकर पर अपनी चीजें सुरक्षित रख सकते हैं। दर्शन करने के लिए आपको मंदिर के द्वार पर ही निशुल्क लॉकर की सुविधा मिलेगी। आप अपने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को इस लॉकर में रख सकते हैं।

दर्शन का समय

राम मंदिर अयोध्या में दर्शन का समय निम्नलिखित है:

  • सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक
  • दोपहर 2:00 बजे से शाम को 7:00 बजे तक
  • रात 10:00 बजे तक (केवल श्रीराम जन्मभूमि के लिए)

आरती का समय

राम मंदिर अयोध्या में दो बार आरती होती है। पहली आरती सुबह 6:30 बजे होती है और दूसरी आरती शाम को 7:30 बजे होती है। आप ऑनलाइन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की वेबसाइट पर जाकर अपने दर्शन का समय रजिस्टर कर सकते हैं।

धार्मिक स्थानों के आसपास होटल

अयोध्या जी में आपको राम मंदिर के आसपास एक से दो किलोमीटर की दूरी पर होटल्स और धर्मशालाओं की विविधता मिलेगी। आप अपनी प्राथमिकता के अनुसार होटल का चयन कर सकते हैं।

प्रमुख दर्शन स्थल

राम मंदिर के अलावा, अयोध्या में कई प्रमुख दर्शन स्थल हैं। हनुमानगढ़ी मंदिर, दशरथ महल, कनक भवन आदि इनमें से कुछ हैं। आप अपनी यात्रा के दौरान इन स्थलों का भी दर्शन कर सकते हैं।

अयोध्या एक तीर्थ नगरी है लेकिन यह एक बहुत बड़ा शहर नहीं है यदि आप चाहे तो एक दिन में ही श्री राम मंदिर के दर्शन तथा अन्य मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए आप एकदम सुबह अयोध्या नगरी पहुंचकर किसी होटल में या धर्मशाला में ठहरें और नहा धोकर तैयार होकर सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में श्री हनुमान जी के दर्शन करें। उसके बाद श्री राम मंदिर के दर्शन करने के लिए जाएं। उसके बाद आप अयोध्या के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। इस तरह आप एक दिन में ही सभी मंदिरों के दर्शन करके शाम को वापस अपने शहर भी लौट सकते हैं

लेकिन हम आपके सुझाव देंगे कि आप कम से कम दो दिन अयोध्या के लिए निकालकर जाएं, क्योंकि अयोध्या में सरयू नदी के तट पर जो आरती की जाती है, वह बड़ा ही दिव्य वातावरण उत्पन्न करती है। उस आरती में शामिल होकर आरती के दिव्या भाव को अनुभव करें और अगले दिन सुबह आप अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान कर सकते हैं।

कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं?

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी के अलावा कनक भवन, दशरथ महल, गुप्तार घाट, सूरजकुंड, आदि जगह प्रसिद्ध हैं। सरयू नदी के तट पर राम कै पैड़ी पर घाटों पर सुबह के समय और शाम के समय होने वाली आरती भी दर्शनीय होती है।

यदि आप दो दिन का समय निकालकर अयोध्या जा रहे हैं तो आप सुबह और शाम की आरती में भी शामिल हो सकते हैं। राम की पैड़ी वह स्थान है, जहाँ पर सरयू नदी के तट पर घाट बने हैं। यहीं पर आरती होती है और उसके बाद शाम के समय लेजर शो भी होता है, जो देखने लायक होता है।

दशरथ महल वह जगह है, जहाँ पर श्री राम के पिता महाराज दशरथ रहा करते थे। कनक भवन वह जगह है, जहां पर श्री राम माता सीता के साथ रहा करते थे। गुप्तार घाट और सूरजकुंड इन जगहों से थोड़ी दूर पर स्थित हैं, लेकिन वहाँ पर भी घूम जा सकता है।

अयोध्या में जाने का खर्चा कितना होगा?

यदि दो लोगों का परिवार या दो जन अयोध्या जा रहे हैं तो आप चाहे तो अयोध्या में 2 से 3000 रुपये में अपना काम निकाल सकते है। इसमें  होटल आदि में ठहरकर और भोजन आदि करके एक दिन में दर्शन करना शामिल है।

भोजन का खर्च एक व्यक्ति पर 500 से ₹700 हो सकता है और होटल में ठहरने का कर्ज ₹2000 हो सकता है। धर्मशाला मे इससे कम में काम हो जाएगा। यदि आप दो दिन का प्रोग्राम बनाकर जा रहे हैं तो दो व्यक्तिों के लिए 2 से 3000 रुपये में अयोध्या नगरी में दर्शन कर सकते हैं।

यदि आप किसी होटल में नहीं ठहरता चाहते तो अयोध्या छोटा सा नगर है और यहां पर सभी दर्शनीय स्थान के दर्शन एक दिन में ही किया जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में आप मात्र ₹500 में भी अपने कार्यक्रम को निपटा सकते हैं, क्योंकि एकदम सुबह आकर सभी मंदिरों के दर्शन कर लें और शाम तक आप वापस निकाल सकते हैं।

अयोध्या छोटा शहर होने के कारण आपको 10 या ₹20 में ई-रिक्शा कहीं पर भी आज आने-जाने के लिए मिल जाएंगे इसलिए यहाँ पर ट्रांसपोर्ट पर बहुत अधिक खर्च नहीं होने वाला।

अंत में…

अयोध्या में राम मंदिर का दर्शन करना एक अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव है। इस स्थान पर आकर श्री राम जी के दर्शन करने का आनंद लें और अपने जीवन को धार्मिकता से प्रेरित करें। यहां पर ध्यान देने योग्य वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता आपको शांति और सुकून का अनुभव कराएगी।


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ये 6 बातें अपनाकर बढ़ती हुई तोंद घटाएं, अपने को बिल्कुल फिट पाएं।

आजकल की अनियमित जीवनशैली के कारण लोग बढ़ती हुई तोंद से परेशान रहते हैं। यहाँ कुछ ऐसे तरीके हैं, जिन्हे अपनाकर आप अपनी बढ़ती हुई तोंद (Belly Fat) को घटाकर उससे छुटकारा पा सकते हैं। 

तोंद से छुटकारा: छह बातें जो पेट की चर्बी कम करने में मदद करती हैं। (Belly fat)

लोग कहते हैं कि सब कुछ ठीक है, लेकिन यह जो तोंद है यह जो पेट पर चर्बी बन गई है, यह कम नहीं होती। इस बात में कोई संदेह नही कि बढ़ती हुई तोंद यानि बैली फैट आजकल हर व्यक्ति की समस्या बन गई है विशेषकर बढ़ती उम्र के साथ तोंद का बढ़ना बेहद आम हो गया है।

एक पुरुष की कमर का साइज 40 से अधिक होना और स्त्री की कमर का साइज 35 से अधिक होना शरीर पर बढ़ रही चर्बी का निशान है और सेहत पर खतरे का सूचक है।

यहाँ आपको कुछ ऐसे उपाय बताएं जा रहे हैं कि आप अपनी बढ़ती तोंद को बढ़ने से रोक सकते हैं और अगर आपकी तोंद बढ़ गई है तो इन उपायों को आजमाकर आप अपने पेट की चर्बी को घटाकर तोंद को कम कर सकते हैं और फिट रह सकते हैं।

नियमित रूप से भरपूर पानी पिएं

नियमित रूप से पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा होता है। सुबह उठकर सबसे पहले गुनगुना पानी एक बोतल या दो गिलास दो से तीन गिलास गुनगुना पानी पीने से न केवल पेट साफ होता है, बल्कि यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को गलाने का भी कार्य करता है। इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गुनगुना सादा पानी पिएं।

गरम पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है। मेटाबोलिज्म बढ़ाने से शरीर में जो भी फैट जमा होता है, वह पिघलने लगता है और धीरे-धीरे वह फैट कम होने लगता है।

गर्म पानी पीने से पाचन शक्ति भी बेहद दुरुस्त रहती है। इसीलिए सुबह उठते ही सबसे पहले हलका गुनगुना पानी पिएं। कम से कम दो गिलास और ज्यादा हो सके तो 3 या 4 गिलास तक पानी पी सकते हैं। यह आप अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित कर सकते हैं।

