आज का भारत-डिजिटल इंडिया (निबंध)

निबंध

आज का भारत-डिजिटल इंडिया

डिजिटल इंडिया बदलते वैश्विक एवं सामाजिक परिवेश तथा समय की माँग को देखते हुए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में डिजिटल इंडिया अभियान का शुरू किया गया। डिजिटल इंडिया का महत्व का उद्देश्य भारत के नागरिकों को आसान ऑनलाइन सरकारी सेवाएँ प्रदान करना तथा देश में इण्टरनेट को सशक्त करके भारत के तकनीकी पहलू में सुधार करना है ।

डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार, डिजिटल रूप में सेवाएँ प्रदान करना और डिजिटल साक्षरता, इस अभियान के तीन प्रमुख पहलू हैं। यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का अभाव, इण्टरनेट कनेक्टिविटी तथा डिजिटल अवसंरचना के रूप में इसके सामने कई चुनौतियाँ हैं तथापि सरकार द्वारा इस क्षेत्र में राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन, भारत नेट आदि कार्यक्रम के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाया जा सके ।

डिजिटल इंडिया की शुरुआत

इस कार्यक्रम का शुरुआत दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम टाटा ग्रुप के चेयरमैन साइरस मिस्त्री और आर आई एल के चेयरमैन तथा मुकेश अंबानी, आदि जैसे उद्योगपतियों की उपस्थिति में 1 जुलाई सन 2015 को डिजिटल इंडिया अभियान का शुरू किया गया था ।

भारत देश को डिजिटल रूप में विकास करने के लिए और देश की आईडी संस्थान में सुधार करने के लिए, डिजिटल इंडिया महत्वपूर्ण शुरुआत है, डिजिटल इंडिया अभियान के विभिन्न योजनाएं हैं जैसे डिजिटल लॉकर, ई स्वास्थ्य, ई शिक्षा, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल खाद्य को शुरू करके इस कार्यक्रम का अनावरण किया गया ।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का विजन

भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज व ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को परिवर्तित करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया । इस कार्यक्रम के अन्तर्गत तीन प्रमुख क्षेत्र केन्द्रित हैं

  1. प्रत्येक नागरिक तक एक मूल सुविधा के रूप में डिजिटल अवसरचना की पहुँच अर्थात् उच्च गति की इण्टरनेट सुविधा, सुरक्षित साइबर स्पेस इत्यादि की सुविधा प्रदान करना ।
  2. प्रशासन एवं उसकी सेवाओं को जनता की माँग पर उसके घर तक पहुँचाना अर्थात् डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर लोगों को नकद-रहित वित्तीय लेन-देन आदि सेवाओं को उपलब्ध कराना ।
  1. नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण अर्थात् सभी नागरिकों को डिजिटल साक्षरता प्रदान करना, नागरिकों को सरकारी दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से जमा करवाने की सुविधा उपलब्ध कराना ।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की प्रमुख पहल

प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण : इसके अंतर्गत सरकार की ओर से मिलने वाले लाभों/सहायता को सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में अन्तरित किया जाता है । इसमें लगभग 440 कार्यक्रमों को शामिल किया गया है, जिससे आज करोड़ों की बचत होती है ।

डिजिलॉकर : यह नागरिकों को उनके सार्वजनिक और निजी दस्तावेज को पब्लिक क्लाउड में सुरक्षित रखने के लिए निजी जगह उपलब्ध कराकर कागजविहीन अभिशासन उपलब्ध कराता है ।

उमंग : यह अनेक सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराने वाला सम्पूर्ण मोबाइल एप्प है ।

मेरी सरकार (MY GOV) : यह साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है, जिसमें नागरिक सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में अपने विचार साझा करते हैं । यह विदेशों में भी लोगों को विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने को प्रोत्साहित करता है ।

डिजिटल भुगतान : इस कार्यक्रम के अन्तर्गत डिजिटल भुगतान केन्द्र; जैसे – भीम एप्प, भीम आधार, भारत क्यू.आर कोड आदि शुरू किए गए हैं, जिससे समय की भी बचत होती है ।

जीवन प्रमाण : इसमें पेन्शन भोगियों को अपना जीवन प्रमाण-पत्र किसी भी समय और किसी भी स्थान पर डिजिटल तरीके से भेजने या प्रस्तुत करने में मदद मिलती है ।

जीईएम : यह आम प्रयोग की वस्तुओं और सेवाओं की सरकारी खरीद का ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है ।

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल : इस एकल ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा अनेक छात्रवृत्ति योजनाओं की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है ।

ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना : इसके अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय में केस स्टेट्स, कोर्ट ऑर्डर आदि कई सेवाएँ शामिल हैं । इसके अंतर्गत नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड भी प्रारम्भ किया गया है, जिसमें कई अदालतों से एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है और डैशबोर्ड के माध्यम से अखिल भारतीय आँकड़ों को प्रदर्शित किया जाता है ।

