Tuesday, July 23, 2024

Kookaburra ball-Duke ball-SG ball – कूकाबूरा बॉल, ड्यूक बॉल तथा एसजी बॉल क्या होती हैं और इनमें क्या अंतर है?
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क्रिकेट के खेल में हम अक्सर कूकाबूरा बॉल, ड्यूक बॉल और एसजी बॉल (Kookaburra ball-Duke ball-SG ball) जैसे नामों को सुनते हैं। क्रिकेट जगत में इन तीनों बॉल का उपयोग किया जाता है। कोई देश कूकाबूरा बाल से खेलता है, कहीं पर ड्यूक बॉल से क्रिकेट खेली जाती है तो कहीं पर एसजी बॉल से क्रिकेट खेली जाती है।

आइए जानते हैं कि कूकाबूरा बॉल, ड्यूक बॉल और एलजी बॉल (Kookaburra ball-Duke ball-SG ball) क्या है। इनमें क्या अंतर है। कौन-कौन से देशों में और कहाँ-कहाँ पर इन गेदों से क्रिकेट खेली जाती है…

कूकाबूरा बॉल, ड्यूक बॉल और एसजी बॉल (Kookaburra ball-Duke ball-SG ball)

यूँ तो क्रिकेट में बहुत तरह की गेंदों से क्रिकेट खेली जाती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में अधिकतर तीन तरह की गेंदों से क्रिकेट खेली जाती है, वो हैं…

  • कूकाबूरा बॉल (Kookaburra ball)
  • ड्यूक बॉल (Duke ball)
  • एसजी बॉल (Sanspareil Greenlands ball)

कूकाबूरा बॉल (Kookaburra ball)

यदि विश्व क्रिकेट में किसी गेंद से सबसे अधिक क्रिकेट खेला जाता है तो वह कूकाबूरा गेंद है। कूकाबूर बॉल से सबसे अधिक से अधिक सबसे अधिक देशों में क्रिकेट खेली जाती है। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान, जिंबॉब्वे जैसे देश प्रमुख हैं।

इन देशों कूकाबूरा की गेंद से ही विश्व स्तर की क्रिकेट खेली जाती है। कूकाबूरा बॉल ऑस्ट्रेलिया में बनाई जाती है। यह ऑस्ट्रेलिया में स्थित कूकाबूरा नाम की कंपनी द्वारा बनाई जाती है। ये कंपनी क्रिकेट और फील्ड हॉकी उपकरण बनाती है। कूकाबूरा बॉल का नाम ऑस्ट्रेलिया के एक जीव से लिया गया है, जो कि अधिकांशतः ऑस्ट्रेलिया में ही पाया जाता है।

कूकाबूरा बॉल को बनाते समय इसकी सिलाई हाथ से नही की जाती है, बल्कि इसकी सिलाई मशीन से की जाती है। कूकाबूरा बॉल की सीम दबी हुई होती है। ये बॉल खेल में शुरु के 20-30 ओवर तेज गेंदबाजों के लिए अधिक मददगार होती है। बाद में ये बल्लेबाजों के लिए आसान होती जाती है।

इस बॉल की सीम दबी हुई होने के कारण ये बॉल स्पिनरों के लिए अधिक मददगार नही होती है। इसीलिए ये बॉल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउध अफ्रीका जैसों देशों में अधिक लोकप्रिय हैं, क्योंकि यहाँ की पिचें तेज गेंदबाजों के अनूकूल होती है।

ड्यूक बॉल (Duke ball)

ड्यूक बॉल से जिन देशों में सबसे अधिक क्रिकेट खेली जाती है, वह देश हैं, इंग्लैंड, आयरलैंड, स्कॉटलैंड, वेस्टइंडीज आदि। ड्यूक बॉल का खासियत ये है कि इसकी सिलाई हाथ से ही की जाती है। इसकी सीम उभरी हुई होती है। ड्यूक बॉल से भी कूकाबूरा बॉल की तरह तेज गेंदबाजों को अधिक मदद मिलती है।