हमेशा पेट भर पानी पीने के बाद ही शौच के लिए जाएं। जिससे सुबह-सुबह ही आपका अच्छे से पेट साफ हो जाएगा। पेट अच्छे से साफ होगा तो अंदर जो कई दिनों का पुराना मल पड़ा हुआ है, वो बाहर आएगा। इससे पेट कम होगा।

प्रोटीन का अधिक से अधिक सेवन करें

प्रोटीन शरीर के लिए बेहद आवश्यक है जोकि शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में सहायक होता है। अभी तक अनेक साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार प्रोटीन एक ऐसा माइक्रो न्यूट्रिएंट है जो बहुत धीरे-धीरे पचता है। धीरे-धीरे पचने के कारण आपको पेट भरा हुआ होने का एहसास होता है। इसलिए आपको बार-बार खाने की इच्छा नहीं होती।

इसलिए प्रोटीन वाले पदार्थ खाने से पेट की चर्बी और बढ़ी हुई चर्बी को घटाने में मदद मिलती है। प्रोटीन वाले पदार्थ प्रोटीन का डाइट बढ़ाने के लिए प्रोटीन पाउडर का उपयोग करने की कोई जरूरत नहीं। यह बिल्कुल भी ठीक नहीं बल्कि हर तरह की दाल, ओट्स, सोयाबीन, राजमा, डेयरी पदार्थ जैसे पनीर, दूध, दही, घी आदि में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन होता है।

हमेशा शाकाहारी पदार्थ से बने प्रोटीन का ही इस्तेमाल करें। शाकाहारी पदार्थ में पाए जाने वाला प्रोटीन को शेयर जल्दी ऑब्जर्व कर लेता है और यह सेहत के लिए ज्यादा अच्छा होता है। अपने दिन की तीनों डाइट यानी ब्रेकफास्ट लंच और डिनर दोनों में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन डाइट को शामिल करें

शुगर का प्रयोग करना बिल्कुल बंद करें

सफेद चीनी स्वास्थ्य के लिए धीमे जहर के समान है। इसीलिए संभव हो सके तो सफेद चीनी का प्रयोग करना बिल्कुल भी बंद कर दें। मीठा के विकल्प के तौर पर गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सफेद प्रोसैस्ड चीनी का प्रयोग बंद करना आपकी तोंद को घटाने में मदद करेगा।

किसी भी तरह की मिठाई से भी परहेज करें। हलवाइयों के यहां जो भी मिठाई बनाई जाती हैं, वह उसमें बड़ी मात्रा में सफेद शक्कर डाली जाती है। यह सारी मिठाइयां सेहत के लिए ठीक नहीं होती। जलेबी, पेस्ट्री, बिस्किट, गुलाब जामुन, रसगुल्ला आदि सारी मिठाइयां खाना बिल्कुल बंद करें।

तले पदार्थों से परहेज करें

किसी भी तरह के तले हुए पदार्थों से जैसे समोस, कचौड़ी, पकौड़े, पूरी, छोले भठूरे से बिल्कुल परहेज करे। ये तले पदार्थ खाना या बिल्कुल बंद करें या बहुत इच्छा होने पर कभी-कभार खाना ही चुनें।

एक ही तेल में बार-बार खाने को न पकाएं। रिसर्च के मुताबिक तेल का बार-बार इस्तेमाल करने से त्रांस फैट बनने लगते हैं। ट्रांस फैट आर्टिरीज को ब्लॉक करने लगता है। इसलिए कई तले खाने जैसे टिक्की, समोसा, पकोड़े, पूरी और भटूरे को खाने से बचे करते हैं।

कच्ची घानी के शुद्ध तेल में पकाया खाना। गाय के दूध से बने देसी घी का एक चम्मच सब्जी के ऊपर डालकर खाएं। रिसर्च के मुताबिक देसी घी में नेचरली CLA होता है। शुद्ध कच्चे देसी घी को जब किसी खाने के पदार्थ विशेषकर सब्जी के ऊपर डाला जाता है तो वह उस सब्जी में ग्लिाइसेमिक इंडेक्स को कम कर देता है। ग्लिाइसेमिक इंडेक्स कम होने से ब्लड शुगर बढ़ती नहीं है और इंसुलिन भी स्पाइक नहीं होता। इस कारण बहुत अधिक फैट नहीं बनता है, इसलिए खाना खाते समय अपनी सब्जी में एक चम्मच कच्चा गाय का देसी घी डालकर खाएं।

मैदे से बने खाने को खाने से बच्चे और खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं

अपने खाने में मैदे से बने पदार्थों को बिल्कुल भी बंद कर दें और पूरा खाना खाएं। पूरा खाना खाने से मतलब जूस की जगह फल खाएं, मैदे की जगह चोकर वाला आता खाएं। मोटे अनाज को प्राथमिकता दें। अनाज बदल-बदल कर खाएं।

केवल गेहूं की रोटी खाना ही सेहत के लिए ठीक नहीं होता। कई तरह के अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मकई, रागी सभी तरह के अनाजों की रोटियां बारी-बारी से बदल-बदल कर खाएं।

केवल रोटियां ही नहीं बल्कि अपनी डाइट में कभी ओट्स कभी बेसन का चीला, कभी डोसा, कभी चावल इस तरह बदल बदल कर अपनी डाइट में वैराइटी लाएं। इससे आपके शरीर को हर तरह के पोषक तत्व मिलेंगे और फाइबर वाला खाना अधिक मात्रा में लेने से शरीर में फैट बनना बंद होगा।

रात में खाना हमेशा जल्दी खाएं और हल्का खाना खाएं

देर रात को खाना खाना शरीर की सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता। जितना संभव हो 5 से 7 बजे के बीच तक अपना डिनर कर लें। यह भी ध्यान रखें कि सोने से कम से कम 3 घंटे पहले अपना डिनर कर लेना चाहिए। दरअसल रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी कम हो जाता है जिससे शरीर खाने को ठीक तरह से पच नहीं पाता। इसीलिए शाम 7 बजे से पहले हल्का खाना खा ले।

ध्यान रखें शाम को जो भी खाएं वह हल्का-फुल्का खाना हो। बहुत भारी भरकम डाइट बिल्कुल भी ना लें। यदि आपको रात में 7 बजे के बाद हल्की भूख का एहसास हो तो और कंट्रोल ना हो तो किसी सब्जी आदि का सूप ले सकते हैं। लेकिन रात में भारी भरकम खाना और देर रात डिनर लेना बिल्कुल भी बंद कर दें।

शाम 7 बजे तक खाना खा लेने के बाद कुछ भी ना खाएं और अगली डाइट सुबह 8 से 9 के बीच में लें। इस तरह शरीर को 15-16 घंटे का आराम मिल जाता है और शरीर अपनी डैमेज सेल्स की रिपेयरिंग कर लेता है और उस शरीर की इंसुलिन भी कंट्रोल में रहती है, जो कि शरीर की चर्बी को घटाने में मदद करती है।

रात को खाना खाने और सुबह के ब्रेकफास्ट के बीच 15-16 की घंटे का फास्ट रखना एक बहुत ही कॉमन और प्रभावी उपाय है जो कि हमारे भारतीय समाज में काफी समय से प्रचलन में रहा है।

हमारे गाँवों में देखा गया है कि गाँव के लोग अधिकतर शाम 6-7 बजे तक ही खाना खा लेते थे और फिर सुबह 8 बजे ही नाश्ता करते थे।

तो इस तरह इन उपायों यानि अपनी खान-पान की शैली में ये बदलाव करके आप बढ़ती हुई तोंद को बढ़ने के रोक सकते हैं और अपनी शरीर की चर्बी को कम कर सकते हैं।

Disclaimer
ये सारे उपाय इंटरनेट पर उपलब्ध तथा विभिन्न पुस्तकों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कोई भी उपाय करते समय अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। इन्हें आम घरेलू उपायों की तरह ही लें। इन्हें किसी गंभीर रोग के उपचार की सटीक औषधि न समझें।

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यू-ट्यूब (YouTube) की स्थापना कब हुई? — भारत में यू-ट्यूब कब आया?

