आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब−तब खेलते−खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।


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भोलानाथ और उसके साथियों जब खेलते खेलते किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं, उसी तरह की कई तुकबंदिया हमने भी अपने बचपन में में खेलते समय अपने साथी-दोस्तों के साथ मिलकर की ।

कुछ तुकबंदियाँ इस प्रकार हैं…

अक्कड़-बक्कड़ बंबे बो,
अस्सी-नब्बे पूरे सौ
सौ में लगा धागा,
चोर निकल कर भागाचंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चाँदनी रात में चाँदी के चम्मच से चमचम चखाई।चंदा मामा दूर के
पुए पकाए बूरके
आप खाएं थाली में
मुन्ने को दे प्याली मेंइस तरह की तुकबंदियां हम भी अपने बचपन में करते थे।

पाठ के बारे में…

‘माता का आँचल’ पाठ शिवपूजन सहाय द्वारा लिखा गया पाठ है, जिसमें उन्होंने भोलानाथ के बचपन के प्रसंग का वर्णन किया है। इस पाठ में भोलानाथ एक बच्चा है जिसका अपने पिता से बेहद लगाव था और वह हर समय अपने पिता के साथ ही रहता था। उसके पिता भी उसे हर समय अपने साथ रखते और उसे घुमाने ले जाते। उसे साथ बिठा कर पूजा करते, लेकिन जब भी कोई दुखद स्थिति आती तो वह अपने माँ के पास ही जाता था। माँ के आँचल की शरण ही लेता था। इसी कारण इस पाठ को ‘माता का आँचल’ भी कहा जाता है |
शिवपूजन सहाय हिंदी के जाने-माने लेखक रहे हैं, जिन्होंने अनेक हिंदी कहानियों की रचना की। उनका जन्म अगस्त 1893 में बिहार के शाहाबाद में हुआ था। उनका निधन 21 जनवरी 1963 को पटना में हुआ। उन्होंने अनेक कथा एवं उपन्यासों की रचना की। उन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

संदर्भ पाठ :

माता का आँचल – शिवपूजन सहाय, (कक्षा – 10, पाठ – 1, कृतिका, भाग -2)

 

हमारे अन्य प्रश्न उत्तर :

आपके विचार से भोलनाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

 

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