ई-मेल सेवाएँ : डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम के अन्तर्गत सरकार सभी आधिकारिक संवाद के लिए सुरक्षित ई-मेल सेवा उपलब्ध कराती है ।

ई-हॉस्पिटल : यह ऑनलाइन पंजीकरण फ्रेमवर्क मरीजों को सरकारी अस्पतालों के साथ ऑनलाइन ओपीडी जाँच कराने की सुविधा प्रदान करने की एक पहल है ।

ई-साइन : ई-केवाईसी सेवा के माध्यम से आधार धारक के प्रमाणीकरण का उपयोग करके ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर सेवा की सुविधा प्रदान करता है ।

डिजिटल शिक्षा : इसके अन्तर्गत स्वयं (SWAYAM), स्वयंप्रभा तथा राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी प्रमुख हैं, जो शिक्षा के प्रमुख पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं ।

डिजिटल इण्डिया के अन्तर्गत ई – पुलिस, वर्चुअल लैब, ई-यन्त्र, ई-गवर्नेस जैसे प्रमुख कार्यक्रम संचालित हैं ।

कोविड-19 के दौरान भी सरकार द्वारा कई डिजिटल प्रोग्राम अपनाए गए हैं जैसे

आरोग्य सेतु ऐप :- यह एक कोरोना वायरस ट्रैकिंग ऐप है, जो जीपीएस एवं ब्लूटूथ के माध्यम से ट्रैक करता है ।

चैटबोट :- प्रधानमंत्री ने लोगों के कोरोना सम्बन्धी प्रश्नों के समाधान हेतु व्हाट्सएप चैटबोट से जुड़ने की घोषणा की थी ।

GOK Direct: – यह ऐप केरल सरकार द्वारा लोगों को कोरोना वायरस महामारी से जागरूक करने हेतु लॉन्च किया गया था ।

आपूर्ति सुविधा ऐप :- नोएडा प्राधिकरण ने लोगों तक आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने के लिए आपूर्ति सुविधा ऐप लॉन्च किया था ।

लोकेटर COVA :- गोवा सरकार ने कोविड-19 लोकेटर ऐप तथा पंजाब सरकार ने COVA ऐप लॉन्च किया था ।

कोरोना वायरस में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतु कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में नवीन क्रांति आई ।

बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया । वीडियो क्लासेज, प्री रिकॉर्डेड वीडियो क्लासेज, स्लाइड्स, ऑनलाइन टेस्ट, पीडीएफ आधारित ऑनलाइन शिक्षा का बहुत  स्तर पर प्रयोग किया जाने लगा ।

कोरोना के दौरान इस रोग के प्रसार को रोकने तथा इससे बचने हेतु तरह-तरह के उपाय डिजिटल माध्यमों की मदद से लोगों तक पहुँचाए गए । देश भर से डाटा एकत्रीकरण में डिजिटलाइजेशन का बखूबी उपयोग किया गया । कोरोना के दौर में लेन-देन एवं क्रय-विक्रय में नकदी के प्रयोग पर रोक लगी तथा लोगों द्वारा ऑनलाइन पेमेंट को व्यापक पैमाने पर अपनाया गया ।

डिजिटल इंडिया का परिणाम

डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम के माध्यम से आज डिजिटली तरीके से सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं । आज भारत नवाचार का केन्द्र बन चुका है ।

डिजिटल लॉकर, ई-साइन, डिजिटल भुगतान आदि के कारण लोगों को सरकारी सेवा घर बैठे अपने फोन पर उपलब्ध हो रही है, जिस कारण इन्हें विभिन्न सरकारी कार्यालयों का चक्कर नहीं काटना पड़ता है अर्थात समय व ऊर्जा दोनों की बचत हो रही है । डिजिटल अर्थव्यवस्था से आम लोगों का जीवन सरल हो रहा है, साथ ही इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है, क्योंकि डिजिटल अर्थव्यवस्था अपनाने से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है ।

डिजिटल इंडिया में आने वाली चुनौतियाँ

विश्व बैंक के अनुसार, यदि डिजिटल तकनीक का लाभ विश्व भर के लोगों तक पहुँचाना है, तो जहाँ कहीं भी डिजिटल डिवाइड है, उसे समाप्त करना होगा अर्थात जिन लोगों के पास यह तकनीक उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी इसका लाभ पहुँचाना होगा । यह कथन भारत पर भी लागू होता है, क्योंकि भारत में भी डिजिटल डिवाइड काफी ज्यादा है, जिस कारण इसका पूर्ण अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। संक्षेप में, भारत में डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम के मार्ग में निम्नलिखित चुनौतियाँ हैं  ।

डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम की सफलता के मार्ग में आज सबसे बड़ी चुनौती आवश्यक अवसंरचना का अभाव है । आज भी भारत में बिजली, इण्टरनेट आदि बुनियादी सुविधाओं का अभाव है । एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को बेहतर इण्टरनेट कनेक्टिविटी के लिए 80 लाख से अधिक बाई-फाई, हॉट-स्पॉट की जरूरत है, जबकि वर्तमान में इसकी उपलब्धता काफी कम है ।

डिजिटल इण्डिया का मूल आधार सूचना-संचार एवं प्रौद्योगिकी है, लेकिन सूचना-संचार प्रौद्योगिकी क्रान्ति का प्रभाव मुख्यतः भारत के शहरों में पड़ा, जबकि भारत के ग्रामीण निर्धन परिवार पर इसका व्यापक प्रभाव नहीं देखा जा सकता है । फिर शैक्षणिक पिछड़ापन व जागरूकता में कमी भी इस मार्ग में बाधा है । इन सब कारणों से भारत में डिजिटल विभाजन की उपस्थिति बनी हुई है, जोकि एक प्रमुख चुनौती है । नीतिगत बाधाएँ भी डिजिटल इण्डिया को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं । कर सम्बन्धी व अन्य नियामकीय दिशा-निर्देश, एफडीआई नीतियों में अस्पष्टता आदि इसके मार्ग में बाधा उत्पन्न करती है । एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में इण्टरनेट की गति अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी कम है । यहाँ तक कि श्रीलंका एवं पाकिस्तान में भी 4G की औसत स्पीड भारत से ज्यादा है ।

डिजिटल इण्डिया की सफलता में साइबर सुरक्षा व डेटा सुरक्षा का मुद्दा महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन भारत में साइबर खतरा व डेटा लीक की समस्या ज्यादा देखी जा रही है तथा इस सन्दर्भ में अभी कोई कानून नहीं है, जिस कारण डिजिटल इण्डिया को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है ।

चुनौतियों से निपटने हेतु सरकारी प्रयास

भारत सरकार डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम की चुनौतियों से निपटने हेतु निम्न प्रयास कर रही हैं ।

राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन इसके माध्यम से पूरे देश में 52.5 लाख लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण देने के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत सभी राज्यों / केन्द्रशासित क्षेत्रों में अधिकृत राशन डीलरों सहित आँगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सामान्य सूचना प्रौद्योगिकी का ज्ञान और प्रशिक्षण दिया जाता है । इससे ये लोग सरकार की ई-सेवाओं से जुड़कर स्वयं लाभ उठाते हैं, साथ ही अन्य लोगों को इससे जोड़ते हैं ।

प्रधानमन्त्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2019 तक समस्त राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में 6 करोड़ व्यक्तियों को डिजिटल साक्षर बनाना तथा प्रत्येक उपयुक्त परिवार के एक व्यक्ति को डिजिटल साक्षर कर 40% ग्रामीण परिवारों को इस योजना से जोड़ना था, जो वर्तमान में भी जारी है ।

भारतनेट इस योजना में वर्ष 2018 तक देश में 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को 100 Mbps की स्पीड पर ब्रॉडबैण्ड कनेक्टिविटी कराने का लक्ष्य रखा गया था । यह विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजना है, जो वर्तमान में भी जारी है ।

इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेण्ट फण्ड वर्ष 2020 तक नेट जीरो आयात प्राप्त करने के उद्देश्य से फण्ड ऑफ फण्ड के रूप में इस फण्ड की स्थापना की गई है ।

डिजिटाइज इण्डिया प्लेटफार्म यह किसी भी संगठन के लिए स्केन किए गए दस्तावेज छवियों के लिए डिजिटलीकरण की सेवाएं प्रदान करता है ।

निष्कर्ष

इस प्रकार, सरकार के सफल प्रयास से डिजिटल क्षेत्र की चुनौतियों के विद्यमान होते हुए भी कार्यों में पारदर्शिता, सरलता, गुणवत्ता में सुधार हुआ है । इससे दूर-दराज के गाँव में भी विभिन्न सेवाओं से लोग लाभान्वित हुए हैं । साथ ही सरकार अब छोटे शहरों में बीपीओ उद्योग स्थापित करने पर बल दे रही है ।

इससे एक तरफ रोजगार के अवसर सृजित होंगे, दूसरी तरफ सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा । डिजिटल इंडिया की सफलता के लिए देश की बड़े-बड़े कंपनियों ने काफी खर्च किया है अब तक इसमें तो 4.5 लाख करोड़ खर्च कर चुके हैं ।

इससे 18 लाख लोगों को नौकरी मिलेगी यह भारत सरकार की बहुत ही अच्छी योजना है इसे भारत की एक अलग पहचान होगी । डिजिटल इंडिया गांव से लेकर शहर तक हर क्षेत्र में जुड़ेगा और हमारे देश का नाम रोशन करेगा । हमारा देश दूसरे देशों से मदद लेता था और अब मदद देने वाला देश बनेगा । इसे भारत की एक अलग ही पहचान होगी ।

 


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