“दो बैलो की कथा” में दोनों बैल झूरी की चरनी पर किस दशा मे खड़े थे? उनकी यह दशा क्यों हुई?

‘दो बैलों की कथा’ में दोनों बैल हीरा और मोती झूरी की चरनी पर बेहद दयनीय दशा में खड़े थे। दोनों के गले में आधा-आधा गराँव लटक रहा था और उनके पाँव घुटनों तक कीचड़ से सने हुए थे। दोनों की आँखों में विद्रोह के साथ-साथ अपने मालिक झूरी के प्रति स्नेह भी झलक रहा था।

दोनों की यह दशा इसलिए हुई थी क्योंकि दोनों बैलों हीरा और मोती को झूरी ने अपनी साले गया के साथ उसके घर भेज दिया था। बैलों को यह लगा कि झूरी ने उनको गया के हाथों बेच दिया है। दोनों बैल झूरी से अत्यंत प्रेम भाव रखते थे और झूरी के घर से जाना नहीं चाहते थे।

झूरी का साला गया जब दोनों बैलों के जबरदस्ती ले जाने लगा तो वे जाने को तैयार नही थी। किसी तरह गया उन्हें अपने घर ले जा पाया। अपने घर ले जाकर गया ने दोनों बैलों से कठोर परिश्रम लिया और शाम को खाने चारा-पानी के नाम पर सूखा चारा दिया। दोनों बैलों के अपने मालिक झूरी के घर से बिछड़ने का दुख हो रहा था इसलिए उन्होंने चारा तक नही खाया। रात में दोनों बैल अपनी रस्सी तुड़ाकर भाग निकले और सीधे झूरी के घर आ गए।

वे झूरी के घर पर पहुँचकर चरनी पर खड़े होकर रंभाने लगे।

 


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