Thursday, February 22, 2024

आरडी (RD) और एफडी (FD) में अंतर क्या है? समझें।

आरडी और एफडी का नाम सेविंग के संदर्भ में बेहद आम है। इनमें अंतर (Difference between RD and FD) क्या है? ये जानते हैं…

आरडी और एफडी में अंतर (Difference between RD and FD)

आरडी RD और एफडी FD में अंतर : बचत के लिए निवेश करते समय हमें अक्सर आरडी (RD) और एफडी (FD) के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो जाती है, तब मन में जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि आरडी क्या है? और एफडी क्या है? किस में निवेश करना सही रहेगा, जिससे सही मायनों में बचत हो सके और अधिक फायदेमंद हो। आइए दोनों को समझते हैं और दोनों के बीच के अंतर को समझते है…

आरडी RD और एफडी FD में अंतर को समझें

आरडी RD और एफडी FD में अंतर को समझते हैं…

आरडी (RD) क्या है?

आरडी यानी रिकरिंग डिपॉजिट एक बचत निवेश योजना है। इसको हिंदी में ‘आवर्ती जमा’ भी कहते हैं। यह एक छोटी अवधि की बचत निवेश योजना है, जिसके माध्यम से शॉर्ट टर्म यानि छोटी अवधि के निवेश किया जाता है। इस बचत निवेश योजना के तहत एक किसी बैंक में एक रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खोलना होता है और हर महीने एक निश्चित एकमुश्त रकम एक निश्चित अवधि तक जमा करनी होती है।

वह समय अवधि पूरी होने के बाद ब्याज सहित जो रकम बनती है उसे आरडी खाते से निकाला जा सकता है। उदाहरण के लिए आपने एक साल के लिए आरडी (RD) खोली है। आपने ₹2000 प्रतिमाह का निवेश चुना है तो आपको अपने आरडी खाते में हर माह ₹2000 जमा कराने होंगे। इस तरह 1 साल तक आपकी कुल जमा रकम ₹24000 हो जायेगी।

इस रकम पर आपको 6% से 9% का वार्षिक ब्याज मिलेगा। ब्याज सहित आपकी जो रकम बनेगी आपक आरडी के मैच्योर होने पर निकाल सकते है। आप चाहें तो उसी आरडी को आगे बढ़ा सकते हैं। आरडी (RD) में निवेश करना उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होता है, जिन्हें शार्ट टर्म के लिए निवेश करना होता है और जिन्हें बहुत जल्दी ही पैसे की आवश्यकता पड़ सकती है।

आरडी (RD) के क्या फायदे हैं?

आरडी (RD) के मुख्य फायदा यह है कि आरडी (RD) छोटे समय का निवेश है। इसके लिए यदि साल भर बाद हमें किसी कार्य के लिए पैसे की जरूरत पड़ने वाली है, तो आरडी (RD) खोल कर बचत कर सकते हैं और आपकी जरूर का समय आने पर आरडी (RD) के मैच्योर से पैसा निकाल सकते हैं।

आरडी में जो ब्याज मिलता है, वह बचत खाते से अधिक मिलता है। इसलिए बचत खाते में पैसा जमा रखने की जगह आईडी खोलकर पैसा जमा किया जाए तो अधिक ब्याज मिलने की संभावना होती है।

आरडी छोटे निवेशकों के लिए सही बचत योजना है, जो एक साथ एक मुश्त और बड़ी रकम का निवेश नही कर सकते इसलिये वो आरडी के माध्यम से छोटा निवेश कर सकते है।

आरडी (RD) 100 से रूपये से लेकर कितनी भी पैसों से की जा सकती है। आप कम से कम से एक साल से लेकर पाँच साल तक की आरडी खोल सकते हैं। आरडी पर ब्याजदर 6% से 9% तक मिलती है जो अलग-अलग बैंकों मे अलग-अलग होती है। ये ब्याज दर समय समय पर बदलती रहती है।

एफडी (FD) क्या है?

