कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।

कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ये पंक्तियां इस प्रकार हैं…

1. मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण फैला है विशाल!

2. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

पाठ के बारे में…

इस पाठ में सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता पर ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ को प्रस्तुत किया गया है।
सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि कहे जाते हैं। उन्होंने प्रकृति के सुंदर मनोरम दृश्यों का जितनी सुंदरता से वर्णन किया है, वैसा और किसी कवि ने नहीं किया।

इस कविता में कवि ने ऐसे ही रोमांच और प्रकृति के सौंदर्य को अपनी आँखों से निरखने की अनुभूति को प्रकट किया है।सुमित्रानंदन पंत जो हिंदी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं, वह प्रकृति के सुकुमार कवि हैं। उनका जन्म 20 मई को उत्तराखंड के कौसानी में हुआ था, जो कि अल्मोड़ा जिले में स्थित है। बचपन से उन्हें कविता में गहन रुचि थी और मात्र 7 वर्ष की आयु में ही कविता पाठ और सृजन आरंभ कर दिया था। उनकी अधिकतर कविता में प्रकृति-प्रेम और रहस्यवाद की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। इसी कारण प्रकृति के सुकुमार कवि कहे गए हैं। उनका निधन 1977 में हुआ था।

संदर्भ पाठ :

सुमित्रानंदन पंत, ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ (कक्षा -10, पाठ – 5, हिंदी, स्पर्श, भाग -2)

 

इस पाठ के अन्य प्रश्न

आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है − (क) अनेक शब्दों की आवृति पर (ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर (ग) कविता की संगीतात्मकता पर

इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

 

इस पाठ के सभी प्रश्नों को एक साथ पाने के लिए इस लिंक पर जायें…

पर्वत प्रदेश में पावस : सुमित्रानंदन पंत (कक्षा-10 पाठ-5 हिंदी स्पर्श 2)

 

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