YouTube के नाम से कौन परिचित नही होगा? ये एक ऐसा सोशल प्लेटफार्म है जिसने कई लोगों की जिंंदगी बदल दी है। इंटरनेट पर यूट्यूब का आगमन (When YouTube founded) कब हुआ? ये कैसे स्टार्ट हुआ जानते हैं…

यू-ट्यूब के बारे में.. (When YouTube Founded)

यूट्यूब (YouTube) के नाम से कौन परिचित नहीं है। यूट्यूब संसार की सबसे बड़ी वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा है। यह सूचना, मनोरंजन, समाचार, नॉलेज संबंधित हर तरह के कंटेट का माध्यम बन चुका है। ये सबसे उपयोगी सबसे सशक्त सोशल मीडिया माध्यम है। यूट्यूब के माध्यम से अनेक कंटेंट क्रिएटर हजारों लाखों करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। ऐसे में हमें यह जानने की उत्सुकता हो जाती है कि यूट्यूब की स्थापना कब हुई? यूट्यूब का मालिक कौन है? पहला यूट्यूब वीडियो कब डाला गया? तो जानते हैं।

यूट्यूब (YouTube) की स्थापना ’14 फरवरी 2005′ में हुई थी।

वर्तमान समय में यूट्यूब का मालिक गूगल कंपनी है, लेकिन यूट्यूब की स्थापना गूगल ने नहीं की थी बल्कि यूट्यूब को तीन दोस्तों ने मिलकर बनाया था। इन तीन दोस्तों के नाम थे – चैड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम।

इन तीनों दोस्तों ने मिलकर 14 फरवरी 2005 में यूट्यूब सोशल वीडियो प्लेटफॉर्म बनाया और इसका पंजीकरण करवाया। ये तीनों अमेरिका के रहने वाले थे और अमेरिका की कॉमर्स कंपनी में पे-पॉल (PayPal) काम करते थे। इन्होंने यूट्यूब का पंजीकरण करवाकर यूट्यूब की स्थापना की।

इन्होंने यूट्यूब पर सब संसार का सबसे पहला वीडियो 24 अप्रैल 2005 को रात 8:27 पर जावेद (Jawed) नाम के चैनल से डाला।

वीडियो का शीर्षक था मी एट जू’ (Me at zoo) वीडियो की अवधि मात्र 19 सेकंड की थी। ये संसार का पहला यूट्यूब वीडियो था। ये वीडियो आज भी यूट्यूब पर मौजूद है, इसको देखने के लिए इस लिंक पर जाएं या नीचे वीडियों देखें…

First YouTube video 24 April 2005

भारत में यूट्यूब कब आया?

भारत में यूट्यूब के शुरुआत की बात की जाए तो भारत में 7 मई 2008 को यूट्यूब लांच हुआ। 7 मई 2008 को गूगल ने यूट्यूब को भारत में आधिकारिक तौर पर लांच किया था।

तब भारत में यूट्यूब को लांच करने में गूगल के साथ  बेनेट कोलमैन एंड कंपनी, यूटीवी, राजश्री ग्रुप और जूम चैनल का भी योगदान है।

इन बड़े कारपोरेट हाउस ने गूगल के साथ मिलकर भारत में यूट्यूब को लांच किया। भारत का पहला यूट्यूब वीडियो किसने और कब बनाया और भारत का पहला यूट्यूब चैनल कौन सा है इस विषय में कुछ स्पष्ट जानकारी नही है।


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फेसबुक की स्थापना कब हुई? किसने की? भारत में फेसबुक कब आया?

फेसबुक की स्थापना कब हुई? किसने की? भारत में फेसबुक कब आया?

फेसबुक एक बेहद लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्म है। सभी सोशल मीडिया में फेसबुक सबसे अधिक लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्म है। इसकी स्थापना कब और कैसे हुई (when Facebook founded) जानते हैं…

फेसबुक के बारे में… (When Facebook Founded)

फेसबुक (Facebook) एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो संसार का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। इसके वर्ल्डवाइड यूजर्स की संख्या 300 करोड़ से अधिक है।

फेसबुक की स्थापना की बात की जाए तो फेसबुक की स्थापना “4 फरवरी 2004” को ‘मार्क जुकरबर्ग’ (Mark Zuckerberg) ने की थी।

मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने अपने साथियों डस्टिन मोस्कोविट्ज़ (Dustin Moskovitz), क्रिस ह्यूजेस (Chris Hughes), एंड्रयू मैककोलम (Andrew McCollum), एडुआर्डो सेवरिन (Eduardo Saverin) के साथ मिलकर फेसबुक 4 फरवरी 2004 को अमेरिका के मैसाचुसेट्स के केम्ब्रिज में फेसबुक की स्थापना की थी।

यह दोनों उस समय अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जोकि कैम्ब्रिज में ही थी। मार्क जुकरबर्ग का पूरा नाम मार्क एलियट जुकरबर्ग है, जो फेसबुक के मुख्य और सह संस्थापक हैं। उन्हें फेसबुक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की स्थापना करने का श्रेय जाता है।

जब उन्होंने 2004 में फेसबुक की स्थापना की था, तब इसका नाम फेसबुक’ था। बाद में 2005 में उन्होंने फेसबुक’ का नाम बदलकर ‘फेसबुक’ कर दिया।

फेसबुक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। जहाँ पर लोग अपने व्यक्तिगत जीवन से संबंधित पल, फोटो, वीडियो आदि अपने मित्रों रिश्तेदारों को शेयर करते हैं, जो कि उनकी फ्रेंडलिस्ट में होते है।

  • फेसबुक एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। फेसबुक की लोकप्रियता पूरे संसार में है और यह संसार की लगभग सभी मुख्य भाषा और मुख्य देशों में उपलब्ध है।
  • किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स की संख्या की दृष्टि से फेसबुक नंबर एक है, क्योंकि पूरे संसार में इसकी यूजर्स की संख्या लगभग 3 बिलियन यानी कि 300 करोड़ है।
  • फेसबुक के मुख्य मालिक मार्क जुकरबर्ग संसार के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं।
  • फेसबुक की पैरेन्ट कंपनी का नाम ‘मेटा प्लेटफॉर्म इन्कॉरपोरेशन’ है, इससे पहले इसकी पैरंट कंपनी का नाम फेसबुक इनकॉरपोरेशन था।
  • फेसबुक का मुख्य थीम कलर नीला रंग है, इसका कारण यह है कि इसके मालिक मार्क जुकरबर्ग को एक ऐसी कलर ब्लाइंड बीमारी है, जिसके कारण उन्हें हरे और लाल रंग का अंतर पता नहीं हो पाता। इसी कारण उन्होंने फेसबुक का मुख्य थीम कलर नीला रखा।

भारत में फेसबुक की शुरुआत कब हुई?

भारत में फेसबुक की शुरुआत इसकी स्थापना के लगभग दो साल बाद 26 सितंबर 2006 से हुई थी।

कुछ और तथ्य

  • भारत में ही पूरे संसार में सबसे अधिक यूजर्स है यानि भारत के लोग सबसे अधिक फेसबुक चलाते हैं।
  • दूसरी स्थान पर अमेरिका और फिर ब्राजील और इंडोनेशिया का नंबर आता है।
  • फेसबुक का मुख्यालय अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के मेलोंपार्क में है।
  • फेसबुक का सीईओ मार्क जुकरबर्ग हैं।
  • फेसबुक गूगल और यूट्यूब के बाद संसार में सबसे ज्यादा एक्सेस की जाने वाली तीसरी वेबसाइट है।
फेसबुक का लिंक
Facebook.com

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क्रिकेट में बैटर के आउट होने के 11 नियमों को जानें।

बहुत से लोगों के मन में क्रिकेट के अलग-अलग नियमों के बारे में जिज्ञासा रहती है। आइए क्रिकेट में कोई भी बैटर कितने तरीकों से आउट हो सकता है (know 11 ways to get a batter out in cricket) इसके बारे में जानते हैं।

क्रिकेट में बैटर के आउट होने के 11 नियम… (11 ways to get a batter out in cricket)

1st तरीका

बोल्ड आउट (Bold out)