एफडी यानी फिक्स डिपाजिट जिसे हिंदी में ‘सावधि जमा खाता’ कहते हैं। यह लंबे समय के लिए निवेश करने की एक या अधिक सुरक्षित बचत योजना है।

एफडी में निवेश करने से निवेशकों को सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि एफडी में निवेश करते समय होने पर निवेशक को कितना लाभ प्राप्त होगा इसका निवेशक पहले से अनुमान हो जाता है। इसमें पहले से तय ब्याज दर पर एफडी में निवेश किया जाता है और वह ब्याज निश्चित रहती है यानि एफडी खोलते समय जो ब्याज दर तय होती है वो पूरी अवधि के दौरान नही बदलेगी। ना ही अधिक मिलेगी नहीं कम होगी, इससे निवेशक को एक निश्चित अनुमान हो जाता है कि उसे एफडी में निवेश करने पर कितना लाभ प्राप्त होगा।

एफडी उन निवेशकों के लिए सही रहती है जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। जिनके पास अधिक धन है और वह धन की बड़ी राशि को लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। एफडी किसी भी बैंक या डाकघर में खोली जा सकती है।

एफडी में एक बार में एकमुश्त रकम जमा करनी पडती है इसमे आरडी की तरह हर महीने पैसा जमा नही करना पड़ता। एफडी को बीच में जरूरत पड़ने पर निकाला जा सकता है। लेकिन निवेशक को एफडी बीच तोड़ने का शुल्क देना पड़ता है। एफडी कम से कम 6 महीने और अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए की जा सकती है।

एफडी की ब्याज दर सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज दर से अधिक होती है जो 6 से 9% के बीच हो सकती है। समय-समय पर ब्याज दरें परिवर्तित होती रहती है। लेकिन एफडी में एक बार अगर निवेश कर दिया तो एफडी में वही ब्याज दर रहेगी जो एफडी में निवेश करते समय तय हुई थी।

एफडी (FD) के क्या फायदे हैं?

एफडी (FD) में निवेश करने का मुख्य फायदा यह है कि यह लंबे समय के निवेश के लिए एक सुरक्षित योजना है। बड़ी राशि का निवेश करने के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। एफडी (FD) पर मार्केट के उतार-चढ़ाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि एफडी में निवेश करते समय जो ब्याज दर तय हो जाती है वह ही स्थिर रहती है।

मार्केट में ब्याज दर कम ज्यादा होने पर एफडी की ब्याज दर प्रभावित नहीं होती। एफडी में निवेश करने से निवेशकों को इन्कमटैक्स में भी छूट मिल सकती है। यदि निवेशक को किसी आपात स्थिति में धन की आवश्यकता पड़तीहै तो वह अपने एफडी अकाउंट के आधार पर बैंक से लोन ले सकते हैं और फिर सही समय आने पर बैंक को उसकी वापसी कर सकते हैं।

आरडी (FD) और एफडी (FD) में क्या अंतर है?

आरडी में एक निश्चित अवधि के लिए निवेश किया जाता है और यह निवेश हर महीने पैसा जमा करने के आधार पर किया जाता है। जबकि आरडी में एक निश्चित अवधि के लिए निवेश किया जाता है, लेकिन यह निवेश एक बार में ही करना होता है। आरडी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिनकी एक निश्चित मासिक आय है और वह अपने उस मासिक आय से हर महीने निवेश करना चाहते हैं।

एफडी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिनके पास एक बड़ी धनराशि अतिरिक्त पैसे के रूप में है और वह उसे एफडी में निवेश करके अपनी धनराशि को ना केवल सुरक्षित कर सकते हैं बल्कि उस पर अच्छा ब्याज भी प्राप्त कर सकते हैं। एफडी 6 महीने से लेकर 10 साल की अवधि तक खोली जा सकती है।

एफडी भी 6 महीने से लेकर 10 साल की अवधि तक खोली जा सकती है। आरडी में निवेश करने पर इनकम टैक्स में कोई लाभ प्राप्त नहीं होता जबकि एफडी में निवेश करने पर इनकम टैक्स में छूट मिल सकती है। आरडी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ सकता है, जबकि एफडी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव नही पड़ता है, उसकी ब्याज दर स्थिर रहती है।

रिटर्न की अगर तुलना की जाए तो आरडी की तुलना में एफडी ज्यादा रिटर्न देती है, और उस पर अधिक ब्याज प्राप्त होता है।

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