धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहाँ जाने की अनुमति मांगी और क्यों​?

धृतराष्ट्र ने वन में जाने की अनुमति इसलिए मांगी क्योंकि धृतराष्ट्र का मन राज्य से सुख भोग में नहीं लगता था।

महाभारत के युद्ध की समाप्ति के बाद कहने को तो युधिष्ठिर ने धृतराष्ट्र के लिए हर तरह की सुख-सुविधा की व्यवस्था कर रखी थी। उनके लिए राजमहल में सब तरह के सुख के साधन थे। लेकिन फिर भी धृतराष्ट्र का मन इन सुख-भोगों में नहीं लगता था। भीम अक्सर उनसे कभी-कभी कड़वी बातें कह दिया करते थे। इससे धृतराष्ट्र के मन को ठेस पहुंचती थी। इन्हीं सब कारणों से धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से वन में जाने की अनुमति मांगी ताकि वहाँ पर शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

धृतराष्ट्र द्वारा युधिष्ठिर से बन जाने की अनुमति मांगने पर युधिष्ठिर को अच्छा नहीं लगा। वह धृतराष्ट्र से बोले आज से आपका पुत्र युयुत्सु राज्य की गद्दी पर बैठेगा और सारा शासन का कार्य का समाधि का लेकिन आप वन जाने की जिद ना करें। लेकिन धृतराष्ट्र नहीं माने और वह कुंती गांधारी तथा संजय के साथ वह वन चले गए।

 


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“जानता हूँ, युधिष्ठिर ! भली भाँति जानता हूँ। किंतु सोच लो, मैं थककर चूर हो गया हूँ, मेरी सभी सेना तितर-बितर हो गई है, मेरा कवच फट गया है, मेरे शस्‍त्रास्‍त्र चुक गए हैं। मुझे समय दो युधिष्‍ठिर ! क्‍या भूल गए मैंने तुम्‍हें तेरह वर्ष का समय दिया था ?” क) वक्‍ता कौन है ? वह क्‍या जानता था ? ख) वक्‍ता इस समय असहाय क्यों हो गया था ? ग) श्रोता को तेरह वर्ष का समय क्‍यों दिया गया था ? घ) श्रोता को जो समय दिया गया था , उसके पीछे वक्‍ता का क्‍या उद्‌देश्‍य था ? क्‍या वह अपने उद्‌देश्‍य में सफल हो सका ?​

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