क्रिकेट में बोल्ड आउट होने का यह सबसे सामान्य तरीका है। इसमें जब बॉलर द्वारा फेंकी गई गेंद बैटर के बल्ले पर ना लग कर सीधे स्टंप पर लगती है और स्टम्स की गिल्लियां बिखर जाती हैं, तो बैटर को बोल्ड आउट माना जाता है। बोल्ड आउट होने के तरीका किसी बैटर के आउट होने का सबसे स्पष्ट तरीका है। इसमें फील्ड अंपायर या थर्ड अंपायर की भी आवश्यकता नही पड़ती।

2nd तरीका

कैच आउट (Catch Out)

यह भी क्रिकेट में आउट होने का एक सामान्य तरीका है। इस तरीके में जब बैटर गेंद को खेलता है तो गेंद बल्ले से लगकर हवा में उड़ जाती है और मैदान मे खड़े किसी भी फील्डर द्वारा कैच कर ली जाती है, तो उसे कैच आउट माना जाता है। कैच आउट होने की शर्त यह है कि गेंद बल्ले से लगकर जमीन पर टच नहीं हुई हो और बल्ले से लगकर सीधे फील्डर के हाथ में जाए।

वह फील्डर मैदान की बाउंड्री लाइन के भीतर होना चाहिए। गेंद को कैच करते समय फील्डर के शरीर का कोई भी हिस्सा बाउंड्री लाइन को छूना नही चाहिए। गेंद को कैच करने वाला फील्डर मैदान के चारों तरफ खड़े 9 फील्डर हो सकता है अथवा बॉल फेंकने वाला बॉलर भी हो सकता है अथवा विकेट के पीछे खड़ा विकेट कीपर भी हो सकता है।

यदि बॉलर द्वारा फेंकी गई ऐसी गेंद पर कोई फील्डर कैच कर लेता है जो कि अंपायर द्वारा नो-बॉल घोषित कर दी गई हो तो वह बैटर आउट नही माना जाएगा।

3rd तरीका

स्टम्प्स आउट (Stumps out)

यह किसी बैटर के आउट होने का तीसरा सामान्य तरीका का है। इस तरीके में जब बैटर बॉलर द्वारा फेंकी गई गेंद को बैठकर खेलने का प्रयास करता है और वह गेंद को खेलने के प्रयास में अपनी क्रीज से बाहर निकल जाता है और विकेट के पीछे पड़ा विकेट कीपर बॉल से स्टम्प्स की गिल्लियां बिखेर दें तो वह और बैटर क्रीज के बाहर हो तो उस बैटर को आउट माना जाता है।

जब तक बॉलर गेंद को फेंकता है और बैटर गेंद को खेलता है तो ये किसी ओवर की एक बॉल का पूरा प्रोसेस होता है। इस प्रोसेस के पूरा होने तक बैटर क्रीज से बाहर नही होना चाहिए।

4rh तरीका

एलबीडब्ल्यू – लेग बिफोर विकेट (LBW – Leg Before Wicket)

यह किसी बेटर के आउट होने का चौथा सामान्य तरीका है। इसमें जब कोई बॉलर गेंद फेंकता है और बैटर उस गेंद को खेलने का प्रयास करता है, तो यदि वह बॉल को खेलने से चूक जाता है, लेकिन गोल उसके पैड से टकराती है और यदि बॉल की लाइन और पीछे के स्टम्प्स की लाइन एक ही सीध में हों तो उस बैटर को आउट घोषित कर दिया जाता है।

क्योंकि यदि बैटर वह गेंद अपने पैड से नहीं रोकता या उसके पैड से टकराकर गेंद नहीं रुकती तो सीधे स्टंप पर जा लगती और बैटर बोल्ड हो जाता, लेकिन क्योंकि बैटर ने बॉल बैट से खेले बिना पैड से रोका या उसके पैड से टकराक बॉल रुक गई, इसीलिए उस बल्लेबाज को एलबीडब्ल्यू आउट दिया जाता है।

एलबीडब्ल्यू आउट के लिए बॉलर द्वारा फेंकी गई गेंद स्टम्प्स की सीध मे होनी चाहिए। तब ही बॉलर एलबीडब्ल्यू की अपील कर सकता है। एलबीडब्ल्यू आउट करने का तरीका अक्सर अंपायर के विवेक पर होता है। कभी-कभी अंपायर इस मामले में चूककर  जाते हैं और गलत एलबीडब्ल्यू आउट दे देते हैं।

ऐसी स्थिति में थर्ड अंपायर का सहारा लेना पड़ता है जो तकनीक द्वारा वीडियो रीप्ले में गेंद की सही लाइन देखता है कि वास्तव में गेंद बैटर ने बल्ले से नहीं खेली और वह उसके पैड से टकराकर रोकी गई तथा गेंद की लाइन स्टम्स की लाइन की सीध में थी।

5th तरीका

रन आउट (Run out)

किसी भी बटन के आउट होने का पांचवा तरीका है। इसमें और किए जाने पर बैटर का विकेट किसी भी बॉलर को नहीं मिलता बल्कि इसे रन आउट माना जाता है। कोई भी बल्लेबाज रन आउट तब होता है, जब जब वह बॉलर द्वारा फेंकी की गई गेंद को खेल कर दौड़ कर रन लेने का प्रयास करता है और अगले छोर पर पहुंचने से पहले ही फील्डर द्वारा गेंद को स्टंप्स से टकराकर उसकी गिल्लियां बिखेर दी जाती हैं।

यदि रन के लिए दौड़ने वाला बैटर गिल्लियां गिरने से पहले क्रीज तक नहीं पहुंच पाया है तो उसे रन आउट मान लिया जाता है। रन आउट स्थिति में आउट होने का क्रेडिट बॉलर को नहीं मिलता बल्कि जिस फील्डर ने बॉल थ्रो की और जिसने बॉल को टकराकर स्टम्प्स की गिल्लियां बिखेरीं उनका नाम रन आउट करने वालों में शामिल होता है।

6th तरीका

हिट विकेट (Hit Wicket)

इस तरीके में जब कोई बैटर बॉलर द्वारा फेंकी गई गेंद को खेलने का प्रयास करता है तो गेंद को खेलने के प्रयास में वह पीछे की ओर चला जाता है और गलती से उसके पैर अथवा हाथ से टच होकर स्टम्स की गिल्लियां गिर जाती हैं, तो बैटर को हिट विकेट मानकर आउट दे दिया जाता है।

यानी उसने अपनी गलती से ही स्टम्प्स की गिल्लियां गिरा दीं। आमतौर पर बैटर गेंद के खेलने के प्रयास में पीछे जाकर गलती से अपने पैर से स्टम्प्स को टच कर देता है और स्टम्प्स की गिल्लियां गिर जाती हैं। इसलिए उसे हिट विकेट मान लिया जाता है। इस तरह के हिट विकेट आउट में हाथ से स्टम्प्स को टच करने के मामले कम ही होते हैं।

7th तरीका

डबल हिट बॉल या हिट द बॉल ट्वाइस (Double hit or Hit the ball twice)

इस तरीके में जब कोई बैटर बॉल को खेलने का प्रयास करता है और वह बॉल को खेल कर दोबारा से उसी बॉल को हिट करता है यानी बॉल को दो बार बल्ले से हिट कर दे तो उसे डबल हिट या हिट द बॉल ट्वाइस के अन्तर्गत आउट दे दिया जाता है।

8th तरीका

ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्डिंग (Obstructing the field)

जब कोई बैटर किसी फील्डर के द्वारा उस या उसके साथी बैटर को रन आउट करने के प्रयास को रोकता है अथवा किसी फील्डर द्वारा किसी बॉल को कैच करने के प्रयास को रोकता है तो उस बैटर को ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ मानकर आउट दे दिया जाता है। ऐसा कोई बैटर जानबूझकर या अनजाने में कर सकता है।

जब बैटर कोई बॉल खेलता है और वह रन लेने के लिए आगे दौड़ता है। उसकी नॉल स्ट्राइकर छोर वाला बैटर भी रन लेने को दौड़ता है। तब फील्डर दोनों बैटर में किसी बैटर को रन आउट करने के लिए गेंद को स्टम्प्स पर हिट करने का प्रयास कर रहा है और बैटर उस स्टम्प्स में बाधा उत्पन्न करे या तो जानबूझकर गेंद और स्टम्प्स के बीच में आ जाए जिससे गेंद स्टम्प्स पर नही लग पाए तो उस बैटर को ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ मानकर आउट दे दिया जाता है।

