सामान्यतः व्यक्ति अपने ऊपर नहीं हँसते, दूसरों पर हँसते हैं। कक्षा में ऐसी घटनाओं का ज़िक्र कीजिए जब- (क) आप अपने ऊपर हँसे हों; (ख) हास्य करुणा में या करुणा हास्य में बदल गई हो।

ऐसी दो स्थितियां मेरे साथ इस प्रकार हुई

(क) आप अपने ऊपर हँसते हों।

एक बार मैं बारिश के मौसम में सड़क किनारे चल रहा था। सड़क के बगल में बड़ा सा फुटपाथ था, लेकिन मैं फुटपाथ से नीचे उतर कर सड़क पर चलने लगा। तभी तेजी से दौड़ती हुई एक कार आई और सड़क पर पड़े पानी के ऊपर से गुजरती गई, जिससे वह सारा पानी मेरे ऊपर आ गिरा और मैं पूरी तरह गीला हो गया। तब मुझे स्वयं पर हँसी आ रही थी कि इतना बड़ा फुटपाथ खाली छोड़कर मैं क्यों सड़क पर चल रहा था।

(ख) हास्य करुणा में बदल गई।

एक बार हम मैं मैदान में अपने दोस्त के साथ खेल रहा था। हमारे पास कोई गेंद नहीं थी, इसलिए हम मैदान में छोटे-छोटे पत्थरों को एक दूसरे की तरफ से उछाल रहे थे। हम लोग पत्थर को कैच करते और फिर दूसरे की ओर उतार देते इस तरह खुशी-खुशी खेल रहे थे कि अचानक मेरे दोस्त द्वारा फेंका गया एक पत्थर मैं सही से कैच नहीं कर पाया और मैं पत्थर सीधे मेरे सिर पर लगा। मेरा सिर से खून बहने लगा। सारा हँसी का माहौल करुणा में बदल गया। मेरा दोस्त घबरा गया। वह दौड़ता हुआ मेरे पास आया और उसने कहा कि यह बात अपने घर पर नहीं बताना। उसने अपने रुमाल से मेरे सिर पर बांधा। मैंने घर पर आकर कहा कि मैं गिर गया था, जिससे चोट लग गई।

संदर्भ पाठ :

चार्ली चैप्लिन यानि हम सब : विष्णु खरे (कक्षा-12 पाठ-15 हिंदी अंतरा भाग 2)


 

इस पाठ के अन्य प्रश्न..

आपके विचार से मूक और सवाक् फ़िल्मों में से किसमें ज़्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है और क्यों?

चार्ली सबसे ज़्यादा स्वयं पर कब हँसता है?

 


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चार्ली चैप्लिन यानि हम सब : विष्णु खरे (कक्षा-12 पाठ-15) हिंदी आरोह 2

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