Wednesday, October 4, 2023

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला – जन-जन के कवि (जीवनी)
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जीवन परिचय

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

 

सूर्यकातं त्रिपाठी निराला सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध कवि रहे हैं, जो छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक प्रमुख कवि थे। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अपने अनमोल रचनाओं से हिंदी साहित्य जगत में एक विशिष्ट स्थान हासिल किए हुए हैं। उनके द्वारा रचित कविताओं से उन्हें विश्व स्तरीय ख्याति मिली।

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को हिंदी साहित्य का सूर्य कहा जाये तो इस बात में कोई अतिश्योक्ति नही होगी। वह अपनी जनप्रिय रचनाओं, जिनमे आम आदमी के जनजीवन से जुड़ी होती थी। जो शोषित समाज की व्यथा का प्रतिनिधित्व करने को जानी जाती है, के लिये प्रसिद्ध रहे हैं।

जन्म

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी 1896 ईस्वी को बसंत पंचमी के दिन बंगाल के मेदिनीपुर नामक स्थान पर हुआ था।

जीवन परिचय

उनके पिता का नाम पंडित राम सहाय तिवारी था, जो बंगाल के महिषादल राज्य के मेदिनीपुर जिले में एक सरकारी सिपाही थे। निराला जी के पिताजी मूल से उत्तरप्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) के रहने वाले थे। जब वह मात्र 3 वर्ष के थे तो उनकी माँ की मृत्यु हो गई।

निराला जी का जन्म बंगाल में ही जीता, जिस कारण बंगाली संस्कृति का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा था। निराला जी की शिक्षा दीक्षा बंगाली माध्यम के विद्यालय से ही शुरू हुई। 10वीं परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने घर पर ही संस्कृत एवं अंग्रेजी की शिक्षा दीक्षा ग्रहण की। उन्हें बचपन से ही साहित्य में बेहद रूचि की, वह हिंदी, बंगला, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा में पूरी तरह निपुण थे। उन पर भारतीय धार्मिक साहित्य का भी बेहद गहरा प्रभाव पड़ा था। रामचरितमानस उनका प्रिय ग्रंथ था। जैसे जैसे वह बड़े होते गए दर्शन के क्षेत्र में भी उनकी रूचि होने लगी और उनके अंदर दार्शनिकता का भाव आने लगा। यद्यपि वह पढ़ाई में बेहद कुशल नही थे लेकिन उनकी खेल, तैराकी, कुश्ती आदि में रहती थी।

विवाह एवं जीवन यात्रा

निराला का विवाह 15 वर्ष की आयु में मनोहरा देवी से हुआ। विवाह के बाद उनका जीवन कुछ समय सुखमय बीता। यह उनकी पत्नी ही थीं जिनकी प्रेरणा से उन्होंने हिंदी में कविताएं लिखना आरंभ किया था। उनकी पत्नी उनके लिए बेहद प्रेरणास्रोत बनी रहीं लेकिन निराला का वैवाहिक जीवन लंबे समय तक नहीं चला। जब उनकी पत्नी 20 वर्ष की थी तभी उनकी मृत्यु हो गई। इस तरह निराला जीवन में फिर एकाकी हो गए।

उनकी सरोज नाम की एक पुत्री थी, उसकी भी शीघ्र ही मृत्यु हो गई, जिस कारण निराला मानलिर अवसाद की स्थिति में आ गए थे। उन्होंने अपनी पुत्री सरोज पर आधारित ‘सरोज स्मृति’ नामक कविता की रचना की है। अपनी पत्नी के निधन के बाद उनकी पुत्री से बेहद लगाव था। उनकी पुत्री सरोज ही उनके लिये जीवन जीने का प्रेरणास्रोत बनी थी, लेरिन पुत्री के मृत्यु के बाद निराला पूरी तरह टूट गये थे।

निराला का जीवन बेहद संघर्षमय और कष्टमय रहा। वह अपने पूरे जीवन आर्थिक तंगी और परिजनों के वियोग के संताप से जूझते। रहे। मात्र 3 वर्ष की आयु में ही उनकी माता की मृत्यु हो गई थी। जब वह 15 वर्ष के थे तो उनके पिता की मृत्यु हो गई। पत्नी की भी शीघ्र ही मृत्यु हो गई और फिर उनकी पुत्री भी उनका साथ छोड़ कर चली गई इस तरह उनके सभी प्रियजन उनको छोड़ कर जा चुके थे और वह एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे थे।

उनके ऊपर कई आश्रित परिजन भी थे, जिनकी जिम्मेदारी उनके ऊपर आन पड़ी और उनकी आय इतनी नहीं थी कि वह सभी का पालन पोषण कर सकें। इसी कारण वे अपने जीवन में अधिकतर समय आर्थिक तंगी से जूझते रहे। उनका पूरा जीवन संघर्ष में बीतास लेकिन उन्होंने संघर्षों के आगे हार नहीं मानी और ना ही कोई समझौता किया

साहित्य यात्रा

यूं तो निराला ने साहित्य की हर विधा में अपना हाथ आजमाया। उन्होंने पद के अलावा गद्य नी कहानी निबंध लेख आदि की भी रचना की उन्होंने कई ग्रंथों के अनुवाद भी किए बाल साहित्य भी लिखा लेकिन उन्हें असली ख्याति अपने काव्य कृतियों से ही मिली और वे मुख्य रूप से एक कवि के तौर पर ही जाने जाते हैं।

हिंदी साहित्य के छायावाद युग के वह एक प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। ‘वह तोड़ती पत्थ’र नामक उनकी कविता कॉलेज आई कविता बन गई जो अनेक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल की गई निराला ने लगभग 19 ईसवी के आसपास अपना लेखन कार्य शुरू किया था उनकी जूही की कली नामक काव्य रचना बेहद प्रसिद्ध रही निराला का विवाह उजाला ने कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कार्य भी किया

 

निराला की रचनायें

काव्य कृतियां

अणिमागीतिकाअनामिकातुलसीदास
परिमलकुकुरमुत्ताबेलानए पत्ते
अर्चनाआराधनागीत कुंजसांध्य काकली
अपरा संचयन

उपन्यास

प्रभावतीनिरुपमाकुल्ली भाटबिल्लेसुर बकरिहा
चोटी की पकड़काले कारनामेइन्दुलेखातकनीक
अप्सराअलकाचमेली (अपूर्ण)

कहानियाँ

भक्त ध्रुवभक्त प्रह्लादभीष्ममहाराणा प्रताप
सीखभरी कहानियाँ

निबंध

प्रबंध प्रतिमारवीन्द्र कविता काननचयन संग्रह
प्रबंध पद्मचाबुक

 

देहावसान

निराला अपने जीवन के अंतिम समय में खराब स्वास्थ्य से जूझते रहे। वे लंबे समय तक चलने वाले खराब स्वास्थ्य से परेशान रहे। उनके जीवन का अंतिम समय था इलाहाबाद (प्रयागराज) में बीता।

15 अक्टूबर 1961 को इलाहाबाद (प्रयागरज) दारागंज नामक मोहल्ले के एक छोटे से मकान में उन्होंने अंतिम सांस ली।

इस तरह निराला हिंदी साहित्य जगत के लिए अनमोल निधियां छोड़कर ईश्वर की शरण में चले गए। लेकिन उनकी कृतियों के माध्यम से वह हिंदी साहित्य प्रेमियों के बीच आज भी जीवित हैं।

 


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कुछ सूचना के लिए साभार

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