अथवा जब बैटर कोई शॉट हवा में खेल बैठा हो और फील्डर द्वारा उसे कैच करने का प्रयास किया जा रहा हो और बैटर फील्डर को कैच करने में बाधा उत्पन्न करें। या तो बैटर जानबूझकर फील्डर से टकरा जाए या अनजाने में उससे टकरा जाए, जिससे वो फील्डर उस बॉल को कैच नही कर पाए तो बैटर को ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ मानकर आउट दे दिया जाता है।

9th तरीका

टाइम आउट (Time out)

किसी भी बैटर के आउट होने के बाद अगले बैटर के मैदान में आने का एक निश्चित टाइम होता है। उस टाइम के अंदर अगले बैटर को मैदान में आना होता है। यह टाइम 3 मिनट का होता है। यदि बैटर के आउट होने के बाद 3 मिनट के अंदर नया बैटर मैदान में नहीं आता है तो जो भी बैटर मैदान में आने वाला है, उसे आउट दे दिया जाता है और वह बैटर बिना कोई गेंद खेले आउट मान लिया जाता है। ऐसी स्थिति में उसके बाद जो बैटर आने वाला है, वह ही आएगा।

10th तरीका

हैंडल्ड दा बॉल (Handled the ball)

जब कोई मैटर गेंद को खेलते समय विरोधी टीम की अनुमति के बिना गेंद को अपने हाथ से छू लेता है अथवा अपने हाथ से रोकने का प्रयास करता है, तो उसे ‘हैडल्ड द बॉल’ मानकर आउट दे दिया जाता है। कोई भी बॉलर गेंद को फेंकता है और उसके बाद बैटर उसे खेलता है, ये किसी ओवर की एक गेंद का प्रोसेस होता है।

इस समय में कोई भी बैटर बॉल को अपने हाथ से छू नहीं सकता, जब तक कि बैटर उस बॉल पर शॉट न खेल ले। इस दौरान वह बॉल के हाथ से छू नही सकता न ही हाथ से रोक सकता है। बॉल पर शॉट पूरा होने के बाद जब रन का प्रोसेस पूरा हो गया है और बॉल बैटर के पास जमीन पड़ी है तो तब वह चाहे तो बॉल को उठाकर बॉलर या फील्डर को दे सकता है। यानि शॉट पूरा होने से पहले और शॉट के दौरान वह बॉल को हाथ से छू नही सकता। शॉट पूरा होने के बाद वह छू सकता है।

11th तरीका

मांकडिंग आउट (Mankading out)

जब कोई बॉलर गेंद को फेंकने जा रहा गो और नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़ा बैटर बॉलर के बॉल फेंकने से पहले ही अपनी क्रीज से बाहर निकल आया हो तो ऐसी स्थिति में बॉलर चाहे तो बॉल को स्टम्प्स से टकराकर नॉन स्ट्राइकर एंड वाले बैटर को आउट कर सकता है। इस तरह आउट हुए तरीके को मांकडिंग आउट कहते हैं।

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ब्राउन राइस और व्हाइट राइस में क्या अंतर है? कौन सा चावल सेहत के लिए बेहतर है?

सफेद चावल तो सभी खाते हैं, लेकिन ब्राउन राइस का ट्रेंड भी आजकल बहुत चल रहा है। सामान्य चावल और ब्राउन राइस में क्या अंतर (Brown rice vs white rice) है, समझते हैं… 

ब्राउन राइस और व्हाइट राइस (Brown rice vs white rice)

आजकल ब्राउन राइस को खाने का प्रचलन बेहद बढ़ चला है। सफेद चावल के नुकसान बताकर ब्राउन राइस खाने की सलाह अक्सर कई हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा दी जाती रही है। सोशल मीडिया पर ब्राउन राइस के अनेक फायदे बताए गए हैं। हेल्थ एक्सपर्ट और डॉक्टर वगैरा पहले से ही सफेद चावल के नुकसान बताते रहे हैं।

सफेद चावल के नुकसानों को बताकर ब्राउन राइस के फायदों और अधिक हाईलाइट किया जाने लगा है। ऐसे में हमें यह जानना हो हो जाता है कि हमारी सेहत के लिए ब्राउन राइस खाना बेहतर है अथवा व्हाइट राइस खाना बेहतर है। उससे पहले हम यह समझ लेते हैं कि ब्राउन राइस आखिर होता क्या है और व्हाइट राइस यानि सफेद चावल क्या है?

ब्राउन राइस क्या है?

ब्राउन राइस के बारे में सबसे पहले यह जान ले कि यह कोई विशेष तरीके से उगाया उगाया गया चावल नहीं है। बल्कि यह वही सामान्य चावल है जो सामान्य रूप से पाया जाता है। ब्राउन राइस की सबसे मुख्य खासियत यह होती है कि इसको रिफाइंड नहीं किया जाता यानी चावल का प्रसंस्करण करते समय उस की भूसी ऊपर से उतारी नहीं जाती। इस कारण ब्राउन राइस में अधिक पोषक तत्वों की मात्रा होती है।

चूँकि ब्राउन राइस के ऊपर से उसकी भूसी नहीं उतारी जाती इसलिए वह भूरे रंग का दिखता है। इसी कारण उसे ब्राउन राइस कहते हैं। आमतौर पर चावल के दानों को उसकी फसल से अलग करते समय चावल के धान में से चावल निकालते समय उसकी रिफायनिंग की जाती है और पॉलिशिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में चावल के ऊपर से उसकी भूसी यानी धान के छिलके उतार लिए जाते हैं। फिर जो चावल तैयार होता है वह सफेद चावल कहलाता है। जिसके छिलके पूरी तरह नही उतारे जाते हैं और उन पर भूसी लगी रह जाती है तथा उन दानों की पॉलिशिंग नही की जाती है, वह ही ब्राउन राइस बनता है।

इस चावल की प्रोसेसिंग करते समय चावल के धान के छिलके पूरी तरह नही उतारे जाते हैं। इसलिए इन चावल के छिलकों में पोटेशियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फास्फोरस जैसे मिनरल की मात्रा सफेद चावल के मुकाबले अधिक पाई जाती है। इसीलिए एक्सपर्ट ब्राउन राइस को खाने की सलाह देते हैं और आजकल सेहत के नाम पर ब्राउन राइस खाने की सलाह देने वाले बातें अनेक लोगों द्वारा सुनी जाती हैं।

लेकिन हमें ब्राउन राइस के फायदे और नुकसान तथा सफेद चावल के फायदे एवं नुकसान दोनों के बारे में जान लेना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि हमेशा ब्राउन राइस हमेशा सबके लिए फायदेमंद ही हो और इसे  खाना सेहत के लिए अच्छा ही हो और यह भी जरूरी नहीं कि सफेद चावर हमेशा नुकसानदायक ही होता है। इसलिए भूरा चावल यानि ब्राउन राइस तथा सफेद चावल यानि व्हाइट राइस के फायदे एवं नुकसान के बारे में जानते हैं…

ब्राउन राइस खाने के फायदे

ब्राउन राइस मानव शरीर के ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है। इसको खाने से ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता। इसीलिए ब्राउन राइस को व्हाइट राइस की तुलना में खाना अधिक फायदेमंद बताया जाता है।

ब्राउन राइस में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा व्हाइट राइस के मुकाबले अधिक पाई जाती है, जिससे यह शरीर की हड्डियों के लिए एक अच्छा स्रोत है।

ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। ब्राउन राइस को खाने से पेट को भरा होने का एहसास होता है और इसलिए कम मात्रा में खाया जाता है, जिससे वेट लॉस में मदद मिलती है।

ब्राउन राइस में प्रोटीन की मात्रा भी व्हाइट राइस के मुकाबले अधिक पाई जाती है। ब्राउन राइस को खाने से स्ट्रेस लेवल कम होता है और यह दिल के लिए भी बेहद अच्छा होता है।

ब्राउन राइस हमारे शरीर में पढ़ने वाले कोलस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है जिससे हृदय रोग की संभावना कम होती है। इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होने के कारण यह खाने को धीरे-धीरे पचाता है, जिससे भूख कम लगती है। इससे वेट लॉस में मदद मिलती है।