इस बॉल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बॉल 60 ओवर तक कठोर बनी रहती है और इससे 20-30 ओवर के बाद ही गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग मिलने लगती है, जबकि कूकाबूरा बॉल और एसजी बॉल से लगभग 50 ओवरों के बाद रिवर्स स्विंग मिलती है। ड्यूक बॉल भी कूकाबूरा बॉल की तरह तेज गेंदबाजों के लिए मददगार होती है।

ड्यूक बॉल इंग्लैंड में ही स्थित कंपनी द्वारा बनाई जाती है। यह कंपनी 1760 में ड्यूक फैमिली द्वारा बनाई गई थी। यह कंपनी क्रिकेट के उपकरण बनाती है। इस कंपनी को 1987 में भारतीय बिजनेस में दिलीप जाजोदिया ने खरीद लिया था यानी भारतीय मूल के मालिक द्वारा यह कंपनी अब ड्यूक बॉल बनाती है, जो कि इंग्लैंड, आयरलैंड, वेस्टइंडीज के क्रिकेट की सबसे प्रमुख बॉल है।

एसजी बॉल (Sanspareil Greenlands ball)

एसजी बॉल जिसका पूरा नाम सन्सपैरील ग्रीनलैंड्स (Sanspareil Greelands) है, यह बॉल पूरी तरह से विशुद्ध भारतीय बॉल है और यह क्रिकेट बॉल भारत के क्रिकेट की सबसे प्रमुख बॉल है।  एसजी बॉल की खासियत यह होती है कि यह बॉल स्पिनरों के लिए अधिक मददगार होती है। इसी कारण भारत में अधिकतर क्रिकेट एसजी बॉल से खेली जाती है, क्योंकि भारत की पिचें स्पिनरों के लिए अधिक मददगार होती हैं।

भारत की सारी घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट एसजी बॉल से खेली जाती है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जो एसजी बॉल का ही प्रयोग करता है। अन्य देशों में सबसे अधिक कूकाबूरा बॉल का प्रयोग किया जाता है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश, जिंबाब्वे, अफगानिस्तान, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, भारत का ही प्रयोग करता है।

एसजी बॉल उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में स्थापित कंपनी द्वारा बनाई जाती है। यह कंपनी 1950 में बनी थी। तब से ये कंपनी एसजी बॉल बनाती है। एसजी बॉल कंपनी की स्थापन द्वारकानाथ और केदारनाथ आनंद द्वारा 1950 में मेरठ मे की गई थी।

सन 1931 में पहले केदारनाथ आनंद और द्वारकानाथ आनंद सन्सपैरिल कंपनी की स्थापना स्यालकोट में की, जो कि अब पाकिस्तान में है, वहीं पर उन्होंने 1940 में ग्रीनलैंड्स कंपनी की स्थापना की, जिसका मुख्य कार्य एक्सपोर्ट करना था। भारत के विभाजन के बाद दोनों भाई भारत आ गए और आगरा-मेरठ में बस गए।

मेरठ में ही इन दोनों ने 1950 में उन्होंने अपनी पहली दोनों कंपनियों को मिलाकर एसजी कंपनी की स्थापना की, जिसने ड्यूक बॉल बनाना शुरु किया। ये कंपनी 1950 से एसजी बॉल बना रही है। एलजी बॉल के अलावा ये कंपनी खेलों के कई उपकरण बनाती है।

इसके बनाए क्रिकेट बैट बहुत लोकप्रिय हैं, जिनकी मांग भारत के अलावा विदेशों विशेषकर ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड में बहुत है। समय-समय पर भारत के ही कई क्रिकेटरों ने एसजी बॉल की गुणवत्ता की आलोचना की है, जिसमें रविचंद्रन अश्विन, कुलदीप यादव, उमेश यादव, विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का नाम प्रमुख है।

उनके अनुसार एसजी बॉल की अपेक्षा कूकाबूरा बॉल तथा ड्यूक बॉल की गुणवत्ता अधिक अच्छी होती है। हालांकि भारत में एसजी बॉल को ही सबसे अधिक सपोर्ट दिया जाता है और भारत में एसजी बॉल से ही सबसे अधिक क्रिकेट खेली जाती है।

Kookaburra ball-Duke ball-SG ball


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