Tuesday, October 3, 2023

“कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?
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इस पाठ में हमने पढ़ा कि लेखिका ने बताया था कि किस तरह सिक्किमी महिलाएं पत्थर पर बैठकर कुदाल से दूसरा पत्थर तोड़ रही थी और सँकरे रास्ते को चौड़ा कर रही थीं। यह ऊँचे पर्वतीय इलाकों में एक कठिन कार्य था। जरा सी चूक होने पर उनका जीवन संकट में पड़ सकता था। इसके अलावा कई महिलाओं की पीठ पर टोकरी में उनके बच्चे भी बंधे हुए थे। छोटे नन्हे बच्चों को साथ में लेकर कार्य करना बेहद ही दुष्कर कार्य था।
हरे-भरे बागानों में बोकू परिधान पहने युवतियाँ चाय की पत्तियां तोड़ रही थीं। यह भी एक कठिन पारिश्रमिक कार्य था। छोटे-छोटे बच्चे जो इतनी ऊँची चढ़ाई विद्यालय जाते और फिर वापस आकर अपनी माँओं के कार्यों में हात बँटाते थे। वह भी अपना योगदान दे रहे थे।
इस तरह किसी क्षेत्र के विकास में स्थानीय निवासियों का बहुत बड़ा योगदान होता है, यह लोग सरकार के भरोसे न बैठकर अपना कार्य करते रहते हैं। यदि यह लोग अपने हाथ खड़े कर दें तो क्षेत्र का विकास ही रुक जाए।
यह लोग जितना परिश्रम करके अपने क्षेत्र में सुधार ला रहे थे, उसके बदले में उन्हें जो मिल रहा था वो बहुत कम था। उन्हें अपने जीवनयापन के लिए कठोर परिश्रम करना पड़ता था और जिस का कार्य करके यह समाज को जो दे रहे थे, उसके बदले में उन्हें बहुत कम मिल रहा था। देश की आर्थिक प्रगति में इन्हीं सभी निवासियों का सबसे अधिक योगदान होता है, जो अपने कर्तव्य को अपनी तन्मयता से पूरा करते हैं, भले ही उन्हें समाज से बदले में बहुत अधिक मिले ना मिले। वे थोड़ा सा लेकर भी समाज को बहुत अधिक वापस लौटा देते हैं।

 

पाठ के बारे में…

‘साना साना हाथ जोड़ि’ यह पाठ ‘मधु कांकरिया’ द्वारा लिखा गया एक यात्रा वृतांत है, जिसमें उन्होंने सिक्किम की अपनी यात्रा का वर्णन किया है। इस यात्रा वृतांत में उन्होंने सिक्किम के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया है और सिक्किम में जितने दिन उन्होंने बिताए, उन अनुभवों को साझा किया है। जितेन नार्गे नामक एक गाइड की यात्रा में उनका मार्गदर्शन कर रहा था।
मधु कांकरिया प्रसिद्ध हिंदी लेखिका रही हैं। जिनका जन्म 1957 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अनेक यात्रा वृतांत, कहानि, उपन्यास आदि की रचना की है। उनकी प्रमुख रचनाओं में पत्ता खोर (उपन्यास), सलाम आखरी, खुले गगन के लाल सितारे, बेचते हुए, अंत में यीशु (कहानी संग्रह) आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने कई यात्रा वृतांत भी लिखे हैं।

संदर्भ पाठ :

“साना-साना हाथ जोड़ि” – मधु कांकरिया (कक्षा – 10, पाठ – 3, हिंदी, कृतिका भाग -2)

 

इस पाठ के अन्य प्रश्न उत्तर…

देश की सीमा पर बैठे फ़ौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?

प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है?

कटाओ’ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए?

प्रदूषण के कारण स्नोफॉल में कमी का जिक्र किया गया है? प्रदूषण के और कौन − कौन से दुष्परिणाम सामने आए हैं, लिखें।

आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए।

सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन−किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।

प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन−कौन से दृश्य झकझोर गए?

प्रकृति उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

इस यात्रा − वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन − जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?

लोग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक−सी क्यों दिखाई दी?

जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।

कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?

गंतोक को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया?

झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?

 

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