Sunday, March 3, 2024

22 जनवरी को राम मंदिर में श्री राम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कराने के लिए पूजन कार्य पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित कराएंगे। जाने कौन हैं?
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22 जनवरी 2024 को होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में श्री राम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठान के लिए विशेष पूजा के मुख्य पुजारी पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित (Pandit Laxmikant Dixit) के नेतृत्व में सम्पन्न होगी। कौन हैं पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित?

राम मंदिर में श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा के मुख्य पुजारी पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित (Pandit Laxmikant Dixit)

22 जनवरी 2024 को प्रभु श्री राम मंदिर में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम की तैयारी जोर शोर पर चल रही है। यह कार्यक्रम बेहद भव्य और विशाल स्तर पर किया जा रहा है, जिसकी गूंज देश-विदेश में गूंज उठी है। समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों को बुलाया गया है और समारोह के मुख्य अतिथि भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे।

इस बड़े विशाल भौतिक कार्यक्रम में पूजन कार्य के लिए जिन विद्वान पंडित को नियुक्त किया गया है, वह भी अपने आप में विशिष्टता रखते हैं।

22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में गर्भ गृह में प्रभु श्री राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के पूजन कार्य का नेतृत्व जो पंडित करेंगे, उनका नाम पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित है। उनके नेतृत्व में ही प्राण प्रतिष्ठा की संपूर्ण पूजा संपन्न होगी।

कौन है लक्ष्मीकांत दीक्षित?

लक्ष्मीकांत दीक्षित एक जाने-माने विद्वान हैं। वह काशी में रहते हैं और वर्तमान समय में काशी में स्थित सामवेद महाविद्यालय में वरिष्ठ शिक्षक का कार्य भी करते हैं। उन्होंने इसी विद्यालय से यजुर्वेद की पढ़ाई की थी और अब इसी महाविद्यालय में शिक्षक का कार्य करते हैं।

लक्ष्मीकांत दीक्षित वाराणसी के मीरघाट में स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य हैं। सांगवेद महाविद्यालय की स्थापना तत्कालीन काशी नरेश ने की थी। वह वेदों के अच्छे जानकार हैं और यजुर्वेद में उनको विशिष्टता प्राप्त है। वह संपूर्ण सनातन वैदिक विधि से पूजा अनुष्ठान कार्य में भी दक्ष माने जाते हैं, इसी कारण उन्हें इस विशेष पूजा के लिए चुना गया है। उनके चाचा गणेश दीक्षित भट्ट भी जाने-माने विद्वान थे और उन्हीं से उन्होंने वेदों और अनुष्ठान की दीक्षा प्राप्त की है।

पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के पुत्र सुनील दीक्षित हैं, जिन्होंने बताया था कि उनके पूर्वज महाराष्ट्र के सोलापुर के जेऊर नामक गाँव में रहा करते थे। वहीं से वे लोग आकर काशी में बस गए। अब वह कई वर्षों से काशी में ही निवास कर रहे हैं।

उनके बारे में कहा जाता है कि उनके पूर्वजों में से एक पूर्वज का नाम विश्वेश्वर भट्ट था। जिन्हें गागा भट्ट के नाम से भी जाना जाता है। गागा भट्ट सत्रहवीं शताब्दी में काफी प्रसिद्ध थे। बतातें हैं कि गागा भट्टा ने ही 1674 ईस्वी में छत्रपति महाराष्ट्र के राज्याभिषेक के पूजन कार्यक्रम का नेतृत्व किया था। गागा भट्ट महाराष्ट्र के ही रहने वाले महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण थे और वह महाराष्ट्र के पैठण गांव के रहने वाले थे। गागा भट्ट के बाद उनके कुछ वंशज वाराणसी रहने चले आए और पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित उन्हीं के वंशज हैं।

पूजन कार्य में कितने पंडित सम्मिलित होंगे?

पंडित राम लक्ष्मीकांत दीक्षित के नेतृत्व में राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा में 101 पंडित सम्मिलित होंगे। यह पूजन कार्य विशाल भव्य स्तर पर होगा। पंडित लक्ष्मीकांत भट्ट प्रधान पुजारी होंगे।

16 जनवरी से पूजन कार्य का अनुष्ठान आरंभ हो चुका है जो 22 जनवरी को होने वाले मुख्य पूजन से पूर्व का अनुष्ठान कार्य है। पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित देश भर से आने वाले सभी 121 पंडितों की पूरे दल का नेतृत्व करेंगे।

इन सभी 101 पंडितों में देश के अलग-अलग कोनों से आने वाले विद्वान पंडित सम्मिलित हैं, वहीं इनमें से काशी से 40 के आसपास पंडित विद्वान भी शामिल होंगे।


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