ब्राउन राइस खाना डायबिटीज के लोगों के लिए भी बेहद अच्छा है जो रोगी टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें अपने डायबिटीज को कंट्रोल करने में ब्राउन राइस मदद करता है। ब्राउन राइस में फाइबर प्रोटीन फाइटोकेमिकल और मिनरल की पर्याप्त मात्रा पाए जाने के कारण यह डायबिटीज में बेहद लाभकारी है। यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।

ब्राउन राइस वेट लॉस यानी वजन को नियंत्रित करने में बेहद फायदेमंद होता है। ब्राउन राइस हड्डियों को दुरुस्त करने के लिए बेहद फायदेमंद है, इसमें मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, इसी कारण बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने में यह मदद करता है।

ब्राउन राइस खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है क्योंकि इसमें विटामिन पाया जाता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट का कार्य करता है। इसका सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

हृदय के लिए ब्राउन राइस फायदेमंद होता है क्योंकि इसको खाने से हृदय रोग की संभावना कम होती है। अस्थमा जैसे रोगों में भी ब्राउन राइस फायदेमंद होता है।

बाउन राइस के नुकसान

ब्राउन राइस के कुछ नुकसान भी हैं। ब्राउन राइस हर किसी के खाने योग्य नहीं होता। इसको लगातार इसका सेवन करने से बहुत से लोगों को समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

ब्राउन राइस उन लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है, जिनको पाचन संबंधी समस्याएं हैं क्योंकि यह शीघ्रता से डाइजेस्ट नहीं होता। यह बहुत देर तक पेट के अंदर रहता है और धीरे-धीरे पचता है, इसमें प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है जिससे कब्ज जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

ब्राउन राइस में साइट्रिक एसिड नमक एक कंपाउंड पाया जाता है जो शरीर में मिनरल को आसानी से शोषित नहीं होने देता।

ब्राउन राइस में फोलिक एसिड बहुत कम मात्रा में होता है, जबकि सफेद चावलों में फोलिक एसिड ठीक-ठाक मात्रा में होता है। फोलिक एसिड शरीर के लिए अच्छा माना जाता है और जरूरी ब्राउन राइस को खाने से शरीर के लिए आवश्यक फोलिक एसिड नहीं मिल पाता।

ब्राउन राइस को पकने में अधिक समय लगता है, इसलिए जो रोज चावल खाने के आदी हैं। उनके लिए यह एक परेशानी वाला काम भी हो सकता है।

ब्राउन राइस का स्वाद भी आम चावलों के स्वाद के मुकाबले अलग होता है, जिन्हें सफेद चावल खाने की आदत है वह ब्राउन राइस के स्वाद को शायद पसंद ना करें।

सफेद चावल क्या है?

सफेद चावल एक प्रकार का चावल है जो भूरे चावल को छीलकर और चोकर और बीजों को हटाकर बनाया जाता है। यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है और भारत और कई एशियाई देशों में मुख्य भोजन के रूप में खाया जाता है। सफेद चावल एक अच्छा कार्बोहाइड्रेट स्रोत है और इसमें कुछ पोषक तत्व भी होते हैं, जैसे कि विटामिन बी1, विटामिन बी3 आदि।

हालांकि, सफेद चावल भूरे चावल की तुलना में कम पोषक तत्वों से भरपूर होता है, क्योंकि छीलने और चोकर को हटाने से कुछ पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. सफेद चावल के कुछ फायदे इस प्रकार हैं…

  • यह एक अच्छा कार्बोहाइड्रेट स्रोत है और इसमें कुछ पोषक तत्व होते हैं। सफेद चावल इंस्टेंट एनर्जी का एक अच्छा स्रोत हैय़ सफेद चावल में कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसका सेवन करने से तुरंत पर्याप्त ऊर्जा मिलती है इसीलिए सफेद चावल इंस्टेंट एनर्जी देने का कार्य करता है।
  • सफेद चावल चूँकि ग्लूटेन फ्री होता है, इसीलिए यह ग्लूटेन से एलर्जी की समस्या वाले लोगों के लिए एक अच्छा आहार स्रोत है। सफेद चावल में ग्लूटेन नहीं पाया जाता, सफेद चावल सुपाच्य होता है। यह बहुत जल्दी पच जाता है। हमारे पाचन तंत्र के लिए यह एक सुपाच्य पदार्थ है। कब्ज की समस्या से परेशान लोगों के लिए सफेद चावल एक अच्छा भोजन है।
  • सफेद चावल ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है तथा इसके अलावा दिल की बीमारियों में भी यह फायदेमंद होता है।
  • सफेद चावल में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो मानव शरीर को फ्री रेडिकल से बचाते हैं।
  • सफेद चावल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और पोषक तत्व पाए जाते हैं।
  • यह एक किफायती भोजन है और इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।
  • यह एक बहुमुखी भोजन है और इसे कई तरह से खाया जा सकता है।
  • यह एक ऊर्जा का अच्छा स्रोत है और इसे वर्कआउट के बाद खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है।

सफेद चावल के कुछ नुकसान

  • यह एक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन है, जिसका मतलब है कि यह रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकता है। सफेद चावल डायबिटीज के रोगों के लिए बेहद नुकसानदायक है। सफेद चावल का अधिक सेवन करने से डायबिटीज के खतरे की संभावना बढ़ती है। जिन लोगों को पहले से ही डायबिटीज है, उन्हें सफेद चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • सफेद चावल में कार्बोहाइड्रेट बड़ी मात्रा में पाया जाता है। ये वजन बढ़ाता है। सफेद चावल का ज्यादा सेवन करने से वजन बढ़ने का खतरा रहता है। यह मोटापा बढ़ाने का कार्य करता है। सफेद चावल का अधिक सेवन करने से वजन बढ़ता है और मोटापे की समस्या पैदा हो सकती है।
  • यह एक लो फाइबर वाला भोजन है, जिसका मतलब है कि यह पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • यह एक अनाज है, जो गैर-जैविक होता है।
  • यह एक ग्लूटेन युक्त भोजन है, जो ग्लूटेन से एलर्जी वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • यदि आप सफेद चावल खाते हैं, तो इसे सीमित मात्रा में खाना और इसे अन्य स्वस्थ खाद्य पदार्थों के साथ मिलाना महत्वपूर्ण है. आप सफेद चावल को भूरे चावल, ज्वार, बाजरा या quinoa जैसे अन्य स्वस्थ अनाज के साथ बदल सकते हैं.

यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि आप सफेद चावल को स्वस्थ तरीके से कैसे खा सकते हैं।

  • इसे सीमित मात्रा में खाएं
  • इसे अन्य स्वस्थ खाद्य पदार्थों के साथ मिलाएं, जैसे कि सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज।
  • इसे बिना किसी अतिरिक्त चीनी या वसा के पकाएं।
  • इसे एक स्वस्थ भोजन के हिस्से के रूप में खाएं, जैसे कि एक अच्छी तरह से संतुलित भोजन के साथ.

यदि आप सफेद चावल खाते हैं, तो यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप इसे स्वस्थ तरीके से खा रहे हैं ताकि आप इसके नुकसान से बच सकें.

