स्त्री माया न जोड़े यहाँ माया शब्द किस ओर संकेत कर रहा है? स्त्रियों द्वारा माया जोड़ना प्रकृति प्रदत्त नहीं, बल्कि परिस्थितिवश है। वे कौन-सी परिस्थितियाँ हैं जो स्त्री को माया जोड़ने के लिए विवश कर देती है?

‘स्त्री माया ना जोड़ें’ यहां पर ‘माया’ शब्द धन की ओर संकेत कर रहा है। स्त्रियों द्वारा माया जोड़ना प्रकृति प्रदत्त नहीं बल्कि परिस्थितिवश है। वे परिस्थितियां उनके घर की परिस्थितियां होती हैं, स्त्रियों को घर गृहस्थी का संचालन करना होता है, उन्हें अपने घर की सभी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही अपने घर का बजट बनाना पड़ता है। पुरुष तो बस पैसे कमाकर लाकर स्त्री के हाथ में रख देते हैं। घर के सारे बजट और भविष्य की योजनाओं का निर्धारण स्त्री को ही करना होता है, पुरुष इस मामले में लापरवाह होते हैं। इसलिए स्त्रियां घर के बजट बनाकर घर को समझदारी से चलाते हुए थोड़ी बहुत बचत भी करती रहती हैं ताकि भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न होने पर वो पैसा काम आ सके। इसी कारण हर घर में स्त्रियां चुपचाप कुछ ना कुछ बचत अवश्य करती रहती हैं, यही बचत आगे चलकर उन्हें काम आती है।

पाठ के बारे में…

यह पाठ जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखित एक निबंध है, जिसमें उन्होंने बाजारवाद और उपभोक्तावाद की विवेचना की है। इस निबंध के माध्यम से उनकी गहरी वैचारिकता और सहायक सुलभ लालित्य का प्रभाव देखने को मिलता है। उपभोक्तावाद एवं बाजारवाद पर पर व्यापक चर्चा के परिप्रेक्ष्य में यह पाठ एक महत्वपूर्ण निबंध है। कई दशक पहले लिखा गया जैनेंद्र कुमार का यह निबंध आज भी अपने लिए बाजारवाद एवं उपभोक्तावाद के संदर्भ में पूरी तरह प्रासंगिक है और बाजारवाद की मूल अंतर्वस्तु को समझने के मामले में बेजोड़ है।जैनेंद्र कुमार हिंदी साहित्य के जाने-माने साहित्यकार रहे हैं, जिन्होंने अनेक कहानियां एवं निबंधों की रचना की। उनका जन्म 1905 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में हुआ था।

उनकी प्रमुख रचनाओं में अनाम, परख, स्वामी, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, एक रात, दो चिड़िया, फांसी, नीलम देश की राजकन्या, प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, पूर्वोदय, साहित्य का श्रेय और प्रेय, सोच-विचार, समय और हम, मुक्तिबोध नामक उपन्यास तथा पाजेब नामक कहानी संग्रह हैं।

उन्हें साहित्य अकादमी तथा भारत भारती पुरस्कार जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें भारत सरकार द्वारा द्वारा पद्म भूषण सम्मान भी मिल चुका है। उनका निधन सन 1990 में हुआ।

संदर्भ पाठ :

बाजार दर्शन, लेखक : जैनेंद्र कुमार ( कक्षा – 12, पाठ – 12, हिंदी स्पर्श 2)

 

 

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पाठ के अन्य प्रश्न

लेखक ने पाठ में संकेत किया है कि कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

बाज़ार दर्शन पाठ में किस प्रकार के ग्राहकों की बात हुई है? आप स्वयं को किस श्रेणी का ग्राहक मानते/मानती हैं?

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