निष्कर्ष

यहाँ पर हमने ब्राउन राइस और व्हाइट राइस दोनों के फायदे और नुकसानों के बारे में जाना। अंत में निष्कर्ष यह निकलता है कि ब्राउन राइस अधिक पौष्टिक तथा सेहत के लिए अधिक अच्छा है, लेकिन कुछ मामलों में ब्राउन राइस सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इसके अलावा ब्राउन राइस एक महंगा आहार है। ये सफेद चावल के मुकाबले महंगा आता है। इस कारण हर कोई इसे अपना नियमित भोजन नहीं बना सकता। ब्राउन राइस हर जगह आसानी से उपलब्ध भी नहीं होता है। सफेद चावल का बुद्धिमानी से प्रयोग करें।

उसे सहायक भोजन के रूप में सीमित मात्रा में प्रयोग करें और कभी-कभी ब्राउन चावल को अपने आहार में शामिल करके अपनी सेहत को एक नया बूस्ट दे सकते है।

Post topic: Brown Rice Vs White Rice

Disclaimer
ये सारे उपाय इंटरनेट पर उपलब्ध तथा विभिन्न पुस्तकों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कोई भी उपाय करते समय अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। इन्हें आम घरेलू उपायों की तरह ही लें। इन्हें किसी गंभीर रोग के उपचार की सटीक औषधि न समझें।

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Samrat Chaudhary Biography – कौन हैं बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी? जानिए पूरा परिचय।

सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के प्रमुख नेता हैं, जो अब बिहार के उप-मुख्यमंत्री भी बन चुके है। सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary Biography) कौन हैं? उनके बारे में जानते हैं…

सम्राट चौधरी का पूरा परिचय (Samrat Chaudhary Biography)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल के साथ अपना गठबंधन तोड़कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वह भारतीय जनता पार्टी के साथ अपना नया गठबंधन बनाकर दोबारा से बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। उनके साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।

सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी बीजेपी के एक फायर ब्रांड नेता है, जो बिहार बीजेपी के सबसे अग्रणी नेताओं में जाने जाते हैं। आईए सम्राट चौधरी के जीवन का एक आकलन करते हैं…

सामान्य परिचय

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम शकुनी चौधरी तथा माता का नाम पार्वती देवी था। वह चौधरी कोइरी जाति से संबंध रखते थे जोकि पिछड़ी जाति की श्रेणी में आती है।

उनके परिवार में उनके माता-पिता शकुनि चौधरी और पार्वती देवी के अलावा उनकी पत्नी ममता कुमारी चौधरी और एक पुत्र तथा एक पुत्री हैं।

शिक्षा

सम्राट चौधरी की आरंभिक शिक्षा बिहार में ही हुई। उसके बाद उन्होंने तमिलनाडु के मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।

राजनीतिक करियर

राजनीति उनको पारिवारिक विरासत में मिली थी, क्योंकि उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के खगड़िया विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक रहे हैं। इसके अलावा एक बार वह लोकसभा सांसद भी रहे। उनकी माँ पार्वती देवी भी बिहार के तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से एक बार विधायक रही हैं।

राजनीति पारिवारिक विरासत में मिली होने के कारण वह जल्दी ही सक्रिय राजनीति में आ गए। जब मात्र 22 साल की उम्र में 1990 में वह सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए। उन्होंने पहली बार तत्कालीन जनता दल की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। जनता दल बाद में टूटकर कई अलग-अलग धड़ों में बट गया और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल के साथ जुड़ गए। 1999 में वह तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री भी बने।

वह लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े रहे। इसी बीच में दो बार 2000 और 2010 में बिहार विधानसभा के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी बने। इसके अलावा वह बिहार विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके हैं। वह 2014 में बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे।

2014 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल छोड़ दिया और जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। जब 2014 में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तो जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री बने और सम्राट चौधरी भी जीतन राम मांझी के मंत्रिमंडल में शहरी विकास और आवास मंत्री बने। 2018 तक वह जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे।

2018 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और 2020 के विधायक विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपना स्टार प्रचारक बनाया था। भारतीय जनता पार्टी के नेता के रूप में उन्होंने बिहार में अच्छी खासी लोकप्रियता प्राप्त कर ली थी।

उनके बारे में कहा जाने लगा कि यदि बिहार में बीजेपी का कोई मुख्यमंत्री बनेगा तो वह सम्राट चौधरी हो सकते हैं। 2021 में जब जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन वाली सरकार की कैबिनेट का विस्तार हुआ तो वह पंचायती राज्य मंत्री बनाए गए। उसके बाद 2022 तक में पंचायती राज मंत्री रहे।

2022 में जब नीतीश कुमार ने एक बार फिर भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया तो सरकार गिर गई और सम्राट चौधरी भी सत्ताविहीन हो गए। लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी के नेता के तौर पर बिहार में लगातार सक्रिय रहे। वह नितीश कुमार के मुखर आलोचकों में गिने जाने लगे थे।

अब दोबारा से नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके दोबारा से सरकार बनाई है, जिसमें सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री बने हैं।

सम्राट चौधरी के बारे में विशेष्य तथ्य

  • सम्राट चौधरी बिहार के बरबत्ता विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। वह पहली बार 2000 में और दूसरी बार 2010 में परबत्ता विधान सभा क्षेत्र से विधायक रहे।
  • राजनीतिक कैरियर की दृष्टि से वह राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी इन तीन दलों से जुड़े रहे हैं।
  • सबसे पहले वह 1990 से 2014 तक राष्ट्रीय जनता दल के साथ जुड़े। उसके बाद 2014 में जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। उसके बाद 2018 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
  • सम्राट चौधरी के पिता शकुनि चौधरी राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेताओं में से थे और वह सात बार विधायक तथा एक बार सांसद रह चुके हैं। उनकी माता भी एक बार विधायक रह चुकी हैं।
  • सम्राट चौधरी मार्च 2023 में भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बने। उसके बाद से वह लगातार बिहार में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।


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काली मिर्च का परिचय

भारत में ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ काली मिर्च का प्रयोग नहीं होता हो। यह मसालों की रानी मानी जाती है। चाहे हम कोई भी सब्जी बनाएं। सब्जी सूखी हो या रसेदार या फिर नमकीन से लेकर सूप आदि तक, सभी तरह के व्यंजन में काली मिर्च का प्रयोग जरूर होता है।

भोजन में काली मिर्च का इस्तेमाल केवल स्वाद के लिए नहीं किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है। काली मिर्च एक अच्छी औषधि भी है। लंबे समय से आयुर्वेद में इसका औषधीय प्रयोग होता रहा है। वास्तव में काली मिर्च के औषधीय गुणों के कारण ही इसे भोजन में शामिल किया जाता है।

काली मिर्च का प्रयोग रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। काली मिर्च के काफी अधिक औषधीय लाभ हैं। यह वात और कफ को नष्ट करती है और कफ तथा वायु को निकालती है। यह भूख बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, लीवर को स्वस्थ बनाती है और दर्द तथा पेट के कीड़ों को खत्म करती है। यह पेशाब बढ़ाती है और दमे को नष्ट करती है। तीखा और गरम होने के कारण यह मुंह में लार पैदा करती है और शरीर के समस्त स्रोतों से मलों को बाहर निकाल कर स्रोतों को शुद्ध करती है। इसे प्रमाथी द्रव्यों में प्रधान माना गया है।

आइए जानते हैं कि आप बीमारियों को ठीक करने के लिए काली मिर्च का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

क्या है काली मिर्च

काली मिर्च एक औषधीय मसाला है। इसे काली मिर्च भी कहते हैं। यह दिखने में थोड़ी छोटी, गोल और काले रंग की होती है  इसका स्वाद काफी तीखा होता है। इसकी लता बहुत समय तक जीवित रहने वाली होती है। यह पान के जैसे पत्तों वाली, बहुत तेजी से फैलने वाली और कोमल लता होती है। इसकी लता मजबूत सहारे से लिपट कर ऊपर बढ़ती है। एक वर्ष में इसकी लगभग दो उपज प्राप्त होती हैं।

पहली उपज अगस्त-सितम्बर में और दूसरी मार्च-अप्रैल में। बाजारों में दो प्रकार की मिर्च बिकती है – सफेद मिर्च और काली मिर्च। काली मिर्च की तासीर आयुर्वेद के अनुसार न शीत है और न उष्ण, लेकिन कहीं-कहीं पर इसको उष्ण तासीर का भी बताया गया है।

कुछ लोग सफेद मिर्च को काली मिर्च की एक विशेष जाति मानते हैं। कोई सहिजन के बीजों को ही सफेद मिर्च मान लेते हैं। सफेद मिर्च काली मिर्च का ही एक अलग रूप है। आधे पके फलों की काली मिर्च बनती है तथा पूरे पके फलों को पानी में भिगोकर, हाथ से मसल कर ऊपर का छिल्का उतार देने से वह सफेद मिर्च बन जाती है। छिलका हट जाने से इसकी गरम तासीर कुछ कम हो जाती है तथा गुणों में कुछ सौम्यता आ जाती है।

काली मिर्च का वानस्पतिक  यानी लैटिन भाषा में नाम पाइपर नाइग्रम् (Piper nigrum Linn.) है। यह पाइपरेसी (Piperaceae) कुल का पौधा है।

काली मिर्च के औषधीय गुण और लाभ

काली मिर्च का भोजन में प्रयोग करने से भी आपको बहुत लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए, ठंड के दिनों में बनाए जाने वाले सभी पकवानों में काली मिर्च का उपयोग किया जाता है ताकि ठंड और गले की बीमारियों से रक्षा हो सके। काली मिर्च नपुंसकता, रजोरोध यानी मासिक धर्म के न आने, चर्म रोग, बुखार तथा कुष्ठ रोग आदि में लाभकारी है। आँखों के लिए यह विशेष हितकारी होती है। जोड़ों का दर्द, गठिया, लकवा एवं खुजली आदि में काली मिर्च में पकाए तेल की मालिश करने से बहुत लाभ होता है।

सिर दर्द दूर करें

काली मिर्च का सेवन  एक काली मिर्च को सुई की नोक पर लगाकर उसे दीपक में जला लें। उसमें से निकलने वाले धुंए को सूंघने से सिरदर्द में आराम होता है। इससे हिचकी भी बंद होती है। सिर दर्द में काली मिर्च के फायदे बहुत लाभकारी साबित होते हैं। भृंगराज के रस अथवा चावलों के पानी के साथ काली मिर्च को पीसकर माथे पर लेप करने से आधासीसी का दर्द यानी माइग्रेन भी ठीक होता है।

सिर के जुंए (डैंड्रफ या रूसी) भगाए काली मिर्च का प्रयोग

बालों में जूँ हो जाने पर 10-12 सीताफल के बीज और 5-6 काली मिर्चों को पीस कर सरसों के तेल में मिला लें। इसे रात में सोने से पहले बालों की जड़ों में लगा लें। सुबह बाल धोकर साफ कर लें। जूं नष्ट हो जाएगी। सिर के बाल यदि झड़तें हो तो काली मिर्च को प्याज व नमक के साथ पीसकर लगाने से लाभ होता है।

खाँसी-जुकाम दूर करें काली मिर्च का सेवन काली मिर्च के 2 ग्राम चूर्ण को गर्म दूध तथा मिश्री के साथ पी लेने अथवा इसके 7 दाने निगलने से जुकाम तथा खाँसी में लाभ होता है। 50 ग्राम दही, 15-20 ग्राम गुड़ और एक-डेढ़ ग्राम काली मिर्च चूर्ण को मिला लें। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करने से जुकाम में लाभ होता है।

आँखों की बीमारी में फायदेमंद काली मिर्च का उपयोग

काली मिर्च को दही के साथ पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी में लाभ होता है। इसे अत्यन्त सावधानीपूर्वक बाहर-बाहर ही लगाएं। आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए रोजाना सुबह आधा से 1 ग्राम तक काली-मिर्च में 1 चम्मच घी तथा आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें। बाद में दूध पीएं। इससे आँखों की बीमारी में लाभ होता है। आँखों की पलकों पर अगर फुंसी हो जाए तो काली मिर्च को पानी में घिसकर लेप करने से फुंसी पककर फूट जाती है। काली मिर्च के आधे ग्राम चूर्ण को एक चम्मच देशी घी में मिलाकर खाने से अनेक प्रकार के नेत्र रोगों का खात्मा होता है।

दाँत दर्द में आराम दिलाये

काली मिर्च का इस्तेमाल काली मिर्च के 1-2 ग्राम चूर्ण को 3-4 जामुन या अमरूद के पत्तों या पोस्तदानों के साथ पीस लें।  इससे कुल्ला करने से दाँत दर्द ठीक होता है। गले के रोग व आवाज बैठ जाने पर भी यह प्रयोग लाभप्रद है। सेंधा नमक, काली मिर्च, शहद तथा नींबू के रस को मिला कर तालू पर लेप करने से मुँह के छाले में लाभ होता है।

काली मिर्च का सेवन से दमा-खाँसी का इलाज

2-3 ग्राम काली मिर्च चूर्ण को शहद और घी (असमान मात्रा में) में मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से सर्दी, सामान्य खाँसी, दमा और सीने का दर्द मिटता है। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है। 200 मिली गाय के दूध में 2 ग्राम काली मिर्च चूर्ण को पकाकर पिलाने से दमा-खाँसी में लाभ होता है।

यदि खाँसी बार-बार उठती हो, भोजन निगलने में कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार काली मिर्च के हल्के काढ़े से कुल्ला करें। काली मिर्च चूर्ण 2 भाग, पीपली चूर्ण 2 भाग, अनार की छाल 4 भाग तथा जौ एक भाग का चूर्ण बना लें। इसमें 8 भाग गुड़ मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से गले का दर्द (कष्टदायक खाँसी) में लाभ होता है। गले की खराश व खाँसी में 2-3 काली मिर्च मुंह में रखकर चूसने मात्र से लाभ होता है।

दस्त रोकने के लिए करें काली मिर्च का प्रयोग

एक भाग काली मिर्च की चूर्ण तथा एक भाग भुनी हींग को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें दो भाग शुद्ध देशी कपूर मिलाकर 125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे आधे घंटे के अंतर से 1-1 गोली देने से हैजे की शुरुआती (प्रथम) अवस्था में लाभ होता है।

काली मिर्च की चूर्ण 1 ग्राम तथा भुनी हींग 1 ग्राम को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें 3 ग्राम अफीम मिलाकर शहद में घोटकर 12 गोलियाँ बना लें। कर 1-1 गोली 1 घंटे के अंतर से दें। बहुत समय तक न दें। इससे पेचिश में भी अत्यन्त लाभ होता है। अफीम मिले होने के कारण इसका प्रयोग सावधानी से करें। काली मिर्च चूर्ण 1/2 ग्राम, हींग 1/4 ग्राम तथा अफीम 100 मिग्रा को मिला लें। इसे जल या शहद के साथ सुबह, दोपहर तथा सायं सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।

पेट के रोगों में फायदेमंद काली मिर्च का उपयोग

2-3 ग्राम काली मिर्च चूर्ण को 1 कप छाछ के साथ सुबह खाली पेट लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। 8-10 काली मिर्च को 5-7 ग्राम शिरीष के पत्तों के साथ पीसकर छान लें। इसे पीने से गैस के कारण होने वाले पेट दर्द और पेट फूलने में आराम मिलता है। एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़ लें। इसमें 5-6 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से पैट की गैस, भूख का घटना-बढ़ना आदि में लाभ होता है।

काली मिर्च के चूर्ण के साथ बराबर भाग सोंठ, पीपली, जीरा और सेंधा नमक मिला लें। 1-1 ग्राम की मात्रा में, भोजन के बाद गर्म जल के साथ लेने से अपच तथा बदहजमी में लाभ होता है। काली मरिच, सोंठ, पीपल तथा हरड़ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ देने से अथवा इसके काढ़े को पीने से अपच तथा पेट की गैस में लाभ होता है।

काली मिर्च के सेवन से बवासीर में फायदा

दो ग्राम काली मिर्च चूर्ण, 1 ग्राम भुना जीरा, 15 ग्राम शहद या शक्कर को मिला लें। दो बार छाछ के साथ या गर्म जल के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है। काली मिर्च चूर्ण 25 ग्राम, भुना जीरा चूर्ण 35 ग्राम और शुद्ध शहद 180 ग्राम को मिला लें। इसे अवलेह (चटनी) बनाकर रखें। इस अवलेह को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।

काली मिर्च और जीरे के मिश्रण में सेंधा नमक मिला लें। इसे दिन में दो बार छाछ के साथ 3-4 मास तक सेवन करते रहने से बवासीर में आराम मिलता है। इससे कमजोरी या वृद्धावस्था के कारण हुए बवासीर या गुदभ्रंश (काँच निकलना) ठीक होते हैं। इससे पाचन व जठराग्नि ठीक रहत है।

कब्ज और पेट की गैस में भी यह प्रयोग लाभप्रद है। एक ग्राम काली मिर्च चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार प्रयोग करें। इससे गुदा का बाहर निकलना बंद हो जाता है।

मूत्र रोग (पेशाब संबंधी बीमारी) में फायदेमंद मिर्